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खड़ी ट्रॉली के नीचे निकला अजगर..देख लोगों के उड़े होश, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू।

लक्सर – लक्सर इस्माइलपुर गांव में एक ग्रामीण के घेर में अजगर निकल आया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने अजगर को पकड़कर जंगल में सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया।

इस्माइलपुर गांव में दिनेश के घेर में खड़ी ट्रॉली के नीचे एक अजगर कुंडली मारे बैठा था। इस बीच दिनेश की नजर उस पर पड़ी तो उसने शोर मचा दिया। शोर सुनकर मौके पर ग्रामीण जमा हो गए। ग्रामीणों ने सूचना वन विभाग को दी।
सूचना पर वन विभाग के गुरजंट सिंह, कवींद्र सिंह व भोपाल सिंह मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू चलाकर करीब तीन घंटे बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया। वन दरोगा आशुतोष नीम ने बताया कि अजगर को वन क्षेत्र पथरी के जंगल में छोड़ दिया गया है।
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सिडकुल में निर्माणाधीन मकान के सैप्टिक टैंक में शव मिलने से सनसनी, नहीं हो पाई शिनाख्त

Haridwar News : हरिद्वार में निर्माणाधीन मकान के सैप्टिक टैंक में शव मिलने से मचा हड़कंप
Haridwar News : हरिद्वार के सिडकुल थाना क्षेत्र स्थित गायत्री विहार में एक निर्माणाधीन मकान के सिडकुल में निर्माणाधीन मकान के सैप्टिक टैंक में शव मिलने से सनसनी मच गई। अब तक शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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निर्माणाधीन मकान के सैप्टिक टैंक में शव मिलने से सनसनी
Haridwar के सिडकुल थाना क्षेत्र स्थित गायत्री विहार के निर्माणाधीन मकान में शव मिलने से हड़कंप मच गया। मिली जानकारी के मुताबिक निर्माणाधीन मकान के सैप्टिक टैंक से अज्ञात शव बरामद किया गया। घटना की जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

Haridwar में मिले शव की अब तक नहीं हो पाई शिनाख्त
निर्माणाधीन मकान में मिले शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से शव की शिनाख्त की कोशिश की लेकिन पहचान नहीं को सकी। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है उम्र
मिली जानकारी के मुताबिक मृतक की उम्र 30 से 35 के बीच बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शव की स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि ये कई दिन पुराना है। दुर्गंध आने के बाद ही लोगों ने आसपास देखा था तब जाकर ही शव मिला था।
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उत्तराखंड: डेढ़ साल की मासूम बच्ची हुई घर से गायब, पड़ोसी पर किडनैपिंग के आरोप

Roorkee: पिरान कलियर क्षेत्र में मासूम बच्ची हुई गायब, पड़ोसी पर गंभीर आरोप
मुख्य बिंदु
रूड़की (Roorkee): हरिद्वार जिले के रूड़की, पिरान कलियर क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ एक डेढ़ साल की मासूम बच्ची अचानक घर से गायब हो गई। इसके बाद परिजनों ने घबराकर घर और आसपास के इलाके में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल सका।
रूड़की, पिरान कलियर क्षेत्र से मासूम हुई गायब (Roorkee Kidnapping)
बच्ची का पता न चलने पर परिजनों ने पुलिस को मामले की सूचना दी। साथ ही बच्ची की मां ने थाने पहुंचकर एक व्यक्ति के खिलाफ नामजद तहरीर भी दी। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से पूरा परिवार सदमे में है और मासूम की सलामती को लेकर बेहद चिंतित है।
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पड़ोसी पर अपहरण का गंभीर आरोप
पीड़ित महिला ने तहरीर में बताया कि उनके घर के पास किराए पर रहने वाला एक व्यक्ति, जो मूल रूप से मुरादाबाद का निवासी है। पिछले कुछ महीनों से अकेले रह रहा था। आरोप है कि 17 जनवरी की शाम करीब पांच बजे उसी व्यक्ति ने उनकी डेढ़ साल की बच्ची को घर से अगवा कर लिया। इस घटना के बाद से बच्ची का कोई पता नहीं चल पाया है।
जांच में जुटी पुलिस, तलाश तेज
तहरीर के आधार पर पुलिस ने नामजद आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्ध की तलाश के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पिरान कलियर थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है और बच्ची को जल्द से जल्द सकुशल बरामद करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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‘ध्वज वंदन समारोह’ में शामिल हुए सीएम धामी और केंद्रीय पर्यटन मंत्री, कहा- देवभूमि के मूल स्वरूप को बचाने के लिए सरकार कर रही काम

Haridwar News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
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‘ध्वज वंदन समारोह’ में शामिल हुए सीएम धामी और केंद्रीय पर्यटन मंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का साक्षात भावात्मक अभिव्यक्ति है। माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा और नई दृष्टि दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता, यह उस युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है।
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।
देवभूमि के मूल स्वरूप को बचाने के लिए सरकार कर रही काम
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू किया गया है। सख्त दंगारोधी कानून एवं धर्मांतरण कानून भी लाया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक अवैध अतिक्रमण को हटाया गया है।
केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग का निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी चेतना को जाग्रत करना
शताब्दी समारोह के दलनायक और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि ये समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है। बल्कि ये युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है। उन्होंने कहा कि ये सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं कर रहा, वरन् ये आयोजन स्वयं आपके सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा कि “गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा। कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।” उन्होंने जनसमूह से आत्मपरिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन की प्रथम शर्त बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण की नींव सशक्त होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है, ताकि विचार, आचरण और कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव हो सके।
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