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कौन थे स्वामी विवेकानंद, जानिए सम्पूर्ण जीवन परिचय, शिक्षा Read More……

SWAMI VIVEKANANDA: आध्यात्मिक जागरण, राष्ट्रनिर्माण और विश्वबंधुत्व का प्रखर स्वर
मुख्य बिंदु
SWAMI VIVEKANANDA का जीवन केवल एक संन्यासी की जीवनी नहीं है, बल्कि ये आधुनिक भारत के बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की कहानी भी है। उन्होंने भारतीय दर्शन को नए रूप में दुनिया के सामने रखा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं के अंदर आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की ज्वाला भी प्रज्वलित की। इसलिए, आज भी उन्हें केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं बल्कि विचारों के महान क्रांतिकारी के रूप में माना जाता है।
उनका व्यक्तित्व विविध रंगों से भरा रहा – वो अपने जीवन काल के दौरान कुशल वक्ता, चिंतक, संन्यासी, समाज सुधारक, राष्ट्र प्रेरक और मानवतावादी सोच वाले महान पुरुष रहे हैं। इसीलिए, जैसे-जैसे उनका जीवन गहराई से समझा जाता है, वैसे-वैसे ये स्पष्ट होता जाता है कि विवेकानंद सिर्फ अतीत के नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भी पथप्रदर्शक हैं।
VIVEKANANDA BIOGRAPHY : जन्म और शुरूआती जीवन
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त एक प्रतिष्ठित वकील थे, जिनका स्वभाव आधुनिक और व्यवहारिक था। इसके विपरीत, उनकी माँ भुवनेश्वरी देवी धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। जिससे, नरेन्द्रनाथ के व्यक्तित्व में तर्क और आस्था दोनों का अद्भुत संयोजन देखने को मिला।
बचपन से ही वो जिज्ञासु, तेजस्वी और ऊर्जा से भरपूर थे। वो अक्सर ईश्वर के अस्तित्व और जीवन के उद्देश्य जैसे गहरे प्रश्न पूछते। यहीं से उनके चिंतनशील स्वभाव की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे ये जिज्ञासा उन्हें आध्यात्मिक खोज की दिशा में ले गई।
VIVEKANANDA EDUCATION : शिक्षा और व्यक्तित्व गठन
NARENDRANATH की शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। वे पढ़ाई में काफी तेज़ थे और संगीत, खेल और व्यायाम में भी रुचि रखते थे। दर्शन, इतिहास, पश्चिमी विचारधाराओं और भारतीय शास्त्रों का गहन अध्ययन उन्होंने युवावस्था में ही कर लिया था।
इसके अलावा, वो तर्कशीलता के समर्थक थे। वे केवल मान लेने के पक्षधर नहीं थे, बल्कि हर बात का कारण जानना चाहते थे। इसलिए, आगे चलकर जब वेदांत और उपनिषदों से उनका साक्षात्कार हुआ, तो उन्होंने इन विचारों को अंधविश्वास की तरह नहीं अपनाया, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समझा।
RAMKRISHN PARAMHANS से मुलाकात – जीवन का निर्णायक मोड़
NARENDRANATH के जीवन की वास्तविक दिशा तब बदली, जब वे श्री रामकृष्ण परमहंस से मिले। वे दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में पूजारी थे। NARENDRANATH के प्रश्नों का जिस सरलता और प्रेम से रामकृष्ण परमहंस ने उत्तर दिया, उसने उनका जीवन परिवर्तित कर दिया।
यहीं से उन्होंने जाना कि—
“प्रत्येक मनुष्य के भीतर ईश्वर है और मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।”
धीरे-धीरे उन्होंने संन्यास ग्रहण किया और अपना जीवन गुरु की शिक्षाओं के अनुसार समाज सेवा और आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। रामकृष्ण के महाप्रयाण के बाद विवेकानंद ने उनके मिशन को संगठित रूप दिया। जिसे रामकृष्ण परमहंस मिशन के नाम से भी जाना जाता है।
संन्यास और अखिल भारतीय यात्रा
संन्यास ग्रहण करने के बाद विवेकानंद ने पूरे भारत का भ्रमण किया। उन्होंने राजाओं के महलों से लेकर गरीब झोपड़ियों तक का जीवन बहुत करीब से देखा। इसके बाद, उन्हें महसूस हुआ कि भारत की वास्तविक समस्या गरीबी, अशिक्षा और आत्मविश्वास की कमी है।
इसलिए उन्होंने कहा—
पहले मनुष्य बनो
अपने भीतर की शक्ति पहचानो
राष्ट्र के लिए जियो
यहीं से उनका सामाजिक और राष्ट्रीय चिंतन और अधिक प्रखर हुआ।
शिकागो की विश्व धर्म संसद – वैश्विक मंच पर भारत की गूंज
सन् 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद आयोजित हुई। SWAMI VIVEKANANDA ने इसमें भारत का प्रतिनिधित्व किया। प्रारंभ में उन्हें भाषण का मौका आसानी से नहीं मिला, लेकिन जब वो मंच पर पहुंचे, तो उनका पहला वाक्य—
