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Gold Silver Rate Today : सोने-चांदी ने रचा नया इतिहास, 20 जनवरी 2026 को ₹1.50 लाख के पार पहुंचा गोल्ड; चांदी @3.20 लाख…

Gold Silver Rate Today : सोने-चांदी ने रचा नया इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार के लिए मंगलवार, 20 जनवरी 2026 की सुबह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी व्यापार नीतियों (Trump Tariffs) के डर ने निवेशकों को ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की ओर धकेल दिया है। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा, जहाँ दोनों ही कीमती धातुओं ने अपने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए नए शिखर को छू लिया है।
आज एमसीएक्स (MCX) पर सोने का भाव Rs 1,50 लाख के स्तर को छू गया, जबकि चांदी ने पहली बार Rs 3,20,000 प्रति किलोग्राम का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
1. सोने की कीमतों में तूफानी तेजी: विस्तृत विश्लेषण
आज सुबह जब बाजार खुला, तो 5 फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना Rs 136 की मामूली बढ़त के साथ Rs 1,45,775 पर था, लेकिन देखते ही देखते इसमें जबरदस्त खरीदारी लौटी। और बढ़त 1,50,000 के पार चली गयी ।
ताजा आंकड़ों पर एक नजर:
- इंट्राडे हाई: सोने ने कारोबारी सत्र के दौरान Rs 1,52,500 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया।
- अप्रैल 2026 डिलीवरी: लंबी अवधि के अनुबंधों (April Futures) में तेजी और भी अधिक रही, जहाँ भाव Rs 1,59,699 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए।
- कारण: जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसी वैश्विक संस्थाओं ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि 2026 तक सोना $5,000 प्रति औंस (लगभग Rs 1.58 लाख प्रति 10 ग्राम) तक जा सकता है। आज की तेजी उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

2. चांदी की चमक: ‘गरीबों का सोना’ बना अमीरों की पसंद
चांदी ने आज रिटर्न के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। शुरुआती सत्र में लाल निशान में रहने के बाद, सिल्वर फ्यूचर्स ने 3.11% की छलांग लगाई।
- नया रिकॉर्ड: चांदी का भाव अब Rs 3,20,000 के बेहद करीब (Rs 3,19,949/kg) पहुंच चुका है।
- औद्योगिक मांग: विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षित निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और सेमीकंडक्टर उद्योगों से आ रही भारी मांग ने चांदी को ‘2026 की मेगा थीम’ बना दिया है।
3. Gold Silver Rate Today : प्रमुख शहरों में आज का भाव (20 जनवरी 2026)
भारत के विभिन्न शहरों में कर (Taxes) और स्थानीय मांग के आधार पर भाव थोड़े भिन्न हो सकते हैं। नीचे प्रमुख महानगरों के ताजा रेट दिए गए हैं:
| शहर | 24 कैरेट सोना (प्रति 10g) | 22 कैरेट सोना (प्रति 10g) | चांदी (प्रति kg) |
| दिल्ली | ₹1,50,075 | ₹1,35,155 | ₹3,20,000 |
| मुंबई | ₹1,50,040 | ₹1,35,000 | ₹3,20,000 |
| देहरादून | ₹1,49,410 | ₹1,36,860 | ₹3,20,000 |
| कोलकाता | ₹1,50,320 | ₹1,35,000 | ₹3,20,000 |
| हैदराबाद | ₹1,49,480 | ₹1,35,000 | ₹3,30,000 |
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल (Global Market Trends)
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पीली धातु (Yellow Metal) की चमक कम नहीं हो रही है।
- कॉमैक्स गोल्ड: 2.01% चढ़कर Rs 4,687.7 प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गया।
- स्पॉट गोल्ड: Rs 4,685.57 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
- डॉलर इंडेक्स: अमेरिकी डॉलर में आई हल्की कमजोरी ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने को सस्ता कर दिया है, जिससे मांग में और उछाल आया है।
5. क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (Expert Opinion & Analysis)
बाजार के दिग्गज और कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन ‘T’ काम कर रहे हैं:
- Tension (भू-राजनीतिक): रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों को अनिश्चितता के समय सोने की ओर खींच रहा है।
- Tariffs (व्यापार युद्ध): अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित नए आयात शुल्कों (Greenland & Trade War) ने वैश्विक व्यापार संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिससे करेंसी मार्केट में डर का माहौल है।
- Trends (सेंट्रल बैंक बाइंग): दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेषकर चीन और भारत, अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की निर्भरता कम करने के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
6. निवेश रणनीति: क्या अभी खरीदना सही है?
