Haridwar
एलोपैथी पर फिर बरसे बाबा रामदेव: कहा हर साल एलोपैथिक दवाइयो से मर रहे करोड़ों निर्दोष लोग।

हरिद्वार – योगगुरु बाबा रामदेव ने एक बार फिर एलोपैथी चिकित्सा पद्धति पर तीखा हमला बोला है। बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि हर साल एलोपैथी की दवाइयों का सेवन करने से करोड़ों निर्दोष लोगों की मौत हो रही है।

बाबा रामदेव ने चिकित्सा स्वाधीनता आंदोलन को और भी जोरदार ढंग से आगे बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि हम स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों को और भी मुखर करें और एलोपैथी की दवाइयों पर निर्भरता को कम करें।” बाबा रामदेव का यह बयान फिर से चिकित्सा के क्षेत्र में विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि इससे पहले भी उनके एलोपैथी विरोधी बयान चर्चाओं में रहे हैं। ऐसे ही देश में अभी जहरीली और सिंथेटिक दवाइयां खाकर करोड़ों लोग मर रहे हैं इसलिए चिकित्सा की स्वाधीनता के आंदोलन को अब आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनकी इस घोषणा से चिकित्सा जगत में हलचल मचने की संभावना है।
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हरिद्वार पहुंचे राज्यपाल गुरमीत सिंह, अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में हुए शामिल

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) आज हरिद्वार में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में राज्यपाल ने अखिल विश्व गायत्री परिवार और देव संस्कृति विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक गुरुकुल है, जहाँ शिक्षा को साधना माना जाता है।
हरिद्वार पहुंचे राज्यपाल गुरमीत सिंह
हरिद्वार में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में राज्यपाल गुरमीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की यह तपोभूमि और माँ गंगा की गोद संकल्प, साधना और लोक कल्याण की ऊर्जा का स्रोत है। उन्होंने डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे अध्यात्म और आधुनिकता के अद्भुत समन्वय द्वारा समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में हुए शामिल
राज्यपाल ने कहा कि अखंड ज्योति केवल एक दीप नहीं है। यह अखंड भारत की भावना, धर्म-जागरण की चेतना और भारत के आध्यात्मिक तत्व का जीवंत प्रतीक है। इसकी ज्योति हमें सत्य, नैतिकता और एकता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि हम बदलेंगे, युग बदलेगा यह केवल नारा नहीं, समाज को भीतर से परिवर्तित करने वाला प्रेरक मंत्र है।
उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार की सेवा-केन्द्रित कार्यशैली हरिद्वार और उत्तराखण्ड के लिए एक आदर्श मॉडल है। राज्यपाल ने कहा कि गायत्री परिवार ने समाज में नैतिक उन्नयन, सेवा और स्वच्छता की जो संस्कृति विकसित की है, वह राष्ट्र-निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। राज्यपाल ने सभी स्वयंसेवकों की निष्ठा, अनुशासन और कार्य-भावना की विशेष सराहना की।
गुरु-शिष्य परंपरा में हैं भारतीय संस्कृति की जड़ें
समारोह के अध्यक्ष जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें गुरु-शिष्य परंपरा में हैं। गुरु कुम्हार है और शिष्य कुंभ। गुरु बाहर से थपकी और भीतर से सहारा देकर जीवन को आकार देता है। माता-पिता, गुरु और ईश्वर, ये सनातन संस्कृति की एक ही धारा हैं।
शताब्दी समारोह में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि विश्व समुदाय के लिए शताब्दी वर्ष सौभाग्य की त्रिवेणी का अद्भुत संगम लेकर आया है। उन्होंने कहा कि वंदनीया माताजी समाज में नारी-जागरण और नारी-स्वाभिमान की प्रेरक शक्ति रहीं। माताजी ने नारी को परिवार और समाज की आधारशिला के रूप में देखा।
Haridwar
हरिद्वार में देसी शराबे के ठेके में लगी आग, एक शख्स की जिंदा जलकर मौत

