Dehradun
राज्य पुलिस समीक्षा गोष्ठी: कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और ‘फिट उत्तराखण्ड’ पर डीजीपी दीपम सेठ ने दिए अहम निर्देश…

देहरादून: आज पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय पुलिस समीक्षा गोष्ठी का आयोजन सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में किया गया। इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, दोनों रेंज प्रभारियों, समस्त जनपदों के पुलिस प्रमुखों, वाहिनियों, रेलवे, STF, SDRF एवं अन्य विशेष इकाइयों के प्रमुख अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

गोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य राज्य की कानून व्यवस्था की समग्र समीक्षा, अपराध नियंत्रण रणनीतियों का मूल्यांकन, पुलिस बल के कल्याण तथा बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करना था।
समीक्षा गोष्ठी में पुलिस महानिदेशक द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा एवं विचार-विमर्श करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए-

▪ वांछित अपराधियों, ईनामी, लंबित विवेचनाओं, एनबीडब्लू/कुर्की वारंट और नशा तस्करों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा:
अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था- वी. मुरूगेशन द्वारा वांछित अपराधियों, ईनामी घोषित अपराधियों और लंबित विवेचनाओं, वारंटों के निष्पादन व प्रचलित अभियानों में कार्यवाहियों का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अवलोकन प्रस्तुत किया गया। पुलिस महानिदेशक द्वारा राज्यभर में अपराध नियंत्रण हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियानों की प्रगति की गहन समीक्षा कर जनपदवार विवरणों के आधार पर निम्न दिशा-निर्देश दिए गए:
• वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए थानावार समीक्षा अनिवार्य की जाए।
• लंबित मामलों की समीक्षा और प्राथमिकता निर्धारण कर जल्द से जल्द निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
• विशेष टीमों का गठन कर इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु केंद्रित अभियान चलाया जाए।
• विवेचना में देरी हेतु उत्तरदायी कारकों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर पुराने मामलों का निस्तारण किया जाए। विवेचकों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।
• लंबित NBW एवं कुकी वारंटों की तामील हेतु थाना प्रभारियों को व्यक्तिगत उत्तरदायित्व सौंपा जाए। नियमित समीक्षा करते हुए उनकी तामील में तीव्रता लायी जाए।
• मादक पदार्थ विरोधी अभियान को सतत रूप से चलाया जाए। नशा तस्करी की रोकथाम हेतु हॉटस्पॉट चिन्हित कर नियमित चेकिंग, और बड़े रैकेट्स पर सम्पत्ति जब्तीकरण सहित PIT-NDPS के अंतर्गत कार्यवाही अमल में लायी जाए।
• डायल 112 में उन जनपदों में जहाँ Response Time अधिक है, वहां संसाधनों की पुनर्संरचना कर समयबद्ध प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए।
• महिला सुरक्षा के लिए बीट स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जाए। Cyber Crime Helpline 1930 व साइबर सेल को और अधिक सुदृढ़ करते हुए विशेष रूप से स्कूल-कॉलेजों व संस्थानों में व्यापक रूप से साइबर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
• गंभीर अपराधों में FSL व फील्ड यूनिट की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए मासिक समीक्षा की जाए।
▪ नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन की समीक्षा व निर्देश-
• नए आपराधिक कानूनों के मुख्य प्रावधानों- Zero FIR, e-FIR, और गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक टीम की अनिवार्य उपस्थिति का अनुपालन सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। साथ ही, साक्ष्यों को डिजिटल माध्यम से अपलोड करने और समयसीमा में कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए गए।
• अपराधिक मामलों में तकनीकी उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) में डेटा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
▪ विभिन्न पोर्टलों की जनपदवार प्रगति की समीक्षा (NCRP, CEIR, SAMANVAY, NATGRID, NCORD, NIDAAN, MANAS):
• संबंधित पोर्टलों पर रोजाना या निर्धारित समयावधि में डेटा अपलोड हो। अपलोड किया गया डेटा समयबद्ध, सटीक और पूर्ण हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए।
• प्रत्येक पोर्टल के लिए जनपद स्तर पर एक नामित नोडल अधिकारी सुनिश्चित किया जाए। ये अधिकारी अपने-अपने पोर्टल की समीक्षा कर रिपोर्ट मुख्यालय को उपलब्ध कराएं।
• संबंधित पुलिसकर्मियों को इन पोर्टलों के कार्यप्रणाली की समुचित ट्रेनिंग दी जाए।
• सभी पोर्टलों पर मौजूद डैशबोर्ड्स की नियमित निगरानी की जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रगति और कार्यान्वयन की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आंकलन हो सके।
