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कौन थे स्वामी विवेकानंद, जानिए सम्पूर्ण जीवन परिचय, शिक्षा Read More……

SWAMI VIVEKANANDA: आध्यात्मिक जागरण, राष्ट्रनिर्माण और विश्वबंधुत्व का प्रखर स्वर
मुख्य बिंदु
SWAMI VIVEKANANDA का जीवन केवल एक संन्यासी की जीवनी नहीं है, बल्कि ये आधुनिक भारत के बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की कहानी भी है। उन्होंने भारतीय दर्शन को नए रूप में दुनिया के सामने रखा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं के अंदर आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की ज्वाला भी प्रज्वलित की। इसलिए, आज भी उन्हें केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं बल्कि विचारों के महान क्रांतिकारी के रूप में माना जाता है।
उनका व्यक्तित्व विविध रंगों से भरा रहा – वो अपने जीवन काल के दौरान कुशल वक्ता, चिंतक, संन्यासी, समाज सुधारक, राष्ट्र प्रेरक और मानवतावादी सोच वाले महान पुरुष रहे हैं। इसीलिए, जैसे-जैसे उनका जीवन गहराई से समझा जाता है, वैसे-वैसे ये स्पष्ट होता जाता है कि विवेकानंद सिर्फ अतीत के नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भी पथप्रदर्शक हैं।
VIVEKANANDA BIOGRAPHY : जन्म और शुरूआती जीवन
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त एक प्रतिष्ठित वकील थे, जिनका स्वभाव आधुनिक और व्यवहारिक था। इसके विपरीत, उनकी माँ भुवनेश्वरी देवी धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। जिससे, नरेन्द्रनाथ के व्यक्तित्व में तर्क और आस्था दोनों का अद्भुत संयोजन देखने को मिला।
बचपन से ही वो जिज्ञासु, तेजस्वी और ऊर्जा से भरपूर थे। वो अक्सर ईश्वर के अस्तित्व और जीवन के उद्देश्य जैसे गहरे प्रश्न पूछते। यहीं से उनके चिंतनशील स्वभाव की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे ये जिज्ञासा उन्हें आध्यात्मिक खोज की दिशा में ले गई।
VIVEKANANDA EDUCATION : शिक्षा और व्यक्तित्व गठन
NARENDRANATH की शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। वे पढ़ाई में काफी तेज़ थे और संगीत, खेल और व्यायाम में भी रुचि रखते थे। दर्शन, इतिहास, पश्चिमी विचारधाराओं और भारतीय शास्त्रों का गहन अध्ययन उन्होंने युवावस्था में ही कर लिया था।
इसके अलावा, वो तर्कशीलता के समर्थक थे। वे केवल मान लेने के पक्षधर नहीं थे, बल्कि हर बात का कारण जानना चाहते थे। इसलिए, आगे चलकर जब वेदांत और उपनिषदों से उनका साक्षात्कार हुआ, तो उन्होंने इन विचारों को अंधविश्वास की तरह नहीं अपनाया, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समझा।
RAMKRISHN PARAMHANS से मुलाकात – जीवन का निर्णायक मोड़
NARENDRANATH के जीवन की वास्तविक दिशा तब बदली, जब वे श्री रामकृष्ण परमहंस से मिले। वे दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में पूजारी थे। NARENDRANATH के प्रश्नों का जिस सरलता और प्रेम से रामकृष्ण परमहंस ने उत्तर दिया, उसने उनका जीवन परिवर्तित कर दिया।
यहीं से उन्होंने जाना कि—
