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मंत्री गणेश जोशी ने असम कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारियों के साथ की बैठक, असम की मंडियों में पहुंचेगा हर्षिल का सेब

उत्तरकाशी – कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने कहा, उत्तरकाशी जिले के हर्षिल में उत्पादित सेब का व्यापार असम की मंडियों में किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने असम कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारियों के साथ सेब का व्यापार करने के लिए विस्तार से चर्चा की।
गुवाहाटी दौरे पर रविवार को कृषि मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखंड के सेब को असम तक पहुंच बढ़ाने के लिए मंडी विपणन बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक की। कहा, उत्तरकाशी के हर्षिल का सेब कोलकाता तक पहुंचता है। इसे असम की मंडियों में पहुंचाया जा सकता है। यदि असम उत्तराखंड के साथ सेब का व्यापार करता है, तो इसके लिए प्रदेश सरकार सहयोग करने के लिए तैयार है।
कृषि विपणन बुनियादी ढांचे चर्चा
उन्होंने असम राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज बरुआ और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तेज प्रसाद भुसाल से असम की फल-सब्जी मंडियों की कार्यप्रणाली और कृषि के क्षेत्र में उर्वरक क्षमताओं, मार्केटिंग, उत्पादन, फसल कटाई के उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन की जानकारी ली। इसके अलावा दोनों राज्यों में कृषि विपणन बुनियादी ढांचे चर्चा की।
मंत्री को असम के अधिकारियों ने अवगत कराया कि असम कृषि विपणन बोर्ड में 700 कर्मचारी और 42 बोर्ड के सदस्य हैं। असम के गोलपाड़ा जिले के ड्रोंगगिरी क्षेत्र केले का बहुत बड़ा उत्पादक है। जहां देश के कई राज्यों के लिए केले भेजे जाते हैं। इस मौके पर मंडी समिति देहरादून के सचिव विजय थपलियाल, असम कृषि विपणन बोर्ड के उप निदेशक पी मुदिर मौजूद थे।
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रिजर्व फॉरेस्ट में मंत्री जी के बेटे की शादी को लेकर बवाल, सफाई में बोले मंत्री- पहले बता देते तो कहीं और करते शादी

Haridwar News : राजाजी टाइगर रिजर्व के रिजर्व फॉरेस्ट में कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी विवादों में आ गई। हरिद्वार रेंज स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर में शादी के बड़े स्तर पर आयोजन को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
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रिजर्व फॉरेस्ट में मंत्री जी के बेटे की शादी को लेकर बवाल
शनिवार को आयोजन की भव्य तैयारियां की गई थी और पंडाल, स्टेज, कूलर और जेनरेटर इत्यादि लगाए गए थे। परमिशन को लेकर मामले ने तूल पकड़ा तो आनन-फानन में पंडाल समेत सारा सामान हटाया गया और पार्क प्रशासन की ओर से मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।
पहले बता देते तो कहीं और करते शादी – मंत्री खजान दास
रविवार दोपहर को मंत्री खजान दास भी सुरेश्वरी देवी मंदिर पहुंचे। उनके बेटे के साथ वधू पक्ष भी आए और सीमित रूप से केवल पूजा अर्चना व फेरों की रस्म अदा की गई। मंत्री खजान दास ने बताया कि वो कई सालों से सुरेश्वरी देवी मंदिर आ रहे हैं। बेटे की तबियत भी मां सुरेश्वरी देवी के आशीर्वाद से ठीक हुई तो, उनकी इच्छा थी कि मंदिर परिसर में ही शादी की जाए।

