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देहरादून के दो भाजपा विधायकों में रार, पुल निर्माण को लेकर आमने-सामने आए काऊ और चमोली

DEHRADUN NEWS : देहरादून के दो भाजपा विधायकों में आपस में ठनती नजर आ रही हैं। रायपुर से विधायक उमेश काऊ और धर्मपुर से विधायक विनोद चमोली एक पुल के निर्माण पर आमने सामने हैं।
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देहरादून के दो भाजपा विधायकों में रार
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी दूर है लेकिन विधायकों में अस्तित्व की लड़ाई को लेकर अभी से रस्साकशी शुरू हो गई है। खबर राजधानी देहरादून (DEHRADUN NEWS) से है जहां दो विधायकों में तनातनी देखने को मिल रही है। हैरानी की बात ये है कि विधायकों की लड़ाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच में नहीं बल्कि सत्ता पक्ष यानी भारतीय जनता पार्टी के ही दो विधायकों के बीच में देखने को मिल रही है।
पुल निर्माण को लेकर आमने-सामने आए काऊ और चमोली
राजधानी देहरादून की दो पड़ोसी विधानसभा में रायपुर और धर्मपुर विधानसभा को जोड़ने वाले हरे पुल को लेकर दोनों विधायकों के बीच में ये तनातनी देखने को मिल रही है। दरअसल धर्मपुर विधायक विनोद चमोली ने अपनी विधानसभा धरमपुर के अंतर्गत आने वाले दीप नगर मोहल्ले से केदारपुरम मोहल्ला जो की रायपुर विधानसभा में पड़ता है उसे जोड़ने के लिए पुराने जीर्णशीर्ण हो चुके हरे पुल के निर्माण को लेकर प्रस्ताव पास किया। दीपनगर मोहल्ले से केदारपुरम स्टेट हाईवे से जुड़ने वाले इस पुल का निर्माणकार्य रायपुर विधायक उमेश काऊ ने मौके पर जाकर रोक दिया इसके बाद ये मामला भड़क गया।

रायपुर विधायक के काम रूकवाने से हर कोई हैरान
स्थानीय पार्षद दिनेश प्रसाद सती का कहना है कि विधायक उमेश द्वारा रूकवाये गए पुल निर्माण के कदम को देखकर वो भी हैरान है और जिस तरह से रायपुर विधायक उमेश काऊ को विकास कार्यों के लिए जाना जाता है यहां बिल्कुल उसके विपरीत है। उन्होंने बताया कि धर्मपुर और रायपुर विधानसभा को जोड़ने के लिए ये ऐतिहासिक कार्य होने जा रहा था और लंबे समय से स्थानीय जनता की मांग इस हरे पुल को लेकर चली आ रही थी और पिछले तीन से चार महीना से दीपनगर से केदारपुरम को जोड़ने वाले इस हरे पुल के निर्माण का कार्य चल रहा था लेकिन कल जिस तरह से अचानक विधायक के द्वारा मौके पर आकर अपना उग्र रूप दिखाया गया और निर्माण कार्य रोका गया ये देख कर वो भी हैरान है।
पार्षद सती ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि बिना विधायक के संज्ञान के ये निर्माण कार्य हो रहा हो लेकिन कल अचानक से उनके द्वारा निर्माण कार्य रुकवाया गया। जबकि उन्हें इस निर्माण की पूरी जानकारी पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस पुल की जरूरत इस इलाके में बहुत ज्यादा है और जिस तरह से लगातार भीड़ और ट्रैफिक बढ़ रही है यह पुल निश्चित तौर से लोगों के लिए राहत देने वाला है।

रायपुर विधायक हैं इस निर्माण कार्य के खिलाफ – विनोद चमोली
धर्मपुर विधायक विनोद चमोली का इस मामले पर कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि पड़ोसी विधानसभा रायपुर के विधायक उमेश काऊ इस पुल निर्माण के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर से विधायक के कुछ संदेह रहे होंगे जिस पर उन्हें जानकारी नहीं होगी यही वजह है कि उनके द्वारा अपनी कोई बात रखी गई है और निश्चित तौर से उनकी जो बात है या फिर उनका जो संदेह है उसका समाधान कर दिया जाएगा वो हमारे अपने विधायक हैं। उन्होंने कहा कि विधायक उमेश को क्या संदेह है ये वही स्पष्ट तौर पर बता सकते हैं
विकास के लिए नहीं होने देंगे विनाश – उमेश शर्मा काऊ
दीपनगर हरे पुल का काम रुकवाने वाले रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ से जब हमारी टीम ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इस पर बोलने से इंकार कर दिया। जबकि फोन पर उन्होंने कहा कि वो विकास के लिए विनाश नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि ये पुल 2013-14 में रायपुर विधानसभा के लिए स्वीकृत हुआ था और उसमें इसका बजट एक करोड़ 90 लाख था लेकिन आज इस पुल का निर्माण 3.5 तीन करोड रुपए खर्च करके किया जा रहा है।

