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दालचीनी खाने के फायदे: सेहत और सुंदरता के लिए एक चमत्कारी औषधि…

dalchini khane ke fayde
भारतीय व्यंजनों में अपनी महक बिखेरने वाली दालचीनी (Cinnamon) केवल एक मसाला नहीं है, बल्कि आयुर्वेद की एक अनमोल धरोहर है। इसे अंग्रेजी में ‘Cinnamon’ और वैज्ञानिक भाषा में Cinnamomum verum कहा जाता है। सदियों से इसका उपयोग न केवल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए, बल्कि कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी किया जा रहा है।
इस विस्तृत लेख में हम dalchini khane ke fayde, इसके औषधीय गुण, उपयोग के तरीके और सावधानियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Table of Contents
दालचीनी के औषधीय गुण (Nutritional Value of Cinnamon)
दालचीनी की छाल में कई प्रकार के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित तत्व होते हैं:
- एंटीऑक्सीडेंट्स: पॉलीफेनोल्स की प्रचुर मात्रा।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी: शरीर की सूजन कम करने वाले गुण।
- मिनरल्स: कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम।
- विटामिन्स: विटामिन A, K और C।

1. डायबिटीज में दालचीनी खाने के फायदे (Cinnamon for Diabetes)
आज के समय में डायबिटीज एक वैश्विक महामारी बन चुकी है। Dalchini khane ke fayde में सबसे प्रमुख ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करना: दालचीनी शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाती है, जिससे कोशिकाएं शुगर का बेहतर उपयोग कर पाती हैं।
- फास्टिंग शुगर कंट्रोल: शोध बताते हैं कि रोजाना चुटकी भर दालचीनी का सेवन फास्टिंग ब्लड शुगर को 10-20% तक कम कर सकता है।
2. वजन घटाने में सहायक (Cinnamon for Weight Loss)
यदि आप मोटापे से परेशान हैं, तो दालचीनी आपका सबसे अच्छा साथी हो सकती है।
- मेटाबॉलिज्म बूस्टर: यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है।
- भूख पर नियंत्रण: यह भूख को दबाने में मदद करती है, जिससे आप ‘बिंज ईटिंग’ (जरूरत से ज्यादा खाना) से बच जाते हैं।
उपयोग विधि: सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में दालचीनी पाउडर और शहद मिलाकर पिएं।
3. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभ (Cinnamon for Heart Health)
हृदय रोगों का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर है। दालचीनी इन दोनों पर प्रभावी रूप से काम करती है।
- यह शरीर से LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करती है।
- यह रक्त संचार (Blood Circulation) को बेहतर बनाती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।
4. महिलाओं के लिए दालचीनी के फायदे (Benefits for Women’s Health)
महिलाओं के लिए दालचीनी का सेवन विशेष रूप से फायदेमंद होता है:
- PCOS/PCOD: यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करती है।
- मासिक धर्म का दर्द: पीरियड्स के दौरान होने वाले असहनीय दर्द और ऐंठन (Cramps) को कम करने के लिए दालचीनी की चाय रामबाण है।
5. मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए (Cinnamon for Brain Health)
न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों जैसे अल्जाइमर और पार्किंसंस में दालचीनी के सेवन से सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करती है और याददाश्त में सुधार करती है।
6. त्वचा और बालों के लिए (Cinnamon for Skin and Hair)
दालचीनी के एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा की समस्याओं को जड़ से खत्म करते हैं:
- मुंहासे (Acne): दालचीनी पाउडर और शहद का लेप लगाने से पिंपल्स कम होते हैं।
- एंटी-एजिंग: यह कोलेजन उत्पादन को बढ़ाती है, जिससे झुर्रियां कम होती हैं।
- बालों का झड़ना: दालचीनी का तेल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, जिससे बाल मजबूत होते हैं।
7. पाचन तंत्र में सुधार (Cinnamon for Digestion)
अगर आपको गैस, कब्ज या पेट फूलने की समस्या रहती है, तो दालचीनी आपके लिए वरदान है। यह पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करती है और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करती है।
दालचीनी के प्रकार (Types of Cinnamon)
बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार की दालचीनी मिलती है:
- सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon): इसे “असली दालचीनी” कहा जाता है। यह श्रीलंका से आती है, पतली होती है और इसमें ‘कूमरिन’ की मात्रा बहुत कम होती है। यह सेहत के लिए सबसे अच्छी है।
- कैसिया दालचीनी (Cassia Cinnamon): यह आम तौर पर किराने की दुकानों पर मिलती है। यह सख्त और मोटी होती है। इसमें कूमरिन ज्यादा होता है, इसलिए इसका अधिक सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
दालचीनी का सेवन कैसे करें? (How to Consume)
| तरीका | उपयोग | लाभ |
| दालचीनी का पानी | रातभर पानी में भिगोकर | वजन घटाने और डिटॉक्स के लिए |
| दालचीनी वाला दूध | रात को सोने से पहले | अच्छी नींद और जोड़ों के दर्द के लिए |
| दालचीनी की चाय | सुबह या शाम | सर्दी-जुकाम और इम्युनिटी के लिए |
| पाउडर | दही या ओट्स में छिड़ककर | ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए |
सावधानियां और दुष्प्रभाव (Side Effects and Precautions)
अति हर चीज की बुरी होती है। Dalchini khane ke fayde तभी मिलते हैं जब इसे सही मात्रा में लिया जाए।
- लिवर की समस्या: कैसिया दालचीनी का अधिक सेवन लिवर को डैमेज कर सकता है।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।
- मुंह के छाले: कुछ लोगों को दालचीनी से एलर्जी होती है, जिससे मुंह में जलन हो सकती है।
- ब्लड थिनर: यदि आप खून पतला करने की दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. एक दिन में कितनी दालचीनी खानी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में केवल 1 से 3 ग्राम (आधा चम्मच) दालचीनी पाउडर का ही सेवन करना चाहिए।
2. क्या दालचीनी से पेट की चर्बी कम होती है?
जी हाँ, दालचीनी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर पेट की जिद्दी चर्बी को कम करने में मदद करती है, लेकिन इसके साथ संतुलित आहार और व्यायाम जरूरी है।
3. क्या दालचीनी खाली पेट ले सकते हैं?
हाँ, वजन घटाने और डिटॉक्सिफिकेशन के लिए सुबह खाली पेट दालचीनी का पानी पीना सबसे प्रभावी माना जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दालचीनी न केवल आपके खाने को स्वादिष्ट बनाती है, बल्कि यह शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति भी देती है। डायबिटीज कंट्रोल करने से लेकर त्वचा निखारने तक, dalchini khane ke fayde अनगिनत हैं। हालांकि, हमेशा कोशिश करें कि आप सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon) का ही उपयोग करें।
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
National
आज से नौतपा शुरू, अगले नौ दिन पड़ेगी भीषण गर्मी, लू से बचना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

