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तुलसी के पौधे की मिट्टी में दबा दें ये चीज, खुल जाएंगे किस्मत के बंद दरवाजे

हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। शास्त्रों में इसे वृंदा के नाम से जाना जाता है और इसकी पूजा की जाती है। तुलसी को घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला पौधा माना जाता है। तुलसी में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है इसलिए जिस भी घर-आँगन में तुलसी का पौधा होता है माना जाता है की वो घर धन धान्य से परिपूर्ण हो जाता है।

तुलसी का पौधा खोल देगा आपकी किस्मत के दरवाजे
तुलसी का पौधा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी बहुत लाभकारी माना जाता है। अगर आपकी जिंदगी भी गुजर रही है संकट के दौर से या आप भी परेशान हैं आर्थिक, मानसिक या पारिवारिक समस्याओं से तो जरूर अपनाएं ये उपाय।
तुलसी के पौधे की मिट्टी में दबा दें ये चीज
तुलसी के पौधे की जड़ों के पास मिट्टी में एक रुपए का सिक्का दबाने से आपकी सारी आर्थिक समस्याएं दूर हो जाएंगी।। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी के पौधे की मिट्टी में एक रुपये का सिक्का दबाने से घर में धन-संपत्ति की कभी कमी नहीं होती है। इससे शनि और राहु का प्रभाव भी कम होता है और वास्तु दोष भी दूर होते हैं।
इसके साथ ही अगर आपके घर में भी आए दिन झगड़ते रहते हैं, परिवार के लोगों में कलेश हो रहे हैं तो तुलसी के पौधे की मिट्टी में एक रुपए का सिक्का दबाने से सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। बता दें कि तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण करने का कार्य करता है।

किस तरह से करें ये उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुलसी से जुड़ा कोई भी उपाय स्नान करके और साफ कपड़े पहनकर ही करना चाहिए। अगर आप इस उपाय को ज्यादा प्रभावशाली बनाना चाहते हैं तो गुरुवार या शुक्रवार को ये उपाय करने से आपको फायदे हो सकते हैं। तुलसी के पौधे के नीचे मिट्टी में एक रुपये का सिक्का दबा कर उसकी रेजाना पूजा करें और घी का दिया जरूर जलाएं।
(ये जानकारी केवल पढ़ने के उदेश्य से से प्रदान की गई है। जनमंच टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है, अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।)

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इस बार समय से पहले शुरू होगी Hemkund Sahib Yatra, 23 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट

Hemkund Sahib Yatra 2026 : उत्तराखंड में स्थित पवित्र हेमकुंड साहिब तीर्थस्थल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए 23 मई को खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही हेमकुंड यात्रा का भी आगाज हो जाएगा।
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23 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड में स्थित पवित्र हेमकुंड साहिब धाम 23 मई 2026 से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। इसी के साथ यात्रा का भी शुभारंभ हो जाएगा। हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने मुख्य सचिव आनंद वर्धन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आगामी तीर्थयात्रा सीजन की तैयारियों पर चर्चा की।

इस बार समय से पहले शुरू होगी Hemkund Sahib Yatra 2026
बता दें कि इस बार हेमकुंड साहिब यात्रा समय से पहले शुरू हो रही है। हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट ने इस वर्ष मौसम की अनुकूल परिस्थितियों और पिछले वर्षों की अपेक्षा कम बर्फबारी को देखते हुए यात्रा को सामान्य समय से पहले शुरू करने का फैसला लिया है।

पिछले साल 25 मई से शुरू हुई थी हेमकुंड साहिब यात्रा
बता दें कि साल 2025 में हेमकुंड साहिब यात्रा 25 मई से शुरू हुई थी। 10 अक्टूबर 2025 को यात्रा का समापन हुआ। यात्रा के 139 दिनों में कुल 2 लाख 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब पहुंचे और मत्था टेका। इस संख्या को अब तक की सबसे अधिक दर्शन करने वालों की संख्या है।
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Gudi Padwa 2026 : 19 या 20 मार्च किस दिन है गुड़ी पड़वा पर्व ?, यहां जानें सही तारीख और मुहूर्त

Gudi Padwa 2026 की सही तारीख क्या है ?, जानें किस दिन मनाया जाएगा त्यौहार
Gudi Padwa 2026 : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ दिन से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। जिसे गुड़ी पड़वा के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा को केवल पर्व नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मकता और शुभता के आगमन का संकेत माना जाता है।
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19 या 20 मार्च किस दिन है Gudi Padwa 2026 ?
गुड़ी पड़वा के त्यौहार के दिन से हिंदू नववर्ष की शूरूआत होती है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसीलिए इस दिन को सृजन और नवआरंभ का प्रतीक माना जाता है। इस साल गुड़ी पड़वा की तारीख (gudi padwa 2026 date) को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है कि त्यौहार 19 मार्च को मनाया जाएगा या फिर 20 मार्च को मनाया जाएगा ?