“प्रत्येक मनुष्य के भीतर ईश्वर है और मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।”
धीरे-धीरे उन्होंने संन्यास ग्रहण किया और अपना जीवन गुरु की शिक्षाओं के अनुसार समाज सेवा और आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। रामकृष्ण के महाप्रयाण के बाद विवेकानंद ने उनके मिशन को संगठित रूप दिया। जिसे रामकृष्ण परमहंस मिशन के नाम से भी जाना जाता है।
संन्यास और अखिल भारतीय यात्रा
संन्यास ग्रहण करने के बाद विवेकानंद ने पूरे भारत का भ्रमण किया। उन्होंने राजाओं के महलों से लेकर गरीब झोपड़ियों तक का जीवन बहुत करीब से देखा। इसके बाद, उन्हें महसूस हुआ कि भारत की वास्तविक समस्या गरीबी, अशिक्षा और आत्मविश्वास की कमी है।
इसलिए उन्होंने कहा—
पहले मनुष्य बनो
अपने भीतर की शक्ति पहचानो
राष्ट्र के लिए जियो
यहीं से उनका सामाजिक और राष्ट्रीय चिंतन और अधिक प्रखर हुआ।
शिकागो की विश्व धर्म संसद – वैश्विक मंच पर भारत की गूंज
सन् 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद आयोजित हुई। SWAMI VIVEKANANDA ने इसमें भारत का प्रतिनिधित्व किया। प्रारंभ में उन्हें भाषण का मौका आसानी से नहीं मिला, लेकिन जब वो मंच पर पहुंचे, तो उनका पहला वाक्य—
“Sisters and Brothers of America”
सुनते ही पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उनके उद्बोधन ने विश्व को यह सिखाया कि धर्म आपसी द्वेष नहीं, बल्कि मानवता और प्रेम का मार्ग है। इसके बाद वे अनेक देशों में गए, व्याख्यान दिए और भारतीय दर्शन का संदेश फैलाया।
रामकृष्ण मिशन की स्थापना (RAMKRISHN MISSION)
भारत लौटने के बाद उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। यह केवल धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का संगठन था। मिशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत कार्यों और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भी यह संस्था देश-विदेश में मानव सेवा का बड़ा केंद्र है। यही स्वामी विवेकानंद के विचारों की जीवंत विरासत है।
नारी सम्मान और मानवतावादी सोच
SWAMI VIVEKANANDA के विचारों में स्त्री सम्मान का विशेष स्थान था। वे मानते थे कि समाज तभी प्रगति कर सकता है जब महिला शिक्षित और सम्मानित हो। विदेश में घटी एक घटना इसका सुंदर उदाहरण है। एक महिला उनके विचारों से प्रभावित होकर विवाह प्रस्ताव लेकर आई। विवेकानंद ने शांत स्वर में कहा—
“मैं संन्यासी हूँ, विवाह नहीं कर सकता। यदि चाहो तो मुझे पुत्र मान लो।”
इस जवाब के पीछे यह संदेश छिपा था कि नारी कोई वस्तु नहीं, बल्कि सम्मान योग्य व्यक्तित्व है। इसलिए वे हर परिस्थिति में मर्यादा और सम्मान की बात करते रहे।
SWAMI VIVEKANANDA- NATIONAL YOUTH DAY
स्वामी विवेकानंद मानते थे कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है। इसलिए उन्होंने युवाओं से आह्वान किया—
उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको नहीं
अपने भीतर की शक्ति पहचानो
निर्भीक बनो, आत्मविश्वासी बनो
