health and life style
इन सर्दियों में बिमारियों को कहें बाय-बाय, अपनाएं ये पांच Health tips

सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है। मौसम बदलने के साथ ही सर्दी के कारण अक्सर लोगों की तबीयत खराब हो जाती है। ऐसे में इस मौसम में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। सर्दियों में शरीर की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है। इसलिए सही खान-पान, योग, अच्छी नींद जैसी आदतें अपनाना सेहत के लिए फायदेमंद है।
सर्दियों में बिमारियों से दूर रहने के लिए पांच Health tips
सर्दियों के मौसम में अगर आप भी खांसी, जुकाम, कफ की समस्या से परेशान रहते हैं तो कुछ ऐसे health tips हैं जिन्हें अपनाकर आप इनसे छुटकारा पा सकते हैं। इसके साथ ही कुछ ऐसी आदतें हैं जिन्हें बदलने से भी आपको लाभ मिल सकता है। ठंड के मौसम में देर रात तक जागना और सुबह देर तक बिस्तर में पड़े रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। क्यूंकि ज्यादा नींद भी शरीर को सुस्त बना देती है। इसिलए सुबह उठने का और रात को साने का एक समय डिसाइड कर लें। इस से आपका रूटीन ठीक होगा और आप सुस्ती महसूस नहीं करेंगे।

सुबह उठकर जरूर करें व्यायाम
ठंड में शरीर को एक्टिव रखने के लिए सुबह के समय व्यायाम, योग या सूर्य नमस्कार से दिन की शुरुवात करें। इससे इम्युनिट अच्छी होगी। सर्दियों में सुबह-सुबह प्राणायाम करने से कफ की समस्या में राहत मिली है। इसके साथ ही आप मार्निंग वॉक के लिए भी जा सकते हैं। इस से सेहत भी बनी रहेगी और दिन की शुरूआत भी एनर्जी से भरी हुई होगी।

ज्यादा देर तक भूखे न रहें
सर्दियों में ज्यादा देर तक भूखा रहना भी बीमारियों को न्योता दे सकता है। इसलिए ज्यादा देर तक खाली पेट न रहें थोड़े थोड़े समयांतराल पर कुछ न कुछ पौष्टिक खाना कहते रहें। वरना कमजोरी के कारण आपका शरीर बीमारियों का शिकार हो सकता है। सबसे जरूरी टिप्स कि हेल्दी खाना खाएं और मौसमी फलों और सब्जियों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।

सर्दियों में नहाना बहुत जरुरी
लोग अक्सर ठंड के मौसम में नहाने से बचने के लिए नए-नए बहाने ढूंढ़ते रहते है। कई लोग ठंड का बहाना देकर सर्दियों में कई दिनों तक नहाते नहीं है। लेकिन ऐसा करने से आप त्वचा रोग जैसे खुजली, फंगल इन्फेक्शन और एलर्जी जैसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। इसलिए सर्दियों में रोज कम से कम एक बार जरूर नहाना चाहिए। आप गुनगुने या गर्म पानी से नहा सकते हैं इस से आपकी थकान भी मिट जाएगी और आप बिमारियों से भी दूर रहेंगे।

रात को खाना खाकर टहलना अच्छी आदत
सर्दियों के आते ही लोग रजाई के अंदर से बाहर निकलना पसंद नहीं करते हैं। रात को खाना खाकर लोग बिस्तर में घुस जाते हैं। लेकिन रात को खाना खा कर तुरंत बिस्तर के अंदर चले जाने से आपके पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सर्दियों में भी रात का खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलने की आदत जरूर डालें। इस से आप हमेशा निरोग और तंदुरुस्त रहेंगे।

Lifestyle
उत्तराखंड में हीटवेव का कहर, ऐसे में रखें अपना खास ख्याल, डिहाईड्रेशन को हल्के में ना लें !

