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भारत में Nipah Virus की वापसी –लक्षण और बचाव की पूरी जानकारी

कोलकाता मे Nipah Virus के नए मामलें
भारत एक बार फिर स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के केंद्र में है, जहां देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में Nipah Virus (NiV) के नए मामलों ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आए संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। हालांकि राहत की बात यह है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निरंतर सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको निपाह वायरस के वर्तमान प्रकोप, इसके इतिहास, इससे जुड़े खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
1. ताजा स्थिति: पश्चिम बंगाल में निपाह की दस्तक (2025-26)
हाल ही में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से निपाह वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह घटना तब प्रकाश में आई जब दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में दो स्वास्थ्य कर्मियों (नर्स) में संदिग्ध लक्षण देखे गए।
क्या है पूरा मामला?
जनवरी 2026 की शुरुआत में, बारासात (कोलकाता के पास) के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले दो नर्सों (एक पुरुष और एक महिला) की तबीयत अचानक बिगड़ी। उनमें तेज बुखार और दिमागी सूजन (एन्सेफलाइटिस) के लक्षण पाए गए। 13 जनवरी 2026 को पुणे स्थित ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (NIV) ने इन नमूनों में निपाह वायरस की पुष्टि की।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मामला सामने आते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर स्थिति की समीक्षा की और एक ‘नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम’ को राज्य में भेजा।
- कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग: स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लगभग 200 लोगों (जिनमें परिवार वाले और अस्पताल के कर्मचारी शामिल थे) की पहचान की और उनकी जांच की। राहत की बात यह रही कि सभी संपर्कों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वायरस का सामुदायिक फैलाव (Community Transmission) नहीं हुआ है।
- वर्तमान स्थिति: 27 जनवरी 2026 को ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (NCDC) ने घोषणा की कि दिसंबर के बाद से कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
2. केरल में भी रहा वायरस का असर (2025)
पश्चिम बंगाल से पहले, वर्ष 2025 के मध्य में दक्षिण भारतीय राज्य केरल में भी निपाह वायरस ने अपना कहर बरपाया था। जुलाई 2025 के आसपास केरल के मलप्पुरम और कोझिकोड जिलों में संक्रमण के मामले देखे गए थे।
- केरल में 2025 के दौरान कुल 4 मामले सामने आए, जिनमें से दुर्भाग्यवश 2 लोगों की मृत्यु हो गई।
- केरल सरकार ने पिछले अनुभवों (2018, 2019, 2021, 2023) से सीखते हुए बहुत तेजी से कंटेनमेंट जोन बनाए और स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और WHO का बयान
भारत में आए इन इक्का-दुक्का मामलों ने पड़ोसी देशों को भी सतर्क कर दिया है।
- स्क्रीनिंग: थाईलैंड, सिंगापुर, नेपाल, म्यानमार और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत से आने वाले यात्रियों के लिए हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी है।
- WHO का आश्वासन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 जनवरी 2026 को जारी अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत से इस वायरस के वैश्विक स्तर पर फैलने का जोखिम “कम” (Low) है। WHO ने भारत पर किसी भी तरह के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता को खारिज कर दिया है, क्योंकि भारत के पास इस वायरस को ट्रैक करने और रोकने की मजबूत क्षमता मौजूद है।
4. आखिर क्या है Nipah Virus? (Understanding Nipah Virus)
निपाह वायरस (NiV) एक ज़ूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus) है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह पैरामिक्सोविरिडे (Paramyxoviridae) परिवार से ताल्लुक रखता है।
मुख्य वाहक (Natural Host)
इस वायरस का प्राकृतिक वाहक फ्रूट बैट्स (Fruit Bats) यानी फल खाने वाले चमगादड़ हैं, जिन्हें ‘फ्लाइंग फॉक्स’ भी कहा जाता है। ये चमगादड़ बिना बीमार हुए अपने शरीर में वायरस को ले जा सकते हैं और अपने मल, मूत्र या लार के जरिए इसे फैला सकते हैं।