“Sisters and Brothers of America”
सुनते ही पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उनके उद्बोधन ने विश्व को यह सिखाया कि धर्म आपसी द्वेष नहीं, बल्कि मानवता और प्रेम का मार्ग है। इसके बाद वे अनेक देशों में गए, व्याख्यान दिए और भारतीय दर्शन का संदेश फैलाया।
रामकृष्ण मिशन की स्थापना (RAMKRISHN MISSION)
भारत लौटने के बाद उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। यह केवल धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का संगठन था। मिशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत कार्यों और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भी यह संस्था देश-विदेश में मानव सेवा का बड़ा केंद्र है। यही स्वामी विवेकानंद के विचारों की जीवंत विरासत है।
नारी सम्मान और मानवतावादी सोच
SWAMI VIVEKANANDA के विचारों में स्त्री सम्मान का विशेष स्थान था। वे मानते थे कि समाज तभी प्रगति कर सकता है जब महिला शिक्षित और सम्मानित हो। विदेश में घटी एक घटना इसका सुंदर उदाहरण है। एक महिला उनके विचारों से प्रभावित होकर विवाह प्रस्ताव लेकर आई। विवेकानंद ने शांत स्वर में कहा—
“मैं संन्यासी हूँ, विवाह नहीं कर सकता। यदि चाहो तो मुझे पुत्र मान लो।”
इस जवाब के पीछे यह संदेश छिपा था कि नारी कोई वस्तु नहीं, बल्कि सम्मान योग्य व्यक्तित्व है। इसलिए वे हर परिस्थिति में मर्यादा और सम्मान की बात करते रहे।
SWAMI VIVEKANANDA- NATIONAL YOUTH DAY
स्वामी विवेकानंद मानते थे कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है। इसलिए उन्होंने युवाओं से आह्वान किया—
उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको नहीं
अपने भीतर की शक्ति पहचानो
निर्भीक बनो, आत्मविश्वासी बनो
इसी कारण भारत सरकार ने 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (NATIONAL YOUTH DAY) के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उनका जीवन आज भी करोड़ों युवाओं को संघर्ष, परिश्रम और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है।
आध्यात्मिक विचारधारा और वेदांत का संदेश
स्वामी विवेकानंद की सोच का मूल आधार वेदांत था। वे कहते थे कि ईश्वर किसी मंदिर या मूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीव के भीतर व्याप्त है। इसलिए उन्होंने जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता का संदेश दिया।
इसके साथ ही वे अंधविश्वास के विरोधी थे। उनका मानना था कि धर्म का उद्देश्य मनुष्य को मजबूत बनाना है, कमजोर नहीं। इसलिए वे विज्ञान और अध्यात्म के संतुलित समन्वय के पक्षधर थे।
राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार
स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज को आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा—
हम किसी से कम नहीं
भारत आध्यात्मिक गुरु है
गरीबी और भिक्षा मानसिक कमजोरी के प्रतीक हैं
उनके विचारों से प्रेरित होकर अनगिनत लोगों में राष्ट्रभक्ति जागी। यही कारण है कि स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक नेता स्वयं को विवेकानंद का शिष्य मानते थे।
अंतिम समय और अमर विरासत
4 जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में SWAMI VIVEKANANDA महाप्रयाण कर गए। लेकिन, उनके विचार आज भी उतने ही जीवित हैं जितने उस समय थे। उन्होंने कहा था—
“मुझे विश्वास है कि मेरा देश पुनः उत्थान करेगा।”
आज जब भारत विश्व मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, तब विवेकानंद के शब्द और भी प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।
VIVEKANANDA – एक युगपुरुष का संदेश
स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें यह सिखाता है कि—
आत्मविश्वास सबसे बड़ी शक्ति है
मानव सेवा ही सच्चा धर्म है
और राष्ट्रप्रेम ही प्रगति की कुंजी है
वास्तव में, वे केवल संन्यासी नहीं, बल्कि युग निर्माता थे। उन्होंने भारतीयता को नया आत्मविश्वास दिया और विश्व को यह बताया कि भारत केवल परंपराओं का देश नहीं, बल्कि ज्ञान, करुणा और सार्वभौमिक बंधुत्व का प्रवक्ता है।
इसीलिए, समय बदलता रहता है, विवेकानंद के विचार कभी पुराने नहीं पड़ते। वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सौ वर्ष पहले थे—और संभवतः आने वाले समय में भी रहेंगे।
स्वामी विवेकानंद कौन थे?