Uttarakhand Heat Alert : उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है। तापमान 40 डिग्री तक पहुंच रहा है। जिस कारण लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हीटवेव के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है।
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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हीटवेव का कहर
उत्तराखंड में इस समय जनता हीटवेव से जूझ रही है। अस्पतालों में डिहाईड्रेशन जैसी बीमारी की ओपीडी दिन प्रतिदिन बढ़ने लगी है। जब हीट वेव के विषय में नगर के सहोता हॉस्पिटल के स्वामी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। ऐसे में सावधानी बरतनी जरूरी है।
डिहाईड्रेशन को हल्के में ना लें !
बता दें कि हमारी बॉडी 30 से 35 डिग्री गर्मी बर्दाश्त कर सकती है। इससे ऊपर 40 से 42 डिग्री गर्मी लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है। हीट वेव के चलते लोगों को पानी की कमी हो जाती है जिसके चलते डिहाइड्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को दस्त, उल्टी, जी मिचलाना, होता है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लेना चाहिए।

12:00 से 4:00 के बीच जरूरी ना हो तो घर से बाहर ना निकलें
दोपहर 12:00 से 4:00 बजे तक खुद और अपने बच्चों को घर से न निकलने दें। इमरजेंसी के चलते सर को ढक कर चले और तरल पदार्थ का उपयोग समय-समय पर करते रहें। बाल विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दवाई उपलब्ध या ओआरएस नहीं मिल पाता है तो घर में भी महिलाएं ओआरएस बना सकती हैं।

ऐसे रखें अपना खास ख्याल
ओआरएस बनाने की विधि 1 लीटर पानी में एक मुट्ठी चीनी और पांच चुटकी नमक और नींबू मिलकर ओआरएस बनाकर डिहाइड्रेशन के मरीज को पिला सकते हैं और अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज करा सकते हैं।

कृष्णा हॉस्पिटल की फिजिशियन चिकित्सक सारिका भदोरिया ने बताया कि इस समय हीट वेव को लेकर ओपीडी में इजाफा हुआ है। डिहाइड्रेशन की बीमारी से ग्रस्त लोग अपना ख्याल रखें और नजदीकी चिकित्सकों से परामर्श लेकर ही अपना इलाज कराएं।
Blog
Whisky vs Wine 2026 : कौन बेहतर है? पढ़े पूरी तुलना, फायदे-नुकसान और अंतर…

Whisky vs Wine
शराब पीने वालों के बीच एक आम सवाल होता है – Whisky और Wine में कौन बेहतर है? कुछ लोग व्हिस्की को उसकी स्ट्रॉन्गनेस और तेज़ असर के कारण पसंद करते हैं, जबकि कई लोग वाइन को उसके हल्के स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के कारण चुनते हैं।
असल में Whisky vs Wine की तुलना कई आधारों पर की जा सकती है – जैसे अल्कोहल की मात्रा, स्वाद, स्वास्थ्य प्रभाव, कीमत, पीने का तरीका और शरीर पर असर। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि दोनों में क्या अंतर है और किस स्थिति में कौन बेहतर है।
Table of Contents
Whisky क्या होती है?

Whisky एक distilled alcoholic drink है, जो आमतौर पर जौ, गेहूं, मक्का या राई जैसे अनाज से बनाई जाती है। इसे लकड़ी के बैरल में लंबे समय तक रखा जाता है जिससे इसका स्वाद गहरा और मजबूत हो जाता है।
Whisky की मुख्य विशेषताएं
- अल्कोहल मात्रा: लगभग 40% या उससे अधिक
- स्वाद: तेज़ और स्ट्रॉन्ग
- रंग: हल्का सुनहरा से गहरा भूरा
- पीने का तरीका: Neat, on the rocks या पानी/सोडा के साथ
Whisky कैसे बनती है?
- अनाज को पीसकर तैयार किया जाता है
- उसे फर्मेंट किया जाता है
- फिर डिस्टिलेशन किया जाता है
- लकड़ी के बैरल में एजिंग होती है
- अंत में बोतल में भरा जाता है
Wine क्या होती है?


