Ramnagar
रामनगर : कोसी नदी में मशीनों से खनन का आरोप, बेरोज़गार मजदूरों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

Ramnagar News : रामनगर में आज कोसी नदी में उपखनिज भरान कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बिहर से आए सैकड़ों मजदूरों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि कोसी नदी में अवैध रूप से बैककैरा और अन्य भारी मशीनें चलाई जा रही हैं, जिसके कारण वे बेरोज़गार हो गए हैं
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रामनगर में कोसी नदी में मशीनों से खनन का आरोप
नैनीताल जिले के रामनगर में आज बेरोजगार मजदूरों का हल्लाबोल देखने को मिला। मजदूरों ने कोसी नदी में अवैध रूप से बैककैरा और अन्य भारी मशीनें चलाए जाने का आरोप लगाया है। मजदूरों का कहना है कि मशीनों से खनन होने के कारण वो बेरोजगार हो गए हैं और उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बेरोज़गार मजदूरों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने बताया कि वे हर साल बड़ी संख्या में कोसी नदी में मैन्युअल तरीके से उपखनिज निकालकर वाहनों में भरने का कार्य करते हैं। इसी काम से उनके परिवारों का पालन-पोषण होता है। मजदूरों का कहना है कि इस बार नदी में मशीनों के जरिए उपखनिज भरा जा रहा है, जिससे उनका पारंपरिक रोजगार पूरी तरह छिन गया है।
मजदूरों ने बताया कि उन्होंने काम की उम्मीद में हजारों रुपये खर्च कर परात, बेलचे और अन्य औजार खरीदे थे, लेकिन नदी में मशीनों के चलते उन्हें काम ही नहीं मिल पाया। मजदूरों का कहना है कि अब वे अपने घर लौटने को मजबूर हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

कोसी नदी में मशीनों के संचालन पर रोक लगाने की मांग
मजदूरों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आरटीआई कार्यकर्ता देव बिष्ट ने बताया कि हर साल कोसी नदी में करीब 50 हजार से लेकर एक लाख तक मजदूर उपखनिज भरान कार्य के लिए आते हैं। लेकिन इस बार मशीनों के इस्तेमाल से ये सभी मजदूर बेरोज़गार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।
इसी को लेकर आज रामनगर उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई है कि कोसी नदी में मशीनों के संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
नदी तक पहुंचने के बाद भी बिना काम लौट रहे मजदूर
कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने इसस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब से उत्तराखंड की नदियों का खनन एक हैदराबाद की कंपनी को दिया गया है, तब से लगातार नदियों में बैककैरा और अन्य भारी मशीनें चलाई जा रही हैं, उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने के वादे किए थे, लेकिन हकीकत ये है कि मजदूर नदी तक पहुंचने के बाद भी बिना काम लौटने को मजबूर हैं।

रणजीत रावत ने आरोप लगाया कि नदी में मशीनों से खनन करना नियमों के खिलाफ है। कानून के अनुसार आपदा की स्थिति को छोड़कर नदी में किसी भी तरह की मशीनों से खुदाई नहीं की जा सकती और खनन कार्य केवल मैन्युअल तरीके से सीमित गहराई तक किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कोसी नदी में कई जगह 90-90 मीटर गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, जो भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।
दोषियों के खिलाफ की जाएगी सख्त कार्रवाई
रामनगर के उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि कोसी नदी में बैककैरा चलने से जुड़े वीडियो उनके संज्ञान में आए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वन विकास निगम के संबंधित अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है और कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। उपजिलाधिकारी ने कहा कि अवैध खनन को लेकर औचक छापेमारी की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Ramnagar
रामनगर में दर्दनाक हादसा, डंपर में पेट्रोमैक्स से हाथ सेक रहे सोए चाचा-भतीजे की मौत

Ramnagar News : रामनगर में एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां ठंड से बचने के लिए डंपर वाहन के अंदर पेट्रोमैक्स जलाकर सोए चाचा-भतीजे की दम घुटने से मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मचा गया है।
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डंपर में पेट्रोमैक्स जलाकर हाथ सेक रहे चाचा-भतीजे की मौत
Ramnagar में ठंड से बचने के लिए डंपर के अंदर पेट्रोमैक्स के हाथ सेक रहे चाचा भतीजे की दम घुटने से मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रहने वाले मोहम्मद इरफान और मोहम्मद इकरार, जो आपस में चाचा-भतीजे थे और डंपर वाहन के चालक थे।
दोनों शनिवार को संभल से Ramnagar के ग्राम पीरुमदारा स्थित एक स्टोन क्रेशर में उपखनिज सामग्री लेने के लिए आए थे। रविवार तड़के करीब 5 बजे दोनों ने 18 टायरा डंपर में क्रेशर से उपखनिज सामग्री लोड की और वाहन को बाहर खड़ा कर दिया।
ठंड से बचने के लिए जलाया था पेट्रोमैक्स
सुबह के समय कड़ाके की ठंड होने के कारण दोनों डंपर के केबिन के अंदर ही बैठ गए। ठंड से बचाव के लिए उन्होंने पेट्रोमैक्स जलाया और वाहन के शीशे बंद कर लिए। इसी दौरान पेट्रोमैक्स से निकलने वाली गैस के कारण दोनों बेहोश हो गए और उन्हें इसका कोई अंदाजा नहीं लग पाया।
दोपहर के समय जब साथ में मौजूद अन्य लोगों ने दोनों को आवाज दी तो अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। शक होने पर डंपर के शीशे तोड़े गए, तो देखा गया कि दोनों अंदर बेहोशी की हालत में पड़े हुए थे। आनन-फानन में मोहम्मद इरफान और मोहम्मद इकरार को बाहर निकालकर Ramnagar के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद से परिजनों में कोहराम
अस्पताल की चिकित्सक डॉ. कृतिका ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर दोनों की मौत दम घुटने से हुई प्रतीत हो रही है। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। हादसे की जानकारी के बाद से मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
Ramnagar
जंगल में लकड़ी लेने गई महिला पर हाथी का हमला, सूंड से उठाकर पटका, ऐसे बची जान