इसी कारण भारत सरकार ने 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (NATIONAL YOUTH DAY) के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उनका जीवन आज भी करोड़ों युवाओं को संघर्ष, परिश्रम और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है।
आध्यात्मिक विचारधारा और वेदांत का संदेश
स्वामी विवेकानंद की सोच का मूल आधार वेदांत था। वे कहते थे कि ईश्वर किसी मंदिर या मूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीव के भीतर व्याप्त है। इसलिए उन्होंने जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता का संदेश दिया।
इसके साथ ही वे अंधविश्वास के विरोधी थे। उनका मानना था कि धर्म का उद्देश्य मनुष्य को मजबूत बनाना है, कमजोर नहीं। इसलिए वे विज्ञान और अध्यात्म के संतुलित समन्वय के पक्षधर थे।
राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार
स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज को आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा—
हम किसी से कम नहीं
भारत आध्यात्मिक गुरु है
गरीबी और भिक्षा मानसिक कमजोरी के प्रतीक हैं
उनके विचारों से प्रेरित होकर अनगिनत लोगों में राष्ट्रभक्ति जागी। यही कारण है कि स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक नेता स्वयं को विवेकानंद का शिष्य मानते थे।
अंतिम समय और अमर विरासत
4 जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में SWAMI VIVEKANANDA महाप्रयाण कर गए। लेकिन, उनके विचार आज भी उतने ही जीवित हैं जितने उस समय थे। उन्होंने कहा था—
“मुझे विश्वास है कि मेरा देश पुनः उत्थान करेगा।”
आज जब भारत विश्व मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, तब विवेकानंद के शब्द और भी प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।
VIVEKANANDA – एक युगपुरुष का संदेश
स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें यह सिखाता है कि—
आत्मविश्वास सबसे बड़ी शक्ति है
मानव सेवा ही सच्चा धर्म है
और राष्ट्रप्रेम ही प्रगति की कुंजी है
वास्तव में, वे केवल संन्यासी नहीं, बल्कि युग निर्माता थे। उन्होंने भारतीयता को नया आत्मविश्वास दिया और विश्व को यह बताया कि भारत केवल परंपराओं का देश नहीं, बल्कि ज्ञान, करुणा और सार्वभौमिक बंधुत्व का प्रवक्ता है।
इसीलिए, समय बदलता रहता है, विवेकानंद के विचार कभी पुराने नहीं पड़ते। वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सौ वर्ष पहले थे—और संभवतः आने वाले समय में भी रहेंगे।
स्वामी विवेकानंद कौन थे?
स्वामी विवेकानंद वेदान्त के महान दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे।
स्वामी विवेकानंद किस भाषण के लिए प्रसिद्ध हैं?
वे 1893 के शिकागो धर्म संसद के भाषण के लिए प्रसिद्ध हैं।
स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ था?
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था।
NATIONAL YOUTH DAY कब मनाया जाता है?
12 JANUARY
स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध नारा क्या है?
“तुम महान हो, अपने अंदर की शक्ति को पहचानो।”
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10 Jan 2026 : विश्व हिंदी दिवस आज , जानें संपूर्ण इतिहास और रोचक तथ्य…

