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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह, राज्यपाल ने 18 हजार से अधिक विद्यार्थियों को दी डिग्री

HALDWANI NEWS : राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किया UOU दीक्षांत समारोह का उद्घाटन
HALDWANI NEWS : राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सोमवार को उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने कुल 18,146 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा स्तर की उपाधियाँ प्रदान की जबकि 6 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि से सम्मानित किया गया।
बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ
इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को युवा दिवस की बधाई देते हुये कहा कि सत्य, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों के साथ निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षिक कार्यों की सराहना की तथा कहा कि विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा को घर घर पहुँचाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अच्छा कार्य कर रहा है, विश्वविद्यालय ने कई शिक्षण संस्थान, कारागार, सेना, आईआईटी रुड़की जैसे संस्थानों से समझौता कर सभी को उच्च शिक्षा से जोड़ने का काम किया है।

शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया
राज्यपाल ने विभिन्न विधाओं में स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों से कहा कि आप लोग क्रान्तिकारी है अपने ज्ञान को प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों तक पहुच कर शिक्षा से वंचित लोगों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य करें। उन्होंने कहा कि कोई राष्ट्र तब तक विकसित नहीं हो सकता जब तक कि शिक्षा को अपना मुख्य आधार न बनाए।
राज्यपाल ने कहा कि उठो जागो, तब तक जागो जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो। राष्ट्र सर्वाेपरि है और अपने आप में परिवर्तन लायें तथा अपने सपनों को लक्ष्य के रूप में परिभाषित करें।
युवा दिवस पर दिया प्रेरक संदेश
उन्होंने कहा शिक्षा एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है जीवन में सीखने की वृत्ति एक विद्यार्थी के भीतर हमेशा होनी चाहिए। जिज्ञासा का उदय व उसके शमन हेतु निरंतर अन्वेषण एक शिक्षार्थी का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा आज के युग में डिजिटल शिक्षा हमारी आवश्यकता है राष्ट्र की प्रगति शिक्षा व्यवस्था से तय होती है।

डिजिटल शिक्षा को बताया समय की आवश्यकता
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्ष 2027 विकसित भारत का संकल्प लिया गया है उसे साकार करने हेतु यह शिक्षण संस्थान भी अपने स्तर से अमृत कार्य कर रहा है उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी शिक्षा से तय होती है
60 देशों के 2 लाख से ज्यादा विद्यार्थी जुड़े
शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ने का कार्य इस विश्वविद्यालय द्वारा नियंत्रित तौर पर किया जा रहा है। 60 से अधिक देशों के 2 लाख से अधिक शिक्षणार्थी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। साइबर सुरक्षा डिजिटल जैसे पाठ्यक्रम यहां संचालित हो रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाला प्रदेश का यह प्रथम विश्वविद्यालय है ।इस पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी बधाई दी इस अवसर पर विभिन्न पत्रिकाओं वार्षिक कैलेंडर हिंदी वेबसाइट का भी लोकार्पण किया है।

इस अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.नवीन चन्द्र लोहनी ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार, शोध गतिविधियों एवं शिक्षण गुणवत्ता सुदृढ़ीकरण के प्रयासों की जानकारी दी।
दीक्षांत समारोह में विद्यापरिषद के सदस्य प्रो. पी.एस. बिष्ट, डॉ. एच.सी. पुरोहित एवं कार्यपरिषद के सदस्य प्रो. बी.एस. राजपूत, रमेश चंद्र बिंजोला और डॉ. अजय कुमार गुप्ता, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, जी बी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एम एस चौहान, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एन के जोशी, प्रो. एच पी शुक्ला, प्रो. उमा जोशी उपस्थित थे।
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हल्द्वानी में खौफनाक मंजर! उफनती भाखड़ा नदी में फंसे दो लोग, बाल-बाल बची जान

Haldwani News : लगातार हो रही बारिश अब उत्तराखंड में खतरे की घंटी बनती जा रही है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने कुछ देर के लिए हर किसी की सांसें रोक दीं। फतेहपुर क्षेत्र की उफनती भाखड़ा नदी पार करते समय दो लोग तेज बहाव में फंस गए।
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हल्द्वानी में उफनती नदी में बहने ही वाले थे दो लोग
नैनीताल जिले के फतेहपुर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। भाखड़ा नदी पार करने के दौरान बाइक सवार दो लोग अचानक तेज बहाव में फंस गए। स्थिति गंभीर होती देख आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से पड़ी जान खतरे में
इन दिनों मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इसी बीच फतेहपुर की भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से दो लोगों की जान खतरे में पड़ गई।