लेकिन उन्हें अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी थी कि मंदिर में शादी के आयोजन की परमिशन लेनी पड़ेगी। कुछ दिन पहले भी वो मंदिर आए थे, उस समय राजाजी के अधिकारी भी उनके साथ थे, वन निदेशक ने शादी के आयोजन की हामी भी भरी ही। लेकिन ऐसा नहीं है कि मंदिर समिति की अनुमति से उनके द्वारा शादी की तैयारी की जा रही थी, निदेशक वन ने भी हामी भरी थी।
बेटे शादी पर आरोप प्रत्यारोप हैं राजनीतिक साजिश
कैबिनेट मंत्री ने आरोप प्रत्यारोप को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि ये दुखद और चिंताजनक विषय है। वो वन नियमों के बारे में सब जानते हैं कि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। अगर वन निदेशक उन्हें पहले ही बता देते तो वो कहीं और शादी का आयोजन कर लेते।
वहीं सुरेश्वरी देवी मंदिर समिति के महामंत्री आशीष मारवाड़ी ने बताया कि मंत्री खजान दास की इच्छा थी कि
मां भगवती के दरबार में वो अपने बेटे की शादी पूजा और भंडारे का आयोजन करें। बड़े स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा था। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा अगर कोई कार्रवाई की गई है तो वो कर सकते हैं, उनका जंगल है लेकिन शादी के आयोजन को लेकर गलत प्रचार किया गया। ये कार्यक्रम इतने बड़े स्तर पर नहीं था।
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28 अप्रैल को बीजेपी निकालेगी देहरादून में विशाल मशाल जुलूस, महिला आरक्षण का विरोध करने वाले दलों को देगी जवाब

Uttarakhand Politics : 28 अप्रैल को राजधानी देहरादून में विधानसभा का विशेष सत्र होने जा रहा है। इसी दिन बीजेपी भी देहरादून में विशाल मशाल जुलूस निकालने जा रही है।
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28 अप्रैल को बीजेपी निकालेगी देहरादून में विशाल मशाल जुलूस
महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या ने कहा है कि महिला आरक्षण के विरोध में विपक्षी दलों के रुख से महिलाओं में व्यापक आक्रोश है। इस आक्रोश को अभिव्यक्ति देने के लिए 28 अप्रैल को एक दिन के विधानसभा सत्र के अलावा उसी दिन शाम को देहरादून में विशाल मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
महिलाओं को नहीं मिला उनका लोकतांत्रिक अधिकार
रविवार को प्रदेश पार्टी कार्यालय पर आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि विपक्षी दलों के विरोध के कारण महिलाओं को उनका लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिल पाया। मंत्री ने बताया कि इन जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देने और राज्य की आवाज को स्पष्ट रूप से सामने रखने के उद्देश्य से 28 अप्रैल को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र आहूत किया गया है।

उसी दिन शाम 6 बजे महिलाओं और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस विपक्षी दलों की महिला विरोधी मानसिकता के खिलाफ आयोजित किया जाएगा।
महिला आरक्षण का विरोध करने वाले दलों को दगी जवाब
रेखा आर्य ने पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ मशाल रैली की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र और मशाल रैली में उत्तराखंड की महिलाओं की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाया जाना चाहिए, ताकि महिला आरक्षण का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों को स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
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उत्तराखंड में होने जा रहा है कुछ बड़ा, 28 अप्रैल को बुलाया गया विधानसभा का विशेष सत्र, अधिसूचना जारी

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में विधानसभा के विशेष सत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है। 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया गया है। जिसके बाद प्रदेश में एक बार फिर चर्चाओं के बाजार गर्म हो गए हैं।
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उत्तराखंड में 28 अप्रैल को बुलाया गया विशेष सत्र
उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। सीएम धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि इस सत्र को लेकर पहले जो चर्चाएं सामने आ रही थीं, अब उन पर आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया गया है।
उत्तराखंड में विधानसभा के विशेष सत्र की अधिसूचना जारी
उत्तराखंड में विधानसभा के विशेष सत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है। 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया गया है। जिसमें महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर उत्तराखंड विधानसभा में चर्चा होगी। विशेष सत्र का आदेश प्रमुख सचिव सहदेव सिंह ने जारी किया।
विशेष सत्र हंगामेदार रहने के आसार
विशेष सत्र में हंगामा होने के आसार हैं। विपक्ष ने इसके संकेत पहले ही दे दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर महिला आरक्षण को लेकर बीजेपी इतनी ही गंभीर है तो उत्तराखंड की 70 विधानसभाओं में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधत्व सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि अगर उनकी श्रीनगर विधानसभा सीट अगर महिला आरक्षण की जद में आ रही है तो वो उस सीट को खुशी-खुशी महिलाओं के लिए छोड़ देंगे और उनके घर से भी कोई महिला चुनाव नहीं लड़ेगी।

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