स्वामी विवेकानंद वेदान्त के महान दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे।
स्वामी विवेकानंद किस भाषण के लिए प्रसिद्ध हैं?
वे 1893 के शिकागो धर्म संसद के भाषण के लिए प्रसिद्ध हैं।
स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ था?
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था।
NATIONAL YOUTH DAY कब मनाया जाता है?
12 JANUARY
स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध नारा क्या है?
“तुम महान हो, अपने अंदर की शक्ति को पहचानो।”
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राष्ट्रीय युवा दिवस पर प्रधानमंत्री से संवाद का अवसर, मेरा युवा भारत पहल का अभियान !
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Uttarakhand
WEST BENGAL: पश्चिम बंगाल में परिवर्तन की हुंकार, CM धामी बोले—कमल खिलेगा तो आएगा सुशासन
बंगाल के चुनावी रण में उत्तराखंड के ‘धाकड़’ धामी, ममता सरकार पर साधा तीखा निशाना
WEST BENGAL: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और इसी के साथ भाजपा ने अपने धाकड़ और धुरंधर स्टार प्रचारक, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चुनावी मैदान में उतार दिया है। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बनगांव पहुंचे, जहां उन्होंने बनगांव दक्षिण सीट से स्वप्न मजूमदार, बनगांव उत्तर सीट से अशोक कीर्तनिया, बगदा सीट से सोमा ठाकुर और गैघाटा सीट से सुब्रत ठाकुर के नामांकन कार्यक्रम में भाग लिया।
मुख्य बिंदु
रोड शो और जनसभा में उमड़ी भारी भीड़
इससे पहले उन्होंने भव्य रोड शो और जनसभा के माध्यम से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की। रोड शो और जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों का उत्साह इस बात का संकेत दे रहा था कि धामी की लोकप्रियता अब उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। लोग उन्हें एक निर्णायक और जननेता के रूप में देख रहे हैं।

धाकड़ और निर्णायक नेता के रूप में पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहचान आज एक धाकड़, निर्णायक और सख्त फैसले लेने वाले नेता के रूप में स्थापित हो चुकी है। समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्णय हो, अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान, नकल विरोधी कानून या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई—इन फैसलों ने उन्हें एक मजबूत प्रशासक के रूप में स्थापित किया है। उत्तराखंड में लिए गए इन साहसिक निर्णयों के चलते कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
देशभर में बढ़ती लोकप्रियता और चुनावी भूमिका
यही कारण है कि कर्नाटक, ओडिशा, बिहार, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी चुनावों के दौरान भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में मुख्यमंत्री धामी का नाम प्रमुखता से शामिल रहा है। अब पश्चिम बंगाल में भी भाजपा ने अपने इस धुरंधर प्रचारक को चुनावी रण में उतारा है, जहां उनके कार्यक्रमों में उमड़ रही भीड़ उनकी बढ़ती लोकप्रियता का संकेत मानी जा रही है।

टीएमसी और ममता सरकार पर तीखा हमला
बनगांव की जनसभा में मुख्यमंत्री धामी ने टीएमसी और ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक “सिंडिकेट” के रूप में काम कर रही है। कट और कमीशन इस सरकार की पहचान बन चुके हैं। लोगों को डराना, धमकाना और लूटना इनकी राजनीति का हिस्सा बन गया है।
डबल इंजन सरकार से विकास का वादा
उन्होंने कहा कि देशभर में डबल इंजन सरकार विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है और पश्चिम बंगाल में भी डबल इंजन सरकार बनने के बाद विकास, समृद्धि और सुशासन का नया दौर शुरू होगा।

जनसैलाब को बताया परिवर्तन की लहर का संकेत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बनगांव की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि इस बार पश्चिम बंगाल में परिवर्तन की लहर है और भारी बहुमत से कमल खिलने जा रहा है। उन्होंने जनता से भाजपा प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील करते हुए कहा कि कमल खिलेगा तो समृद्धि आएगी, विकास आएगा और कानून का राज स्थापित होगा।
राजनीतिक विश्लेषण: धामी का दौरा BJP के लिए फायदेमंद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की छवि एक ऐसे धाकड़ और निर्णायक नेता की बन चुकी है, जो सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते—और यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभर रही है। पश्चिम बंगाल में उनका यह दौरा भाजपा के चुनाव अभियान को और धार देने वाला माना जा रहा है।
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बड़ी खबर : कल से बदल जाएंगे ये नियम, LPG, UPI से लेकर ATM तक जानें क्या-क्या बदलेगा ?