▪ चारधाम यात्रा 2025 की तैयारी:
• गढ़वाल रेंज कार्यालय में स्थापित “चारधाम यात्रा कंट्रोल रूम” को शीघ्र क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए गए।
• यात्रा मार्गों की ट्रैफिक योजना, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाए।
• उत्तराखण्ड पुलिस मोबाइल ऐप में रियल-टाइम अपडेट, इमरजेंसी हेल्पलाइन, और रूट अपडेट जैसी सेवाएं सक्रिय की जाएं।
डीजीपी महोदय ने कहा, “चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, राज्य की प्रतिष्ठा से जुड़ा व्यापक आयोजन है, इसलिए पुलिस की जिम्मेदारी यहां सबसे अहम है।”
▪ जनपदों/वाहिनियों/इकाइयों द्वारा प्रस्तुतियाँ:
• दोनों परिक्षेत्र/सभी जनपद/एसटीएफ/रेलवे इकाइयों ने कानून व्यवस्था, आपराधिक घटनाओं पर प्रतिक्रिया, विशेष अभियानों और प्रशासनिक आवश्यकताओं पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं।
• PAC की 31वीं, 46वीं एवं 40वीं वाहिनियों, SDRF, IRB, इकाइयों में राजपत्रित अधिकारियों द्वारा की गयी डिटैचमेंट चैकिंग, विशेष तैनातियाँ, व आपदा प्रबंधन की तैयारी से संबंधित बिंदुओं पर सशक्त प्रस्तुतिकरण दिया गया।
▪ ‘फिट उत्तराखण्ड’ अभियान – स्वास्थ्य और मनोबल के लिए ठोस पहल
राज्य पुलिस बल की शारीरिक और मानसिक फिटनेस को प्राथमिकता देते हुए डीजीपी महोदय द्वारा फिट इंडिया मूवमेंट व फिट उत्तराखण्ड अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। इस अभियान के अंतर्गत सभी जनपदों और इकाइयों में निम्न बिंदुओं को अनिवार्य रूप से क्रियान्वित किया जाएगा:
• पुलिस कर्मियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण (रेगुलर हेल्थ चेकअप)
• परेड, पीटी, योगा एवं मेडिटेशन सत्रों का आयोजन
• स्ट्रेस मैनेजमेंट और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग वर्कशॉप्स
• स्वस्थ जीवनशैली और कार्य-जीवन संतुलन पर जागरूकता कार्यक्रम
यह पहल न केवल बल की शारीरिक क्षमता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि मानसिक सुदृढ़ता एवं मनोबल को भी ऊंचा करेगी।
▪ सीमावर्ती सुरक्षाबलों और पेंशनर्स की समस्याओं के समाधान हेतु संरचित व्यवस्था
डीजीपी महोदय ने बॉर्डर क्षेत्रों में तैनात सेना और पैरामिलिट्री बलों के जवानों की समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण एवं सेना/अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों (Ex-Servicemen), व सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के कल्याण हेतु निर्दश दिए गए-
• प्रत्येक जनपद में एक पुलिस नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो इन मामलों की निगरानी करेगा।
• पुलिस मुख्यालय स्तर पर एक राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी भी नामित किया जाएगा, जो समन्वय एवं नीति निर्माण में सहयोग करेगा।
• पेंशन से संबंधित समस्याएं, चिकित्सा सहायता, परामर्श सेवाएं एवं वेलफेयर गतिविधियों को समयबद्ध ढंग से संचालित किया जाएगा।
▪ महिला पुलिस बल को और अधिक प्रोफेशनल और दक्ष बनाने की दिशा में पहल
डीजीपी महोदय द्वारा महिला पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण, दक्षता-वृद्धि एवं कल्याण के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। इस दिशा में निम्न प्रयास किए जाएंगे:
• महिला कर्मियों के लिए विशेष स्किल डेवेलपमेंट प्रोग्राम्स।
• साइबर अपराध, जांच/विवेचना, महिला एवं बाल संरक्षण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं।
• ड्यूटी में सुविधा हेतु परामर्श, स्वास्थ्य एवं मातृत्व से जुड़े प्रावधानों को बेहतर बनाना।
• महिला पुलिसकर्मियों की पदोन्नति, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करना।
अपने सम्बोधन में डीजीपीने कहा कि “उत्तराखण्ड पुलिस राज्य की सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए दृढ़ संकल्पित एवं प्रतिबद्ध है। पुलिस को तकनीक-सक्षम, संवेदनशील और पेशेवर बल के रूप में विकसित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, और पुलिस बल के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर लिए गए निर्णय राज्य की आंतरिक सुरक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगे।
मुख्यमंत्री के ‘फिट उत्तराखण्ड’ अभियान तथा चारधाम यात्रा 2025 की सफलतापूर्वक तैयारी के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सेवानिवृत्त कर्मियों की समस्याओं के समाधान हेतु भी ठोस एवं प्रभावी निर्णय लिये गए हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अधिकारीगण निर्धारित प्राथमिकताओं पर मिशन मोड में कार्य करते हुए समयबद्धता, गुणवत्ता, और परिणामों पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएंगे।”
#LawandOrder #Cybersecurity #CrimeControl #WomenSafety #PoliceWelfare
Uttarakhand
लैंड फ्रॉड पर गढ़वाल आयुक्त सख्त : 45 मामलों का निस्तारण, धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के दिए निर्देश…