10 Jan 2026 : विश्व हिंदी दिवस (World Hindi Day)
आज 10 jan 2026 है, और पूरी दुनिया ‘विश्व हिंदी दिवस’ (World Hindi Day) के उल्लास में डूबी है। फिजी के तटों से लेकर मॉरीशस की गलियों तक और अमेरिका के सिलिकॉन वैली से लेकर संयुक्त राष्ट्र के गलियारों तक, आज हिंदी की गूंज सुनाई दे रही है। हिंदी अब केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है; यह एक वैश्विक भाषा बन चुकी है।
इस विस्तृत लेख में हम विश्व हिंदी दिवस(World Hindi Day) के गहरे इतिहास, इसके महत्व, और 10 जनवरी की तारीख के पीछे के विशेष कारणों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Table of Contents
विश्व हिंदी दिवस क्या है? (What is World Hindi Day?)
विश्व हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना, वैश्विक मंच पर इसे एक सशक्त पहचान दिलाना और दुनिया भर के हिंदी प्रेमियों को एक सूत्र में बांधना है।
जहाँ राष्ट्रीय हिंदी दिवस (14 सितंबर) भारत की आंतरिक राजभाषा के रूप में हिंदी के सम्मान पर केंद्रित है, वहीं विश्व हिंदी दिवस का फलक अंतरराष्ट्रीय है। इस दिन विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिसमें गैर-हिंदी भाषियों को इस भाषा की सुंदरता और गहराई से परिचित कराया जाता है।
इतिहास: 10 जनवरी की तारीख ही क्यों?
विश्व हिंदी दिवस मनाए जाने के पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है।
1. प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन (1975)
10 जनवरी 1975 को महाराष्ट्र के नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था।
- उद्देश्य: हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पहचान दिलाना।
- सहभागिता: इस ऐतिहासिक सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
- अध्यक्षता: मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की थी।
2. आधिकारिक घोषणा (2006)
हालाँकि पहला सम्मेलन 1975 में हुआ था, लेकिन इसे ‘दिवस’ के रूप में आधिकारिक पहचान मिलने में समय लगा। साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि हर साल 10 जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। तब से लेकर आज तक, यह सिलसिला निरंतर जारी है।
10 Jan 2026 : विश्व हिंदी दिवस और राष्ट्रीय हिंदी दिवस में अंतर
अक्सर लोग इन दोनों तिथियों के बीच भ्रमित हो जाते हैं। इसे समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| विशेषता | विश्व हिंदी दिवस | राष्ट्रीय हिंदी दिवस |
| दिनांक | 10 जनवरी | 14 सितंबर |
| उद्देश्य | वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार | भारत में राजभाषा के रूप में सम्मान |
| ऐतिहासिक संदर्भ | 1975 का नागपुर सम्मेलन | 1949 में संविधान सभा द्वारा राजभाषा घोषित |
| घोषणा वर्ष | 2006 (डॉ. मनमोहन सिंह) | 1953 (पंडित नेहरू) |
विश्व हिंदी दिवस 2026 की थीम (Theme 2026)
हर साल विश्व हिंदी दिवस के लिए एक विशेष विषय (Theme) निर्धारित किया जाता है। 2026 के लिए इस वर्ष की थीम है:
“हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तक”
यह थीम इस बात का प्रतीक है कि हिंदी अब केवल साहित्य और काव्य की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह तकनीक और भविष्य की भाषा बन रही है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई (ChatGPT) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी के बढ़ते डेटा और उपयोग ने इसे डिजिटल युग की अग्रणी भाषा बना दिया है।
हिंदी का वैश्विक विस्तार: आंकड़े क्या कहते हैं?
हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। ‘एथनोलॉग’ (Ethnologue) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 61 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं।
- प्रवासी भारतीय: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए हिंदी का उपयोग करते हैं।
- फिजी और मॉरीशस: फिजी में हिंदी को आधिकारिक भाषाओं में से एक का दर्जा प्राप्त है।
- यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र: हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अपने सोशल मीडिया और सूचना पोर्टलों पर हिंदी का उपयोग बढ़ा दिया है, जो एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।
विश्व हिंदी दिवस कैसे मनाया जाता है?
दुनिया भर में इस दिन विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होता है:
- दूतावासों में कार्यक्रम: विदेशों में स्थित भारतीय मिशन निबंध प्रतियोगिता, कविता पाठ और चर्चाएं आयोजित करते हैं।
- शैक्षणिक संस्थान: स्कूलों और विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिताएं होती हैं।
- डिजिटल अभियान: सोशल मीडिया पर हिंदी हैशटैग्स ट्रेंड करते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
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निष्कर्ष: हमारा संकल्प
विश्व हिंदी दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक संकल्प है। यह संकल्प है—हिंदी को विश्व मंच पर उसका जायज हक दिलाने का। जैसे-जैसे भारत एक वैश्विक शक्ति (Vishwa Guru) के रूप में उभर रहा है, उसकी भाषा का महत्व भी उसी अनुपात में बढ़ रहा है।
हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी भाषा इतनी लचीली है कि वह वेदों की ऋचाओं को भी समेटे हुए है और आज के दौर में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के साथ भी कदम से कदम मिलाकर चल रही है।
शुभकामना संदेश:
“हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का दर्पण है। आइए, इस विश्व हिंदी दिवस पर हम हिंदी को और अधिक समृद्ध और वैश्विक बनाने का संकल्प लें।”
Accident
हिमाचल प्रदेश में भीषण बस दुर्घटना, हादसे में 9 की मौत 40 घायल