तो आपको बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर 20 मार्च सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसलिए गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा।
गुड़ी को फहराने का शुभ मुहूर्त
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक |
| गोधुली मुहूर्त | शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक |
| निशिता मुहूर्त | रात 12:05 बजे से 12:52 बजे तक |

कई शुभ योग में हो रहा गुड़ी पड़वा का आगाज
इस साल गुड़ी पड़वा का आगाज बेहद ही शुभ योग में हो रहा है। 19 मार्च को गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा और इसी दिन चैत्र नवरात्रों की भी शुरूआत हो रही है। यूं तो हिंदू नववर्ष को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस दिन गुड़ीपड़वा महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में ऐसी मान्यता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी विजय के बाद पहली बार गुड़ी फहराने की परंपरा को शुरू किया था।

गुड़ी पड़वा पर ये करना माना जात है बेहद शुभ
1. इस दिन घर के मुख्य दरवाजे को आम के पत्तों और फूलों के तोरण से सजाना शुभ माना जाता है।
2. घर के प्रवेश द्वार पर आकर्षक रंगोली बनाकर उत्सव का स्वागत करें।
3. बांस की डंडी पर सुंदर कपड़ा बांधकर उसके ऊपर तांबे या चांदी का पात्र उल्टा रखें और उसे नीम की पत्तियों व चीनी की माला से सजाकर घर के ऊंचे स्थान या खिड़की पर स्थापित करें।
4. परंपरा के अनुसार सुबह नीम की पत्तियां, गुड़ और इमली का मिश्रण ग्रहण किया जाता है, जो जीवन में सुख-दुख के संतुलन और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है।
Uttarakhand
Jhanda Mela 2026: झंडे जी मेले की आज से शुरुआत, 94 फीट ध्वजदंड का आरोहण
देहरादून में ऐतिहासिक झंडे जी मेले का आगाज, देश-विदेश से पहुँच रहे श्रद्धालु
Jhanda Mela 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आस्था और परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक झंडे जी मेले की शुरुआत आज से हो चुकी है। दरबार साहिब में इस बार 94 फीट लंबे नए ध्वजदंड का आरोहण किया जा रहा है। देशभर से संगतों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है, इसके साथ ही प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर विशेष व्यवस्था लागू कर दी है।
मुख्य बिंदु
दरबार साहिब में शुरू हुआ झंडा जी मेला 2026
दरअसल, देहरादून स्थित दरबार साहिब में हर साल आयोजित होने वाला झंडे जी मेला धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इस बार भी आयोजन को भव्य बनाने के लिए कई दिनों से तैयारियां जारी थीं, जिसके बाद आज से झंडा जी के आरोहण के साथ शुरू हो चुका है। खास बात ये है कि इस बार झंडे जी के लिए 94 फीट लंबे नए ध्वजदंड को तैयार किया गया है, जिसे बनाने में कारीगरों को करीब दो महीने का समय लगा।
Jhanda Mela 2026 – देशभर से पहुँच रहे श्रद्धालु
दूसरी तरफ, देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं का देहरादून पहुंचना भी शुरू हो गया है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में संगतें इस आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचती हैं। इसके अलावा स्थानीय लोग भी इस आयोजन को लेकर काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया है।
गिलाफ चढ़ाने के लिए 90 से 100 साल पहले दर्ज होता है नाम
इसी बीच झंडे जी से जुड़ी एक खास परंपरा गिलाफ चढ़ाने की भी है, जिसे बेहद श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाया जाता है। इसके लिए कई महीने पहले से ही सेवादारों द्वारा गिलाफ सिलने का कार्य शुरू कर दिया जाता है। विशेष रूप से महिलाएं इस सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं और पूरी श्रद्धा के साथ गिलाफ तैयार करती हैं। परंपरा के अनुसार झंडे जी पर कुल तीन प्रकार के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं।
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सबसे पहले 41 सादे गिलाफ लगाए जाते हैं, इसके बाद 21 सनील के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। अंत में सबसे ऊपर दर्शनी गिलाफ लगाया जाता है, जिसे चढ़ाने का अवसर बेहद खास माना जाता है। दिलचस्प बात ये है कि इसके लिए श्रद्धालु वर्षों पहले ही अपना नाम दर्ज कराते हैं और कई बार 90 से 100 साल बाद यह मौका मिलता है। इस बार देहरादून के अनिल गोयल को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
होली की पंचमी तिथि को होता है झंडे जी का आरोहण
परंपरा के मुताबिक, झंडे जी का आरोहण हर साल होली के बाद पंचमी तिथि को किया जाता है। इसी दिन शाम के समय धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरे विधि-विधान के साथ ध्वजदंड स्थापित किया जाता है। इससे पहले दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की रस्म पूरी की जाती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरबार साहिब पहुंचते हैं।
ढोल-नगाड़ों की गूंज पर ध्वजदंड को लाया गया दरबार साहिब
एक दिन पहले ही नए ध्वजदंड को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दरबार साहिब लाया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और श्रद्धालुओं की पुष्प वर्षा के बीच ध्वजदंड का भव्य स्वागत किया गया। इस धार्मिक माहौल ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। वहीं जैसे ही झंडे जी का आरोहण होता है, उसके साथ ही प्रसिद्ध झंडे मेले की शुरुआत भी हो जाती है। इसके बाद दरबार साहिब के आसपास पूरे इलाके में मेले की रौनक देखने को मिलती है।

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800 से ज्यादा विदेशी श्रद्धालुओं को भेजा गया निमंत्रण
हर साल हजारों श्रद्धालु इस मेले में शामिल होते हैं, जिससे शहर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। दिलचस्प बात ये है कि इस बार विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। दरबार साहिब की ओर से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन सहित कई देशों में रहने वाले लगभग 800 से अधिक श्रद्धालुओं को निमंत्रण भेजा गया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार मेले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संगतों की अच्छी भागीदारी देखने को मिलेगी।
मेले के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान जारी
मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु रखना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। दरबार साहिब के आसपास के इलाके को जीरो जोन घोषित किया गया है, जहां बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है जिससे ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रहे।
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सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे से रखी जा रही निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों और धर्मशालाओं में संगतों के ठहरने की व्यवस्था की गई है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेला परिसर में अस्थायी अस्पताल भी बनाए गए हैं। इसके अलावा 24 घंटे लंगर की व्यवस्था भी रहेगी।
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