Uttarakhand
उत्तरकाशी: बड़ी धूमधाम से मनाया गया मिल्क फेस्टिवल, नागदेवता को दूध मक्खन दही चढ़ा कर मवेशियों ओर लोगों की खुशहाली की कामना।

उत्तरकाशी – बेर थात अंजूठ में भी मिल्क फेस्टिवल बड़े धूम धाम से मनाया गया इसके साथ ही धनारी पट्टी और गमरी पट्टी के लोगों ने भी मिल्क फेस्टिवल को बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया।

माना जाता है कि वर्षों की परंपरा को जीवित रखने के लिए स्थानीय लोगों के द्वारा दूध गाडू त्योहार के दिन ऑब्लिक नागराज देवता की पूजा की जाती है। यह भी माना जाता है कि पुराने जमाने चली आ रही परंपरा जिसमें इन क्षेत्रों के ग्रामीण गर्मियों के मौसम में हिमालय क्षेत्र में अपने भेड़, गाय, भैंसों को लेकर चले जाते थे जहां पर बुग्याल घास होती है। और 6 महीने के बाद जैसे ही ठंड शुरू हो जाती थी तो वह सब लोग अपने-अपने गांव वापस लौट आते थे माना यह भी जाता है कि गाय का दूध मक्खन दही नाग देवता को चढ़ा कर मवेशियों ओर लोगों की खुशहाली की कामना नाग देवता से करते हैं। इस दौरान कहीं चमत्कार भी देखने को मिलते हैं जिसमें स्वयं नाग देवता दूध पीने के लिए प्रकट होते हैं।
इस दौरान समाजसेवी मुकेश जगमोहन चौहान का कहना है कि हमारी यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है कहा कि और जो हमारे आने वाली नई पीढ़ी है वह इस परंपरा से रूबरू हो सके हमारे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और इस जगह को ट्रैकिंग रूट से जोड़ा जाए। इसलिए हम हर वर्ष इस पर्व को मिल्क फेस्टिवल के रूप में आयोजन कर रहे हैं।।
Roorkee
Roorkee: बच्चों के आपसी विवाद में भिड़े परिजन, बढ़ते विवाद के बीच पुलिस ने किया लाठीचार्ज

रुड़की में बच्चों की कहासुनी बनी बवाल, परिजनों के बीच जमकर मारपीट
रुड़की (Roorkee): सिविल लाइन कोतवाली क्षेत्र में बच्चों के बीच हुई मामूली कहासुनी ने अचानक हिंसक रूप ले लिया. देखते ही देखते दोनों पक्षों के परिजन आमने-सामने आ गए और विवाद इतना बढ़ गया कि लाठी-डंडे चलने लगे. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
मुख्य बिंदु
बच्चों के विवाद में परिजन आमने-सामने, जमकर चले लाठी डंडे
जानकारी के मुताबिक, रुड़की के इमली रोड क्षेत्र में बच्चों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था. शुरुआत में मामला छोटा था, लेकिन बाद में परिजन भी इसमें कूद पड़े. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई. इतना ही नहीं, आरोप है कि कुछ लोग एक-दूसरे के घरों में घुस गए और वहां भी हाथापाई की. अचानक भड़की इस हिंसा से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई.

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पुलिस ने लाठीचार्ज कर मामला किया शांत
इस बीच कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर झगड़ा शांत कराने की कोशिश की, लेकिन उनके साथ भी बदसलूकी की गई. हालात नियंत्रण से बाहर होते देख किसी व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही सिविल लाइन कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियां फटकारनी पड़ीं. पुलिस की मौजूदगी के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकी.
पुलिस मामले की कर रही जाँच, तहरीर का इन्तजार
कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके. प्रभारी निरीक्षक प्रदीप बिष्ट ने बताया कि झगड़े की सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को शांत कराया गया. फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं मिली है. तहरीर मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाएँ
बता दें कि, रुड़की क्षेत्र में हाल के दिनों में मारपीट और झगड़े की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. मामूली विवाद भी हिंसक रूप ले लेते हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. हालांकि पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं.
Roorkee
तीसरी बार धंसा रुड़की बाईपास पर बना फ्लाईओवर, निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवाल, जनता में आक्रोश

