Uttar Pradesh
जब बंदरों ने किसान के पैसों पर किया कमांडो ऑपरेशन, तो एटा में हुई नोटों की बारिश; फिर वकील बने सुपरहीरो !

एटा – एटा के अलीगंज कस्बे में बंदरों का आतंक है। शुक्रवार को पुरानी तहसील में बैनामा कराने आए किसान की बाइक की डिग्गी से बंदर एक लाख रुपये निकाल ले गए और उड़ा दिए। नोटों की बारिश होते ही वहां मौजूद वकील व उनके मुंशी एकत्रित करने में जुट गए। एक नोट छोड़ पूरी रकम किसान को वापस मिल गई।
सर्वेश निवासी ग्राम नगला केसरी शुक्रवार दोपहर के समय अलीगंज तहसील में एक जमीन का बैनामा कराने के लिए आए थे। अपने अधिवक्ता से बातचीत कर रहे थे। 500-500 के नोट की दो गड्डी बाइक की डिग्गी में रखी थीं। तभी अचानक बंदर ने गड्डियां निकाल लीं। हाथों में नोटो की गड्डी थामकर बंदर अधिवक्ताओं के चेंबर की बिल्डिंग के ऊपर बैठ गया। लोग इनसे गड्डियां वापस कराने के तमाम प्रयास करीब आधे घंटे तक करते रहे। सर्वेश ने बंदर को केले डाले तो नोटों की एक गड्डी बंदरों ने फेंक दी, जबकि दूसरी गड्डी को बंदर ने हवा में उछाल दिया।
इसके उछलते ही तहसील परिसर में नोटों की बारिश हो गई। नोट जमीन पर आकर बिखर गए। अधिवक्ताओं व उनके मुशियों ने एक-एक कर नोटों को एकत्रित किया और किसान को वापस किए। सर्वेश ने बताया कि एक लाख रुपये में से 500 का एक नोट नहीं मिल सका।
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Uttar Pradesh
प्रतीक यादव का बड़ा ऐलान : अपर्णा यादव से लेंगे तलाक, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये लगाया ‘घर तोड़ने’ का आरोप…

Aparna Yadav : पति प्रतीक जैन से तलाक की खबर
उत्तर प्रदेश की चर्चित महिला नेता Aparna Yadav एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह राजनीति नहीं बल्कि उनका निजी जीवन है। हाल ही में पति प्रतीक यादव के साथ तलाक की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मच गई है। प्रतीक यादव ने सार्वजनिक रूप से रिश्ते में तनाव की बात कही, जिसके बाद अपर्णा यादव का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय मीडिया में ट्रेंड करने लगा।
Aparna Yadav Divorce News: क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में प्रतीक यादव ने अपने और अपर्णा यादव के रिश्ते को लेकर तलाक की प्रक्रिया शुरू करने की बात सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये बयानों में उन्होंने पारिवारिक मतभेद और मानसिक तनाव का जिक्र किया।
हालांकि अपर्णा यादव की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई औपचारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह खबर इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि वे मुलायम सिंह यादव परिवार की बहू रह चुकी हैं और वर्तमान में भाजपा की सक्रिय नेता हैं।
यह मामला सिर्फ एक निजी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है।

कौन हैं Aparna Yadav? | Early Life and Education
पूरा नाम: अपर्णा बिष्ट यादव
जन्म: उत्तराखंड मूल का परिवार
शिक्षा: इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में मास्टर्स (यूके से)
पेशा: राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता
अपर्णा यादव का जन्म एक पढ़े-लिखे और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ। उनके पिता एक वरिष्ठ पत्रकार और सूचना आयुक्त रह चुके हैं। शुरू से ही अपर्णा की रुचि राजनीति, अंतरराष्ट्रीय मामलों और समाज सेवा में रही।
उन्होंने विदेश से राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उच्च शिक्षा प्राप्त की, जो आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बनी।
मुलायम सिंह यादव परिवार से रिश्ता
अपर्णा यादव की पहचान तब और मजबूत हुई जब उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव से विवाह किया। इस रिश्ते के बाद वे यादव परिवार की बहू बनीं और सीधे राजनीति के केंद्र में आ गईं।
हालांकि पारिवारिक रिश्तों में समय के साथ तनाव बढ़ता गया और अब यह रिश्ता तलाक की कगार तक पहुंच चुका है।