देहरादून : गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या की समीक्षा की गई। इस दौरान समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए मामलों सहित 125 मामलों सुनवाई की गई। इस दौरान समिति द्वारा कुल 45 प्रकरणों का निस्तारण के साथ ही 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। लैंड फ्रॉड समिति में दर्ज नए मामलों में सबसे अधिक 74 मामले देहरादून जनपद के है, जबकि हरिद्वार के 15, पौडी के 13, टिहरी के 02 तथा चमोली का 01 प्रकरण भी इसमें शामिल है।
गढ़वाल आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार और मा. मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रकरणों में संयुक्त निरीक्षण अपेक्षित है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि हर 15 दिनों के अंतराल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में आयोजित ताजा बैठक में कुल 125 प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें 20 लंबित और 105 नए मामले शामिल थे। इनमें से 24 प्रकरण अत्यंत गंभीर पाए गए, जिनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन 24 मामलों में उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग, मिथलेश सिंघल, जगदंबा रावत, अर्जुन सिंह, सामरजी देवी समेत कुल 13 शिकायतें विशेष रूप से भूमि पर तारबाड़ कर कब्जा व जमीन को खुर्द-बुर्द करने से संबंधित हैं। आयुक्त ने कहा कि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं-कहीं बिना जमीन के ही बिक्री, कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर अलग भूमि देना, तो कहीं 2 बीघा भूमि को 4 बीघा बताकर बेचना जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं। आयुक्त ने ऐसे मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त भूमि धोखाधडी, अवैध कब्जा एवं गंभीरता वाले अन्य 11 मामलो पर भी आयुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए है।
आयुक्त ने कहा कि 24 एफआईआर योग्य मामलों के अतिरिक्त 45 अन्य प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया है। इनमें कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है। कुछ में लेन-देन की समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप से सुलझ गई और धनराशि वापस कर दी गई। वहीं, कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए, जिनमें बेनामा निरस्तीकरण से संबंधित विवाद हैं और इनमें लैंड फ्रॉड नहीं पाया गया। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निस्तारण विधिवत न्यायालय के माध्यम से ही होगा।

आयुक्त ने विशेष रूप से बड़े भू-क्षेत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे लंबित प्रकरणों में 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति लाना सुनिश्चित करें। ऐसे मामलें जिनमें अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, उनमें तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए। स्पष्ट भूमि धोखाधड़ी के सभी मामलों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। जो मामले भूमि धोखाधडी से संबंधित नही है उनकी सूचना शिकायतकर्ता को भी दी जाए। आयुक्त ने निर्देश दिए कि भूमि से संबंधित मामलों में प्रारंभिक स्तर पर ही विवाद की पहचान कर आवश्यक प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में जटिलताएं उत्पन्न न हों।
आयुक्त ने न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा किसी भी भूमि संबंधी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के निर्देश दिए।
Uttarakhand
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की विधानसभा क्षेत्रों की समीक्षा, अधिकारियों को समयबद्ध कार्य के दिए निर्देश….

