Chamoli
बद्रीनाथ हाइवे: पांच दिनों से बंद नंदप्रयाग बद्रीनाथ हाईवे खुला, आवाजाही शुरू।

चमोली – पाँच दिनों से नंदप्रयाग के पास पर्था डीप में पहाड़ी से हुए भूस्खलन के कारण मलवा और बोल्डर आने से अवरुद्ध बद्रीनाथ हाईवे आज छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया हैं।हाईवे बंद होने के कारण बद्रीनाथ और हेमकुंड आने जाने वाले तीर्थयात्रियों के साथ नंदप्रयाग की तरफ़ से ज़िला मुख्यालय गोपेश्वर जाने के वाले लोगो को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।हालाँकि हाईवे बंद होने से छोटे वाहनों की आवाजाही नंदप्रयाग,सैकोट मोटरमार्ग से करवाई जा रही थी,लेकिन यह मोटरमार्ग सँकरा होने के कारण यहाँ जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी।

नंदप्रयाग में हाईवे अभी भी स्थाई तौर पर नहीं खुल पाया हैं,देर रात अगर फिर बारिश होती हैं तो फिर इसी स्थान पर हाईवे अवरुद्ध होने की आशंका बनी हुई हैं,क्योंकि पहाड़ी पर अभी भी कई बड़े बड़े बोल्डर और मलवा अटका हुआ हैं।
बता दे कि बीतें दिनों हुई बारिश के कारण बद्रीनाथ हाईवे नंदप्रयाग के पास पार्थ डीप में हुए भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया था,मलबा अधिक होने के कारण और पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन से सड़क खोलने में मशीन ऑपरेटरो के लिए जान का जोखिम बना हुआ था,जिस वजह से सड़क को खोलने में पाँच दिन का समय लगा।लेकिन अब सड़क खुलने से पाँच दिनों से सड़क खुलनें की राह ताक रहें ट्रक ड्राइवरों सहित स्थानीय लोगो ने राहत की साँस ली हैं
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भारत-चीन सीमा पर बड़ी उपलब्धि, मलारी स्टील पुल से सेना और नीति घाटी को नई ताकत…

Chamoli news: मलारी स्टील ब्रिज से मिलेगी भारत को मजबूती, नीती घाटी के दर्जनों गांवों में बढ़ेगा पर्यटन
Chamoli news: चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारत को मिली महत्वपूर्ण सफलता। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत स्यून गदेरे के पास 104 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत, अगले साल तक इस पुल को यातायात के लिए खोलने की योजना है, जिससे सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्य बिंदु
भारत चीन सीमा को जोड़ेगा Malari Steel Bridge
इसके साथ ही, दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में बने इस स्टील ब्रिज को इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सीमांत क्षेत्र में इतने बड़े स्टील ब्रिज का निर्माण पहली बार किया गया है। परिणामस्वरूप, भारतीय सेना और आईटीबीपी की चौकियों तक रसद सामग्री और भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो सकेगी, जिससे सीमा सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नीति घाटी और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इसी कड़ी में, ढाक वार्ड की जिला पंचायत सदस्य आरुषि बुटोला ने बताया कि इस पुल के बन जाने से नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पहले से मौजूद कई पुल जर्जर स्थिति में थे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी। अब, इस नए और मजबूत स्टील ब्रिज से ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित होगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका
एसडीएम जोशीमठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने इस पुल को सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे नीति घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इसके परिणामस्वरूप, पर्यटकों को सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। BRO का ये प्रोजेक्ट सामरिक महत्व के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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Malari Steel Bridge कहाँ बनाया जा रहा है?
Malari स्टील ब्रिज उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यून गदेरे के पास बनाया जा रहा है।
Malari Steel Bridge की लंबाई कितनी है?
इस स्टील ब्रिज की कुल लंबाई 104 मीटर है, जिसे सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत बनाया जा रहा है।
Malari स्टील ब्रिज कब तक यातायात के लिए खुलेगा?
BRO के अनुसार Malari Steel Bridge को अगले वर्ष तक आम यातायात और सैन्य उपयोग के लिए खोलने की योजना है।
Breakingnews
ज्योतिर्मठ में आर्मी कैंप में भीषण आग, सेना जवान आग बुझाने में जुटे, 1 घंटे बाद भी नहीं बुझी आग