मेहरा इक्विटीज के विशेषज्ञों के अनुसार, सोना वर्तमान में Rs 1,44,050–Rs 1,42,310 के मजबूत सपोर्ट जोन पर है। यदि आप लंबी अवधि (1-2 साल) के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो ‘बाय ऑन डिप’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति सबसे बेहतर है।
- ज्वेलरी बनाम निवेश: यदि आपका उद्देश्य केवल निवेश है, तो 22 कैरेट की जगह डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर विचार करें, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और शुद्धता की समस्या नहीं होती।
7. निष्कर्ष
20 जनवरी 2026 का दिन भारतीय सर्राफा इतिहास में दर्ज हो गया है। ₹1.50 लाख के करीब पहुंचता सोना और Rs 3.20 लाख को छूती चांदी यह साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में भी तेजी जारी रह सकती है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार की अस्थिरता (Volatility) को ध्यान में रखना चाहिए।
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RBI Monetary Policy June 2026: अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच रेपो रेट 5.25% पर स्थिर; विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6% किया गया..

RBI Monetary Policy June 2026 Overview
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू मोर्चे पर मौसम की अनिश्चितताओं के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी जून 2026 की त्रैमासिक समीक्षा बैठक के नतीजे घोषित कर दिए हैं। चालू वित्त वर्ष की इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय बैंक ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाते हुए नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई छह सदस्यीय समिति की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, मौद्रिक रुख (Policy Stance) को भी ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) बनाए रखा गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो (El Nino) के उभरते जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को घटा दिया है।
नीतिगत फैसले के मुख्य बिंदु (Key Directives)
आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए आरबीआई ने निम्नलिखित मुख्य घोषणाएं की हैं:
| संकेतक (Indicators) | वर्तमान स्थिति (June 2026) | पिछला रुख / अनुमान |
| रेपो रेट (Repo Rate) | 5.25% | 5.25% (यथावत) |
| पॉलिसी स्टांस (Stance) | न्यूट्रल (Neutral) | न्यूट्रल |
| FY27 जीडीपी ग्रोथ अनुमान | 6.6% | 6.9% (कटौती की गई) |
| FY27 खुदरा महंगाई अनुमान | 5.1% | 4.6% (बढ़ोतरी की गई) |
| विदेशी मुद्रा भंडार | $682.2 अरब | ऐतिहासिक रूप से मजबूत |
रेपो रेट को स्थिर रखने के पीछे का गणित
फरवरी 2025 में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होने के बाद से आरबीआई अब तक कुल 1.25% (125 बेसिस प्वाइंट) की कटौती कर चुका है। पिछली कटौतियों के बाद से रेपो दर 5.25% पर टिकी हुई है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही घरेलू स्तर पर खुदरा महंगाई इस समय नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन की बाधाओं को देखते हुए दरों में और कटौती करना जोखिम भरा हो सकता था। केंद्रीय बैंक इस समय ‘रुको और देखो’ की रणनीति पर चल रहा है ताकि पिछली कटौतियों का असर बाजार में पूरी तरह से दिखाई दे सके।
जीडीपी (GDP) वृद्धि दर के अनुमान में गिरावट क्यों?