Roorkee News : रुड़की के अब्दुल कलाम चौक से कोर कॉलेज बाईपास की ओर जाने वाला सोलानी पुल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार किसी विकास कार्य को लेकर नहीं, बल्कि इस पर बने गड्ढे के कारण ये सुर्खियों में है।
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तीसरी बार धंसा रुड़की बाईपास पर बना फ्लाईओवर
रुड़की के अब्दुल कलाम चौक से कोर कॉलेज बाईपास की ओर जाने वाला सोलानी पुल पर बीचोंबीच एक बड़ा गड्ढा बन गया है। जिस कारण दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
आपको बता दें कि ये फ्लाईओवर NH-334 का वो अहम हिस्सा है जिसे NHAI द्वारा केंद्र सरकार के मुजफ्फरनगर–हरिद्वार–देहरादून प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई थी। लेकिन एक या दो बार नहीं तीसरी बार इसके धंसने की खबर सामने आ रही है।

कुंभ मेले से पहले ही ठीक किया गया था पुल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोलानी फ्लाईओवर को साल 2021 कुंभ मेले से पहले ही ठीक किया गया था। लेकिन इसके बावजूद भी ये तीसरी बार धंस चुका है। जिस कारण स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने जल्द से जल्द इसकी मरम्मत की मांग उठाई है।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल
फ्लाईओवर में गड्ढा होने के कारण प्रशासन ने इसके चारों ओर बैरिकेटिंग कर दी है। इसके साथ ही ट्रैफिक को भी डायव्रट कर दिया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों में इसे लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों ने पुल के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही समय रहते कार्रवाई ना होने पर प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।
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Kedarkantha Trek vs Brahmatal Trek : आपके लिए कौन सा विंटर ट्रेक सबसे बेहतर है?

Kedarkantha Trek vs Brahmatal Trek
उत्तराखंड की हसीन वादियों में जब सर्दियों की चादर बिछती है, तो हर एडवेंचर प्रेमी के मन में एक ही सवाल होता है— केदारकांठा (Kedarkantha) या ब्रह्मताल (Brahmatal)? दोनों ही ट्रेक अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं, लेकिन आपकी पसंद और अनुभव के हिसाब से कौन सा ट्रेक “परफेक्ट” है, यह जानना बहुत जरूरी है।
इस ब्लॉग में हम इन दोनों दिग्गज विंटर ट्रेक्स की गहराई से तुलना करेंगे ताकि आप 2026 की अपनी अगली हिमालयी यात्रा का सही फैसला ले सकें।
केदारकांठा ट्रेक (Kedarkantha Trek): विंटर ट्रेकिंग की रानी
केदारकांठा ट्रेक को भारत का सबसे लोकप्रिय विंटर ट्रेक माना जाता है। उत्तरकाशी जिले के गोविंद वन्यजीव अभयारण्य (Govind Wildlife Sanctuary) में स्थित यह ट्रेक अपनी ‘क्लासिक समिट’ (Summit) के लिए जाना जाता है।
मुख्य आकर्षण:
- 360 डिग्री हिमालयी दृश्य: समिट पर पहुँचते ही आपको स्वर्गारोहिणी, बंदरपूंछ और ब्लैक पीक जैसी चोटियों का अद्भुत नज़ारा मिलता है।
- जुडा का तालाब (Juda Ka Talab): चीड़ के घने जंगलों के बीच स्थित यह जमी हुई झील किसी सपने जैसी लगती है।
- शुरुआती लोगों के लिए आसान: अगर आप पहली बार ट्रेकिंग कर रहे हैं, तो यह ट्रेक आपके लिए सबसे सुरक्षित और बेहतरीन अनुभव होगा।