Chamoli News : चमोली जिले के ज्योतिर्मठ में औली रोड पर स्थित आर्मी कैंप में आग लगने से हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना पर आर्मी के जवान और आर्मी फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई है और आग बुझाने की कोशिश की जा रही है।
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Chamoli के ज्योतिर्मठ में आर्मी कैंप में भीषण आग
ज्योतिर्मठ में आर्मी कैंप की कैंटीन में आग लगने से पूरे कैंप परिसर में अफरा तफरी मच गई। मिली जानकारी के मुताबिक आग कैंटीन के स्टोर में लगी है। जहां पर प्लास्टिक का सामान रखा गया था। तेज हवाओं के कारण आग और भी तेजी से फैली और इसने विकराल रूप ले लिया है।
एक घंटे बाद भी आग पर नहीं पाया जा सका काबू
मिली जानकारी के मुताबिक आग लगने की सूचना पर सेना की फायर ब्रिगेड और जवान तत्काल मौके पर पहुंचे। लगातार आग बुझाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन तेज हवाओं के कारण खबर लिखे जाने तक आग बुझ नहीं सकी है। एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।

आसमान में उठा काले धुएं का गुबार
बताया जा रहा है कि आग लगने के कारण आर्मी कैंटीन के स्टोर में रखा ज्यादातर सामान जलकर खाक हो चुका है। फिलहाल स्टोर के अंदर रखे सामान को बचाने की कोशिश की जा रही है। आग लगने के कारण घटनास्थल के पास आसमान में काले धुएं का गुबार उठ गया है। जिस आस-पास के लोगों में डर का माहौल है।
Chamoli
गुलदार ने मवेशियों को बनाया निवाला, गुस्साए ग्रामीणों ने वनकर्मियों को ही बना लिया बंधक, कई घंटे तक नहीं छोड़ा

Chamoli News : उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। चमोली में जब ग्रामीणों के मवेशियों को गुलदार ने निवाला बना लिया तो गुस्साए लोगों ने वनकर्मियों को ही बंधक बना लिया और कई घँटे तक अपने कब्जे में रखा।
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गुलदार के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने वनकर्मियों को बनाया बंधक
चमोली से ऐसी खबर (Chamoli News) सामने आई जिसने सभी को हैरान करने के साथ ही सोचने पर भी मजबूर कर दिया। गैरसैंण के सीमावर्ती मेहलचौरी और कुनीगाड क्षेत्र में गुलदार का आतंक कम होने के का नाम नहीं ले रहा। आए दिन गुलदार ग्रामीणों के मवेशियों को अपना निवाला बना रहा है।

गौशाला का दरवाजा तोड़कर गौशाला में घुसा गुलदार
मंगलवार रात तो गुलदार गौशाला में घुसा और गाय और उसके बछड़े को मार डाला। इस घटना से ग्रामीणों आक्रोशित हो गए। जब इसकी जानकारी वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गुस्साए ग्रामीणों ने आधा दर्जन से ज्यादा बनकर्मियों को बंधक बना लिया।

गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग
गुस्साई महिलाओं ने कई घंटों तक फॉरेस्टर समेत आधा दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों को मौके पर ही रस्सों से बांधे रखा और उन्हें ना छोड़ने की जिद्द पर अड़ी रही। गांव वालों का कहना है कि गुलदार के हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। अब तक वो 10 से ज्यादा गायों को मार चुका है।
इसके अलावा गौवंश और कुत्तों को भी अपना शिकार बना चुका है। ऐसे में कभी भी किसी बच्चे ओर वृद्ध पर भी हमला हो सकता है। इसलिए ग्रामीणों की वन विभाग से से गुलदार को पकड़ कर संरक्षित क्षेत्र में भेजने की मांग है।
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