Wine एक fermented alcoholic drink है, जो मुख्य रूप से अंगूर से बनाई जाती है। यह व्हिस्की की तुलना में हल्की होती है और आमतौर पर खाने के साथ पी जाती है।
Wine की मुख्य विशेषताएं
- अल्कोहल मात्रा: लगभग 8% से 15%
- स्वाद: हल्का और मीठा या खट्टा
- रंग: लाल, सफेद या गुलाबी
- पीने का तरीका: ग्लास में धीरे-धीरे
Wine कैसे बनती है?
- अंगूर को कुचला जाता है
- रस को फर्मेंट किया जाता है
- कुछ समय के लिए स्टोर किया जाता है
- फिल्टर करके बोतल में भरा जाता है
Whisky vs Wine: बेसिक तुलना
| आधार | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| बनाने का तरीका | Distillation | Fermentation |
| मुख्य सामग्री | अनाज | अंगूर |
| अल्कोहल मात्रा | 40%+ | 8–15% |
| स्वाद | तेज़ | हल्का |
| पीने की मात्रा | कम | ज्यादा |
| नशा | जल्दी | धीरे |
Alcohol Content की तुलना
| पेय | औसत Alcohol % | असर |
|---|---|---|
| Whisky | 40–50% | तेज़ नशा |
| Red Wine | 12–15% | मध्यम नशा |
| White Wine | 8–12% | हल्का नशा |
निष्कर्ष:
Whisky में alcohol ज्यादा होता है इसलिए उसका असर जल्दी होता है, जबकि Wine धीरे-धीरे असर करती है।
स्वाद (Taste) की तुलना
| विशेषता | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| स्वाद | स्ट्रॉन्ग | हल्का |
| मिठास | कम | ज्यादा हो सकती है |
| खुशबू | स्मोकी या वुडी | फ्रूटी |
| आफ्टर टेस्ट | लंबा | हल्का |
अगर आपको strong taste पसंद है तो Whisky बेहतर है।
अगर आपको smooth taste पसंद है तो Wine बेहतर है।
स्वास्थ्य के हिसाब से तुलना
| पहलू | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| कैलोरी | ज्यादा | कम |
| Antioxidants | कम | ज्यादा |
| दिल के लिए | सीमित | बेहतर मानी जाती |
| शुगर | कम | ज्यादा हो सकती |
| हैंगओवर | ज्यादा | कम |
Wine के फायदे
- Red wine में antioxidants होते हैं
- दिल की सेहत के लिए बेहतर मानी जाती
- धीरे असर करती है
Whisky के फायदे
- कम sugar
- ठंड में गर्माहट
- कम मात्रा में पी जाती है
शरीर पर असर
| प्रभाव | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| नशा | जल्दी | धीरे |
| डिहाइड्रेशन | ज्यादा | कम |
| सिरदर्द | हो सकता | कम |
| एसिडिटी | कम | ज्यादा हो सकती |
कौन ज्यादा स्ट्रॉन्ग है?
Whisky Wine से कई गुना ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है।
उदाहरण:
- 30 ml Whisky = लगभग 1 ग्लास Wine के बराबर alcohol
इसका मतलब Whisky कम मात्रा में भी ज्यादा असर करती है।
किस मौके पर क्या बेहतर है?
| मौका | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| पार्टी | ✔ | ✔ |