बाइक के साथ नदी पार करने का कर रहे थे प्रयास
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों व्यक्ति बाइक के साथ नदी पार करने का प्रयास कर रहे थे। तभी नदी का बहाव तेज हो गया और वे बीच धारा में फंस गए। उन्हें संघर्ष करते देख आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की बदौलत दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बरसात के दौरान नदी का बढ़ जाता है जलस्तर
ग्रामीणों का कहना है कि खेती, स्कूल, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें रोज इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर बार दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण की मांग दोहराई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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हल्द्वानी के लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा, रेत में दबने से मजदूर की मौत

Haldwani News : उत्तराखंड के लालकुआं में एक स्टोन क्रशर पर हुए दर्दनाक हादसे ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्दूचौड़ निवासी 30 वर्षीय मजदूर पवन सिंह की काम के दौरान रेत में दबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि डंपर में रेत भरने की प्रक्रिया के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
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लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा
लालकुंआ में दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। मिली जानकारी क मुताबिक हल्दूचौड़ निवासी पवन सिंह रोज की तरह सुबह काम पर गया था। स्टोन क्रशर में वह डंपर के किनारों पर कट्टे लगा रहा था ताकि रेत बाहर न गिरे।
रेत में दबने से मजदूर की मौत
इसी दौरान लोडर चालक ने कथित तौर पर बिना ये देखे कि डंपर में कोई व्यक्ति मौजूद है या नहीं, उसमें रेत डालनी शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में पवन भारी मात्रा में रेत के नीचे दब गया। बरसात के कारण रेत गीली और अधिक भारी थी, जिससे उसके बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं बची।
रेत खाली करते समय चला हादसे का पता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ समय बाद जब डंपर से रेत उतारी जा रही थी, तब मजदूरों को रेत के नीचे पवन के दबे होने की जानकारी मिली। इसके बाद सभी ने मिलकर उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। माना जा रहा है कि रेत के दबाव और दम घुटने की वजह से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मशीन चलाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता कि डंपर के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारी मशीनों के संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। मशीन शुरू करने से पहले कर्मचारियों की मौजूदगी की पुष्टि करना, आपसी समन्वय बनाए रखना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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हल्द्वानी में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन पानी के टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटों की मौत

Haldwani News : हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में मंगलवार शाम एक बेहद दुखद हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। निर्माणाधीन भूमिगत पानी के टैंक के भीतर जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण मां और उसके दो बेटे बेहोश हो गए। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
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निर्माणाधीन पानी के टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटों की मौतह
हल्द्वानी में गौलापार की कुंवरपुर न्याय पंचायत के मानपुर गांव निवासी धर्मेंद्र बिष्ट ने अपने घर के पास कुछ समय पहले भूमिगत पानी का टैंक बनवाया था। मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे टैंक की शटरिंग हटाने का काम चल रहा था। इसी दौरान धर्मेंद्र टैंक के अंदर उतर गए, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आए।
जब धर्मेंद्र की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उनके छोटे भाई खुशाल सिंह उन्हें देखने के लिए टैंक में उतरे। कुछ ही देर बाद वह भी अंदर ही अचेत हो गए।
बेटों को बचाने उतरी मां भी हुई बेहोश
दोनों बेटों के बाहर न आने पर उनकी मां सरस्वती देवी को अनहोनी की आशंका हुई। वह भी टैंक के अंदर गईं, लेकिन वहां मौजूद गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण वह भी बेहोश होकर गिर गईं।
बचाव के दौरान एक और व्यक्ति हुआ अचेत
परिजनों और ग्रामीणों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। गांव के सब्जी विक्रेता भोज राम ने तीनों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन टैंक में उतरते ही वह भी अचेत हो गए। हालांकि, ग्रामीणों ने तुरंत सभी को बाहर निकाला, जिससे भोज राम को होश आ गया, लेकिन मां और दोनों बेटों की हालत गंभीर बनी रही।
अस्पताल में डॉक्टरों ने तीनों को किया मृत घोषित
ग्रामीण तुरंत तीनों को सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद धर्मेंद्र बिष्ट, खुशाल सिंह और उनकी मां सरस्वती देवी को मृत घोषित कर दिया।
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