इतिहास
- 1998 (मलेशिया): निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के ‘सुंगई निपाह’ गांव में हुई थी। वहां यह सूअरों के जरिए इंसानों में फैला था।
- भारत में इतिहास: भारत में इसका पहला प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में देखा गया था। इसके बाद 2007 में नादिया (पश्चिम बंगाल) और फिर 2018 से केरल में इसके मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

5. यह कैसे फैलता है? (Transmission)
निपाह वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से तीन तरीकों से होता है:
- जानवरों से इंसानों में: यदि कोई व्यक्ति संक्रमित चमगादड़ या सूअर के सीधे संपर्क में आता है, या उनके मल-मूत्र से दूषित चीजों को छूता है।
- दूषित भोजन: यह भारत और बांग्लादेश में संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है। चमगादड़ अक्सर खजूर के पेड़ों से रस पीते हैं या फलों को कुतरते हैं। यदि कोई इंसान कच्चा खजूर का रस (ताड़ी) पीता है या चमगादड़ द्वारा कुतरा हुआ फल खाता है, तो वह संक्रमित हो सकता है।
- इंसान से इंसान में: यह आमतौर पर अस्पतालों में या परिवार के सदस्यों के बीच होता है जब वे किसी संक्रमित मरीज की देखभाल कर रहे होते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके शारीरिक तरल पदार्थों (Blood, Saliva) के संपर्क में आने से यह स्वस्थ व्यक्ति को बीमार कर सकता है।
6. लक्षण और पहचान (Symptoms)
संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 4 से 14 दिन (Incubation Period) लग सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में यह समय 45 दिनों तक भी हो सकता है।
शुरुआती लक्षण:
- तेज बुखार और बदन दर्द।
- सिरदर्द और भारीपन।
- खांसी और गले में खराश।
- सांस लेने में तकलीफ।
- उल्टी और पेट दर्द।
गंभीर लक्षण (खतरे की घंटी):
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, वायरस दिमाग पर हमला करता है, जिसे ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस’ (Acute Encephalitis) कहते हैं। इसके लक्षण हैं:
- चक्कर आना और भ्रम की स्थिति (Drowsiness/Confusion)।
- दौरे पड़ना (Seizures)।
- 24 से 48 घंटों के भीतर मरीज का कोमा में चले जाना।
मृत्यु दर: निपाह वायरस की मृत्यु दर (Case Fatality Rate) बहुत अधिक है, जो प्रकोप की गंभीरता के आधार पर 40% से 75% तक हो सकती है। यही कारण है कि इसे कोविड-19 से भी अधिक घातक माना जाता है, भले ही यह कोविड जितना संक्रामक नहीं है।
7. इलाज और वैक्सीन (Treatment & Vaccine)
यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशिष्ट दवा या वैक्सीन (टीका) उपलब्ध नहीं है।
- सपोर्टिव केयर: इलाज का मुख्य आधार ‘सपोर्टिव केयर’ है। यानी डॉक्टर मरीज के लक्षणों का इलाज करते हैं—बुखार कम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना, और सांस लेने में दिक्कत होने पर वेंटिलेटर का उपयोग करना।
- मोनोक्लोनल एंटीबॉडी: कुछ मामलों में (जैसे केरल में 2018 और 2024 में), प्रयोगात्मक तौर पर ‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी’ (m102.4) का उपयोग किया गया है, लेकिन यह अभी भी ट्रायल के चरण में है और हर जगह उपलब्ध नहीं है।
8. बचाव ही सुरक्षा है: क्या करें और क्या न करें
चूंकि इसका कोई पक्का इलाज नहीं है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपाय निम्नलिखित हैं:
खान-पान में सावधानी:
- फलों की जांच: जमीन पर गिरे हुए फल कभी न खाएं। बाजार से लाए गए फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं और छीलें।
- दांतों के निशान: अगर किसी फल पर पक्षी या जानवर के दांतों/नाखूनों के निशान दिखें, तो उसे तुरंत फेंक दें।
- खजूर का रस: खुले बर्तनों में इकट्ठा किया गया कच्चा खजूर का रस या ताड़ी पीने से पूरी तरह बचें। इसे उबालकर पीना सुरक्षित है।
व्यक्तिगत स्वच्छता:
- अपने हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं, खासकर भोजन करने से पहले और बाद में।
- अगर आप अस्पताल जा रहे हैं, तो N95 मास्क का प्रयोग करें।
बीमारों से दूरी:
- बुखार और खांसी से पीड़ित व्यक्तियों के बेहद करीब जाने से बचें।
- अगर किसी क्षेत्र में निपाह का प्रकोप है, तो वहां की यात्रा टालें।
- मृत जानवरों (विशेषकर चमगादड़ और सूअर) को न छुएं।
9. निष्कर्ष: डरें नहीं, जागरूक रहें
वर्तमान परिदृश्य में, पश्चिम बंगाल और केरल दोनों ही जगहों पर स्वास्थ्य तंत्र ने सराहनीय कार्य किया है। भारत सरकार की सर्विलांस प्रणाली (Surveillance System) मजबूत है और संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान की जा रही है।