राजनीतिक करियर की शुरुआत
अपर्णा यादव ने राजनीति में कदम समाजवादी पार्टी से रखा।
2017 विधानसभा चुनाव
- सीट: लखनऊ कैंट
- पार्टी: समाजवादी पार्टी
- परिणाम: हार
हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सकीं, लेकिन उनकी सक्रियता और साफ छवि ने उन्हें एक अलग पहचान दी।
BJP में एंट्री और बड़ा राजनीतिक मोड़
जनवरी 2022 में अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन कर ली। यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा झटका माना गया क्योंकि वे यादव परिवार से जुड़ी थीं।
भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने खुलकर योगी सरकार की नीतियों का समर्थन किया और महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और समाज सेवा के मुद्दों पर काम शुरू किया।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में भूमिका
BJP में आने के बाद अपर्णा यादव को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
इस पद पर रहते हुए उन्होंने:
- महिला सुरक्षा मामलों में हस्तक्षेप किया
- सरकारी महिला संस्थानों का निरीक्षण किया
- उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई
- प्रशासन और मुख्यमंत्री से सीधे संवाद किया
यह भूमिका उनके राजनीतिक करियर का अब तक का सबसे अहम पद मानी जाती है।
समाजिक कार्य और छवि
अपर्णा यादव खुद को सिर्फ राजनेता नहीं बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी स्थापित करना चाहती हैं।
वे खासतौर पर इन मुद्दों पर काम करती रहीं:
- महिला अधिकार
- वृद्धाश्रम और अनाथालय सहायता
- गरीब महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं की निगरानी
- स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम
उनकी छवि एक सॉफ्ट लेकिन स्पष्टवादी नेता की रही है।
विवाद और चर्चाएं
अपर्णा यादव का नाम समय-समय पर कुछ विवादों में भी आया:
- पार्टी बदलने को लेकर राजनीतिक आलोचना
- पारिवारिक मतभेद
- तलाक विवाद (लेटेस्ट और सबसे बड़ा मामला)
हालांकि हर बार उन्होंने खुद को संयमित तरीके से पेश किया और सीधे टकराव से बचती रहीं।
वर्तमान स्थिति
आज अपर्णा यादव:
- भाजपा की सक्रिय महिला नेता हैं
- उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं
- तलाक विवाद के बाद निजी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चर्चा में हैं
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इस निजी संकट से निकलकर राजनीति में अपनी भूमिका को कैसे आगे बढ़ाती हैं।
संक्षेप में | Aparna Yadav Profile
- समाजवादी परिवार की बहू से BJP नेता तक का सफर
- महिला आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में अहम भूमिका
- तलाक विवाद के बाद फिर सुर्खियों में
- शिक्षित, अंतरराष्ट्रीय राजनीति की समझ रखने वाली नेता
FAQs
Q1. Aparna Yadav कौन हैं?
अपर्णा यादव उत्तर प्रदेश की महिला नेता, भाजपा सदस्य और महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष हैं।
Q2. Aparna Yadav Divorce News क्यों चर्चा में है?
पति प्रतीक यादव के साथ तलाक की खबर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया।
Q3. Aparna Yadav किस पार्टी में हैं?
वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हैं।
Q4. उनका सबसे बड़ा राजनीतिक पद क्या रहा है?
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष।
Uttar Pradesh
भारत का एक ऐसा गांव जहाँ कुत्ता बना भगवान, दूर-दराज से लोग आ रहे दर्शन के लिए