जून 2026 की इस नीतिगत समीक्षा में सबसे बड़ा बदलाव भारत की विकास दर के अनुमान में देखने को मिला है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है।
केंद्रीय बैंक ने इसके लिए मुख्य रूप से तीन बड़े जोखिमों को जिम्मेदार ठहराया है:
- पश्चिम एशिया संकट (Middle East Conflict): इस क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वैश्विक माल ढुलाई (Freight Costs) और बीमा लागतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
- इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी: कच्चे तेल और अन्य औद्योगिक कमोडिटीज की कीमतों में अस्थिरता के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ रही है।
- कमजोर मानसून का साया: देश में अल नीनो (El Nino) की स्थितियां विकसित हो रही हैं। इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के असमान रहने की आशंका है, जो सीधे तौर पर कृषि उत्पादन और ग्रामीण इलाकों में मांग को प्रभावित कर सकता है।
आरबीआई के अनुमान के मुताबिक, आगामी तिमाहियों में जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार कुछ इस तरह रह सकती है:
- Q1 (अप्रैल-जून): 6.6%
- Q2 (जुलाई-सितंबर): 6.3%
- Q3 (अक्टूबर-दिसंबर): 6.5%
- Q4 (जनवरी-मार्च): 6.8%
महंगाई का मोर्चा: अनुमान में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि
आरबीआई को खुदरा महंगाई (CPI Inflation) को 4% के दायरे में रखने का वैधानिक दायित्व मिला हुआ है। अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा 3.48% पर था, जो संतोषजनक है। लेकिन थोक मूल्यों (WPI) और ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने केंद्रीय बैंक को सतर्क कर दिया है।
यही वजह है कि आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, जो पहले के अनुमान से 0.50% अधिक है। त्योहारों के सीजन (तिमाही 3) में इसके 5.9% के उच्चतम स्तर पर पहुंचने की आशंका जताई गई है, जो आरबीआई की ऊपरी सीमा (6%) के बेहद करीब है।
रुपये की विनिमय दर और विदेशी पूंजी को बढ़ावा
हाल के महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) में देखे गए उतार-चढ़ाव पर गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये के किसी विशेष स्तर को लक्षित नहीं करता है। भारतीय मुद्रा का मूल्य बाजार की ताकतों द्वारा ही तय होता है। हालांकि, उन्होंने सट्टेबाजी के दबावों और अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $682.2 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर है, जो 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। विदेशी पूंजी प्रवाह (Foreign Capital Flows) को और तेज करने के लिए आरबीआई ने दो बड़े नीतिगत सुधारों की घोषणा की है:
- सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) का दायरा बढ़ाना: फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत विदेशी निवेशकों के लिए अब 15, 30 और 40 वर्ष की लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड्स को भी शामिल कर लिया गया है।
- रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) को बढ़ावा देने के लिए 13 सितंबर 2026 तक एक विशेष रियायती स्वैप सुविधा दी जाएगी।
आम जनता और रीयल एस्टेट सेक्टर पर प्रभाव
नीतिगत दरों में बदलाव न होने का सीधा मतलब है कि आम उपभोक्ताओं के होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि ब्याज दरों में स्थिरता से रीयल एस्टेट मार्केट में चल रही खरीदारी की रफ्तार बनी रहेगी। डेवलपर्स और बिल्डर्स ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे उनकी ऋण लागत स्थिर रहेगी और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश को बल मिलेगा।
आर्थिक विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों का नजरिया
आरबीआई के इस कदम पर उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है:
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के अनुसार, “वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए दरों को स्थिर रखना एक परिपक्व फैसला है। बाजार को पहले से ही इस बात का अंदेशा था और यह कदम बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी (तरलता) को संतुलित बनाए रखेगा।”
डीबीएस बैंक (DBS Bank) की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया है कि भले ही जून में दरों को नहीं बदला गया है, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जमीन तैयार हो रही है। यदि कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है और खुदरा महंगाई 5% को पार करती है, तो आगामी तिमाहियों में आरबीआई को दरों में 75 से 100 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष
आरबीआई मौद्रिक नीति जून 2026 के फैसलों से यह साफ झलकता है कि केंद्रीय बैंक इस समय त्वरित आर्थिक विकास की तुलना में व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) को अधिक प्राथमिकता दे रहा है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए लगातार परीक्षा ले रही हैं।
वर्तमान में ब्याज दरों का न बढ़ना कॉर्पोरेट जगत और आम जनता दोनों के लिए फौरी राहत जरूर है, लेकिन विकास दर के अनुमान में की गई कटौती यह संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को आने वाले दिनों में फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाना होगा। यदि आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और नहीं बिगड़ते हैं, तभी देश इस संशोधित विकास लक्ष्य को हासिल करने में सफल हो पाएगा।
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Hexagon Nutrition IPO: निवेश का नया मौका? जानें बिजनेस, फाइनेंशियल्स, जीएमपी और सभी जरूरी डिटेल्स..