ब्रह्मताल ट्रेक (Brahmatal Trek): झीलों और रिज का जादुई सफर
चमोली जिले में स्थित ब्रह्मताल ट्रेक उन लोगों के लिए है जो भीड़भाड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता की तलाश में हैं। यह ट्रेक अपनी बर्फीली झीलों और लंबी ‘रिज वॉक’ (Ridge Walk) के लिए मशहूर है।
मुख्य आकर्षण:
- जमी हुई झीलें: यहाँ आपको बेकल ताल और ब्रह्मताल जैसी दो खूबसूरत झीलें देखने को मिलती हैं।
- त्रिशूल और नंदा घुंटी के नज़ारे: इस ट्रेक के दौरान माउंट त्रिशूल और नंदा घुंटी चोटियाँ इतनी करीब महसूस होती हैं कि लगता है आप उन्हें छू लेंगे।
- एकांत और शांति: केदारकांठा के मुकाबले यहाँ भीड़ कम होती है, जो इसे फोटोग्राफर्स और शांति पसंद लोगों की पहली पसंद बनाता है।

Kedarkantha Trek vs Brahmatal Trek : तुलनात्मक तालिका (Comparison Table)
| विशेषता | केदारकांठा ट्रेक (Kedarkantha) | ब्रह्मताल ट्रेक (Brahmatal) |
| अधिकतम ऊंचाई | 12,500 फीट | 12,250 फीट |
| कठिनाई स्तर | आसान से मध्यम (Beginner Friendly) | मध्यम (Moderate) |
| कुल दूरी | लगभग 20 किमी | लगभग 24 किमी |
| समय अवधि | 5 दिन | 6 दिन |
| बेस कैंप | सांकरी (Sankri) | लोहाजंग (Lohajung) |
| सबसे अच्छा समय | दिसंबर से अप्रैल | दिसंबर से मार्च |
| मुख्य अनुभव | समिट क्लाइम्ब और सनराइज | जमी हुई झीलें और रिज वॉक |
गहराई से तुलना: आपको क्या चुनना चाहिए?
1. ट्रेक की कठिनाई और शारीरिक क्षमता
केदारकांठा का रास्ता काफी सुगम है और इसमें चढ़ाव धीरे-धीरे आता है। केवल समिट वाले दिन आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, ब्रह्मताल में आपको ज्यादा दूरी तय करनी होती है और बर्फीले रास्तों पर चलने के लिए थोड़ी ज्यादा स्टैमिना (Stamina) की जरूरत होती है।
2. दृश्यों का अंतर (Landscapes)
केदारकांठा घने देवदार और ओक के जंगलों से घिरा हुआ है। यहाँ की कैंपिंग साइट्स बहुत जादुई होती हैं। दूसरी ओर, ब्रह्मताल में आप जंगलों से बाहर निकलकर ऊंचे ‘रिज’ (पहाड़ की धार) पर चलते हैं, जहाँ से विशाल हिमालयी पर्वतमालाएं आपके साथ-साथ चलती हैं।
3. भीड़ और माहौल
यदि आप नए लोगों से मिलना और कैंपफायर के साथ रौनक पसंद करते हैं, तो केदारकांठा बेस्ट है। लेकिन अगर आप अपनी तन्हाई और पहाड़ों की खामोशी को महसूस करना चाहते हैं, तो ब्रह्मताल की ओर रुख करें।
जरूरी तैयारी और टिप्स (2026 अपडेट)
- रजिस्ट्रेशन: उत्तराखंड सरकार के नियमों के अनुसार अपना ऑनलाइन ई-पास और रजिस्ट्रेशन पहले ही करा लें।
- गियर: विंटर ट्रेक के लिए वाटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज, कम से कम 3 लेयर के गर्म कपड़े और माइक्रो-स्पाइक्स (Micro-spikes) साथ रखें।
- फिटनेस: ट्रेक पर जाने से कम से कम 1 महीना पहले कार्डियो एक्सरसाइज शुरू कर दें।
निष्कर्ष (Final Verdict)
- केदारकांठा चुनें यदि: आप पहली बार पहाड़ों पर जा रहे हैं और कम समय में एक महान समिट का अनुभव करना चाहते हैं।
- ब्रह्मताल चुनें यदि: आप पहले एक-दो ट्रेक कर चुके हैं और आपको जमी हुई झीलों और शांत रास्तों से प्यार है।