Nautapa 2026 : 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है। नौतपा का संबंध सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से माना जाता है। मान्यता के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती पर गर्मी का असर सबसे अधिक महसूस होता है। इसी वजह से इन शुरुआती नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है।
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आज से नौतपा शुरू, अगले नौ दिन पड़ेगी भीषण गर्मी
Nautapa 2026 शुरू होते ही कई इलाकों में भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। भारतीय पंचांग के अनुसार ये नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में शामिल होते हैं। इस दौरान लू लगना, शरीर में पानी की कमी, पेट संबंधी समस्याएं और थकान जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
लू से बचना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को ठंडा रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी की पूर्ति करें। वहीं, शरीर की गर्मी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। सही खानपान अपनाकर गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नौतपा में क्या करें और क्या ना करें ?
खाने-पीने में ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन कम लेना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। भारी नॉनवेज भोजन जैसे मटन से भी परहेज करना बेहतर माना जाता है। इसकी जगह हल्का भोजन जैसे दाल, हरी सब्जियां और ताजे फल शामिल किए जा सकते हैं।
चाय और कॉफी का अधिक सेवन करने के बजाय पानी, जूस और अन्य तरल पदार्थों को प्राथमिकता देना चाहिए। साथ ही शराब और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना बेहतर रहता है।

नौतपा के दौरान इन चीजों को डाइट में करें शामिल
- छाछ और लस्सी
- नारियल पानी
- तरबूज, खरबूजा और खीरा
- नींबू पानी
- दही और हल्का भोजन
- मौसमी फल
- अधिक पानी और ORS

गर्मी से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
इसके अलावा गर्मी से बचाव के लिए हल्के और सूती कपड़े पहनना फायदेमंद माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि धूप में बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े, टोपी या अन्य साधनों से ढककर रखना चाहिए।
Lifestyle
उत्तराखंड में हीटवेव का कहर, ऐसे में रखें अपना खास ख्याल, डिहाईड्रेशन को हल्के में ना लें !