Hexagon Nutrition Ipo Overview
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में आईपीओ (IPO) को लेकर निवेशकों का उत्साह लगातार बना हुआ है। न्यूट्रिशन और वेलनेस सेक्टर की एक जानी-मानी कंपनी Hexagon Nutrition Limited अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लेकर आ रही है। अगर आप भी इस आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद मददगार साबित होने वाला है।
इस विस्तृत लेख में हम Hexagon Nutrition IPO का गहराई से विश्लेषण करेंगे। हम कंपनी के बिजनेस मॉडल, इसकी ताकत, संभावित जोखिम, वित्तीय स्थिति (Financial Health), आईपीओ की तारीखें, प्राइस बैंड और ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के बारे में विस्तार से जानेंगे ताकि आप एक सही और सटीक निवेश निर्णय ले सकें।
Table of Contents
1. Hexagon Nutrition Limited: कंपनी का परिचय (Company Overview)
Hexagon Nutrition Limited की स्थापना वर्ष 1993 में हुई थी। यह एक रिसर्च-ओरिएंटेड (Research-Oriented) न्यूट्रिशन कंपनी है, जो न्यूट्रिशन और वेलनेस प्रोडक्ट्स की एक विस्तृत श्रृंखला के विकास, निर्माण और मार्केटिंग में सक्रिय है।
शुरुआती दिनों में कंपनी ने केवल माइक्रोन्यूट्रिएंट फॉर्मूलेशन (Micronutrient Formulations) प्लेयर के रूप में काम शुरू किया था, लेकिन समय के साथ कंपनी ने ब्रांडेड हेल्थ और क्लिनिकल न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।
कंपनी के मुख्य बिजनेस सेगमेंट्स:
- ब्रांडेड वेलनेस और क्लिनिकल न्यूट्रिशन (Branded Wellness & Clinical Nutrition): कंपनी के पास कई जाने-माने ब्रांड्स हैं जो आम लोगों की सेहत, वजन प्रबंधन और क्लिनिकल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
- प्राइमिक्स फॉर्मूलेशन (Premix Formulations): विभिन्न प्रकार के विटामिन्स और मिनरल्स के मिश्रण (Premixes) तैयार करना, जिनका उपयोग फूड एंड बेवरेज (F&B) इंडस्ट्री में किया जाता है।
- थेराप्यूटिक न्यूट्रिशन सॉल्यूशंस (Therapeutic Nutrition Solutions): इसके तहत कंपनी रेडी-टू-यूज फूड्स (RUFs) और माइक्रोन्यूट्रिएंट पाउडर्स (MNPs) का निर्माण करती है, जो कुपोषण से लड़ने और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बेहद उपयोगी होते हैं।
2. कंपनी के प्रमुख ब्रांड्स और वैश्विक उपस्थिति (Brands & Global Presence)
Hexagon Nutrition ने भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपने ब्रांड्स को काफी मजबूती से स्थापित किया है। कंपनी के कुछ सबसे लोकप्रिय ब्रांड्स निम्नलिखित हैं:
- PENTASURE: क्लिनिकल न्यूट्रिशन और विशेष स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए।
- OBESIGO: वजन प्रबंधन (Weight Management) और मील रिप्लेसमेंट के लिए।
- PEDIAGOLD: बच्चों के समग्र पोषण और विकास के लिए।
- NUTRONE: विभिन्न न्यूट्रिशनल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए।
ग्लोबल रीच (Global Footprint):
कंपनी सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका बिजनेस दुनिया के 75 से अधिक देशों में फैला हुआ है। कंपनी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों, बड़े हेल्थकेयर संगठनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अपने प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है।
इसके अलावा, कंपनी के पास 4 अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, जिनमें से 3 भारत में (महाराष्ट्र और तमिलनाडु) और 1 उज्बेकिस्तान में स्थित है। खास बात यह है कि भारत की दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZs) में हैं, जिससे कंपनी को टैक्स और लॉजिस्टिक्स में काफी फायदा मिलता है।
3. Hexagon Nutrition IPO की महत्वपूर्ण तारीखें और डिटेल्स
यदि आप इस आईपीओ में आवेदन करना चाहते हैं, तो आपको इसकी महत्वपूर्ण तारीखों और टाइमलाइन के बारे में पता होना चाहिए:
