Dehradun
उत्तराखंड: सीएम धामी के सख्त आदेश के बाद DGP अभिनव कुमार ने की गोष्ठी, अपराधियों पर कार्रवाई करने के दिए निर्देश !

देहरादून – अभिनव कुमार, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड की अध्यक्षता में समस्त परिक्षेत्र/जनपद प्रभारियों, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड, पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा, पुलिस महानिरीक्षक/ निदेशक, यातायात, पुलिस उपमहानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था एवं पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ/ रेलवेज के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से ईनाम/ वांछित अपराधियों के विरूद्ध की जा रही कार्यवाही के सम्बन्ध गोष्ठी आयोजित की गयी।

अभिनव कुमार, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड द्वारा बताया की मुख्यमंत्री के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक विधिसम्मत कार्यवाही, प्रत्येक स्तर पर समन्वय बनाने, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान, अभिसूचना तंत्र को और मजबूत बनाये जाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त व रात्रि पेट्रोलिंग की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।
इसके अतिरिक्त द्वारा ईनाम/ वांछित अपराधियों के विरूद्ध की जा रही कार्यवाही की समीक्षा करने के उपरान्त निम्न निर्देश दिये गयेः-

1- सर्वप्रथम, माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा पुलिस मुख्यालय का औचक निरीक्षण कर विनिर्दिष्ट प्रकरणों में कार्यवाही करने के निर्देश एवं सुझावों के बारे में अवगत कराया गया ।
2- ईनामी/ वांछित अपराधियों की 03 कैटेगरी बनायी जायेगी एवं विशेष अभियान चलाकर कार्यवाही की जाये (संगीन अपराध जैसे- पोक्सो, लूट, डकैती आदि) 1-ऐसे अपराधी जिन पर पूर्व ईनाम घोषित किया गया है, 2- ऐसे अपराधी जिनमें पूर्व में कम ईनाम घोषित किया गया है उसमें ईनाम की राशि बढायी जाये 3- ऐसे अपराधी जिन पर पूर्व ईनाम घोषित नही है उनमें ईनाम घोषित किया जायेगा ।

3- ईनामी/ वांछित अपराधियों पर 01 माह का विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिये ।
4- जनपद प्रभारियों को निर्देश दिये गये कि सर्किल स्तर एवं थाने स्तर पर अब तक कार्यों की समीक्षा कर ली जाय, यदि तीन माह में वर्तमान स्तर से सुधार नहीं होता है तो सम्बन्धित क्षेत्राधिकारी एवं थानाध्यक्ष के विरूद्ध प्रतिकूल कार्यवाही अमल में लायी जायेगी ।
5- महिला सम्बन्धी प्रकरणों में पुलिस द्वारा समय से त्वरित कार्यवाही की जाये, एवं प्रकरण के सम्बन्ध में पुलिस कार्यवाही का आवश्यक रूप से प्रचारित किया जाये, ताकि घटना में फेक न्यूज एवं अफवाहों पर रोक लगायी जा सके ।

6- वर्तमान में प्रचलित पुलिस भर्ती के सम्बन्ध में अफवाह फैलाने वालों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही अमल लायी जाये एवं साथ ही पुलिस अधिकारियों द्वारा ऐसी अफवाहों का त्वरित खंडन सोशल मीडिया पर बाइट के माध्यम से प्रसारित किया जाये ।
7- पुलिस विभाग में प्रमोशन, आवासीय/ आनावासीय निर्माण एवं लंबित घोषणा के सम्बन्ध में मा0 मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड जी का सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है ऐसे प्रकरणों में तेजी से कार्यवाही करने हेतु निर्देश दिये ।
इस दौरान ए0पी0 अंशुमान, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उतराखण्ड, मुख्तार मोहसिन, निदेशक यातायात, कृष्ण कुमार वी0के0, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना, विम्मी सचदेवा, पुलिस महानिरीक्षक मुख्यालय, के0एस0 नागन्याल, पुलिस महानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र, सुश्री पी0रेणुका देवी पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे ।
Uttarakhand
DEHRADUN में फूलदेई की धूम: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बच्चों संग मनाया पारंपरिक लोकपर्व