आम जनता के लिए संदेश साफ है—घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। निपाह वायरस हवा में कोरोना की तरह आसानी से नहीं फैलता है। यह केवल बहुत नजदीकी संपर्क या दूषित भोजन से फैलता है। इसलिए, अपनी स्वच्छता का ध्यान रखें, फलों को धोकर खाएं और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें।
यदि आपको या आपके परिवार में किसी को तेज बुखार के साथ दिमागी उलझन या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
“सतर्कता ही सुरक्षा है, और जागरूकता ही बचाव।”
(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और स्वास्थ्य संगठनों (WHO/NCDC) की रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी चिकित्सीय सलाह के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श करें।)
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दालचीनी खाने के फायदे: सेहत और सुंदरता के लिए एक चमत्कारी औषधि…

dalchini khane ke fayde
भारतीय व्यंजनों में अपनी महक बिखेरने वाली दालचीनी (Cinnamon) केवल एक मसाला नहीं है, बल्कि आयुर्वेद की एक अनमोल धरोहर है। इसे अंग्रेजी में ‘Cinnamon’ और वैज्ञानिक भाषा में Cinnamomum verum कहा जाता है। सदियों से इसका उपयोग न केवल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए, बल्कि कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी किया जा रहा है।
इस विस्तृत लेख में हम dalchini khane ke fayde, इसके औषधीय गुण, उपयोग के तरीके और सावधानियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Table of Contents
दालचीनी के औषधीय गुण (Nutritional Value of Cinnamon)
दालचीनी की छाल में कई प्रकार के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित तत्व होते हैं:
- एंटीऑक्सीडेंट्स: पॉलीफेनोल्स की प्रचुर मात्रा।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी: शरीर की सूजन कम करने वाले गुण।
- मिनरल्स: कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम।
- विटामिन्स: विटामिन A, K और C।

1. डायबिटीज में दालचीनी खाने के फायदे (Cinnamon for Diabetes)
आज के समय में डायबिटीज एक वैश्विक महामारी बन चुकी है। Dalchini khane ke fayde में सबसे प्रमुख ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करना: दालचीनी शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाती है, जिससे कोशिकाएं शुगर का बेहतर उपयोग कर पाती हैं।
- फास्टिंग शुगर कंट्रोल: शोध बताते हैं कि रोजाना चुटकी भर दालचीनी का सेवन फास्टिंग ब्लड शुगर को 10-20% तक कम कर सकता है।
2. वजन घटाने में सहायक (Cinnamon for Weight Loss)
यदि आप मोटापे से परेशान हैं, तो दालचीनी आपका सबसे अच्छा साथी हो सकती है।
- मेटाबॉलिज्म बूस्टर: यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है।
- भूख पर नियंत्रण: यह भूख को दबाने में मदद करती है, जिससे आप ‘बिंज ईटिंग’ (जरूरत से ज्यादा खाना) से बच जाते हैं।
उपयोग विधि: सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में दालचीनी पाउडर और शहद मिलाकर पिएं।
3. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभ (Cinnamon for Heart Health)
हृदय रोगों का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर है। दालचीनी इन दोनों पर प्रभावी रूप से काम करती है।
- यह शरीर से LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करती है।
- यह रक्त संचार (Blood Circulation) को बेहतर बनाती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।
4. महिलाओं के लिए दालचीनी के फायदे (Benefits for Women’s Health)
महिलाओं के लिए दालचीनी का सेवन विशेष रूप से फायदेमंद होता है:
- PCOS/PCOD: यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करती है।
- मासिक धर्म का दर्द: पीरियड्स के दौरान होने वाले असहनीय दर्द और ऐंठन (Cramps) को कम करने के लिए दालचीनी की चाय रामबाण है।
5. मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए (Cinnamon for Brain Health)
न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों जैसे अल्जाइमर और पार्किंसंस में दालचीनी के सेवन से सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करती है और याददाश्त में सुधार करती है।
6. त्वचा और बालों के लिए (Cinnamon for Skin and Hair)