| आईपीओ इवेंट (IPO Event) | संभावित तारीख (Dates) |
| आईपीओ खुलने की तारीख (IPO Open Date) | 05 जून 2026 |
| आईपीओ बंद होने की तारीख (IPO Close Date) | 09 जून 2026 |
| अलॉटमेंट की तारीख (Allotment Date) | 10 जून 2026 |
| रिफंड/फंड्स अनब्लॉक की तारीख | 10 जून 2026 |
| डिमैट अकाउंट में शेयर्स क्रेडिट होना | 11 जून 2026 |
| लिस्टिंग की तारीख (Listing Date) | 12 जून 2026 |
आईपीओ का साइज, प्राइस बैंड और लॉट साइज (Issue Size & Price Band)
- टोटल इश्यू साइज (Issue Size): ₹138.87 करोड़
- प्राइस बैंड (Price Band): ₹42 से ₹45 प्रति इक्विटी शेयर
- फेस वैल्यू (Face Value): ₹1 प्रति शेयर
- लॉट साइज (Lot Size): 333 शेयर्स
- न्यूनतम निवेश (Minimum Investment): ₹13,986 (एक लॉट के लिए)
- कहाँ लिस्ट होगा: BSE और NSE पर
नोट: खुदरा निवेशक (Retail Investors) अधिकतम ₹2 लाख तक निवेश कर सकते हैं, जबकि हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) ₹2 लाख से ₹5 लाख तक के लिए आवेदन कर सकते हैं।
4. Hexagon Nutrition की वित्तीय स्थिति (Financial Performance)
किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी के फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड को देखना बेहद जरूरी होता है। Hexagon Nutrition के पिछले तीन सालों के आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी लगातार ग्रोथ दर्ज कर रही है।
(सभी आंकड़े करोड़ रुपये में)
| वित्तीय वर्ष (Financial Year) | कुल राजस्व (Total Revenue) | टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) |
| FY 2023 | ₹279 करोड़ | ₹5.82 करोड़ |
| FY 2024 | ₹298 करोड़ | ₹12.21 करोड़ |
| FY 2025 | ₹325 करोड़ | ₹24.38 करोड़ |
वित्तीय विश्लेषण (Financial Analysis):
- राजस्व में बढ़ोतरी: कंपनी का रेवेन्यू FY23 में ₹278.50 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹324.93 करोड़ हो गया है, जो एक स्थिर मांग को दर्शाता है।
- मुनाफे में शानदार उछाल: सबसे आकर्षक बात यह है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट (Profit After Tax) पिछले तीन वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है। FY23 में जो मुनाफा मात्र ₹5.82 करोड़ था, वह FY25 में बढ़कर ₹24.38 करोड़ हो गया है। यानी मुनाफे में मल्टीफोल्ड ग्रोथ देखी गई है।
मुख्य वित्तीय अनुपात (Key Performance Indicators – KPIs)
31 दिसंबर 2025 को समाप्त अवधि के अनुसार कंपनी के प्रमुख अनुपात इस प्रकार हैं:
- ROE (Return on Equity): 13.02%
- ROCE (Return on Capital Employed): 14.82%
- EBITDA Margin: 14.03%
- PAT Margin: 9.81%
- Debt/Equity Ratio: 0.18 (जो कि बेहद कम है और कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है)
- Post IPO EPS (Earnings Per Share): ₹2.93
5. Hexagon Nutrition की ताकत (Key Strengths)
इस कंपनी के बिजनेस मॉडल में कई ऐसी खूबियां हैं जो इसे लंबी अवधि के लिए एक मजबूत खिलाड़ी बनाती हैं:
- पूरी तरह से इंटीग्रेटेड बिजनेस: कंपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी एश्योरेंस और मार्केटिंग के पूरे वैल्यू चेन में खुद काम करती है। नासिक और चेन्नई में कंपनी के दो इन-हाउस R&D सेंटर्स हैं।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) कार्यक्रमों से जुड़ाव: कंपनी वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के विभिन्न न्यूट्रिशन और कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट पाउडर्स (MNPs) की सबसे बड़ी लाइसेंस प्राप्त सप्लायर्स में से एक है।
- मजबूत ग्राहक संबंध और रिपीट ऑर्डर्स: कंपनी के पास बी2बी (B2B), बी2बी2सी (B2B2C) और ईएसजी (ESG) सेगमेंट्स में ग्राहकों का एक बड़ा नेटवर्क है। कंपनी के अधिकांश ग्राहक रिपीट कस्टमर्स (Repeat Customers) हैं, जो इसके प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता पर भरोसा जताते हैं।
