Bageshwar
कुमाऊं के इस जिले में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र 8 जुलाई को रहेंगे बंद, आदेश जारी।

बागेश्वर – भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा दिनाँक 07.07.2024 को अपरान्हः 01:30 बजे जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार जनपद बागेश्वर अन्तर्गत कहीं-कहीं भारी वर्षों तथा कहीं-कही गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने / वर्षा के अति तीव्र से अत्यन्त तीव्र दौर की सम्भावना व्यक्त करते हुए अलर्ट जारी किया गया है। तद्कम में वर्तमान में जनपद अन्तर्गत हो रही वर्षा के दृष्टिगत छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के मध्यनजर दिनांक 08.07.2024 (सामेवार) को जनपद बागेश्वर के समस्त शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी विद्यालय (कक्षा 01 से 12 तक) एवं ऑगनबाड़ी केन्द्रों में अवकाश घोषित किया जाता है।

मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा जारी चेतावनी के दृष्टिगत दिनांक 08.07.2024 (सोमवार) को जनपद के समस्त शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी विद्यालयों में (कक्षा 01 से 12 तक) एवं आँगनबाड़ी केन्द्र बन्द रहेगें। मुख्य शिक्षा अधिकारी, बागेश्वर तद्नुसार आवश्यक कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। विचलन की दशा में सम्बन्धित के विरूद्ध कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।
Uttarakhand
बागेश्वर में SARRA की अहम बैठक, गरुड़ गंगा समेत जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर जोर

Bageshwar: स्प्रिंग व रिवर रीजुविनेशन को लेकर SARRA की अहम बैठक सम्पन्न
मुख्य बिंदु
बागेश्वर (Bageshwar): उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में कलेक्ट्रेट सभागार में स्प्रिंग एवं रिवर रीजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) की बैठक आयोजित की गई। जिसमें प्राचीन नौलों, धारों और नदियों के संरक्षण-संवर्धन, भू-जल स्तर में सुधार तथा प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर चर्चा हुई।
गरुड़ गंगा नदी के पुनर्जीवन के लिए तैयार किया जाएगा प्रस्ताव
बैठक में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने भागीरथ ऐप पर चिन्हित क्रिटिकल जल स्रोतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी पुनरुद्धार के निर्देश दिए। साथ ही गरुड़ गंगा नदी के पुनर्जीवन हेतु विस्तृत और व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार की लिए कहा।
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वैज्ञानिक सर्वे और लोकज्ञान से जल स्रोतों को मिलेगा नया जीवन: डीएम
जिलाधिकारी ने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विस्तृत सर्वे बेहद जरुरी है। जिसमें आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ-साथ स्थानीय बुजुर्गों और अनुभवी व्यक्तियों के ज्ञान और अनुभव को भी शामिल किया जाना चाहिए। जिससे जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का सटीक विश्लेषण किया जा सके और योजनाएं अधिक प्रभावी बनें।
SARRA से जुड़े सभी विभागों को समन्वय मजबूत करने को कहा
उन्होंने SARRA से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए। और कहा कि अगले 15 दिनों के अंदर गरुड़ गंगा सहित अन्य महत्वपूर्ण जल स्रोतों के संरक्षण से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं।
योजना के अंतर्गत कम जलधारा वाले स्रोतों को चिन्हित कर उनके पुनर्जीवन के लिए व्यापक पौधरोपण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग (जल संचयन) एवं अन्य वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएंगे, जिससे भविष्य में पेयजल संकट से प्रभावी रूप से निपटा जा सके।
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Uttarakhand
ठण्ड से बचने के लिए जलाई अंगीठी, 2 साल की मासूम समेत चार लोग बेहोश

