Haridwar
चैंपियन का विवादित इतिहास : हड्डियां तोड़ने की धमकी से लेकर तमंचे पर डिस्को तक , देखे कब कब पड़ें विवादों में….

हरिद्वार : हरिद्वार जनपद के खानपुर से पूर्व विधायक रहे कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन हमेशा किसी न किसी विवाद के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं। कभी ‘तमंचे पर डिस्को’ तो कभी मगरमच्छ पर गोली चलाने जैसे घटनाओं के कारण उनकी छवि हमेशा विवादों से घिरी रही है। इस बार कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का विवाद खानपुर से वर्तमान निर्दलीय विधायक उमेश कुमार से हुआ है, जिसने पूरे उत्तराखंड को हिलाकर रख दिया है। आइए जानते हैं कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन से जुड़ी कुछ बड़ी घटनाओं के बारे में, जिन्होंने उन्हें हमेशा चर्चा का केंद्र बनाए रखा है।

1. मगरमच्छ पर गोली चलाने का मामला (2006): कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का पहला बड़ा विवाद साल 2006 में सामने आया था, जब उन्होंने बहादराबाद में एक रोडवेज बस को साइड न देने पर बस चालक पर गोली चला दी थी। वहीं, इसी साल चैंपियन ने कई मगरमच्छों पर भी गोलियां दागी थीं। इस घटना ने उनके चरित्र और व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए थे।
2. तमंचे पर डिस्को (2013): साल 2013 में तत्कालीन मंत्री हरक सिंह के आवास पर डिनर पार्टी के दौरान चैंपियन ने डांस करते हुए अचानक गोली चला दी थी। इस घटना में राज्य आंदोलनकारी विवेकानंद खंडूड़ी जख्मी हो गए थे, जो उस वक्त चर्चा का विषय बने। यह घटना चैंपियन के विवादों की लंबी लिस्ट में एक और कड़ी जोड़ने वाली थी।

3. 2015 में गोली चलाने का आरोप: साल 2015 में चैंपियन ने हरिद्वार के पथरी में खनन को लेकर एक विवाद के दौरान स्थानीय ग्रामीणों पर गोली चला दी थी। हालांकि, इस मामले को बाद में सुलझा लिया गया था, लेकिन यह घटना भी उनके लिए एक और विवाद का कारण बन गई थी।
4. पत्रकार को थप्पड़ मारने का आरोप (2019): कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का नाम 2019 में दिल्ली के उत्तराखंड सदन में एक टीवी पत्रकार को थप्पड़ मारने के आरोप के साथ सामने आया। हालांकि, उन्होंने इस आरोप को गलत बताया था, लेकिन इस घटना ने उनकी छवि को और धूमिल किया था।
5. सोशल मीडिया पर धमकी देने का मामला (2021): 2021 में चैंपियन का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक पत्रकार को हड्डी तोड़ने की धमकी देते दिखाई दिए थे। यह घटना भी उनके विवादों की सूची में शामिल हो गई और कई मीडिया रिपोर्ट्स का हिस्सा बनी।
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बारे में यह घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि वह अक्सर विवादों में रहे हैं और उनका नाम राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण चर्चित रहा है। अब एक बार फिर से उनके और विधायक उमेश कुमार के बीच विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है।
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रिजर्व फॉरेस्ट में मंत्री जी के बेटे की शादी को लेकर बवाल, सफाई में बोले मंत्री- पहले बता देते तो कहीं और करते शादी