- कम कर्ज (Low Debt): कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो केवल 0.18 है, जिसका मतलब है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ बहुत कम है।
6. आईपीओ से जुड़े जोखिम (Key Risks & Challenges)
निवेश का कोई भी फैसला जोखिमों को जाने बिना अधूरा है। Hexagon Nutrition IPO से जुड़े कुछ मुख्य जोखिम निम्नलिखित हैं:
- कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव: न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स के लिए विटामिन्स और मिनरल्स जैसे कच्चे माल की आवश्यकता होती है। यदि इनकी कीमतों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उछाल आता है, तो कंपनी के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
- कड़ा मुकाबला (Competition): भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस और क्लिनिकल न्यूट्रिशन सेक्टर में पहले से ही कई बड़े और स्थापित ब्रांड्स मौजूद हैं। उनसे मुकाबला बनाए रखना एक चुनौती होगी।
- सरकारी नीतियां और रेगुलेशन: चूंकि यह क्षेत्र सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए FSSAI और अन्य वैश्विक संस्थाओं के कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों में किसी भी तरह का बदलाव कंपनी के बिजनेस को प्रभावित कर सकता है।
7. Hexagon Nutrition IPO GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम)
आईपीओ के प्रति निवेशकों के रुझान को समझने के लिए Grey Market Premium (GMP) एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। हालांकि GMP में बाजार की स्थितियों के अनुसार दैनिक आधार पर उतार-चढ़ाव होता रहता है।
इस आईपीओ का छोटा इश्यू साइज (₹138.87 करोड़) और कंपनी के आकर्षक फाइनेंशियल्स को देखते हुए, ग्रे मार्केट में इसके लिए सकारात्मक माहौल बनने की उम्मीद है। यदि यह अपने अपर प्राइस बैंड (₹45) के मुकाबले अच्छे प्रीमियम पर ट्रेड करता है, तो निवेशकों को लिस्टिंग गेन (Listing Gains) मिलने की अच्छी संभावना रहेगी।
8. निष्कर्ष और एक्सपर्ट राय: क्या आपको निवेश करना चाहिए?
Hexagon Nutrition Limited का बिजनेस मॉडल काफी अनूठा और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल है। कोरोना महामारी के बाद से दुनिया भर में हेल्थ, वेलनेस और इम्युनिटी-बूस्टिंग सप्लीमेंट्स की मांग में भारी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा फायदा इस कंपनी को मिल सकता है।
निवेश के लिए चेकलिस्ट:
- शॉर्ट-टर्म / लिस्टिंग गेन के लिए: यदि आप केवल लिस्टिंग गेन के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो आईपीओ के अंतिम दिनों (7 से 9 जून) में सब्सक्रिप्शन डेटा और तत्कालीन GMP को जरूर ट्रैक करें।
- लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए: कंपनी के वित्तीय आंकड़े मजबूत हैं, कर्ज बहुत कम है, और मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। यदि आप हेल्थकेयर और न्यूट्रिशन सेक्टर में लंबी अवधि के लिए दांव लगाना चाहते हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
अंतिम सलाह: अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा करने और अपने रिस्क प्रोफाइल का आकलन करने के बाद ही Hexagon Nutrition IPO में पैसा लगाएं।
Hexagon Nutrition IPO से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. Hexagon Nutrition IPO कब खुलेगा और बंद होगा?
यह आईपीओ 05 जून 2026 को खुलेगा और 09 जून 2026 को बंद होगा।
Q2. इस आईपीओ का प्राइस बैंड क्या है?
कंपनी ने इसका प्राइस बैंड ₹42 से ₹45 प्रति इक्विटी शेयर तय किया है।
Q3. एक लॉट में कितने शेयर्स मिलेंगे और न्यूनतम निवेश कितना है?
एक लॉट में 333 शेयर्स होंगे, जिसके लिए कट-ऑफ प्राइस (₹45) पर न्यूनतम ₹13,986 का निवेश करना होगा।
Q4. इस आईपीओ का रजिस्ट्रार कौन है?