दालचीनी के एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा की समस्याओं को जड़ से खत्म करते हैं:
- मुंहासे (Acne): दालचीनी पाउडर और शहद का लेप लगाने से पिंपल्स कम होते हैं।
- एंटी-एजिंग: यह कोलेजन उत्पादन को बढ़ाती है, जिससे झुर्रियां कम होती हैं।
- बालों का झड़ना: दालचीनी का तेल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, जिससे बाल मजबूत होते हैं।
7. पाचन तंत्र में सुधार (Cinnamon for Digestion)
अगर आपको गैस, कब्ज या पेट फूलने की समस्या रहती है, तो दालचीनी आपके लिए वरदान है। यह पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करती है और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करती है।
दालचीनी के प्रकार (Types of Cinnamon)
बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार की दालचीनी मिलती है:
- सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon): इसे “असली दालचीनी” कहा जाता है। यह श्रीलंका से आती है, पतली होती है और इसमें ‘कूमरिन’ की मात्रा बहुत कम होती है। यह सेहत के लिए सबसे अच्छी है।
- कैसिया दालचीनी (Cassia Cinnamon): यह आम तौर पर किराने की दुकानों पर मिलती है। यह सख्त और मोटी होती है। इसमें कूमरिन ज्यादा होता है, इसलिए इसका अधिक सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
दालचीनी का सेवन कैसे करें? (How to Consume)
| तरीका | उपयोग | लाभ |
| दालचीनी का पानी | रातभर पानी में भिगोकर | वजन घटाने और डिटॉक्स के लिए |
| दालचीनी वाला दूध | रात को सोने से पहले | अच्छी नींद और जोड़ों के दर्द के लिए |
| दालचीनी की चाय | सुबह या शाम | सर्दी-जुकाम और इम्युनिटी के लिए |
| पाउडर | दही या ओट्स में छिड़ककर | ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए |
सावधानियां और दुष्प्रभाव (Side Effects and Precautions)
अति हर चीज की बुरी होती है। Dalchini khane ke fayde तभी मिलते हैं जब इसे सही मात्रा में लिया जाए।
- लिवर की समस्या: कैसिया दालचीनी का अधिक सेवन लिवर को डैमेज कर सकता है।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।
- मुंह के छाले: कुछ लोगों को दालचीनी से एलर्जी होती है, जिससे मुंह में जलन हो सकती है।
- ब्लड थिनर: यदि आप खून पतला करने की दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. एक दिन में कितनी दालचीनी खानी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में केवल 1 से 3 ग्राम (आधा चम्मच) दालचीनी पाउडर का ही सेवन करना चाहिए।
2. क्या दालचीनी से पेट की चर्बी कम होती है?
जी हाँ, दालचीनी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर पेट की जिद्दी चर्बी को कम करने में मदद करती है, लेकिन इसके साथ संतुलित आहार और व्यायाम जरूरी है।
3. क्या दालचीनी खाली पेट ले सकते हैं?
हाँ, वजन घटाने और डिटॉक्सिफिकेशन के लिए सुबह खाली पेट दालचीनी का पानी पीना सबसे प्रभावी माना जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दालचीनी न केवल आपके खाने को स्वादिष्ट बनाती है, बल्कि यह शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति भी देती है। डायबिटीज कंट्रोल करने से लेकर त्वचा निखारने तक, dalchini khane ke fayde अनगिनत हैं। हालांकि, हमेशा कोशिश करें कि आप सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon) का ही उपयोग करें।
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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Coffee Butter Benefits: त्वचा के लिए कॉफी बटर के 6 फायदे, पढें इस्तेमाल और सही तरीका…

Coffee Butter Benefits For Skin In Hindi
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्किन से जुड़ी समस्याएं लगभग हर उम्र के लोगों में देखने को मिलती हैं। रूखापन, डलनेस, झुर्रियां, डार्क सर्कल्स और मुंहासे अब आम हो चुके हैं। ऐसे में लोग केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से हटकर नेचुरल स्किनकेयर की ओर लौट रहे हैं। इसी ट्रेंड में coffee butter benefits को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
कॉफी बटर एक ऐसा नेचुरल स्किनकेयर इंग्रीडिएंट है, जो न केवल त्वचा को गहराई से पोषण देता है बल्कि उसे लंबे समय तक हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में भी मदद करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कॉफी बटर क्या है, इसके फायदे क्या हैं और इसे सही तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए।
Table of Contents
कॉफी बटर क्या है?
