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कांग्रेस नेता ने निकाय चुनाव में पार्टी पर उठाए गंभीर सवाल, टिकट वितरण को लेकर लगाए आरोप !

रुड़की: रुड़की में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने निकाय चुनाव के दौरान पार्टी के टिकट वितरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गांधी जी की अहम भूमिका का हवाला देते हुए पार्टी पर रुपयों के लेन-देन का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मेयर और पार्षदों के टिकटों के लिए खुलेआम पैसे का खेल हो रहा है, जिससे कांग्रेस पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पार्टी में कई काबिल लोग हैं, जिन्हें इस प्रक्रिया से अलग रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य और मेहनती नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि कुछ जूनियर और सीनियर नेताओं को टिकट में प्राथमिकता दी जा रही है।
मेयर के टिकट को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए, और कहा कि इसमें पार्टी के सीनियर और जूनियर कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है, जो पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंच विधायक अरविंद पांडे ने कर दी ऐसी मांग, उत्तराखंड बीजेपी में आया भूचाल

Uttarakhand Politics : गदरपुर विधायक अचानक पहुंचे पुलिस मुख्यालय, अब कर दी ये बड़ी मांग
Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में भले ही बर्फबारी हो रही हो और कड़ाके की ठंड पड़ रही हो। लेकिन यहां का राजनीतिक माहौल आजकल गरमाया हुआ है। भाजपा सरकार इन दिनों अपने ही विधायकों के बयानों से असहज नजर आ रही है।
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अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंचे BJP विधायक अरविंद पांडे
राजधानी देहरादून में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब सत्ताधारी भाजपा के कद्दावर नेता और गदरपुर विधायक Arvind Pandey अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंच गए। अपने तेवरों के लिए मशहूर विधायक पांडे ने सीधे डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात की और खुद पर लगे आरोपों को लेकर एक बड़ी चुनौती दे डाली।
विधायक अरविंद पांडे ने दे डाली खुली चुनौती
पुलिस मुख्यालय पहुंचकर अरविंद पांडे ने बड़ी चुनौती दे डाली है। बता दें कि गदरपुर विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडे के खिलाफ हाल ही में एक मुकदमा दर्ज हुआ है। जिसमें उन पर और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर बीते दिनों भी उत्तराखंड की राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही थी। इस पूरे मामले पर विधायक खुद सामने आए हैं और उनका कहना है कि ये उन्हें ‘भू-माफिया’ साबित करने की एक सोची-समझी साजिश है।

नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग
आज पुलिस मुख्यालय पहुंचे विधायक ने साफ लहजे में कहा कि वो जांच से भागने वाले नहीं हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी हो। उन्होंने डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया जाए। ताकि सच्चाई सामने आ सके और पूरी दुनिया को पता चल सके।
विधायक की मांग से उत्तराखंड बीजेपी में आया भूचाल
जहां एक ओर गदरपुर विधायक Arvind Pandey ने इस पूरे मामले में चुप्पी तोड़ी है और मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखी है। तो वहीं उनके अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंचने और नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग और उनके खिलाफ साजिश के आरोप वाली बात ने उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा भूचाल ला दिया है। अपनी ही पार्टी के विधायक के इस तरीके के बयान से जहां एक ओर सरकार असहज नजर आ रही तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी में भी अंर्तकलह नजर आ रही है।
अपनी ही पार्टी के नेताओं ने अरविंद पांडे के खिलाफ खोला मोर्चा
बीते दिनों ही Arvind Pandey के तीखे तेवरों के सामने आने के बाद उनके पार्टी से नाराज होने की बात सामने आ रही है। ऐसा तक कहा जा रहा था कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने के लिए पहुंच सकते हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जिसके बाद गदरपुर के नेताओं ने ही अरविंद पांडे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
यहां तक कि गदरपुर के बीजेपी नेताओं ने विधायक अरविंद पांडे पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। जिसके बाद से ही बीजेपी में अंर्तकलह की खबरें सामने आ रही हैं। इसे लेकर विपक्ष भी बीजेपी पर हमलावर है। अब देखना ये होगा कि बीजेपी इस से किस तरीके से निपटती है।
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अतिक्रमण के खिलाफ धाकड़ धामी का बड़ा एक्शन, विधायक अरविंद पांडे के खिलाफ की कार्रवाई

Uttarakhand Politics : भाजपा विधायक अरविंद पांडे के खिलाफ नोटिस हुआ जारी
Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में धामी सरकार का अतिक्रमण को लेकर लगातार अभियान चल रहा है। सरकारी जमीनों पर किए गए अतिक्रमण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया जिसके चर्चे उत्तराखंड में चारों ओर चल रहे हैं।
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भाजपा अरविंद पांडे ने अतिक्रमण कर बनाया कैंप कार्यालय !
उत्तराखड की धामी सरकार यूं तो अतिक्रमण के खिलाफ शुरू से ही सख्त रूख अपनाए हुए है। लेकिन हाल ही में ऐसा मामला सामने आया है जो कि सुर्खियां बन गया है। दरअसल मामला जमीनी विवादों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले गदरपुर विधायक अरविंद पांडे से जुड़ा हुआ है।
प्रशासन ने भाजपा विधायक Arvind Pandey के कैंप कार्यालय को अवैध अतिक्रमण बताते हुए इसे हटाने को कहा है। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया है। बीते दिन प्रशासन की टीम उनके आवास पहुंची। जहां उन्होंने अरविंद पांडे के बेटे को अतिक्रमण हटाने का नोटिय थमाया है। जिसके बाद से ये मामला चर्चाओं में है।
सुनील यादव बनाम उत्तराखंड सरकार केस का दिया हवाला
जारी नोटिस में नैनीताल हाईकोर्ट में दायर याचिका 192/2024 (एमएस) सुनील यादव बनाम उत्तराखंड सरकार का हवाला दिया गया है। जिसमें कहा गया है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री व गदरपुर विधायक पांडे के कैंप कार्यालय की जमीन खाता संख्या 64 के खसरा संख्या 12 ग में 0.158 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है। इसलिए राजस्व कर्मियों को नोटिस देने भेजा गया था। अगर इस संबंध में विधायक के पास कोई साक्ष्य हैं तो वो प्रस्तुत कर सकते हैं।

राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है ये कार्रवाई – Arvind Pandey
कैंप कार्यालय की जमीन को लेकर मिले नोटिस को लेकर गदरपुर विधायक Arvind Pandey का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ की गई प्रशासन के ये कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि अगर किसी की भी निर्माण के दौरान कानून का उल्लंघन हुआ है तो उसे हटाया जाना चाहिए, हालांकि उनके निजी आवास पर इस तरह की कार्रवाई गलत है।
सत्ताधारी पार्टी के विधायक पर कार्रवाई पर सोशल मीडिया पर बवाल
यूं तो उत्तराखंड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लंबे समय से चल रही है। लेकिन पहली बार किसी सत्ताधारी पार्टी के विधायक पर ऐसे आरोप लगना और अब कार्रवाई होने से ये लोगों के बीच चर्चाओं का विषय बना हुआ है। खासतौर पर सोश मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई है।
कुछ लोगों का कहना है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री व गदरपुर विधायक पांडे अक्सर विवादों में रहते ही हैं। इस से पहले भी उन पर लोगों की जमीन कब्जाने का आरोप और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप लग चुके हैं।
तो वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी में अंदरखाने ही घमासान चल रहा है। जिसके चलते ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। लोगों का कहना तो यहां तक है कि हाल ही में हुए काशीपुर के सुखवंत सिंह गोलीकांड में अरविंद पांडे ने खुलकर अपनी बात रखी थी। इसीलिए उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई देखने को मिल रही है।
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सांसद निधि में माननीयों ने किया बड़ा खेल, उत्तराखंड का पैसा UP में बांट दिया, RTI में हुआ बड़ा खुलासा

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड के सांसदों का गजब खेल, सांसद निधि को दूसरे राज्यों में बांट दिया
Uttarakhand Politics : उत्तराखंड की राजनीति से ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने जनता को हैरान कर दिया है। उत्तराखंड के माननीयों यानी कि सांसदों ने सांसद नीधि का पैसा उत्तराखंड में लगाने की जगह उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बांट दिया। सांसद निधि के इस गड़बड़झाले का खुलासा आरटीआई में हुआ है।
सांसद निधि में माननीयों ने किया बड़ा खेल
Uttarakhand में आए दिन घोटाले सामने आते रहते हैं। कभी अधिकारियों के घोटाले तो कभी मंत्रियों के घोटाले की खबरें सामने आती हैं। अब एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों से घोटाले की खबर सामने आ रही है। जहां प्रदेश के विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि को उत्तराखंड के सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बांट दिया।
Uttarakhand का पैसा UP में बांट दिया
उत्तराखंड के कई गांव जहां आज भी पानी, सड़क और स्वास्थ्य समेत कई बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। वहीं राज्य के सांसद अपनी निधि का एक बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) में इसका खुलासा हुआ है।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। ये हाल तब हैं जब उत्तराखंड में आए दिन सड़क और पानी के लिए लोग आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

UP में सांसद निधि बांटने वाला सांसद कौन ?
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सूचना के अधिकार (आरटीआई) में से सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के विकास के लिए मिली सासंद निधि दूसरे राज्यों में बांटने वाले सांसदों में टिहरी से लोकसभा सासंद माला राज्य लक्ष्मी शाह पहले नंबर पर हैं। जिन्होंने दूसरे राज्यों में पांच या दस लाख नहीं बल्कि एक करोड़ की धनराशि दी है। ये धनराशि उत्तर प्रदेश राज्य के एक जिले आगरा को ही दी गई है। जो कि विकास कार्यों के लिए दी गई है।
लोकसभा सासंदों ने अपनी निधि से दूसरे राज्यों में पैसा बांटा तो भला राज्यसभा सांसद क्यों पीछे रहते। राज्यसभा सासंद नरेश बंसल ने अपनी सासंद निधि का पैसा हरियाणा में बांट दिया। उन्होंने सांसद निधि से हरियाणा को शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए 25 लाख की धनराशि दी है। पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010-16) के दौरान स्वीकृत धनराशि 10 दिसंबर 2025 को आवंटित की गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी, सड़कों आदि के लिए तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे।

अपनी लोकसभा से बाहर जाकर इस सांसद ने बांटी सांसद निधि
ये बात तो थी Uttarakhand के सांसदों द्वारा दूसरे राज्यों में पैसा बांटने की। लेकिन एक सांसद तो ऐसे भी हैं जिन्होंने दूसरे राज्य में तो पैसे नहीं दिए पर अपने संसदीय क्षेत्र को छोड़कर दूसरी लोकसभा में विकास कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी।
अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र की सीमाओं से बाहर जाकर नैनीताल जिले के लिए धनराशि को स्वीकृति दी है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सांसद अजय टम्टा ने नैनीताल के स्कूलों में हॉल और कमरों के निर्माण के लिए 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं।

सांसद कहीं भी खर्च कर सकता है अपनी निधि – बीजेपी
भाजपा प्रवक्ता नवीन ठाकुर का इस पूरे मामले को लेकर कहना है कि अब देश में या नियम आ चुका है। जिसके तहत सांसद देश के किसी भी राज्य में सांसद निधि खर्च कर सकते हैं। क्योंकि देश के कई राज्यों में उत्तराखंड के निवासी रहते हैं। वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
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