हरिद्वार से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां एक देसी शराब के ठेके पर आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी भयानक थी कि एक शख्स की इसमें जलकर मौत हो गई।
हरिद्वार में देसी शराबे के ठेके में लगी आग
हरिद्वार जिले के सिडकुल क्षेत्र में देशी शराब ठेके के पीछे बने टीनशेड में अचानक आग लग गई। मिली जानकारी के मुताबिक शराब के ठेके के टीनशेड स्टोर में देर रात आग लग गई। जिस से मौके पर हड़कंप मच गया। आग इतनी बढ़ गई कि इसमें जलकर एक अज्ञात शख्स की मौत हो गई।
आग लगने के कारणों का नहीं चल पाया पता
आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक खाली शराब पेटियों के गत्तों में आग लगी थी। आग लगने की जानकारी पर मौके पर पहुंची पुलिस ने आग पर काबू पाकर अज्ञात का शव बरामद किया। इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए एसओ नितेश शर्मा ने कहा कि सीसीटीवी चेक किए जा रहे हैं। मृतक की अब तक शिनाख्त नहीं हो पाई है, उसकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
Uttarakhand
बेटा निकला पिता की हत्या का मास्टरमाइंड, 30 लाख और स्कार्पियो में दी सुपारी

हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार से रिश्ते को शर्मशार करने वाली एक घटना सामने आयी है। जहाँ एक युवक ने अपने ही पिता की हत्या कर दी। आरोपी पहले मनगढ़ंत कहानी से पुलिस को गुमराह कर रहा था। सख्ती से पूछताछ करने पर जुर्म कबूल किया। पिता की करोड़ों की सम्पति के लालच में आरोपी बेटे ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।
सम्पति के लालच में बेटे ने करवाई पिता की हत्या
दरअसल, 29 नवंबर की देर रात पुलिस कण्ट्रोल रूम को मृतक भगवान् सिंह के बेटे यशपाल ने एक सूचना दी थी। जिसमें उसने एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा पिता की गोली मरकर हत्या करने की बात कही थी। उसने बताया कि, वो अपने पिता के साथ रोशनाबाद शादी में जा रहा था। जटवाड़ा पुल के करीब एक व्यक्ति ने लिफ्ट मांगी और कार में बैठते ही पिता को गोली मारकर मौके से फरार हो गया। सम्बंधित मामले की जाँच बहादराबाद थाना, रानीपुर कोतवाली और सीआईयू की संयुक्त टीमें कर रहीं थी।
सख्ती से पूछताछ के बाद कबूला जुर्म
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि जब पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर यशपाल से पूछताछ की तो वह अपने ही बयान बदलने लगा। शादी में किस दोस्त के यहां जाना था, इस पर भी वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। यहीं से शक की सुई बेटे की ओर घूम गई। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो बेटे के जवाब लगातार उलझते गए। आखिरकार वो टूट गया और उसने पिता की हत्या करवाने का जुर्म स्वीकार किया। उसने पुलिस को बतया कि पिता की हत्या उसी ने दोनों दोस्तों के साथ मिलकर करवाई है।
सम्पति के लालच में करवाई पिता की हत्या
पुलिस के अनुसार मृतक भगवान सिंह एयरफोर्स से सेवानिवृत थे। उनके पास करोड़ों की सम्पति थी, बेटे की गलत संगत और आदतों के चलते दोनों के बीच हमेशा विवाद की स्थिति बनी रहती थी। आरोपी यशपाल ने पिता पर कई बार संपत्ति अपने नाम कराने को लेकर दबाव बनाया था, लेकिन मृतक ने साफ मना कर दिया और उसे सम्पति से बेदखल करने तक की चेतावनी दी थी। इसी रंजिश के चलते बेटे ने बाप की हत्या की योजना बना कर अपने मंसूबों को अंजाम दिया।
30 लाख और एक स्कॉर्पियो के बदले दी हत्या की सुपारी
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि यशपाल ने अपने दोस्त ललित मोहन उर्फ राजन और शेखर से बात कर पिता की हत्या के बदले 30 लाख और एक स्कॉर्पियो देने का सौदा तय किया था। तीनों ने 29 नवंबर की दोपहर नहर पटरी पर रेकी की और रात में वारदात को अंजाम दिया। रात करीब आठ बजे यशपाल अपने पिता को दोस्त की शादी का झांसा देकर कार में साथ ले गया। जटवाड़ा पुल से आगे बैराज के पास उसके साथी राजन और शेखर पहले से मौजूद थे। योजना के तहत यशपाल ने पिता से गाड़ी रुकवाई और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गया। इसी दौरान राजन को उसने दोस्त बताकर कार में बैठाया।
कार चलने के कुछ ही मिनट बाद राजन ने तमंचे से भगवान सिंह की कनपटी पर दो गोलियां मार दीं। वारदात के बाद राजन मौके से फरार हो गया। कुछ देर बाद बेटे ने घटना को अंजान बताकर 112 पर कॉल कर पुलिस को गुमराह किया। आरोपी यशपाल, ललित मोहन उर्फ राजन, शेखर को धर दबोचा। राजन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, एक खोखा कारतूस, वारदात के समय पहने कपड़े व जूते उसके किराये के कमरे से बरामद हुए।
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