कॉफी बटर को कॉफी बीन्स से निकाले गए ऑयल और शीया बटर जैसे प्राकृतिक बटर को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें कॉफी के गुण भी होते हैं और बटर की गहरी नमी भी। यही वजह है कि इसे आजकल मॉइश्चराइजर, बॉडी बटर और नाइट क्रीम के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
कॉफी में मौजूद कैफीन त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जबकि बटर बेस त्वचा की नमी को लॉक करता है।
Coffee Butter Benefits for Skin
1. त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है
coffee butter benefits में सबसे बड़ा फायदा इसका मॉइस्चराइजिंग गुण है। यह त्वचा पर एक पतली परत बनाता है, जिससे नमी बाहर नहीं जाती। खासकर ड्राई और सेंसिटिव स्किन वालों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
2. एंटी-एजिंग में मददगार
कॉफी बटर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो फ्री रेडिकल्स से त्वचा की रक्षा करता है। इसके नियमित इस्तेमाल से झुर्रियां और फाइन लाइन्स धीरे-धीरे कम नजर आने लगती हैं। यही कारण है कि coffee butter for skin care में इसे एंटी-एजिंग इंग्रीडिएंट माना जाता है।
3. डार्क सर्कल्स और सूजन कम करता है
कॉफी में मौजूद कैफीन ब्लड फ्लो को बढ़ाने में मदद करता है। इससे आंखों के नीचे की सूजन और काले घेरे कम हो सकते हैं। हल्की मात्रा में कॉफी बटर को अंडर-आई एरिया में लगाने से फ्रेश लुक मिलता है।
4. मुंहासे और लालिमा को शांत करता है
कॉफी बटर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह त्वचा की जलन, लालिमा और हल्के मुंहासों को शांत करने में मदद करता है। हालांकि बहुत ऑयली स्किन वाले लोगों को इसे सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए।
5. सन टैन और डलनेस कम करता है
धूप में निकलने के बाद त्वचा का रंग अक्सर काला और बेजान लगने लगता है। कॉफी बटर के एंटीऑक्सीडेंट तत्व स्किन टोन को बैलेंस करने और नेचुरल ग्लो वापस लाने में सहायक होते हैं।
6. त्वचा को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाता है
कॉफी बटर हल्का एक्सफोलिएटिंग असर भी दिखाता है। यह डेड स्किन सेल्स को हटाकर त्वचा की रंगत को निखारता है और नैचुरल चमक देता है।
कॉफी बटर इस्तेमाल करने का सही तरीका
चेहरे के लिए
- रात को सोने से पहले चेहरा अच्छी तरह धो लें
- थोड़ी सी मात्रा में कॉफी बटर लें
- चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से मसाज करें
- इसे नाइट क्रीम की तरह छोड़ दें
यह तरीका खासकर रूखी त्वचा वालों के लिए बहुत फायदेमंद है।
शरीर के लिए
नहाने से पहले या नहाने के बाद शरीर पर कॉफी बटर से मसाज करने से त्वचा लंबे समय तक मुलायम और स्मूद बनी रहती है।
होंठों के लिए
फटे और रूखे होंठों पर कॉफी बटर लगाकर इसे नेचुरल लिप बाम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
- बहुत ज्यादा ऑयली या एक्ने-प्रोन स्किन वालों को पहले पैच टेस्ट करना चाहिए
- अगर किसी तरह की एलर्जी या जलन महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद करें
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निष्कर्ष
अगर आप केमिकल-फ्री और नेचुरल स्किनकेयर विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो coffee butter benefits को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह त्वचा को मॉइस्चराइज करने, एजिंग के लक्षण कम करने और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है। सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर कॉफी बटर आपकी स्किनकेयर रूटीन का एक भरोसेमंद हिस्सा बन सकता है।
अस्वीकरण
यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी तरह से चिकित्सकीय या त्वचा विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी नए उत्पाद को इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
FAQs
Q1. Coffee Butter क्या सभी स्किन टाइप के लिए सुरक्षित है?
हां, सामान्य तौर पर coffee butter सभी स्किन टाइप के लिए सुरक्षित माना जाता है। हालांकि बहुत ऑयली या एक्ने-प्रोन स्किन वालों को इसे इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।
Q2. क्या कॉफी बटर रोज चेहरे पर लगाया जा सकता है?
हां, coffee butter को रोजाना लगाया जा सकता है, खासकर रात के समय। यह नाइट क्रीम की तरह काम करता है और त्वचा को गहराई से पोषण देता है।
Q3. डार्क सर्कल्स के लिए कॉफी बटर कितना असरदार है?
coffee butter में मौजूद कैफीन ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे आंखों के नीचे की सूजन और काले घेरे समय के साथ हल्के हो सकते हैं।
Q4. क्या कॉफी बटर मुंहासों को बढ़ा सकता है?