लोक भवन में पारंपरिक अंदाज में मनाया गया फूलदेई
DEHRADUN: रविवार को उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई का आयोजन बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस अवसर पर गुरमीत सिंह ने लोक भवन में बच्चों के साथ मिलकर पर्व मनाया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह लोकसंस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
मुख्य बिंदु
बच्चों ने देहरी पर चढ़ाए फूल और चावल
लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे बच्चों ने देहरी पर फूल और चावल अर्पित किए। साथ ही उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई” जैसे पारंपरिक लोकगीत भी गाए, जिससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक सांस्कृतिक बन गया।

राज्यपाल ने बच्चों को दिए उपहार और आशीर्वाद
इस अवसर पर राज्यपाल ने बच्चों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद देते हुए उपहार भेंट किए। उन्होंने कहा कि फूलदेई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और खुशियां बांटने का संदेश देने वाली हमारी समृद्ध लोक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से बच्चे घर-घर जाकर फूल अर्पित करते हैं और सभी के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश
राज्यपाल ने पारंपरिक वेशभूषा में पर्व मनाने के लिए बच्चों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी से हमें यह सीख मिलती है कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है। जब बच्चे गर्व के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को अपनाते हैं, तो यह हमारी विरासत के संरक्षण का मजबूत संदेश देता है।

पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की सराहना
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उनका उत्साह यह दर्शाता है कि खुशियों का वास्तविक आनंद तभी मिलता है जब उन्हें सबके साथ साझा किया जाए। उन्होंने पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की भी सराहना करते हुए कहा कि संस्था उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की परंपराएं और पूर्वजों की विरासत हमें प्रकृति से प्रेम, आपसी सद्भाव और समाज में खुशियां बांटने की प्रेरणा देती हैं।
Uttarakhand
Uttarakhand News: 5 साल में 826 स्कूल बंद, विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा

पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था पर पलायन की मार, पांच सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
UTTARAKHAND NEWS: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में इस बार कई चौंकाने वाले मामले सामने आए. ऐसी ही एक खबर शिक्षा विभाग से निकलकर सामने आई. विधानसभा में भाजपा के ही विधायक के सवाल पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बतया कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में लगभग 826 प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं. सरकार ने इसके पीछे की वजह बढ़ते पलायन को बताया है.
मुख्य बिंदु
विधानसभा में आया शिक्षा विभाग से जुड़ा चौंकाने वाला मामला
विधानसभा में ये मुद्दा भाजपा विधायक महेश जीना ने उठाया, जिसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने स्थिति को सदन में स्पष्ट किया. सरकार ने माना कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम रह गई थी, जिसके कारण उन्हें चलाना मुश्किल हो गया. ऐसे में शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कर छात्रों को पास के बड़े स्कूलों में समायोजित करने का निर्णय लिया. सरकार का कहना है कि इससे बच्चों को बेहतर शिक्षण माहौल और सुविधाएं मिल सकेंगी.
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पिछले 5 सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
उत्तराखंड में लचर शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता जिलेवार आंकड़े भी हैं. सबसे अधिक टिहरी जिले में 262 स्कूल बंद हुए हैं. इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104, अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43 और देहरादून में 38 स्कूल बंद हुए हैं. वहीं चंपावत में 34, उत्तरकाशी और बागेश्वर में 25-25, उधम सिंह नगर में 21, रुद्रप्रयाग में 15 और हरिद्वार में 2 स्कूलों पर ताले लगे हैं. वर्तमान में राज्य में करीब 10,940 स्कूल संचालित हो रहे हैं. लेकिन उनमें से कई स्कूल ऐसे भी हैं जहाँ पर बच्चों की संख्या केवल दो से तीन ही रह गई है.
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पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था के लिए अभिशाप बन रहा पलायन
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की कमी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. कई सरकारी स्कूलों में भवन जर्जर हैं और शौचालय, पेयजल व खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. यही कारण है कि अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को बचाए रखना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
Dehradun
देहरादून में आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल, अपनी मांगों को लेकर किया सीएम आवास कूच

Dehradun News : देहरादून में आज आंनबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
Table of Contents
देहरादून में आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल
देहरादून में आज प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है।

अपनी मांगों को लेकर किया सीएम आवास कूच
बता दें कि आंनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में वेतन वृद्धि और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग शामिल है। बड़ी संख्या में पहुंची कार्यकर्ताओं के कारण सड़कों पर जनसैलाब जैसा माहौल देखने को मिला और प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय मंत्री पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री आवास कूच करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय मंत्री रेखा आर्य पर भी निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।
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