1 April New Rules : नए फाइनेंशियल ईयर के साथ होने जा रहे कई बदलाव, जानें नए नियम
1 April New Rules : 1 अप्रैल यानी कल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है। कल से सैलरी, टैक्स, यात्रा और बैंकिंग में लागू होने वाले नियम आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। ऐसे में आपको जान लेना चाहिए कि कल से क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं।
Table of Contents
कल यानी एक अप्रैल से बदल जाएंगे ये नियम
नए फाइनेंशियल ईयर के साथ ही कल से कई बदलाव (1 April New Rules) होने जा रहे हैं। एक अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स कानून लागू होगा। इसके साथ ही टेक होम सैलरी, ग्रेच्युटी, रेलवे टिकट कैंसिलेशन नियम, FASTag, पैन कार्ड को लेकर नए नियम लागू होने जा रहे हैं।
टिकट रद्द करने के नियम हो जाएंगे अपडेट
एक अप्रैल से टिकट कैंसिल करने के नियमों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। भारतीय रेलवे ने नियम में बदलाव करते हुए ये प्रावधान किए हैं कि अब रिफंड पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपने कब टिकट कैंसिल किया है।
जितनी जल्दी टिकट कैंसिल किया जाएगा उसी के आधार पर रिफंड दिया जाएगा। सबसे बड़ी बात अगर आप 8 घंटे बाद टिकट कैंसिल करते हैं तो आपको कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा।

| समय / सुविधा | नियम / विवरण | यात्रियों पर असर |
|---|---|---|
| 72 घंटे पहले | लगभग पूरा पैसा वापस (थोड़ा चार्ज कटेगा) | ज्यादा रिफंड मिलेगा |
| 24 से 72 घंटे | 25% किराया कटेगा | आंशिक रिफंड मिलेगा |
| 8 से 24 घंटे | 50% किराया कटेगा | आधा पैसा कटेगा |
| 8 घंटे से कम | कोई रिफंड नहीं | पूरा पैसा डूब सकता है |
| ई-टिकट रिफंड | कैंसिल करने पर पैसा सीधे अकाउंट में आएगा | फॉर्म भरने की जरूरत नहीं |
| बोर्डिंग स्टेशन बदलाव | ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बदलाव संभव | यात्रियों को अधिक सुविधा |
नया इनकम टैक्स कानून होगा लागू
कल से या इनकम टैक्स कानून लागू होगा। पुराने सिस्टम की तुलना नें इसमें बड़े बदलाव किए गए हैं। पहले ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ अलग-अलग होते थे। लेकिन इसमें बदलाव करते हुए अब केवल ‘टैक्स ईयर’ ही होगा। इसके साथ ही ITR-3 और ITR-4 भरने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है।

कल से होंगे ये दस बड़े बदलाव
| नंबर | बदलाव का विषय | क्या बदलेगा | आम लोगों पर असर |
|---|---|---|---|
| 3 | ग्रेच्युटी | बेसिक सैलरी बढ़ने से ग्रेच्युटी बढ़ेगी | नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर ज्यादा पैसा मिलेगा |
| 4 | FASTag | वार्षिक पास ₹3000 से बढ़कर ₹3075 | टोल खर्च थोड़ा बढ़ेगा |
| 5 | रेलवे टिकट नियम | 8 घंटे पहले तक ही कैंसिलेशन पर रिफंड | लेट कैंसिल करने पर पैसा नहीं मिलेगा |
| 5A | रिफंड नियम | 72 घंटे पहले: पूरा, 24-72 घंटे: 25% कट, 8-24 घंटे: 50% कट | समय पर टिकट कैंसिल करना जरूरी |
| 5B | अतिरिक्त सुविधा | 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे | यात्रियों को अधिक सुविधा |
| 6 | PAN कार्ड | सिर्फ आधार से आवेदन बंद | अन्य दस्तावेज देना जरूरी |
| 7 | क्रेडिट स्कोर | हर हफ्ते अपडेट होगा | स्कोर जल्दी अपडेट होगा |
| 8 | गोल्ड बॉन्ड टैक्स | बाजार से खरीदे बॉन्ड पर 12.5% टैक्स | निवेशकों पर टैक्स असर |
| 9 | ATM नियम | फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद चार्ज | ज्यादा उपयोग पर अतिरिक्त खर्च |
| 10 | डिजिटल पेमेंट | टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य | पेमेंट अधिक सुरक्षित होगा |
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प्रधानमंत्री मोदी की सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक, पश्चिम एशिया संकट पर होगी चर्चा

PM Modi Meeting with CMs Today: वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक, बड़े फैसलों की संभावना
PM Modi Meeting with CMs Today: वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक, बड़े फैसलों की संभावना मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पूरे विश्व पर ईंधन की आपूर्ति का संकट बना हुआ है. भारत में भी लोगों पर इसका असर देखने को मिल रहा है, सबसे अधिक एलपीजी गैस को लेकर लोग चिंतित हैं. आज ईरान और इजराइल के मध्य इस युद्ध का 28 वां दिन है, इस बढ़ते संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है, खासकर तेल और LPG सप्लाई को लेकर चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं.