Ramnagar News : उत्तराखंड में मानव वन्यजीव संघर्ष कम होने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन बाघ, गुलदार और हाथी के हमले की खबर सामने आ रही है। रामनगर में मानव–वन्यजीव संघर्ष का एक और गंभीर मामला सामने आया है। जहां एक हाथी ने जंगल में लकड़ी लेने गी महिला पर हमला कर दिया।
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Ramnagar में लकड़ी लेने जंगल गई महिला पर हाथी का हमला
रामनगर के टेड़ा गांव में जंगल से लकड़ी लेने गई एक महिला पर हाथी ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसे उपचार के लिए रामनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक घटना शनिवार शाम की है।
सूंड से उठाकर पटकने के बाद छोड़ा
Ramnagar वन प्रभाग की कोसी रेंज के अंतर्गत ग्राम टेढ़ा निवासी 43 वर्षीय सीमा देवी अपने गांव की तीन अन्य महिलाओं के साथ टेढ़ा के जंगल में लकड़ी लेने गई थीं। इसी दौरान जंगल में अचानक सामने आए एक हाथी ने सीमा देवी पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हाथी ने महिला को अपनी सूंड में उठाकर जमीन पर जोर से पटक दिया, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गई।

महिलाओं ने किसी तरह जंगल से भागकर सड़क तक पहुंचकर अपनी जान बचाई। घायल सीमा देवी ने बताया कि हाथी कुछ दूरी तक पीछे-पीछे दौड़ता हुआ सड़क तक भी आ गया था। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से महिला को रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
ग्रामीणों से अकेले न जाने की अपील
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी की निगरानी शुरू कर दी गई है। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से जंगल में अकेले न जाने की अपील की है। इस मामले में डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया ने कहा कि शीतकाल के दौरान हाथियों की गतिविधियां अधिक रहती हैं और ऐसे में वन्यजीव ज्यादा आक्रामक होते है,उन्होंने कहाँ कि ग्रामीणों को जंगल जाने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि मौके पर गश्त बढ़ा दी गई है।
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रामनगर में बाघ ने मजदूर को बनाया निवाला, एक हफ्ते में तीन की मौत से इलाके में दहशत

Ramnagar News : उत्तराखंड में मानव वन्यजीव संघर्ष कम होने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन गुलदार, बाघ और भालू के हमले में लोगों की मौत हो रही है। रामनगर में रविवार को बाघ ने एक मजदूर को अपना निवाला बना लिया। कुमाऊं में एक हफ्ते में बाघ के हमले में तीसरी मौत के बाद से लोगों में भारी आक्रोश है।
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Ramnagar में बाघ ने मजदूर को बनाया निवाला
रामनगर में बाघ का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रविरा देर शाम बाघ ने एक मजदूर को अपना निवाला बना लिया। मिली जानकारी के मुताबिक रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत देचोरी रेंज के पाटकोट क्षेत्र के भलोन गांव में बाघ ने मजदूर को अपना शिकार बना लिया। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है।
पाइपलाइन फिटिंग का काम कर रहा था मजदूर
मिली जानकारी के मुताबिक मृतक मूल रूप से बिहार का रहने वाला था। जो कि सिंचाई विभाग के अंतर्गत चल रहे पाइपलाइन बिछाने के काम में रामनगर आया हुआ था। रविवार शाम को वो पूर्व प्रधान मनमोहन पाठक की गौशाला के पास पाइप फिटिंग का काम कर रहा था।
इसी दौरान बाघ ने उस पर हमला कर दिया और उसे घसीट कर जंगल की ओर ले गया। मजदूर पर हमला कर बाघ जब उसे ले जा रहा था तो साथी मजदूर उसकी चीख सुनकर वहां पहुंचे। मजदूरों ने साथी की जान बचाने के लिए चिल्लाना शुरू किया। लेकिन बाघ ने उसे नहीं छोड़ा।

जंगल से बरामद किया गया मजदूर का शव
बाघ के हमले की जानकारी लोगों ने वन विभाग को दी। जिसके बाद Ramnagar वन प्रभाग की टीम मौके पर पहुंची। रात होने के कारण वन विभाग ने हाथियों, पैदल दलों और ड्रोन की मदद से सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कुछ देर बाद मजदूर का शव जंगल से बरामद किया गया।
अंदर बाघ को किया गया किया गया ट्रेंकुलाइज
मजदूर को निवाला बनाने वाले बाघ को वन विभाग की टीम ने तीन घंटे के अंदर ट्रेंकुलाइज कर लिया है। मिली जानकारी के मुताबिक ट्रेंकुलाइज करने के बाद बाघ को रेस्क्यू वैन में सुरक्षित तरीके से रखा गया। इसके बाद उसे रामनगर के ही ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है।

एक हफ्ते में तीन की मौत से इलाके में दहशत
कुमाऊं में एक हफ्ते के भीतर बाघ के हमले में ये तीसरी मौत है। जिसके बाद से लोगों में भारी आक्रोश है। इस से पहले बाघ ने एक हफ्ते में टोटाम के क्यारी गांव और सांवल्दे में दो महिलाओं को अपना निवाला बना लिया था। रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया ने बताया कि इस घटना के बाद पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
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