उत्तराखंड के ये दोनों ही ट्रेक आपको जीवनभर की यादें देंगे। तो आप इस साल कहाँ जा रहे हैं? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
आपके पाठकों के मन में केदारकांठा और ब्रह्मताल ट्रेक को लेकर कई सवाल हो सकते हैं। लेख की Google रैंकिंग सुधारने के लिए ये FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) सेक्शन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह Google के “People Also Ask” सेक्शन में आने में मदद करता है।
यहाँ आपके आर्टिकल के लिए सबसे महत्वपूर्ण FAQ दिए गए हैं:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. केदारकांठा और ब्रह्मताल में से कौन सा ट्रेक शुरुआती (Beginners) के लिए बेहतर है?
उत्तर: केदारकांठा ट्रेक शुरुआती लोगों के लिए थोड़ा बेहतर माना जाता है। इसका रास्ता अच्छी तरह से चिह्नित है और चढ़ाई ब्रह्मताल की तुलना में थोड़ी कम थकाऊ है। हालांकि, अगर आपकी फिटनेस अच्छी है, तो आप ब्रह्मताल से भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं।
Q2. क्या इन ट्रेक्स पर जाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत होती है?
उत्तर: हाँ, उत्तराखंड में उच्च हिमालयी ट्रेक्स के लिए वन विभाग (Forest Department) द्वारा अधिकृत डॉक्टर से हस्ताक्षरित मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है। इसके बिना आपको बेस कैंप से आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
Q3. क्या सर्दियों में इन झीलों (Juda Ka Talab या Brahmatal) का पानी पीने लायक होता है?
उत्तर: सर्दियों में ये झीलें पूरी तरह जम जाती हैं। ट्रेक के दौरान गाइड बर्फ पिघलाकर पानी तैयार करते हैं या झरनों के बहते पानी का उपयोग करते हैं। हमेशा क्लोरीन टैबलेट या फिल्टर बोतल साथ रखने की सलाह दी जाती है।
Q4. केदारकांठा या ब्रह्मताल ट्रेक के लिए सबसे अच्छा महीना कौन सा है?
उत्तर: यदि आप भारी बर्फबारी देखना चाहते हैं, तो दिसंबर के अंतिम सप्ताह से फरवरी के मध्य तक का समय सबसे अच्छा है। यदि आप खिले हुए बुरांश (Rhododendron) के फूल देखना चाहते हैं, तो मार्च का महीना उत्तम है।
Q5. क्या इन ट्रेक्स पर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध है?
उत्तर: सांकरी (केदारकांठा बेस) और लोहाजंग (ब्रह्मताल बेस) में BSNL और Jio का नेटवर्क सीमित रूप से मिलता है। लेकिन जैसे ही आप ट्रेक पर ऊपर चढ़ते हैं, नेटवर्क पूरी तरह चला जाता है। अपने परिवार को पहले ही सूचित कर दें कि आप कुछ दिनों के लिए “ऑफ-ग्रिड” रहेंगे।
Q6. क्या मैं बिना गाइड के केदारकांठा या ब्रह्मताल ट्रेक कर सकता हूँ?
उत्तर: सुरक्षा कारणों और स्थानीय नियमों के अनुसार, उत्तराखंड में बिना स्थानीय गाइड के ट्रेकिंग करना अब प्रतिबंधित और असुरक्षित है। स्थानीय गाइड न केवल रास्ता जानते हैं, बल्कि वे मौसम और आपातकालीन स्थिति में आपकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।
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