अगर बहुत ज्यादा मात्रा में या ऑयली स्किन पर लगाया जाए तो मुंहासे बढ़ सकते हैं। सही मात्रा में और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने पर यह मुंहासों और लालिमा को शांत करने में मदद करता है।
Q5. कॉफी बटर और कॉफी स्क्रब में क्या फर्क है?
coffee butter मुख्य रूप से मॉइस्चराइजिंग और पोषण के लिए होता है, जबकि कॉफी स्क्रब एक्सफोलिएशन यानी डेड स्किन हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Q6. क्या कॉफी बटर होंठों पर लगाया जा सकता है?
हां, कॉफी बटर को लिप बाम के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह फटे होंठों को मुलायम बनाने में मदद करता है।
Q7. कॉफी बटर से रिजल्ट कितने समय में दिखते हैं?
नियमित इस्तेमाल करने पर 2 से 3 हफ्तों में त्वचा की नमी, सॉफ्टनेस और ग्लो में फर्क नजर आने लगता है।
Q8. क्या कॉफी बटर सन टैन हटाने में मदद करता है?
कॉफी बटर के एंटीऑक्सीडेंट तत्व सन डैमेज से हुई डलनेस को कम करने और त्वचा की रंगत सुधारने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन यह सनस्क्रीन का विकल्प नहीं है।
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24 दिसंबर से शुरू होगा साल का अंतिम Panchak, इन 4 राशियों को रहना होगा अलर्ट…

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खरमास में साल का अंतिम Panchak, 24 से 29 दिसंबर तक रहें सतर्क
खरमास के दौरान इस बार साल का अंतिम Panchak पड़ने जा रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से काफी संवेदनशील समय माना जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है, तब लगभग एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता है। यदि इसी दौरान Panchak पड़ जाए, तो इसे द्विगुण दोष काल माना जाता है, यानी इस समय सावधानी और अधिक जरूरी हो जाती है।
इस बार यह Panchak 24 दिसंबर से शुरू होकर 29 दिसंबर तक रहेगा। इन पांच दिनों में विशेष रूप से वृषभ, कर्क, धनु और मीन राशि के जातकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
Panchak और खरमास क्यों माने जाते हैं अशुभ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहते हुए पांच विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है। वहीं खरमास में शुभ और मांगलिक कार्य पहले से ही वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में जब पंचक और खरमास का संयोग बनता है, तो इसका प्रभाव सामान्य से कहीं अधिक माना जाता है।
पंचक का वृषभ राशि पर प्रभाव
पंचक के दौरान वृषभ राशि वालों को किसी भी तरह के विवाद से दूर रहना चाहिए। नौकरीपेशा जातकों पर कार्यस्थल पर दबाव बढ़ सकता है और अपेक्षित सहयोग न मिलने से तनाव महसूस हो सकता है। व्यापार में लाभ सीमित रहने के संकेत हैं, जबकि खर्च बढ़ सकते हैं। पारिवारिक जीवन में जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना है, इसलिए धैर्य से काम लेना जरूरी होगा।
कर्क राशि के लिए पंचक में सावधानी
पंचक के समय कर्क राशि वालों को धन के लेन-देन में विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। गलत संगति या जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। करियर में काम का दबाव रहेगा और सीनियर्स के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। हालांकि, नई नौकरी या बदलाव के अवसर भी इसी दौरान मिल सकते हैं।
धनु राशि पर पंचक का असर
धनु राशि वालों के लिए पंचक की यह अवधि उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है। पारिवारिक परेशानियां बढ़ने की आशंका है। करियर में यात्रा, स्थान परिवर्तन या नौकरी बदलने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। व्यापार में अपेक्षित मुनाफा पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।
मीन राशि वालों के लिए पंचक में चेतावनी
पंचक के दौरान मीन राशि के जातकों को अपनी और परिवार की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यात्रा और रोजमर्रा के कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। पारिवारिक तनाव और जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना भी अधिक रहेगी, इसलिए संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
पंचक के दौरान क्या करें और क्या न करें?
क्या न करें:
- नए शुभ या मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश या नया निर्माण
- बड़ी खरीदारी
- अनावश्यक यात्रा
क्या करें:
- पूजा-पाठ और दान
- आत्मचिंतन और संयम
- पुराने अधूरे कार्य पूरे करना
निष्कर्ष
24 से 29 दिसंबर तक रहने वाला यह पंचक, जो खरमास के दौरान पड़ रहा है, सावधानी और संतुलन का समय है। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सोच-समझकर लिए गए फैसले इस Panchak के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए संयम बनाए रखना ही इस अवधि का सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।
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