12 फुट का रास्ते में इतना बड़ा पुल बनाने की क्या जरूरत ?
रायपुर विधायक का कहना है कि दीपनगर से इसे केदारपुरम उनकी विधानसभा से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है तो क्या उन्हें नहीं पूछा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी जेब से 10 लख रुपए खर्च करके पहले का पुल बनवाया था और निर्माण एजेंसी द्वारा उस लोहे को पुल को उठा ले गए बिना उनकी संस्तुति के।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि निर्माण एजेंसी द्वारा सारा गंदा पानी मंदिर में छोड़ा गया है, उन्होंने कहा कि PWD द्वारा बनाए गए पुश्तों की वजह से बहुत नुकसान हो गया हैं। इसके अलावा पुल से आगे 12 फुट का रास्ता है और इतना बड़ा पुल बनाने की क्या जरूरत है। देहरादून के दो विधायकों की इस खबर (DEHRADUN NEWS) से राजनितिक गलियारों में चर्चाओं के बाजार गर्म हैं।
3.50 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है पुल
पुल को बना रही कार्यदाई एजेंसी देहरादून निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता नीरज त्रिपाठी ने बताया कि दीपनगर से धर्मपुर विधानसभा से केदारपुरम रायपुर विधानसभा को जोड़ने वाले ये एक डेढ़ लेन का हरा मोटर पुल का निर्माण किया जा रहा हैं। जिसकी लागत 355.64 लाख यानी करीबन 3.50 करोड़ है। इसके अलावा उन्होंने पूर्व में यहां पर बने लोहे के हरे रंग के पुल के बारे में कुछ भी जानकारी न होने की बात कही।
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उत्तराखंड में यहां चल रहा था बच्चा चोरी का बड़ा रैकेट, पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह का किया भंडाफोड़

Haridwar News : उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर अंतरराज्यीय बच्चा चोरी और मानव तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है।
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हरिद्वार में रहा था बच्चा चोरी का बड़ा रैकेट
कनखल क्षेत्र के बैरागी कैंप से अपहृत तीन वर्षीय मासूम बच्ची को सकुशल बरामद करने के साथ ही पुलिस ने दिल्ली से चोरी किए गए एक अन्य बच्चे को भी मुक्त कराया है। इस मामले में दो महिलाओं समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह का किया भंडाफोड़
जांच में सामने आया है कि गिरोह बच्चों को चोरी कर निसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचता था। एसएसपी नवनीत सिंह की निगरानी में पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगालने, डंप डाटा विश्लेषण और लगातार छापेमारी के बाद इस बड़े नेटवर्क तक पहुंच बनाई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण के साथ मानव तस्करी की धाराएं भी बढ़ाई हैं।

6 जून को बैरागी कैंप तीन साल की मासूम हुई थी चोरी
6 जून को बैरागी कैंप निवासी विनोद सोलंकी की तीन वर्षीय बेटी राधिका के अपहरण की सूचना मिलने पर कनखल पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए फिरौती के बजाय बच्चा चोरी गिरोह की संलिप्तता की आशंका पर काम किया। लगातार जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

डेढ़ लाख रुपये में करते थे बच्चे का सौदा
पुलिस कार्रवाई से घबराए गिरोह के अन्य सदस्य अपहृत बच्ची को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर छोड़कर फरार हो गए, जहां से पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया। पूछताछ में ये भी खुलासा हुआ कि गिरोह ने 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक अन्य बच्चे का अपहरण कर उसे डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया था।
पुलिस ने उस बच्चे को भी बदायूं से सुरक्षित बरामद कर लिया है। आरोपियों से पूछताछ में बच्चों की खरीद-फरोख्त और मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
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NEET Re-Exam : उत्तराखंड सरकार का बड़ा ऐलान! NEET छात्रों को मिलेगी निशुल्क बस यात्रा

NEET Re-Exam : उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने 21 जून को आयोजित होने वाली नीट पुनर्परीक्षा के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए।
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NEET Re-Exam से पहले उत्तराखंड सरकार का बड़ा ऐलान
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जल्द शासनादेश जारी करने को कहा।
इसके साथ ही मौसम विभाग द्वारा बारिश की संभावना जताए जाने के मद्देनजर जिलाधिकारियों को सड़क बंद होने जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक योजना तैयार रखने के निर्देश भी दिए।

NEET छात्रों को मिलेगी निशुल्क बस यात्रा
मुख्य सचिव ने 14 जून को आयोजित होने वाली उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय पुनर्परीक्षा के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक कदम उठाने को कहा। मुख्य सचिव ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने तथा सभी जरूरी जांच प्रक्रियाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
योग दिवस की तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश
बैठक में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्यभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
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NEET पेपर लीक पर दून में बवाल!, सड़कों पर उतरे कांग्रेसी, शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
Dehradun News : नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का विरोध लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार को देहरादून में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
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NEET पेपर लीक पर दून में सड़कों पर उतरे कांग्रेसी
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सचिवालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जबकि कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे।
शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के प्रयास किए। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।

पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को लिया हिरासत में
प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए और छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। बाद में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
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