BAGESHWAR NEWS : अंगीठी के धुंए से चार लोग बेहोश, अस्पताल में चल रहा इलाज
मुख्य बिंदु
BAGESHWAR NEWS: उत्तराखंड में बढ़ती ठण्ड के प्रकोप से बचने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में लोग आग का सहारा ले रहे हैं। लेकिन कई बार यही आग लापरवाही के कारण जान जोखिम में डाल देती है। ताजा मामला बागेश्वर के दाड़िमठौक गांव से सामने आया है जहाँ पर घर के अंदर अंगीठी की गैस से एक ही परिवार के चार सदस्य बेहोश हो गए हैं।
BAGESHWAR में अंगीठी के धुंए से चार लोग बेहोश
दरअसल, बागेश्वर कोतवाली के दाड़िमठौक गांव में घर के अंदर एक परिवार ने ठण्ड से बचने के लिए अंगीठी जलाई थी। जिसके बाद उन्होंने घर के सभी खिड़की दरवाजे बंद कर दिए थे। जिस से परिवार के चार लोग बेहोश हो गए जिनमें एक बच्ची भी शामिल थी। चारों लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना का पता सुबह दूध लेने वाली महिला की वजह से चला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
कोतवाल अनिल उपाध्याय ने बताया कि
शुक्रवार सुबह 112 पर गुनाकोट ग्राम पंचायत के तेवाड़ीगांव, दाड़िमठौक तोक से चार लोगों को गैस लगने की खबर मिली थी। जिसके बाद तत्काल 112 टीम और एम्बुलेंस को मौके के लिए रावण किया गया। मौके पर पहुंचकर गैस लगने से प्रभावित चारों लोगों को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया। अंगीठी के धुंए से बेहोश होने वालों के नाम –
- नवीन चंद्र तिवारी (62)
- विमला तिवारी (55)
- बबीता तिवारी (24)
- पोती काव्या (02)
सुबह जलाई थी अंगीठी में आग
पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब चार बजे कमरे में अंगीठी जलाई गई थी। इसके बाद जब आग बुझ गई तो खिड़की और दरवाजे बंद कर दिए गए। इसी बीच अंगीठी में बचे कोयलों से उठी गैस फैल गई और जिसके बाद चारों लोग बेहोश हो गए। फिर जब सुबह उजाला हुआ तो रोज की तरह दूध देने पहुंची गांव की महिला खष्टी देवी ने घर का दरवाजा बाहर से बंद देखा। उसने काफी देर तक इन्तजार किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी दौरान बबीता वहां पहुंची और दरवाजा खोला, जिसके बाद वो भी बेहोश हो गई। तुरंत महिला ने गांव वालों को इसकी सूचना दी और ग्रामीणों ने बिना देरी किए पुलिस को खबर दी।
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Cricket
कौन है रोहित शर्मा को 0 पर आउट करने वाले Devendra Singh Bora , जानिए उनकी पूरी जीवनी…

Devendra Singh Bora : संघर्ष से सुर्खियों तक, उत्तराखंड के तेज़ गेंदबाज़ की पूरी कहानी
भारतीय घरेलू क्रिकेट में हर साल कई खिलाड़ी आते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जिनका एक पल उन्हें पहचान दिला देता है। Devendra Singh Bora उन्हीं नामों में से एक हैं। विजय हज़ारे ट्रॉफी में मुंबई के खिलाफ मैच के दौरान रोहित शर्मा को पहली ही गेंद पर आउट कर देना केवल एक विकेट नहीं था, बल्कि यह उस मेहनत, धैर्य और सपने का नतीजा था, जो वर्षों से एक युवा गेंदबाज़ के भीतर पल रहा था।
यह लेख Devendra Singh Bora की पूरी जीवनी है। इसमें उनका शुरुआती जीवन, क्रिकेट सफर, घरेलू करियर, खेल शैली, उपलब्धियां और भविष्य की संभावनाएं विस्तार से बताई गई हैं।
Table of Contents
Devendra Singh Bora का शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
उत्तराखंड की टीम की ओर से विजय हज़ारे ट्रॉफी में खेल रहे Devendra Singh Bora मूल रूप से एक पहाड़ी खिलाड़ी हैं। Devendra Singh Bora उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रहने वाले हैं और बीते दो वर्षों से राज्य की सीनियर टीम का हिस्सा बने हुए हैं।