Uttarakhand Heat Alert : उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है। तापमान 40 डिग्री तक पहुंच रहा है। जिस कारण लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हीटवेव के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है।
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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हीटवेव का कहर
उत्तराखंड में इस समय जनता हीटवेव से जूझ रही है। अस्पतालों में डिहाईड्रेशन जैसी बीमारी की ओपीडी दिन प्रतिदिन बढ़ने लगी है। जब हीट वेव के विषय में नगर के सहोता हॉस्पिटल के स्वामी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। ऐसे में सावधानी बरतनी जरूरी है।
डिहाईड्रेशन को हल्के में ना लें !
बता दें कि हमारी बॉडी 30 से 35 डिग्री गर्मी बर्दाश्त कर सकती है। इससे ऊपर 40 से 42 डिग्री गर्मी लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है। हीट वेव के चलते लोगों को पानी की कमी हो जाती है जिसके चलते डिहाइड्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को दस्त, उल्टी, जी मिचलाना, होता है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लेना चाहिए।

12:00 से 4:00 के बीच जरूरी ना हो तो घर से बाहर ना निकलें
दोपहर 12:00 से 4:00 बजे तक खुद और अपने बच्चों को घर से न निकलने दें। इमरजेंसी के चलते सर को ढक कर चले और तरल पदार्थ का उपयोग समय-समय पर करते रहें। बाल विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दवाई उपलब्ध या ओआरएस नहीं मिल पाता है तो घर में भी महिलाएं ओआरएस बना सकती हैं।

ऐसे रखें अपना खास ख्याल
ओआरएस बनाने की विधि 1 लीटर पानी में एक मुट्ठी चीनी और पांच चुटकी नमक और नींबू मिलकर ओआरएस बनाकर डिहाइड्रेशन के मरीज को पिला सकते हैं और अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज करा सकते हैं।

कृष्णा हॉस्पिटल की फिजिशियन चिकित्सक सारिका भदोरिया ने बताया कि इस समय हीट वेव को लेकर ओपीडी में इजाफा हुआ है। डिहाइड्रेशन की बीमारी से ग्रस्त लोग अपना ख्याल रखें और नजदीकी चिकित्सकों से परामर्श लेकर ही अपना इलाज कराएं।
Blog
Whisky vs Wine 2026 : कौन बेहतर है? पढ़े पूरी तुलना, फायदे-नुकसान और अंतर…

Whisky vs Wine
शराब पीने वालों के बीच एक आम सवाल होता है – Whisky और Wine में कौन बेहतर है? कुछ लोग व्हिस्की को उसकी स्ट्रॉन्गनेस और तेज़ असर के कारण पसंद करते हैं, जबकि कई लोग वाइन को उसके हल्के स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के कारण चुनते हैं।
असल में Whisky vs Wine की तुलना कई आधारों पर की जा सकती है – जैसे अल्कोहल की मात्रा, स्वाद, स्वास्थ्य प्रभाव, कीमत, पीने का तरीका और शरीर पर असर। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि दोनों में क्या अंतर है और किस स्थिति में कौन बेहतर है।
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Whisky क्या होती है?

Whisky एक distilled alcoholic drink है, जो आमतौर पर जौ, गेहूं, मक्का या राई जैसे अनाज से बनाई जाती है। इसे लकड़ी के बैरल में लंबे समय तक रखा जाता है जिससे इसका स्वाद गहरा और मजबूत हो जाता है।
Whisky की मुख्य विशेषताएं
- अल्कोहल मात्रा: लगभग 40% या उससे अधिक
- स्वाद: तेज़ और स्ट्रॉन्ग
- रंग: हल्का सुनहरा से गहरा भूरा
- पीने का तरीका: Neat, on the rocks या पानी/सोडा के साथ
Whisky कैसे बनती है?
- अनाज को पीसकर तैयार किया जाता है
- उसे फर्मेंट किया जाता है
- फिर डिस्टिलेशन किया जाता है
- लकड़ी के बैरल में एजिंग होती है
- अंत में बोतल में भरा जाता है
Wine क्या होती है?