Hexagon Nutrition IPO का आधिकारिक रजिस्ट्रार KFin Technologies Limited है। आप इनकी वेबसाइट पर जाकर अपना अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं।
Q5. क्या Hexagon Nutrition IPO में प्री-अप्लाई किया जा सकता है?
हाँ, कई ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे Groww) पर आप आईपीओ खुलने से 2 दिन पहले ही ‘Pre-apply’ कर सकते हैं, जिससे आपका ऑर्डर बिडिंग शुरू होते ही एक्सचेंज के पास चला जाता है।
Business
CMR Green Technologies Ltd IPO: निवेशकों के लिए बड़ा मौका, जानें प्राइस बैंड, डेट्स और पूरी डिटेल

CMR Green Technologies Ltd IPO Overview
भारतीय शेयर बाजार में आईपीओ (IPO) का क्रेज लगातार बना हुआ है। इसी कड़ी में मेटल रिसाइक्लिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी CMR Green Technologies Limited अपना आईपीओ लेकर आ रही है। अगर आप भी इस आईपीओ में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए कंपनी के बिजनेस मॉडल, फाइनेंशियल हेल्थ, ताकत और रिस्क को समझना बेहद जरूरी है।
इस आर्टिकल में हम आपको CMR Green Technologies Ltd IPO से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी आसान भाषा में देने जा रहे हैं।
कंपनी का बिजनेस और बैकग्राउंड (About the Company)
CMR Green Technologies Limited की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। यह कंपनी मुख्य रूप से नॉन-फेरस मेटल रिसाइक्लिंग (Non-Ferrous Metal Recycling) के बिजनेस में है। कंपनी रिसाइकल्ड एल्युमिनियम अलॉय (Recycled Aluminium Alloys) और अन्य मेटल प्रोडक्ट्स का निर्माण करती है।
मुख्य प्रोडक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता:
- उत्पाद (Products): रिसाइकल्ड एल्युमिनियम अलॉय (इंगट और लिक्विड फॉर्म में), एल्युमिनियम बिलेट्स, जिंक अलॉय इंगट और इसके अलावा स्टेनलेस स्टील, कॉपर, ब्रास, जिंक, लीड और मैग्नीशियम का स्क्रैप प्रोसेस करना।
- क्लाइंट्स (Customers): कंपनी के मुख्य ग्राहकों में ऑटोमोटिव ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) और टियर-1 ऑटोमोटिव सप्लायर्स शामिल हैं।
- प्लांट्स (Facilities): कंपनी के पास भारतभर के 8 राज्यों (हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तराखंड, राजस्थान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश) में 13 रिसाइक्लिंग फैसिलिटीज हैं।
- उत्पादन क्षमता: 31 मार्च, 2026 तक कंपनी की कुल कंबाइंड प्रोडक्शन कैपेसिटी 615,150 MTPA (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) है।
CMR Green Technologies IPO की महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates)
यदि आप इस आईपीओ में दांव लगाना चाहते हैं, तो इन तारीखों को अपने कैलेंडर में नोट कर लें:
| इवेंट | तारीख |
| IPO Open Date (खुलने की तारीख) | 3 जून 2026 |
| IPO Close Date (बंद होने की तारीख) | 5 जून 2026 |
| Allotment Date (अलॉटमेंट की तारीख) | 8 जून 2026 |
| Refund/Refund Unblock (पैसे रिफंड होने की तारीख) | 8 जून 2026 |
| Tentative Listing Date (लिस्टिंग की तारीख) | 10 जून 2026 |
आईपीओ का साइज, प्राइस बैंड और लॉट साइज (IPO Details & Lot Size)
- इश्यू साइज (Issue Size): यह आईपीओ कुल ₹630.88 करोड़ का है।
- ऑफर फॉर सेल (OFS): ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरा आईपीओ ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) है। यानी इस आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा प्रमोटर्स और बेचने वाले शेयरधारकों के पास जाएगा, कंपनी को बिजनेस बढ़ाने के लिए इसमें से कोई फंड नहीं मिलेगा।
- प्राइस बैंड (Price Band): कंपनी ने इसका प्राइस बैंड ₹182 से ₹192 प्रति शेयर तय किया है।
- फेस वैल्यू (Face Value): ₹2 प्रति इक्विटी शेयर।