| डिनर | ✖ | ✔ |
| ठंड | ✔ | ✖ |
| रिलैक्स | ✔ | ✔ |
| डेट | ✖ | ✔ |
कीमत की तुलना
| पेय | कीमत |
|---|---|
| Whisky | मध्यम से महंगी |
| Wine | सस्ती से महंगी |
Wine सस्ती भी मिल सकती है जबकि अच्छी Whisky अक्सर महंगी होती है।
नशे की तुलना
| पहलू | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| असर | तेज़ | धीमा |
| कंट्रोल | मुश्किल | आसान |
| समय | कम | ज्यादा |
कैलोरी तुलना
| पेय | कैलोरी (प्रति ग्लास) |
|---|---|
| Whisky | ~100 |
| Wine | ~120 |
हालांकि Wine में कैलोरी ज्यादा हो सकती है, लेकिन Whisky ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है।
पुरुष और महिलाओं के लिए
| व्यक्ति | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| पुरुष | Whisky या Wine |
| महिलाएं | Wine |
| नए पीने वाले | Wine |
| अनुभवी | Whisky |
फायदे और नुकसान
Whisky के फायदे
- स्ट्रॉन्ग
- कम मात्रा में काफी
- ठंड में अच्छी
Whisky के नुकसान
- जल्दी नशा
- लिवर पर असर
- डिहाइड्रेशन
Wine के फायदे
- हेल्थ के लिए बेहतर मानी जाती
- हल्की
- स्वाद अच्छा
Wine के नुकसान
- ज्यादा पी सकते हैं
- शुगर ज्यादा
- एसिडिटी
कौन ज्यादा सुरक्षित है?
अगर सीमित मात्रा में पी जाए तो दोनों सुरक्षित हो सकते हैं।
लेकिन अधिक मात्रा में दोनों ही नुकसानदायक हैं।
कौन बेहतर है?
| स्थिति | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| हेल्थ | Wine |
| नशा | Whisky |
| स्वाद | Wine |
| स्ट्रॉन्ग | Whisky |
| शुरुआत | Wine |
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- सीमित मात्रा में Wine बेहतर विकल्प है
- ज्यादा मात्रा में कोई भी शराब नुकसानदायक है
Whisky या Wine – क्या चुनें?
अगर आप:
- हल्का पीना चाहते हैं → Wine
- स्ट्रॉन्ग चाहते हैं → Whisky
- हेल्थ सोचते हैं → Wine
- जल्दी नशा चाहते हैं → Whisky
निष्कर्ष
Whisky और Wine दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं।
Whisky ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है और जल्दी असर करती है, जबकि Wine हल्की होती है और धीरे असर करती है।
अगर स्वास्थ्य और हल्के नशे की बात करें तो Wine बेहतर मानी जाती है।
अगर स्ट्रॉन्ग ड्रिंक की बात करें तो Whisky बेहतर है।
अंत में सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी शराब का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, तभी वह सुरक्षित माना जाता है।
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गलत तरीके से पानी पीने से हो सकते हैं ये नुकसान, अपनाएं ये तरीके…