Haridwar News : राजाजी टाइगर रिजर्व के रिजर्व फॉरेस्ट में कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी विवादों में आ गई। हरिद्वार रेंज स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर में शादी के बड़े स्तर पर आयोजन को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
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रिजर्व फॉरेस्ट में मंत्री जी के बेटे की शादी को लेकर बवाल
शनिवार को आयोजन की भव्य तैयारियां की गई थी और पंडाल, स्टेज, कूलर और जेनरेटर इत्यादि लगाए गए थे। परमिशन को लेकर मामले ने तूल पकड़ा तो आनन-फानन में पंडाल समेत सारा सामान हटाया गया और पार्क प्रशासन की ओर से मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।
पहले बता देते तो कहीं और करते शादी – मंत्री खजान दास
रविवार दोपहर को मंत्री खजान दास भी सुरेश्वरी देवी मंदिर पहुंचे। उनके बेटे के साथ वधू पक्ष भी आए और सीमित रूप से केवल पूजा अर्चना व फेरों की रस्म अदा की गई। मंत्री खजान दास ने बताया कि वो कई सालों से सुरेश्वरी देवी मंदिर आ रहे हैं। बेटे की तबियत भी मां सुरेश्वरी देवी के आशीर्वाद से ठीक हुई तो, उनकी इच्छा थी कि मंदिर परिसर में ही शादी की जाए।

लेकिन उन्हें अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी थी कि मंदिर में शादी के आयोजन की परमिशन लेनी पड़ेगी। कुछ दिन पहले भी वो मंदिर आए थे, उस समय राजाजी के अधिकारी भी उनके साथ थे, वन निदेशक ने शादी के आयोजन की हामी भी भरी ही। लेकिन ऐसा नहीं है कि मंदिर समिति की अनुमति से उनके द्वारा शादी की तैयारी की जा रही थी, निदेशक वन ने भी हामी भरी थी।
बेटे शादी पर आरोप प्रत्यारोप हैं राजनीतिक साजिश
कैबिनेट मंत्री ने आरोप प्रत्यारोप को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि ये दुखद और चिंताजनक विषय है। वो वन नियमों के बारे में सब जानते हैं कि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। अगर वन निदेशक उन्हें पहले ही बता देते तो वो कहीं और शादी का आयोजन कर लेते।
वहीं सुरेश्वरी देवी मंदिर समिति के महामंत्री आशीष मारवाड़ी ने बताया कि मंत्री खजान दास की इच्छा थी कि
मां भगवती के दरबार में वो अपने बेटे की शादी पूजा और भंडारे का आयोजन करें। बड़े स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा था। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा अगर कोई कार्रवाई की गई है तो वो कर सकते हैं, उनका जंगल है लेकिन शादी के आयोजन को लेकर गलत प्रचार किया गया। ये कार्यक्रम इतने बड़े स्तर पर नहीं था।
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गेहूं काटते समय मिली टॉपर बनने की खबर, बेटे के जिला टॉप करने की खबर सुन रो पड़े किसान पिता

Haridwar News : खेतों में गेहूं काटते मिले हरिद्वार जिला टॉपर, खबर सुन पिता हुए भावुक
Haridwar News : उत्तराखंड बोर्ड रिजल्ट के सामने आते ही संघर्ष और मेहनत की ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जो हर किसी को हैरान कर रही हैं। जहां मजदूर के बेटे और टैक्सी चालक की बेटी ने टॉप किया तो वहीं हरिद्वार में जिला टॉपर खेतों में गेहूं काटते हुए मिला।
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गेहूं काटते समय मिली टॉपर बनने की खबर
खेतों में मेहनत कर रहे एक किशोर की सफलता की कहानी को सुन आप भी कह उठेंगे कि मेहनत जरूर रंग लाती है। हरिद्वार के जोनिश कुमार ने हाईस्कूल परीक्षा में 95.20% अंक प्राप्त कर जिले में तीसरा और पूरे उत्तराखंड में 12वां स्थान हासिल किया है। खास बात ये है कि रिजल्ट घोषित होने के समय भी वो खेत में मजदूरी कर रहे थे। उन्हें अपने रिजल्ट की सूचना भी तब मिली जब मीडिया उनसे मिलने के लिए पहुंची।
बिना किसी कोचिंग के विपरीत परिस्थितयों में जोनिश बने टॉपर
जानकारी के अनुसार, जोनिश कुमार राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, औरंगाबाद आनेकी का छात्र है। जैसे ही उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी हुआ, उसकी इस उपलब्धि ने उसे सुर्खियों में ला दिया। सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाले जोनिश के माता-पिता शिक्षित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में हर संभव सहयोग किया।
बिना किसी कोचिंग के हासिल की गई ये सफलता जोनिश की कड़ी मेहनत और लगन को दर्शाती है। खेतों में काम करने के साथ-साथ पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उसने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।