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्रों यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और कोटद्वार की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को ये निर्देश दिए।
बैठक में दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश
मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा उनकी प्रभावी निगरानी के लिए प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू टेक्निक (पी.ई.आर.टी.) चार्ट तैयार किया जाए। बिजली, पेयजल, वनाग्नि, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा सड़क से संबंधित समस्याओं का विभागों द्वारा यथाशीघ्र समाधान किया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। विधायकगणों द्वारा अपने क्षेत्रों की जिन समस्याओं को उठाया जा रहा है, अधिकारी उन्हें गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करें। जिन घोषणाओं के अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उन्हें 15 जून 2026 तक जारी किया जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से जनसमस्याओं का समाधान करें।
शिक्षा और युवाओं के लिए पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में छात्राओं की सर्वाधिक संख्या वाले विद्यालयों को चिन्हित करते हुए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगणों द्वारा केंद्रीय विद्यालय संगठन खोलने के लिए दिए जा रहे प्रस्तावों पर शिक्षा विभाग तथा संबंधित जिलाधिकारी केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने पर उन्हें शीघ्र स्वीकृति मिल सके। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पौड़ी में मल्टीपरपज हॉल बनाया जाए।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा बैठक में उठाई गई समस्याओं का संबंधित विभागीय सचिव प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित रोपवे प्रकरणों की अलग से समीक्षा की जाए। साथ ही पार्किंग की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए तथा सरकारी कार्यालयों में नियमित रूप से सोलर पैनल लगाए जाएं।
बैठक में उपस्थित सदस्य
बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, विधायक रेनू बिष्ट, राजकुमार पोरी, दलीप सिंह रावत, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, रणवीर सिंह चौहान, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा वर्चुअल माध्यम से गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय और जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति भदौरिया उपस्थित थे।
Uttarakhand
देहरादून: छात्र की बेरहमी से पिटाई का वीडियो वायरल, SSP ने दरोगा और सिपाही को किया लाइन हाजिर….

देहरादून : छात्र की बेरहमी से पिटाई मामले में SSP का कड़ा एक्शन, दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर इलाके से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने पहुँचे पुलिसकर्मियों पर एक युवक को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक दरोगा और एक सिपाही को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, प्रेमनगर स्थित उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में ‘युवा फेस्ट’ का आयोजन किया जा रहा था। रविवार को होने वाले एक बड़े म्यूजिकल इवेंट से पहले ही शुक्रवार को संस्थान के गेट पर छात्रों और बाहरी लोगों का भारी जमावड़ा लग गया। इस भीड़ के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिसकी शिकायत मिलने पर प्रेमनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुँची।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिसकर्मी जब यातायात सुचारू कराने के लिए वाहनों को हटा रहे थे, तभी एक युवक की पुलिसकर्मियों से तीखी बहस हो गई। बहस बढ़ते ही पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो वह भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने पीछा कर उसे पकड़ा और जमीन पर गिराकर लाठियों से जमकर पिटाई की। पिटाई इतनी गंभीर थी कि युवक मौके पर ही बेहोश हो गया।


वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
इस पूरी घटना का वीडियो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने बना लिया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो में पुलिस की बर्बरता साफ तौर पर देखी जा सकती है। शुरुआत में पुलिस अधिकारियों ने इसे ‘हल्का बल प्रयोग’ बताकर बचाव करने की कोशिश की, लेकिन साक्ष्यों के सामने आने के बाद विभाग को कड़ा कदम उठाना पड़ा।
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि वर्दी में इस तरह का हिंसक व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने वीडियो में दिख रहे दरोगा और सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच एक राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) को सौंप दी है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: प्रेमनगर, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी गेट।
- कारण: ट्रैफिक जाम और युवक के साथ बहस।
- कार्रवाई: एसएसपी ने दो पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया।
- जांच: राजपत्रित अधिकारी द्वारा मामले की गहन पड़ताल जारी।
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