Wine एक fermented alcoholic drink है, जो मुख्य रूप से अंगूर से बनाई जाती है। यह व्हिस्की की तुलना में हल्की होती है और आमतौर पर खाने के साथ पी जाती है।
Wine की मुख्य विशेषताएं
- अल्कोहल मात्रा: लगभग 8% से 15%
- स्वाद: हल्का और मीठा या खट्टा
- रंग: लाल, सफेद या गुलाबी
- पीने का तरीका: ग्लास में धीरे-धीरे
Wine कैसे बनती है?
- अंगूर को कुचला जाता है
- रस को फर्मेंट किया जाता है
- कुछ समय के लिए स्टोर किया जाता है
- फिल्टर करके बोतल में भरा जाता है
Whisky vs Wine: बेसिक तुलना
| आधार | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| बनाने का तरीका | Distillation | Fermentation |
| मुख्य सामग्री | अनाज | अंगूर |
| अल्कोहल मात्रा | 40%+ | 8–15% |
| स्वाद | तेज़ | हल्का |
| पीने की मात्रा | कम | ज्यादा |
| नशा | जल्दी | धीरे |
Alcohol Content की तुलना
| पेय | औसत Alcohol % | असर |
|---|---|---|
| Whisky | 40–50% | तेज़ नशा |
| Red Wine | 12–15% | मध्यम नशा |
| White Wine | 8–12% | हल्का नशा |
निष्कर्ष:
Whisky में alcohol ज्यादा होता है इसलिए उसका असर जल्दी होता है, जबकि Wine धीरे-धीरे असर करती है।
स्वाद (Taste) की तुलना
| विशेषता | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| स्वाद | स्ट्रॉन्ग | हल्का |
| मिठास | कम | ज्यादा हो सकती है |
| खुशबू | स्मोकी या वुडी | फ्रूटी |
| आफ्टर टेस्ट | लंबा | हल्का |
अगर आपको strong taste पसंद है तो Whisky बेहतर है।
अगर आपको smooth taste पसंद है तो Wine बेहतर है।
स्वास्थ्य के हिसाब से तुलना
| पहलू | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| कैलोरी | ज्यादा | कम |
| Antioxidants | कम | ज्यादा |
| दिल के लिए | सीमित | बेहतर मानी जाती |
| शुगर | कम | ज्यादा हो सकती |
| हैंगओवर | ज्यादा | कम |
Wine के फायदे
- Red wine में antioxidants होते हैं
- दिल की सेहत के लिए बेहतर मानी जाती
- धीरे असर करती है
Whisky के फायदे
- कम sugar
- ठंड में गर्माहट
- कम मात्रा में पी जाती है
शरीर पर असर
| प्रभाव | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| नशा | जल्दी | धीरे |
| डिहाइड्रेशन | ज्यादा | कम |
| सिरदर्द | हो सकता | कम |
| एसिडिटी | कम | ज्यादा हो सकती |
कौन ज्यादा स्ट्रॉन्ग है?
Whisky Wine से कई गुना ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है।
उदाहरण:
- 30 ml Whisky = लगभग 1 ग्लास Wine के बराबर alcohol
इसका मतलब Whisky कम मात्रा में भी ज्यादा असर करती है।
किस मौके पर क्या बेहतर है?
| मौका | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| पार्टी | ✔ | ✔ |
| डिनर | ✖ | ✔ |
| ठंड | ✔ | ✖ |
| रिलैक्स | ✔ | ✔ |
| डेट | ✖ | ✔ |
कीमत की तुलना
| पेय | कीमत |
|---|---|
| Whisky | मध्यम से महंगी |
| Wine | सस्ती से महंगी |
Wine सस्ती भी मिल सकती है जबकि अच्छी Whisky अक्सर महंगी होती है।
नशे की तुलना
| पहलू | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| असर | तेज़ | धीमा |
| कंट्रोल | मुश्किल | आसान |
| समय | कम | ज्यादा |
कैलोरी तुलना
| पेय | कैलोरी (प्रति ग्लास) |
|---|---|
| Whisky | ~100 |
| Wine | ~120 |
हालांकि Wine में कैलोरी ज्यादा हो सकती है, लेकिन Whisky ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है।
पुरुष और महिलाओं के लिए
| व्यक्ति | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| पुरुष | Whisky या Wine |
| महिलाएं | Wine |
| नए पीने वाले | Wine |
| अनुभवी | Whisky |
फायदे और नुकसान
Whisky के फायदे
- स्ट्रॉन्ग
- कम मात्रा में काफी
- ठंड में अच्छी
Whisky के नुकसान
- जल्दी नशा
- लिवर पर असर
- डिहाइड्रेशन
Wine के फायदे
- हेल्थ के लिए बेहतर मानी जाती
- हल्की
- स्वाद अच्छा
Wine के नुकसान
- ज्यादा पी सकते हैं
- शुगर ज्यादा
- एसिडिटी
कौन ज्यादा सुरक्षित है?
अगर सीमित मात्रा में पी जाए तो दोनों सुरक्षित हो सकते हैं।
लेकिन अधिक मात्रा में दोनों ही नुकसानदायक हैं।
कौन बेहतर है?
| स्थिति | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| हेल्थ | Wine |
| नशा | Whisky |
| स्वाद | Wine |
| स्ट्रॉन्ग | Whisky |
| शुरुआत | Wine |
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- सीमित मात्रा में Wine बेहतर विकल्प है
- ज्यादा मात्रा में कोई भी शराब नुकसानदायक है
Whisky या Wine – क्या चुनें?
अगर आप:
- हल्का पीना चाहते हैं → Wine
- स्ट्रॉन्ग चाहते हैं → Whisky
- हेल्थ सोचते हैं → Wine
- जल्दी नशा चाहते हैं → Whisky
निष्कर्ष
Whisky और Wine दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं।
Whisky ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है और जल्दी असर करती है, जबकि Wine हल्की होती है और धीरे असर करती है।
अगर स्वास्थ्य और हल्के नशे की बात करें तो Wine बेहतर मानी जाती है।
अगर स्ट्रॉन्ग ड्रिंक की बात करें तो Whisky बेहतर है।
अंत में सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी शराब का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, तभी वह सुरक्षित माना जाता है।
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