Bijnor news: मूर्ति की परिक्रमा करने वाला एक कुत्ता, लोग दूर दराज से आ रहे दर्शन करने
मुख्य बिंदु
Bijnor news: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नंदपुर गांव में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने लोगों की आस्था के साथ-साथ जिज्ञासा भी चरम पर पहुंचा दी है। यहां बीते चार दिनों से गांव में लगातार परिक्रमा कर रहे एक कुत्ते को ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ ‘कुत्ता महाराज’ का दर्जा दे दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग उसे भगवान का रूप मानकर माथा टेकने लगे हैं।
बिजनौर में कुत्ता महाराज के दर्शन के लिए दूर-दराज से पहुँच रहे लोग
दरअसल, नंदपुर गांव में ये अनोखी घटना देखते-ही-देखते चर्चा का विषय बन गई। मंदिरों में देवताओं के चमत्कारों की कहानियां तो आम हैं, लेकिन यहां मामला कुछ अलग ही नजर आया। चार दिनों तक बिना रुके परिक्रमा करते कुत्ते को देखकर ग्रामीणों की आस्था जाग उठी और फिर शुरू हो गया पूजा-पाठ का सिलसिला। देखते ही देखते कुत्ते के आसपास भीड़ जमा होने लगी और दूर-दराज से लोग भी ‘कुत्ता महाराज’ के दर्शन के लिए पहुंचने लगे।
ग्रामीणों ने कहा कि ये घटना है दैवीय संकेत
चार दिन की लगातार परिक्रमा के बाद कुत्ता अब थककर एक स्थान पर बैठ गया है, लेकिन ग्रामीणों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। इसी बीच प्रशासन को भी मामले की सूचना मिली, जिसके बाद वेटरनरी डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद डॉक्टरों ने साफ किया कि कुत्ता पूरी तरह स्वस्थ है और उसमें किसी तरह की बीमारी के लक्षण नहीं हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि दैवी संकेत है।
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स्थानीय लोग कुत्ते को मान रहे भैरव बाबा का रूप Source
स्थानीय लोगों का मानना है कि कुत्ता भैरव बाबा की परिक्रमा कर रहा था। एक ग्रामीण ने बताया कि “चार दिन से लगातार परिक्रमा कर रहे हैं, आज थोड़ा विश्राम कर रहे हैं। कुछ लोगों को लगा कि शायद कुत्ता बीमार है, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि सब ठीक है। अब जब डॉक्टर भी कह चुके हैं, तो हम तो इन्हें भगवान का ही रूप मानते हैं।”
कुल मिलाकर, नंदपुर गांव में इन दिनों आस्था, आश्चर्य और हल्की-सी हैरानी का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
भारत का कौन-सा गांव कुत्ते को भगवान मानकर पूजा कर रहा है?
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नंदपुर गांव में एक कुत्ते को भगवान के रूप में पूजा जा रही है।
लोग कुत्ते को ‘कुत्ता महाराज’ क्यों कह रहे हैं?
ग्रामीणों का मानना है कि कुत्ते ने लगातार चार दिनों तक गांव की परिक्रमा की, जिसे वे दैवी संकेत मान रहे हैं, इसी कारण उसे ‘कुत्ता महाराज’ कहा जा रहा है।
क्या लोग सच में कुत्ते की पूजा कर रहे हैं?
हां, ग्रामीण कुत्ते को भगवान का रूप मानकर उसके सामने माथा टेक रहे हैं और भोजन अर्पित कर रहे हैं।
भारतीय संस्कृति में कुत्ते का क्या धार्मिक महत्व है?
हिंदू मान्यताओं में कुत्ते को भैरव बाबा से जोड़ा जाता है, हालांकि किसी जीवित कुत्ते की इस तरह पूजा होना दुर्लभ माना जाता है।
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माघ मेला 2026: जानें शाही स्नान और पूजा‑पर्व की पूरी डेट, पवित्र संगम में स्नान से मिलेगा मोक्ष

Magh Mela 2026: 3 जनवरी से 15 फरवरी तक प्रयागराज में भक्तों का भव्य संगम
मुख्य बिंदु
Magh Mela 2026: हर साल की तरह Magh Mela 2026 का आयोजन प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश ) के त्रिवेणी संगम पर 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा‑यमुना‑सरस्वती के पवित्र संगम में शाही स्नान और तप, दान तथा आध्यात्मिक साधना के लिए एकत्रित होंगे। यह आयोजन हिंदू कैलेंडर के माघ मास के दौरान होता है और इसे मिनी कुंभ मेला भी कहा जाता है।
कब और कहाँ होता है Magh Mela ?
Magh Mela 2026 का आयोजन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर होगा, जहां तीन पवित्र नदियाँ — गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती — मिलती हैं। इसे माघ मास में धार्मिक पवित्रता, स्नान और दान का शुभ अवसर माना जाता है।

