Dehradun
14वें ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम में राज्यपाल ने किया प्रतिभाग, युवा मतदाताओं को वोटर आईडी कार्ड देकर किया सम्मानित।

देहरादून – राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने देहरादून स्थित गांधी पार्क में उत्तराखण्ड राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित 14वें ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2024’ के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित करते हुए सभी उपस्थित लोगों को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर राज्यपाल ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बनाया वर्ष 2024 का कैलेंडर और कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। इस दौरान युवाओं को आकर्षित करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा लोकतंत्र और मतदान पर आधारित एक ‘जागरूकता गीत’ जारी किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल, पद्मश्री बसंती बिष्ट, पर्वतारोही ताशी मलिक को सम्मानित किया गया। उन्होंने युवा मतदाताओं को भी उनका प्रथम वोटर आईडी कार्ड देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में मतदान की महत्ता को समझाने के लिए NCC, NSS और कई विद्यालयों के छात्र- छात्राओं ने सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा उत्तराखंड में जागरूकता अभियान चलाकर तहसील स्तर पर सभी विद्यालयों में निबंध लेखन, चित्रकला व स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन्ही प्रतियोगिताओं में प्रथम आए छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने पुरस्कृत किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने उपस्थित सभी लोगों से मतदान को सफल बनाने के लिए शपथ दिलाकर एक सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में चल रहे हस्ताक्षर अभियान में अपना हस्ताक्षर करके युवाओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित किया।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे जीवन का सबसे बड़ा दान मतदान है, लोकतंत्र की सफलता तभी होगी जब हम सभी मतदान करेंगे, आप सभी इससे अपना मत एवं अपना अधिकार सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की नीव मत अधिकार पर ही रखी जाती है, ‘वोट देगा उत्तराखंड’ का स्लोगन हम सभी के लिए एक संकल्प जैसा होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि यह समय हमारे लिए संकल्प लेने का है की लोकतंत्र के अंदर हमारा क्या योगदान है, सुशासन की स्थापना के लिए बिना किसी भेदभाव के मत देना बेहत जरूरी है। यह गौरव की बात है की विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए ‘भारत निर्वाचन आयोग’ हमेशा से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराता रहा है।
उन्होंने कहा कि मैं खासकर अपने युवाओं को नैतिक और निर्भीक होकर मतदान करने की अपील करता हूं। यह आप सभी की जिम्मेदारी है की आप सभी को अंतिम छोर तक सभी भावी मतदाताओं को जागरूक करना है। उन्होंने जागरूकता के इन सफल प्रयासों के लिए समस्त देवभूमि और निर्वाचन आयोग को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है की भविष्य में भी उत्तराखंड राज्य की इस गरिमा को बनाने के लिए हम सभी अपना पूर्ण सहयोग देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि उत्तराखंड में 100 वर्ष या उससे अधिक वाले लगभग करीब 1000 से अधिक मतदाता हैं, हम सब मिलकर उनकी दीर्घायु की प्रार्थना के साथ लोकतंत्र में उनके सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 100 बूथ ऐसे हैं जिन्हें पूर्ण रूप से महिलाओं द्वारा चलाया जाता है, यह दर्शाता है की हमारा राज्य मातृशक्ति के लिए कृतज्ञ और समर्पित है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सरकार चुनने का अधिकार मिला है हमें इसकी सराहना करनी चाहिए, यह हमारे देश के लोकतंत्र की खूबसूरती है।

कार्यक्रम में मतदाताओं में उत्साह और जागरूकता में वृद्धि के लिए उत्तराखण्ड के प्रत्येक जिले के निर्वाचन अधिकारियों ने स्टॉल और प्रदर्शनी लगाई। जिनमें आदर्श मतदान केंद्र और महिला, बुजुर्ग एवं दिव्यांगजनों के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा दी जा रही सुविधाओं को बताया गया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल द्वारा सभी प्रदर्शनियों का अवलोकन किया गया।

कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट, सचिव निर्वाचन दिलीप जावलकर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. वी.षणमुगम, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
Dehradun
हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा पर बोले राज्यपाल, सैन्य-नागरिक-समाज का समन्वित दृष्टिकोण जरूरी

Dehradun News : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) द्वारा आज क्लेमेंट टाउन, देहरादून में “फोर्टिफाइंग द हिमालयाजः ए प्रोएक्टिव मिलिट्री-सिविल-सोसाइटी फ्यूजन स्ट्रेटजी इन द मिडिल सेक्टर” विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में प्रतिभाग किया गया।
हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा पर राज्यपाल ने कही बड़ी बात
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू-आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि मध्य सेक्टर को परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांत माना जाता रहा है।
लेकिन वर्तमान परिस्थितियाँ सतत सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र, विशेष रूप से भारत-चीन सीमा के मध्य सेक्टर में, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सैन्य, नागरिक प्रशासन और समाज के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
सैन्य-नागरिक-समाज का समन्वित दृष्टिकोण जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियां अब केवल प्रत्यक्ष सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाइब्रिड वारफेयर, ग्रे-जोन गतिविधियों, द्वि-उपयोगी आधारभूत संरचना और सीमा क्षेत्रों में निरंतर दबाव जैसे कारकों से भी आकार ले रही हैं। ऐसे परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्रों की दीर्घकालिक सुरक्षा केवल सैन्य तैयारियों से नहीं, बल्कि नागरिक प्रशासन, स्थानीय समुदायों और प्रौद्योगिकी के साथ प्रभावी समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।