उन्होंने साल 2024 में अपने घरेलू करियर की एक अहम शुरुआत की, जब उन्होंने देहरादून में पुडुचेरी के खिलाफ अपना पहला रणजी ट्रॉफी मैच खेला। यह मुकाबला उनके लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में प्रवेश का बड़ा मौका साबित हुआ।
अगर लिस्ट-ए क्रिकेट की बात करें, तो देवेंद्र सिंह बोरा अब तक उत्तराखंड के लिए दो मैच खेल चुके हैं, जिसमें उन्होंने चार अहम विकेट अपने नाम किए हैं। सीमित मौकों के बावजूद उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वे टीम के लिए उपयोगी और भरोसेमंद गेंदबाज़ बनकर उभर रहे हैं।
देवेंद्र सिंह बोरा का जन्म 6 दिसंबर 2000 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में हुआ। पहाड़ी राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होता, क्योंकि यहां न तो बड़े क्रिकेट मैदान हैं और न ही सुविधाओं की भरमार। फिर भी, देवेंद्र के परिवार ने उनके सपनों को सीमित नहीं होने दिया।
शिक्षा और क्रिकेट की शुरुआत
Devendra Singh Bora ने अपनी शुरुआती पढ़ाई उत्तराखंड से ही पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट को संतुलन में रखना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी खेल को बोझ नहीं बनने दिया।
- स्कूल स्तर पर तेज़ गेंदबाज़ के रूप में पहचान
- स्थानीय टूर्नामेंटों में लगातार विकेट
- जिला और फिर राज्य टीम तक चयन
यहीं से उनका सफर धीरे-धीरे गंभीर होता गया। उत्तराखंड की घरेलू क्रिकेट संरचना में जगह बनाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।