Magh Mela के प्रमुख स्नान (Snan) तिथियाँ
पूजा‑और धार्मिक महत्व की वजह से कुछ विशेष तिथियों पर शाही स्नान (मुख्य स्नान पर्व) आयोजित होंगे। इनका आयोजन निम्नानुसार है:
| मुख्य स्नान पर्व | तारीख (2026) |
|---|---|
| पौष पूर्णिमा स्नान | 3 जनवरी 2026 |
| मकर संक्रांति स्नान | 14 जनवरी 2026 |
| मौनी अमावस्या स्नान | 18 जनवरी 2026 |
| बसंत पंचमी स्नान | 23 जनवरी 2026 |
| माघ पूर्णिमा स्नान | 1 फरवरी 2026 |
| महाशिवरात्रि स्नान | 15 फरवरी 2026 |
धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
Magh Mela को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, त्रिवेणी संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति की संभावना बढ़ती है। इसे कल्पवास का अवसर भी कहा जाता है, जिसमें श्रद्धालु महीने भर तक नदी के तट पर रहकर संयम, ध्यान और दान जैसे आध्यात्मिक कार्यों में लीन रहते हैं।
भव्य आयोजन और तैयारियाँ
प्रशासन ने इस बार Magh Mela के लिए तैयारी और सुदृढ़ कर दी है:
- मेला क्षेत्र लगभग 800 हेक्टेयर में विस्तारित किया गया है।
- अलग‑अलग सेक्टर्स और पांटून पुल बनाकर यातायात प्रबंध बनाए गए हैं।
- प्रयागराज में रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का भी उन्नयन किया जा रहा है।
ये व्यवस्थाएँ 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के उद्देश्य से की जा रही हैं।
आधुनिक सुरक्षा और प्रबंधन
इस बार मेला सुरक्षा के लिहाज़ से भी खास है:
- ATS की महिला कमांडो टीम सुरक्षा में तैनात रहेगी।
- भीड़‑प्रबंधन के लिए व्यापक मॉक ड्रिल और 10 आपातकालीन योजनाएँ तैयार की गई हैं।
- ट्रेनों के आसपास पार्किंग योजनाओं में परिवर्तन किए जाएंगे ताकि यात्री सुविधा और भीड़ नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
Magh Mela का सांस्कृतिक अनुभव
Magh Mela केवल स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति एवं जीवन की परंपरा का जीवंत रूप है। भक्त‑यात्री यहाँ
- साधु‑संतों की अखाड़ा सभा देख सकते हैं,
- प्रवचन, कथा‑कीर्तन और यज्ञ में भाग ले सकते हैं,
- देसी खान‑पान और ग्रामीण जीवन का अनुभव कर सकते हैं।
ये सभी पहलू इसे न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी एक अद्वितीय आयोजन बनाते हैं।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सलाह
यदि आप Magh Mela 2026 में शामिल होने का विचार कर रहे हैं, तो ध्यान रखें:
- ठंड के मौसम के लिए पर्याप्त तैयारी साथ रखें।
- सरकारी टेंट सिटी या धर्मशालाओं में समय पर आवास सुनिश्चित करें।
- प्रमुख स्नान दिनों पर भीड़ अधिक होती है, अतः योजना पूर्व निर्धारित रखें।
ये सुझाव आपकी यात्रा को सुरक्षित और आनंदमय बनाने में मदद करेंगे।

Magh Mela 2026 एक अद्भुत अवसर है, जहाँ श्रद्धा, संस्कृति और अध्यात्म का संगम एक साथ देखने को मिलता है। यह न केवल धार्मिक यात्रा है, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और जीवन के गहरे अर्थों को समझने की यात्रा भी है।
Magh Mela 2026 कब से कब तक चलेगा?
Magh Mela dates के अनुसार माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 से होगी और यह 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।
Magh Mela 2026 कहां होगा?
Magh Mela 2026 location के तहत माघ मेले का आयोजन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में किया जाएगा।
माघ मेला और कुंभ मेला में क्या अंतर है?
Magh Mela vs Kumbh Mela के अनुसार माघ मेला हर वर्ष लगता है, जबकि कुंभ मेला 12 साल में एक बार आयोजित होता है। माघ मेले को मिनी कुंभ भी कहा जाता है।
Magh Mela 2026 में जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
Best time to visit Magh Mela 2026 प्रमुख स्नान पर्वों जैसे मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के दिन माने जाते हैं।
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