सीमावर्ती गांव राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक
राज्यपाल ने सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सीमाई सुरक्षा के सहभागी और बलवर्धक हैं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसे कार्यक्रम सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या स्थिरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति को भी सुदृढ़ करते हैं।
राज्यपाल ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधारभूत संरचना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सड़कें, सुरंगें, पुल, हवाई संपर्क और दूरसंचार सुविधाएँ परिचालन तत्परता के अनिवार्य घटक हैं। उन्होंने चारधाम परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाती है, बल्कि रणनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती प्रदान करती है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सैन्य नागरिक से जुड़े विषय पर सेमिनार का होना अति महत्वपूर्ण है। कहा कि सेमिनार से निकले सुझाव हमारी सामरिक नीति को सुदृढ़ बनाने में सहायक और हिमालयी क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित जनसंख्या जैसी चुनौतियों को देखते हुए सेना, नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। हिमालयी क्षेत्रों में सीमाओं के आस-पास निवास करने वाले नागरिक देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जो वास्तव में देश के आँख और कान बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा करना सेना के साथ साथ प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।
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अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए सोशल मीडिया से सभी वीडियो हटाने आदेश
Dehradun News : अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। इस मामले में सोशल मीडिया पर चल रहे बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस से जुड़े दुष्यंत गौतम के नाम वाले वीडियो सोशल मीडिया से हटाने के आदेश दिए हैं।
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Ankita Bhandari case में दुष्यंत गौतम को बड़ी राहत
अंकिता भंडारी मामले में वीआईपी के नाम को लेकर बीते कई दिनों से प्रदेश में माहौल गरमाया हुआ है। इसमें बीजेपी प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम भी सामने आ रहा था। जिसके लिए बीजेपी नेता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद अब इस मामले में उन्हें बड़ी राहत मिली है। दरअसल Ankita Bhandari case में दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम के नाम वाले कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाने के आदेश दिए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए सोशल मीडिया से सभी वीडियो हटाने आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम के नाम वाले सभी वीडियो हटाने के आदेश के साथ कहा है कि इन्हें 24 घंटे में हटा लिया जाए। अगर 24 घंटे के भीतर ये सभी वीडियो नहीं हटाए जाते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद ही इस कटेंट को हटा दें। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि अगर इस तरह के कटेंट दोबारा अपलोड किए जाते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसकी जानकारी याचिकाकर्ता को दें ताकि वो जरूरी कदम उठा सकें।

अब तक हुई बदनामी की नहीं हो सकती भरपाई
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम के वकील गौरव भाटिया ने कहा कि वीडियो डालकर उनकी छवि को खराब किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को बदनाम करने में राजनीतिक दलों के अकाउंट भी शामिल हैं।
गौरव भाटिया ने कहा कि अंकिता मामले में याचिकाकर्ता का नाम कभी सामने नहीं आया। इस मामले में तो कोर्ट का फैसला आ चुका है और सजा भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता लंबे समय से राजनीति में हैं और इन आरोपों के कारण उनकी बदनामी हुई है। अब तक जितनी बदनामी हुई है उसकी भरपाई तक नहीं की जा सकती है
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मसूरी : जॉर्ज एवरेस्ट की हाथी पांव रोड पर स्कूटी खाई में गिरी, दो लोग घायल

Mussoorie news : मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट हाथी पांव रोड पर एक स्कूटी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में स्कूटी सवार दो लोग घायल हो गए।
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Mussoorie के जॉर्ज एवरेस्ट में खाई में गिरी स्कूटी
Mussoorie में कड़ाके की ठंड और सड़क पर बर्फनुमा पाला एक बार फिर हादसे की वजह बन गई। यहां जॉर्ज एवरेस्ट की हाथी पांव रोड पर स्कूटी पैराफिट ना होने के कारण खाई में गिर गई। इस हादसे में स्कूटी सवार घायल हो गए। स्थानीय लोगों की तत्परता से दोनों घायलों को खाई से बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।

पाला जमने और पैराफिट न होने के कारण हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ठंड के कारण सड़क पर बर्फनुमा पाला जम गया था। जैसे ही स्कूटी उस स्थान पर पहुंची, वह फिसल गई और चालक संतुलन खो बैठा। सड़क किनारे पैराफिट न होने के कारण स्कूटी सीधे गहरी खाई में जा गिरी। अगर समय रहते स्थानीय लोग मौके पर न पहुंचते तो हादसा गंभीर रूप ले सकता था।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने घटना के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जॉर्ज एवरेस्ट हाथी पांव रोड पर कई स्थानों पर सड़क किनारे पैराफिट नहीं है। जिससे आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है। ठंड के मौसम में यहां पाला जमने से दोपहिया वाहन लगातार फिसल रहे हैं और कई लोग चोटिल हो चुके हैं।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों, स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया था। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
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