घरेलू क्रिकेट में एंट्री
Devendra Singh Bora ने उत्तराखंड के लिए फर्स्ट क्लास और लिस्ट-ए क्रिकेट खेलना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन जब भी गेंद थमाई गई, उन्होंने खुद को साबित किया।
फर्स्ट क्लास करियर
- सीम और स्विंग पर भरोसा
- लंबी स्पेल डालने की क्षमता
- दबाव में विकेट निकालने का माद्दा
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 15 मैचों में 3.5 की इकॉनमी से 30 विकेट लेकर यह दिखा दिया कि वे सिर्फ फिलर खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि मैच जिताने की क्षमता रखते हैं।
लिस्ट-ए और विजय हज़ारे ट्रॉफी
विजय हज़ारे ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच होते हैं। यहां प्रदर्शन सीधे चर्चा में आ जाता है। देवेंद्र के साथ भी यही हुआ। लिस्ट – ए मे Devendra Singh Bora ने इस मुक़ाबले से पहले 2 मैच ही खेले थे जिसमे उन्हे 4 विकेट प्राप्त है ।
रोहित शर्मा का ऐतिहासिक विकेट
जयपुर में खेले गए उत्तराखंड बनाम मुंबई मैच में Devendra Singh Bora को नई गेंद सौंपी गई। सामने थे भारतीय टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज़ रोहित शर्मा।
पहली ही गेंद…
- सटीक लाइन
- हल्की मूवमेंट
- रोहित शर्मा का कैच आउट
गोल्डन डक।
यह पल Devendra Singh Bora के करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों तक, हर कोई पूछने लगा – ये देवेंद्र सिंह बोरा कौन हैं?
गेंदबाज़ी शैली और ताकत
Devendra Singh Bora को सिर्फ एक विकेट से आंकना गलत होगा। उनकी गेंदबाज़ी में कई खास बातें हैं।
गेंदबाज़ी की मुख्य विशेषताएं
- राइट आर्म फास्ट-मीडियम
- नई गेंद से स्विंग कराने की क्षमता
- अनुशासित लाइन-लेंथ
- डेथ ओवर्स में नियंत्रण
वह बहुत ज्यादा आक्रामक दिखने की कोशिश नहीं करते। उनकी ताकत सादगी और निरंतरता है।
मानसिक मजबूती और मैदान पर सोच
Devendra Singh Bora की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिकता है। बड़े नामों के सामने गेंदबाज़ी करते वक्त घबराहट नहीं, बल्कि आत्मविश्वास दिखता है।
- विकेट के बाद जश्न सीमित
- अगली गेंद पर पूरा फोकस
- कप्तान की योजना के अनुसार गेंदबाज़ी
यही गुण उन्हें एक भरोसेमंद घरेलू गेंदबाज़ बनाते हैं।
उत्तराखंड क्रिकेट के लिए अहम नाम
उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए Devendra Singh Bora का उभरना प्रेरणादायक है। उनका प्रदर्शन यह साबित करता है कि सही मेहनत और धैर्य से छोटे क्रिकेटिंग सिस्टम से भी बड़े खिलाड़ी निकल सकते हैं।
आज वे सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उत्तराखंड के युवा क्रिकेटरों के लिए रोल मॉडल बनते जा रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
देवेंद्र सिंह बोरा अभी अपने करियर की शुरुआती अवस्था में हैं। उम्र उनके पक्ष में है और अनुभव लगातार बढ़ रहा है।
आने वाले वर्षों में संभावनाएं
- घरेलू क्रिकेट में नियमित स्थान
- आईपीएल ट्रायल और चयन की उम्मीद
- इंडिया ए या राष्ट्रीय चयन की दौड़
अगर फिटनेस और निरंतर प्रदर्शन बना रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब देवेंद्र बड़े मंच पर नजर आएंगे।
व्यक्तिगत जीवन
देवेंद्र अपने निजी जीवन को सुर्खियों से दूर रखते हैं।
- साधारण जीवनशैली
- परिवार से गहरा जुड़ाव
- सोशल मीडिया पर सीमित लेकिन सकारात्मक मौजूदगी
वे मैदान पर अपने खेल से बात करना पसंद करते हैं।
निष्कर्ष
देवेंद्र सिंह बोरा की कहानी सिर्फ एक विकेट की कहानी नहीं है। यह कहानी है संघर्ष, धैर्य और सही मौके पर सही प्रदर्शन की। रोहित शर्मा को गोल्डन डक पर आउट करना भले ही सुर्खियों में रहा हो, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी निरंतर मेहनत और क्रिकेटिंग समझ है।
उत्तराखंड क्रिकेट को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं, और भारतीय घरेलू क्रिकेट को एक ऐसा गेंदबाज़ मिला है, जो चुपचाप काम करता है और सही वक्त पर असर छोड़ता है।
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FAQs: देवेंद्र सिंह बोरा से जुड़े सवाल
Q1. देवेंद्र सिंह बोरा कौन हैं?
देवेंद्र सिंह बोरा उत्तराखंड के लिए खेलने वाले भारतीय घरेलू क्रिकेटर और तेज़ गेंदबाज़ हैं।
Q2. देवेंद्र सिंह बोरा ने रोहित शर्मा को कब आउट किया?
विजय हज़ारे ट्रॉफी में उत्तराखंड बनाम मुंबई मैच के दौरान उन्होंने रोहित शर्मा को पहली ही गेंद पर आउट किया।
Q3. देवेंद्र सिंह बोरा की गेंदबाज़ी शैली क्या है?
वे राइट आर्म फास्ट-मीडियम गेंदबाज़ हैं, जो स्विंग और लाइन-लेंथ पर भरोसा करते हैं।
Q4. क्या देवेंद्र सिंह बोरा आईपीएल खेल चुके हैं?
अब तक उन्होंने आईपीएल नहीं खेला है, लेकिन भविष्य में उनके चयन की संभावना है।
Q5. देवेंद्र सिंह बोरा का जन्म कब हुआ?
उनका जन्म 6 दिसंबर 2000 को हुआ।
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