Himachal Bus Accident : हरिपुरधार में भीषण बस हादसा, 9 की मौत
मुख्य बिंदु
Himachal Bus Accident : हिमाचल प्रदेश से बस दुर्घटना की एक दर्दनाक खबर सामने आई है। ये भीषण हादसा सिरमौर जिले के हरिपुरधार में निजी बस के खाई में गिरने से हुआ। हादसे में बस में सवार 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि कई लोगों के घायल होने की सूचना है। मौके पर राहत बचाव कार्य जारी है।
Sirmaur Haripurdhar Bus Accident :बस दुर्घटना 8 लोगों की मौके पर मौत
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर को ये बस शिमला से कुपवी जा रही थी। जो की हरिपुरधार बजार से पहले खाई में 60 मीटर नीचे गिर गई। अब तक हादसे के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। हादसे के बाद मौके पर लोगो का जमावड़ा शुरू हो गया। हादसे के समय बस में करीब 45 लोगों के सवार होने की सूचना है।

Haripurdhar Bus Accident : 45 लोगों के बस में सवार होने की सूचना
हादसे की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को दी। जिसके बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान में जुट गए। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत और 30 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए हरिपुरधार के स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया । जहाँ से अब उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

हादसे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जताया शोक
बस हादसे पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह दुर्घटना अत्यंत दुखद है और पूरे प्रदेश को शोकाकुल कर गई है। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि मृतकों के परिजनों को हरसंभव मदद तुरंत उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा, घायलों के बेहतर उपचार के लिए समुचित चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने को भी कहा गया। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने हादसे पर शोक जताया
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं रेणुका जी के विधायक विनय कुमार ने भी इस हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा कि हरिपुरधार में जीते कोच बस का गंभीर सड़क हादसा बेहद व्यथित करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह पीड़ा सभी के लिए असहनीय है, हालांकि इस कठिन समय में कांग्रेस परिवार पूर्ण संवेदना और एकजुटता के साथ पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। साथ ही उन्होंने ईश्वर से दुआ की कि सभी घायल जल्द स्वस्थ हों।
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आस्था
14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्राति ?, यहां जानें makar sankranti 2026 की सही डेट और मुहूर्त

makar sankranti 2026 date : मकर संक्रांति का त्यौहार नजदीक है लेकिन कई लोगों को इसकी डेट को लेकर क्नफ्यूजन है कि त्यौहार 14 जनवरी को मनाया जा रहा है या फिर 15 जनवरी को मनाया जाएगा। अगर आपको भी है ये कन्फूजन तो हम बताते हैं आपको सही डेट और शुभ मुहूर्त।
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14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्राति ?
अलग-अलग पंचांगों में सूर्य के गोचर का समय अलग-अलग दिए जाने के कारण मकर संक्रांति कब है? इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण मकर संक्रांति की तारीख (makar sankranti 2026 date) को लेकर भी कन्फ्यूजन बना हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब सूर्य देव जब मकर राशि में गोचर करते हैंउस समय सूर्य की मकर संक्रांति मनाई जाती है। ऐसे में 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।

15 जनवरी है makar sankranti 2026 की सही डेट
काशी विश्वनाथ के हृषिकेश पंचांग के मुताबिक सूर्यदेव 14 जनवरी 2026 को रात में 9 बजकर 41 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस बार रात्रि के समय में ही संक्रांति हो रही है। इसी कारण makar sankranti का पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद से होगा।
निर्णय सिंधु के मुताबिक इस साल मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को प्राप्त हो रहा है। क्योंकि सूर्य का प्रवेश मकर राशि में रात के समय हो रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति 15 जनवरी गुरुवार को मनाना शास्त्र सम्मत है।

makar sankranti का शुभ मुहूर्त
बात करें मकर संक्रांति पर शुभ मुहूर्त की तो 15 जनवरी को मकर संक्रांति वाले दिन पुण्य काल 2 बजकर 53 मिनट तक है। ऐसे में आप सुबह से लेकर दोपहर दो बजकर 53 मिनट तक स्नान और दान कर सकते हैं। बता दें कि makar sankranti वाले दिन दान का पुण्य मिलता है।
क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का त्यौहार ?
मकर संक्रांति अलग-अलग नामों से लेकिन पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है। कहीं इस दिन खिचड़ी बनती है तो कहीं पतंगबाजी देखने को मिलती है। ये एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो पूरे देश में एकसाथ मनाया जाता है चाहे इसे मनाने के तरीके और नाम अलग हों।

आमतौर पर ये त्यौहा जनवरी महीने की 14 तारीख को मनाया जाता है। लेकिन कभी-कभी ये त्योहार 12, 13 या 15 तारीख को भी मनाया जाता है। जिसके पीछे का कारण ये है कि जिस दिन सूर्य पूरी तरह से मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसे उसी दिन मनाया जाता है। जो कि 12, 13, 14 या 15 तारीख को ही होता है।
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक भगवान विष्णु ने इसी दिन असुरों का अंत कर उनके सिरों को मंदार पर्वत में दबाकर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। इसलिए इस दिन को बुराइयों और नकारात्मकता को समाप्त करने का दिन भी माना जाता है जो कि बेहद ही शुभ होता है।
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