- लॉट साइज (Lot Size): इस आईपीओ का लॉट साइज 78 शेयर्स का है।
न्यूनतम निवेश (Minimum Investment):
एक रिटेल निवेशक को कम से कम 1 लॉट (78 शेयर्स) के लिए अप्लाई करना होगा। अपर प्राइस बैंड (₹192) के हिसाब से आपको न्यूनतम ₹14,196 का निवेश करना होगा। रिटेल निवेशक अधिकतम ₹2 लाख तक की बिडिंग कर सकते हैं।
कंपनी के वित्तीय आंकड़े (Financial Performance)
कंपनी के पिछले तीन सालों के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर नजर डालें, तो इसके रेवेन्यू में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है (सभी आंकड़े करोड़ रुपये में):
- FY23 का रेवेन्यू: ₹5,868.51 करोड़
- FY24 का रेवेन्यू: ₹5,952.44 करोड़
- FY25 का रेवेन्यू: ₹6,666.48 करोड़
मुख्य वित्तीय अनुपात (KPIs – 31 दिसंबर 2025 तक):
- EBITDA Margin: 5.17%
- PAT Margin: 2.59%
- Debt/Equity Ratio: 0.76 (कर्ज की स्थिति नियंत्रण में है)
- Return on Net Worth (RoNW): 24.92%
- Post IPO EPS: ₹9.88
CMR Green Technologies IPO: ताकत और कमजोरियां (Strengths & Risks)
मजबूत पक्ष (Strengths):
- मार्केट लीडरशिप: कंपनी भारत में नॉन-फेरस मेटल रिसाइक्लिंग के क्षेत्र में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। FY25 के आंकड़ों के मुताबिक, कास्ट अलॉय ऑटोमोटिव सेगमेंट में इसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 42-45% है।
- ग्लोबल सोर्सिंग नेटवर्क: कंपनी के पास कच्चे माल (स्क्रैप) के लिए दुनिया के 73 देशों में फैले 198 से ज्यादा सप्लायर्स का नेटवर्क है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है।
- ग्लोबल पार्टनर्स: कंपनी का टोयोटा त्सुशो कॉरपोरेशन (Toyota Tsusho Corporation) और निक्केई एमसी एल्युमिनियम जैसी जापानी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर है, जिससे इसे बेहतरीन टेक्निकल सपोर्ट मिलता है।
जोखिम और चुनौतियां (Risks):
- पूरा आईपीओ OFS है: जैसा कि पहले बताया गया, ₹630.88 करोड़ का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है, इसलिए कंपनी के ग्रोथ ऑपरेशन्स के लिए फ्रेश फंड नहीं आ रहा है।
- ऑटो सेक्टर पर निर्भरता: कंपनी के प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल सेक्टर में सप्लाई होते हैं। ऐसे में अगर ऑटो सेक्टर में सुस्ती आती है, तो कंपनी के बिजनेस पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
- कमोडिटी प्राइस रिस्क: मेटल की कीमतों में होने वाले वैश्विक उतार-चढ़ाव से कंपनी का मार्जिन प्रभावित हो सकता है।
आईपीओ के लीड मैनेजर्स और रजिस्ट्रार
- रजिस्ट्रार (Registrar): इस आईपीओ का ऑफिशियल रजिस्ट्रार KFin Technologies Limited है। अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के लिए आप इनकी वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
- लीड मैनेजर्स: इक्विरस कैपिटल, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इस इश्यू के बुक रनिंग लीड मैनेजर्स हैं।
निष्कर्ष: क्या आपको निवेश करना चाहिए?
CMR Green Technologies Ltd मेटल रिसाइक्लिंग और ग्रीन इकोनॉमी सेगमेंट की एक मजबूत खिलाड़ी है। इसका फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड और मार्केट शेयर काफी शानदार है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह पूरी तरह से OFS (ऑफर फॉर सेल) आईपीओ है।
यदि आप लॉन्ग-टर्म के लिए रीसाइक्लिंग और ऑटो-कंपोनेंट सेक्टर पर दांव लगाना चाहते हैं, तो लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट और ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को देखते हुए इसमें निवेश का फैसला ले सकते हैं। किसी भी आईपीओ में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से चर्चा जरूर करें।
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