Uttarakhand
Nirjala Ekadashi 2026: हरिद्वार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

Nirjala Ekadashi 2026 : तीर्थनगरी हरिद्वार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
हरिद्वार, भारत — सनातन धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माने जाने वाले निर्जला एकादशी 2026 के पावन अवसर पर तीर्थनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी के बावजूद, देश के कोने-कोने से आए हजारों भक्तों ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई। पूरी धर्मनगरी वैदिक मंत्रोच्चार, भजनों और ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी।
हर की पैड़ी पर दिखा भक्ति का अनूठा संगम
सुबह के ब्रह्ममुहूर्त से ही हर की पैड़ी समेत हरिद्वार के तमाम प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। पवित्र गंगा स्नान के बाद भक्तों ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
इस विशेष पर्व पर दान-पुण्य का अत्यधिक महत्व होने के कारण घाटों पर जल, मौसमी फल, वस्त्र और मिट्टी के घड़ों का दान करने वालों की लंबी कतारें देखी गईं।
प्रशासनिक मुस्तैदी: श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए हरिद्वार पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष रूट डायवर्जन लागू किया गया था।
क्यों खास है निर्जला एकादशी का व्रत?
शास्त्रों के अनुसार, वर्ष में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। ‘निर्जला’ का अर्थ है बिना जल के। जहां अन्य एकादशी व्रतों में फलाहार या दूध का सेवन किया जा सकता है, वहीं इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न और जल का पूर्ण त्याग करना होता है।
भीमसेनी एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडव भाई भीमसेन (भीम) के लिए अपनी अत्यधिक भूख (वृकोदर प्रवृत्ति) के कारण महीने में दो बार आने वाले एकादशी व्रतों को रखना असंभव था।
जब उन्होंने अपनी इस विवशता को लेकर महर्षि वेदव्यास जी से मार्गदर्शन मांगा, तो व्यास जी ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का पूर्ण निर्जला व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस एकमात्र कठिन व्रत को पूरी निष्ठा से करने पर वर्ष की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
निर्जला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण का समय
व्रत की पूर्णता और उसका आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए तिथियों और शुभ मुहूर्त का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है:
| विशेष आयोजन / तिथि | शुभ समय और दिनांक |
| निर्जला एकादशी व्रत तिथि | गुरुवार, 25 जून 2026 |
| एकादशी तिथि का प्रारंभ | 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से |
| एकादशी तिथि की समाप्ति | 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे तक |
| पारण (व्रत तोड़ने) का समय | 26 जून 2026 (शुक्रवार) सुबह 05:43 बजे से 08:26 बजे तक |
नोट: हिंदू शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर और सूर्योदय के बाद ही किया जाना चाहिए। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान विष्णु को भोग लगाकर जल ग्रहण करना चाहिए।
मुख्य नियम और धार्मिक परंपराएं
इस दिन दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु निम्नलिखित परंपराओं का पालन करते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह सूर्योदय से पूर्व (04:04 AM से 04:45 AM के बीच) उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना।
- मंत्र साधना: पूरे दिन मन ही मन
ॐ नमो भगवते वासुदेवायमहामंत्र का जाप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना। - शीतलता का दान: जेठ की भीषण गर्मी को देखते हुए भूखे-प्यासों को पानी पिलाना, शर्बत बांटना, तथा मिट्टी के घड़े, हाथ के पंखे और छतरियों का दान करना सर्वोत्तम माना जाता है।
- तुलसी दल निषेध: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं किया जाता और न ही पत्तियां तोड़ी जाती हैं, क्योंकि माना जाता है कि माता तुलसी भी इस दिन भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
संध्याकाल में गंगा आरती के दर्शन और रात में हरि-कीर्तन (जागरण) के साथ श्रद्धालु इस कठिन व्रत को पूर्ण कर आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना करते हैं।
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नंदा गौरा योजना: हरिद्वार और उत्तरकाशी की 4098 बालिकाओं को मिला लाभ, खातों में पहुंचे 19.23 करोड़ रुपये

नंदा गौरा योजना के तहत बड़ी डीबीटी ट्रांसफर
देहरादून : नंदा गौरा योजना के तहत गुरुवार को हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की कुल 4098 पात्र बालिकाओं को योजना का लाभ प्रदान किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से इन बालिकाओं के बैंक खातों में लगभग 19.23 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की।
पहले छूटी हुई बालिकाओं को मिला लाभ
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 33,251 पात्र बालिकाओं को 26 फरवरी 2026 को ही योजना का लाभ दिया जा चुका था।
हालांकि, हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की कुछ बालिकाओं की आवश्यक औपचारिकताएं और जनपद स्तरीय समिति से अनुमोदन समय पर पूरा नहीं हो सका था, जिसके कारण उन्हें उस समय लाभ नहीं मिल पाया था।
अब सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद गुरुवार को यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय से इन 4098 बालिकाओं को डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि जारी की गई।

सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश की कोई भी पात्र बेटी योजना के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि नंदा गौरा योजना बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
लाभार्थियों का विवरण
इस बार लाभान्वित बालिकाओं में शामिल हैं:
- जन्म के समय सहायता पाने वाली 417 बालिकाएं
- 12वीं उत्तीर्ण कर स्नातक में प्रवेश लेने वाली 3681 बालिकाएं
योजना का अब तक का कुल आंकड़ा
गौरतलब है कि नंदा गौरा योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश की कुल 4,11,035 बालिकाओं को लगभग 1314 करोड़ रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से वितरित की जा चुकी है।
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Haridwar News : गंगा पार कर हाथियों के साथ सेल्फी लेना युवकों को पड़ा भारी, बाल-बाल बची जान…

Haridwar News : गंगा पार कर हाथियों के साथ सेल्फी लेने पहुंचे युवक
हरिद्वार। वन्यजीवों के साथ सेल्फी लेने और रोमांच के शौक में छह युवकों ने अपनी जान जोखिम में डाल दी। हरिद्वार के सप्तऋषि घाट क्षेत्र में गंगा पार कर हाथियों के झुंड के करीब पहुंचना युवकों को भारी पड़ गया। हाथी अचानक आक्रामक हो गए और युवकों के पीछे दौड़ पड़े। इस दौरान दो युवकों की जान बाल-बाल बची। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार सोमवार को गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचे छह युवक सप्तऋषि घाट के सामने स्नान कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें गंगा पार हाथियों का एक झुंड दिखाई दिया। झुंड में शिशु हाथियों समेत करीब आठ से दस हाथी मौजूद थे, जो गंगा किनारे विचरण कर रहे थे। युवकों ने हाथियों के साथ फोटो और वीडियो बनाने के लिए गंगा पार कर उनके बेहद करीब पहुंचने का फैसला किया।
हाथियों ने किया चार्ज, मच गई अफरा-तफरी
हाथियों के पास पहुंचकर युवक तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे। खुद को असुरक्षित महसूस करते ही हाथी आक्रामक हो गए और युवकों की ओर दौड़ पड़े। हाथियों को अपनी तरफ आते देख युवकों में अफरा-तफरी मच गई और सभी अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। इस दौरान दो युवक हाथियों के बेहद करीब पहुंच गए, जिससे उनकी जान पर खतरा मंडराने लगा। हालांकि उन्होंने तेजी से भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचते हुए खुद को बचा लिया।
घटना के बाद सभी युवक वापस लौट आए। उनकी लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। सप्तऋषि घाट पर मौजूद एक युवक ने पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में हाथी युवकों के पीछे दौड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाथी कुछ और करीब पहुंच जाते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पुलिस और वन विभाग ने दी चेतावनी
सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने युवकों को कड़ी फटकार लगाई और भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न करने की चेतावनी दी।
रेंज अधिकारी शीशपाल सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर खदेड़ा गया। उन्होंने कहा कि जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। बिना अनुमति वन क्षेत्र में प्रवेश करना और वन्यजीवों के करीब जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि फोटो या वीडियो बनाने के लिए वन्यजीवों के नजदीक न जाएं और वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि वन्यजीवों को भी अनावश्यक तनाव और खतरे से बचाया जा सकेगा।
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स्व. जसपाल राणा के त्रयोदशी संस्कार में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और CM धामी, दी भावभीनी श्रद्धांजलि

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मझौन, देहरादून में प्रसिद्ध निशानेबाज़ एवं पद्मश्री स्व. जसपाल राणा के त्रयोदशी संस्कार में शामिल होकर स्वर्गीय जसपाल राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वर्गीय जसपाल राणा के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। साथ ही उन्होंने परिजनों से भेंट कर शोक संवेदना व्यक्त की तथा भगवान से इस दुःख की घड़ी में परिवार को धैर्य एवं संबल प्रदान करने की कामना की।


इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश बृजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सौरव बहुगुणा, खजान दास , सांसद डॉ. महेश शर्मा, अजय भट्ट, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, विधायक पंकज सिंह एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
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