How To Drink Water: खड़े होकर या बैठकर, कैसे पीना चाहिए पानी ..
How To Drink Water: मानव शरीर का ज्यादातर हिस्सा पानी से बना होता है. औसतन एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की मात्र होती है. इसलिए ये हमारे जीवन के लिए सबसे जरुरी चीजों में से एक है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानी पीने का सही तरीका क्या है ? गलत तरीके से पानी पीने से हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुँचता है. इसलिए हमें पानी पीने का सही तरीका मालूम होना चाहिए. चलिए हम आपको बताते हैं कि गलत तरीके से पानी पीने के क्या नुक्सान हो सकते हैं, और हमें स्वस्थ रहने के लिए पानी पीने का कौन सा तरीका अपनाना चाहिए.
मुख्य बिंदु
गलत तरीके से पानी पीने के नुकसान
हमारे शरीर को गलत तरीके से पानी पीने से कई तरह के नुकसान होते हैं. ज्यादातर लोगों को पानी पीने का सही तरीका मालूम नहीं होता है, जिस वजह से उन्हें रोजमर्रा के जीवन में काफी दिक्कतों का सामना करना पढता है. गलत तरीके से पानी पीने से आपको ये नुकसान हो सकते हैं.
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- डाइजेशन कमजोर हो सकता है
- जब आप बहुत ज्यादा या बहुत ठंडा पानी अचानकपीते हैं, तो पाचन रस पतले हो जाते हैं. इससे खाना ठीक से नहीं पच पाता और गैस, अपच या भारीपन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. खासकर खाना खाते समय ज्यादा पानी पीना डाइजेशन को और खराब कर सकता है.
- पेट फूलने और गैस की समस्या
- तेजी से या खड़े होकर पानी पीने से हवा पेट में चली जाती है. इसका नतीजा ये होता है कि पेट फूलने लगता है और गैस की शिकायत बढ़ जाती है. कई लोगों को पानी पीने के बाद तुरंत असहजता महसूस होने लगती है.
- किडनी पर पड़ सकता है असर
- बार-बार जरूरत से ज्यादा पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इससे शरीर के जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल सकते हैं. लंबे समय तक ऐसा करने पर किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है.
- हार्ट से जुड़ी दिक्कतें
- एक साथ बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर में तरल संतुलन बिगड़ सकता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है और हार्ट को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है. खासतौर पर हृदय रोग से पीड़ित लोगों को पानी पीने में सावधानी बरतनी चाहिए.
पानी पीना हमारे शरीर के लिए क्यों है जरूरी? how to drink water properly
पानी हमारे शरीर की सबसे बुनियादी जरूरतों में से एक है. मानव शरीर का लगभग 60–70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि पानी के बिना शरीर की कल्पना ही नहीं की जा सकती. सही मात्रा में पानी पीने से शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से चलती रहती हैं.
शरीर में पानी की भूमिका
पानी शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है और पसीने के जरिए शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है. इसके अलावा, ये पोषक तत्वों को कोशिकाओं तक पहुंचाने और शरीर के अंगों को सही तरीके से काम करने में अहम भूमिका निभाता है. शरीर में पानी की कमी होते ही थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं महसूस होने लगती हैं.
डाइजेशन, स्किन, किडनी और ब्रेन के लिए जरूरी
- डाइजेशन: पर्याप्त पानी पीने से भोजन को पचाने में आसानी होती है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है.
- स्किन: पानी त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखता है, जिससे स्किन हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती .
- किडनी: किडनी शरीर से गंदगी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है, जिसमें पानी की भूमिका बेहद अहम होती है.
- ब्रेन: दिमाग के सही काम करने के लिए भी पानी जरूरी है। पानी की कमी से एकाग्रता कम हो सकती है और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शरीर को सही तरह से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना बेहद जरूरी है. साथ ही पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है, फिर भी नियमित रूप से पानी पीते रहना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है.
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कैसे पीना चाहिए पानी, क्या है सही तरीका ? (How To Drink Water)
