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धनतेरस से पहले सोना-चांदी हुआ महंगा, खरीददारी से पहले जान लें नए रेट

Gold-Silver Price : और दिवाली के मौके पर सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को महंगाई का झटका लगा है। बीते कुछ दिनों तक कीमतों में नरमी रहने के बाद अब दोनों कीमती धातुओं के भाव में तेजी लौट आई है।
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धनतेरस से पहले सोना-चांदी हुआ महंगा
धरतेरस 2026 से पहले महज दो दिनों के भीतर चांदी की कीमत में 14,400 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है, जबकि सोना भी 7,770 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया है। अचानक आई इस तेजी से त्योहारों पर गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3 नवंबर को सोने का भाव 1,38,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 5 नवंबर तक इसकी कीमत बढ़कर 1,45,770 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इस तरह दो दिनों में सोने के दाम में 7,770 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल
चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। 3 नवंबर को एक किलो चांदी 1,76,000 रुपये में मिल रही थी, जबकि 5 नवंबर को इसका भाव बढ़कर 1,90,400 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यानी महज 48 घंटों में चांदी 14,400 रुपये महंगी हो गई। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव भी लगभग 4,140 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।
सोने-चांदी की कीमतों में तेजी की क्या है वजह?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी को सोने की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद डॉलर पर दबाव देखने को मिला। डॉलर कमजोर होने से वैश्विक बाजार में सोने की मांग को समर्थन मिला और कीमतों में बढ़ोतरी हुई।

इसके अलावा ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के बीच महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है। इसका असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव
देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की सांकेतिक कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | 24 कैरेट (10 ग्राम) | 22 कैरेट (10 ग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹1,42,960 | ₹1,31,060 |
| मुंबई | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
| चेन्नई | ₹1,42,920 | ₹1,31,010 |
| कोलकाता | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
| बेंगलुरु | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
| हैदराबाद | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर सोने और चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। यही वजह है कि त्योहार के दौरान बाजार में खरीदारों की संख्या बढ़ जाती है। हालांकि, कीमतों में अचानक आई तेजी से खरीदारी का खर्च बढ़ सकता है।
खरीदारों को ध्यान रखना चाहिए कि बाजार में बताए जाने वाले सोने के भाव सांकेतिक होते हैं और अलग-अलग शहरों में इनमें अंतर हो सकता है। इसके अलावा गहने खरीदने पर मेकिंग चार्ज, 3 फीसदी GST और अन्य लागू शुल्क भी चुकाने होते हैं। ऐसे में खरीदारी करने से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा भाव और कुल कीमत की जानकारी जरूर लें।
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धनतेरस पर कब करें पूजा और कब करें खरीदारी? जानिए तिथि से लेकर शुभ मुहूर्त तक सब कुछ

Dhanteras 2026 : धनतेरस हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन घर में नई चीजें लाने से सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
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धनतेरस पर कब करें पूजा और कब करें खरीदारी ?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ भगवान कुबेर, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने की भी परंपरा है। इसी पर्व से पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली उत्सव का शुभारंभ होता है। साल 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
इस बार पर्व के दौरान खरीदारी और पूजा के लिए कई शुभ समय निर्धारित हैं। अगर आप भी इस दिन सोना-चांदी, बर्तन या अन्य सामान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो जान लीजिए त्रयोदशी तिथि से लेकर पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त तक की पूरी जानकारी।

त्रयोदशी तिथि कब शुरू होगी और कब होगी समाप्त ?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 9 बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 7 नवंबर 2026 को सुबह करीब 11 बजकर 45 मिनट पर होगा।
पर्व मनाने की परंपरा और उदया तिथि के आधार पर इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि और अन्य देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
धनतेरस 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन प्रदोष काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है —

- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक।
- प्रदोष काल: शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक।
- वृषभ काल: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक।
धनतेरस पर दिन के चौघड़िया मुहूर्त
धनतेरस पर खरीदारी के लिए दिन के चौघड़िया मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:
| चौघड़िया | शुभ समय |
|---|---|
| चर | सुबह 6:32 से 7:54 बजे तक |
| लाभ | सुबह 7:54 से 9:16 बजे तक |
| अमृत | सुबह 9:16 से 10:38 बजे तक |
| काल | सुबह 10:38 से दोपहर 12:01 बजे तक |
| शुभ | दोपहर 12:01 से 1:23 बजे तक |
| रोग | दोपहर 1:23 से 2:45 बजे तक |
| उद्वेग | दोपहर 2:45 से शाम 4:07 बजे तक |
| चर | शाम 4:07 से 5:30 बजे तक |

धनतेरस 2026: रात के चौघड़िया मुहूर्त
रात में भी खरीदारी और अन्य शुभ कार्यों के लिए चौघड़िया के अनुसार समय निर्धारित हैं।
| चौघड़िया | शुभ समय |
|---|---|
| रोग | शाम 5:30 से 7:08 बजे तक |
| काल | शाम 7:08 से 8:45 बजे तक |
| लाभ | रात 8:45 से 10:23 बजे तक |
| उद्वेग | रात 10:23 से 12:01 बजे तक |
| शुभ | रात 12:01 से 1:39 बजे तक (7 नवंबर) |
| अमृत | रात 1:39 से 3:17 बजे तक |
| चर | सुबह 3:17 से 4:55 बजे तक |
| रोग | सुबह 4:55 से 6:32 बजे तक |
धनतेरस के दिन खरीदारी के साथ पूजा-पाठ और दीपदान का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
धर्म-कर्म
जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा, लगाएं ये भोग मिलेगी कान्हा की कृपा

Janmashtami 2026 : भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खास विधि से अगर भगवान कृष्ण की पूजा करो तो कान्हा जी कृपा आप पर बनी रहेगी।
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जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए रखें उपवास
इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करते हैं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाने के साथ आरती की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोलते हैं।
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा, जिसे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा मध्यरात्रि 12 बजे के आसपास करना शुभ माना गया है।

जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
सबसे पहले पूजा स्थल और भगवान लड्डू गोपाल के आसन को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार श्रृंगार करें।
श्रृंगार में मोर मुकुट और बांसुरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं और उनके आसपास खिलौने रख सकते हैं। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में श्रीकृष्ण की आरती करें और अपनी पूजा-व्रत की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के सात्विक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनिया पंजीरी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।
इसके अलावा भगवान को माखन-मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है, इसलिए इसका भोग भी लगाया जा सकता है। दूध से बने पकवान, मौसमी फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।
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रक्षाबंधन पर उत्तराखंड में उत्साह, राज्यपाल और सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं

Uttarakhand News : रक्षाबंधन का त्योहार देशभर के साथ उत्तराखंड में भी उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक यह पर्व प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी हैं।
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रक्षाबंधन पर राज्यपाल और सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और विश्वास को मजबूत करने वाला विशेष पर्व है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत करता है।
महिलाओं का सम्मान एक बेहतर समाज की बुनियाद
सीएम धामी ने कहा कि महिलाओं का सम्मान और उनकी सुरक्षा एक बेहतर समाज की बुनियाद है। रक्षाबंधन का पर्व भी महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

सीएम ने महिलाओं से की खास अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण के बिना विकसित और समृद्ध उत्तराखंड का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रदेशवासियों से महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और प्रगति के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने में सहयोग देने की अपील की।
आज और कल महिलाओं के लिए रोडवेज में फ्री रहेगी यात्रा
रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तराखंड की महिलाओं के लिए राज्य सरकार ने विशेष सुविधा भी दी है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को 28 और 29 अगस्त को निशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार के इस फैसले से रक्षाबंधन पर अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए यात्रा करने वाली महिलाओं को राहत मिलेगी।













