माता-पिता दोनों फैक्टी में करते हैं मजदूरी
जोनिश के माता और पिता दोनों ही सिडकुल की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। इन दिनों वो खेतों में गेहूं काटने का कामन कर रहे हैं। जिस वक्त जोनिश से मिलने के लिए मीडिया पहुंची तो भी खेतों में गेहूं काट रहे थे।
इस दौरान मीडिया से अपनी उपलब्धि का उन्हें पता चला तो वो अपने घर गए और कपड़े बदले फिर फोटो खिंचवाई। उन्होंने कहा कि उनका सपना डॉक्टर बनना है और उनकी सफलता का श्रेय उनके माता-पिता और भाई को जाता है।
बेटे के जिला टॉप करने की खबर सुन किसान पिता के छलके आंसू
बेटे के जिला टॉपर बनने की खबर को सुन पिता भावुक हो गए। पिता राजेश कुमार ने कहा कि उन्हें यकीन था कि उनका बेटा एक दिन गांव का नाम रोशन जरूर करेगा। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति सही ना होने के बाद भी उनके दो बेटे बीकॉम और बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। वो जोनिश को भी कुछ करता देखना चाहते हैं।
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Good News : मजदूर के बेटे ने रचा इतिहास, रुड़की के लविश ने प्रदेश टॉप-5 में बनाई जगह

Roorkee News : उत्तराखंड बोर्ड के परिणाम सामने आते ही कुछ ऐसे बच्चों की खबरें सामने आ रहीं हैं जो दूसरे बच्चों के लिए प्रेरण बन रही हैं। रूड़की के लविश ने प्रदेश के टॉप 5 की लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। जबकि उसके पिता एक मजदूर हैं। लविश की कामयाबी के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।
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रुड़की के लविश ने प्रदेश टॉप-5 में बनाई जगह
उत्तराखंड बोर्ड के नतीजों के साथ जहां हजारों घरों में खुशियां बिखरीं हुईं हैं। तो वहीं रुड़की से आई एक कहानी ने हर किसी का दिल जीत लिया। सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने वाले एक छात्र ने अपनी मेहनत से प्रदेश में टॉप-5 में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया।
रुड़की के सिटी पब्लिक इंटर कॉलेज के छात्र लविश लामियान ने 500 में से 484 अंक हासिल करते हुए 96.8 प्रतिशत के साथ पूरे उत्तराखंड में पांचवां स्थान प्राप्त किया है।
पिता करते हैं मजदूरी लेकिन बेटे की पढ़ाई में नहीं होने दी कोई कमी
ये उपलब्धि इसलिए और भी खास हो जाती है क्योंकि लविश के पिता मजदूरी करते हैं। लेकिन उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। संघर्ष और मेहनत की इस कहानी में लविश की लगन साफ झलकती है।

दिन-रात की पढ़ाई, परिवार का त्याग और गुरुओं का मार्गदर्शन—इन्हीं के दम पर लविश ने ये मुकाम हासिल किया। उसकी इस सफलता ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे रुड़की शहर का नाम रोशन कर दिया है।
परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
लविश की इस उपलब्धि से परिवार में जश्न का माहौल है, तो वहीं स्कूल में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। विद्यालय प्रबंधन ने लविश की इस उपलब्धि को गौरव का क्षण बताया। विद्यालय प्रबंधक दीपक वर्मा ने कहा कि लविश शुरू से ही होनहार छात्र रहा है और उसकी मेहनत रंग लाई है।
लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा बने लविश
वहीं, लविश ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया और कहा कि उनका सपना आगे भी पढ़ाई कर देश के लिए कुछ बड़ा करने का है। लविश की ये सफलता उन तमाम छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।
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