अब सवाल ये है कि अगर गलत तरीके से पानी पीने के इतने नुकसान हैं तो फिर आखिर सही तरीका क्या है. चलिए जानते हैं पानी पीने का सही तरीका, जिस से आप अपने शरीर को नुकसान पहुँचाने से बच सकते हैं.
- बैठकर पानी पिएं
हमेशा आराम से बैठकर छोटे-छोटे घूंट में पानी पिएं. खड़े होकर पानी पीने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है. - धीरे-धीरे और घूंट-घूंट करके पिएं
एक साथ गटकने की बजाय धीरे-धीरे पिएं. इससे पानी सही तरीके से पचता है और शरीर बेहतर तरीके से अवशोषित करता है. - सुबह खाली पेट पानी पिएं
सुबह उठकर 1–2 गिलास गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है. इससे शरीर डिटॉक्स होता है और पाचन तंत्र सक्रिय होता है. - खाने के तुरंत बाद ज्यादा पानी न पिएं
खाना खाने के तुरंत बाद अधिक पानी पीने से पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. खाने के 30–40 मिनट बाद पानी पीना बेहतर होता है. - बहुत ठंडा पानी न पिएं
ज्यादा ठंडा पानी पाचन को धीमा कर सकता है. सामान्य या हल्का गुनगुना पानी बेहतर विकल्प है. - प्यास लगने का इंतजार न करें
दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें. प्यास लगना इस बात का संकेत है कि शरीर पहले से ही डिहाइड्रेट होने लगा है.
पानी पीने से जुड़े आम मिथक
आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर पानी को लेकर कई तरह की बातें वायरल होती रहती हैं. आपको अलग- अलग चैनलों पर नई-नई सलाहें देखने को मिल जाएंगी, लेकिन हर बात सच नहीं होती. आइए जानते हैं कुछ आम मिथक:
ज्यादा पानी = ज्यादा हेल्थ
बहुत से लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, उतने ज्यादा हेल्दी रहेंगे.
सच क्या है – जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है. इससे शरीर में सोडियम का स्तर कम हो सकता है (हाइपोनेट्रेमिया), जो गंभीर स्थिति बन सकती है. सही मात्रा आपकी उम्र, वजन, मौसम और गतिविधि पर निर्भर करती है.
ठंडा पानी हमेशा नुकसानदेह होता है
अक्सर कहा जाता है कि ठंडा पानी पीना सेहत के लिए हानिकारक है.
सच क्या है – बहुत ज्यादा ठंडा पानी अचानक पीना कुछ लोगों में गले या पाचन पर असर डाल सकता है, लेकिन सामान्य रूप से ठंडा पानी हर किसी के लिए हानिकारक नहीं है. फिर भी, सामान्य या हल्का गुनगुना पानी शरीर के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है.
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प्यास लगे बिना पानी नहीं पीना चाहिए
कुछ लोग मानते हैं कि जब तक प्यास न लगे, पानी नहीं पीना चाहिए.
सच क्या है – प्यास लगना इस बात का संकेत है कि शरीर में पानी की कमी शुरू हो चुकी है. इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना बेहतर है, खासकर गर्म मौसम या व्यायाम के दौरान.
पानी पीने से जुड़ी हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह
डॉक्टर क्या कहते हैं
- ज्यादातर डॉक्टर सलाह देते हैं कि व्यक्ति को अपनी बॉडी की जरूरत के अनुसार पानी पीना चाहिए.
- आमतौर पर 7–8 गिलास पानी की सलाह दी जाती है, लेकिन यह एक सामान्य गाइडलाइन है, फिक्स नियम नहीं.
- यूरिन का हल्का पीला या लगभग साफ रंग इस बात का संकेत है कि आप पर्याप्त पानी पी रहे हैं.
- किडनी, हार्ट या लिवर के मरीजों को पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह से तय करनी चाहिए.
आयुर्वेदिक नजरिया
- आयुर्वेद के अनुसार पानी हमेशा बैठकर और छोटे-छोटे घूंट में पीना चाहिए.
- गुनगुना पानी पाचन अग्नि को बेहतर बनाए रखने में सहायक माना जाता है.
- सुबह खाली पेट पानी पीना (उषापान) शरीर की शुद्धि के लिए लाभकारी बताया गया है.
- भोजन के तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी पीना पाचन शक्ति को कमजोर कर सकता है.
पानी कैसे पीना चाहिए ? how to drink water
पानी हमेशा शांति से बैठकर पीना चाहिए .
क्या खड़े होकर पानी पीने से शरीर को नुकसान होता है.
हाँ, खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए इससे शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है.
दिन में कितने गिलास पानी पीना चाहिए?
आमतौर पर 7–8 गिलास पानी की सलाह दी जाती है, लेकिन यह व्यक्ति की उम्र, वजन, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है.
पानी की कमी के लक्षण क्या हैं?
थकान, चक्कर आना, सिरदर्द, सूखा मुंह, गहरे रंग का यूरिन और कमजोरी डिहाइड्रेशन के सामान्य लक्षण हैं.
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