मुख्य बिंदु
प्रधानमंत्री मोदी की सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक
इस युद्ध के प्रभाव से भारत भी अछूता नहीं है. यही कारण है कि आज शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं. इस बैठक में मौजूदा हालात पर विस्तृत चर्चा की जाएगी. माना जा रहा है कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री कोई बड़ा ऐलान भी कर सकते हैं.
शाम को होगी अहम बैठक
दरअसल, प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्रियों से संवाद करेंगे. इस दौरान राज्यों की तैयारियों, आवश्यक योजनाओं और संकट से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा होगी. साथ ही, भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया जाएगा. हालांकि, जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उनके मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे.
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पहले भी दे चुके हैं चेतावनी
इससे पहले भी संसद में प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता जताई थी. उन्होंने कोविड-19 काल का जिक्र करते हुए कहा था कि देश को संभावित संकट के लिए तैयार रहना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस युद्ध का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है, इसलिए सतर्कता जरूरी है.
केंद्र और राज्यों के समन्वय पर जोर
इसी के साथ प्रधानमंत्री ने राज्यों से सहयोग की अपील भी की है. उन्होंने कहा कि जैसे कोरोना काल में केंद्र और राज्यों ने मिलकर बेहतर प्रबंधन किया था, वैसे ही इस बार भी सामूहिक प्रयास जरूरी होंगे. स्पष्ट है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एकजुट होकर स्थिति से निपटना है. खबरों के मुताबिक, इस बैठक में कई अहम निर्णय लिए जा सकते हैं. यही नहीं, बैठक के बाद शाम तक प्रधानमंत्री द्वारा बड़े ऐलान की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में पूरे देश की नजर इस मीटिंग पर टिकी हुई है.
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क्या दोबारा लगेगा लॉकडाउन ?
वहीँ दूसरी ओर प्रधानमंत्री द्वारा संसद में दिए गए भाषण में कोरोना का जिक्र करते ही देशभर में एक नई बहस शुरू हो गई है. कई लोग कयास लगा रहे हैं की देश में कोरोना काल के जैसे ही लोकडाउन लग सकता है. हालांकि इस बात की सरकार की तरफ से कोई भी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने इन बातों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि सरकार अभी इस दिशा में कुछ नहीं सोच रही है. आज की इस बैठक के बाद बड़ा फैसला आने की उम्मीद है.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
संभावना है कि इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती . उदाहरण के तौर पर—
- बाजार में कालाबाजारी को रोकना
- आम जनता में घबराहट फैलने से बचाना
- सही और प्रमाणिक जानकारी का प्रसार
- आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करना
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव पैदा कर सकता है आर्थिक संकट
आज की इस बैठक पर देश भर के लोगों की नजर टिकी रहेगी. अब देखन ये होगा कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष इसी तरह से जारी रहेगा तो आगे सरकार क्या फैसला लेगी. एलपीजी, खाद्य सामग्री और ईंधन पर सरकार क्या निर्णय लेती है. इस युद्ध से विश्व भर में एक बड़ी आर्थिक मंदी के संकेत भी बड़ रहे हैं. इससे दुनिया भर में शेयर बाजार की स्थिति में बभी लगातार भारी गिरावट की संभावनाएं जताई जा रही हैं.
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