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तंबाकू पदार्थो का सेवन करने वालों के लिए बुरी खबर! इस दिन से जेब पर पड़ेगा सीधा असर..

Tobacco Price Hike : 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पाद होंगे महंगे, उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
भारत में तंबाकू पदार्थो के सेवन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 से तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद सिगरेट, पान मसाला, गुटखा और चबाने वाले तंबाकू की कीमतों में सीधी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। अनुमान है कि इसका असर देश के करीब 10 करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
यह कदम सरकार की कर प्रणाली को सरल बनाने और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को कम करने की नीति से जुड़ा माना जा रहा है।
Table of Contents
Tobacco Price Hike क्यों हुई? सरकार का नया फैसला समझें
वित्त मंत्रालय ने Chewing Tobacco, Jarda Scented Tobacco and Gutkha Packing Machines (Capacity Determination and Collection of Duty) Rules, 2026 को अधिसूचित किया है। इसके तहत 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर लंबाई के हिसाब से प्रति 1,000 स्टिक Rs2,050 से Rs8,500 तक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि तंबाकू उत्पादों पर अधिक कर लगाकर:
- सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जाए
- तंबाकू की खपत को हतोत्साहित किया जाए
- कर व्यवस्था में मौजूद जटिलताओं को कम किया जाए
Cigarette Tax in India: GST और Excise Duty का नया ढांचा
Cigarette Tax in India में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अभी तक लगने वाला GST Compensation Cess 1 फरवरी 2026 से खत्म कर दिया जाएगा।
नया टैक्स स्ट्रक्चर क्या होगा?
- सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू उत्पाद: 40% GST
- बीड़ी (Bidi): 18% GST
- पान मसाला: Health and National Security Cess लागू
- तंबाकू उत्पाद: GST के अलावा Additional Excise Duty
यानी अब GST के साथ-साथ अतिरिक्त उत्पाद शुल्क भी देना होगा, जिससे कुल टैक्स बोझ पहले से ज्यादा हो जाएगा।
Tobacco Price Hike का सीधा असर: कीमतें कितनी बढ़ेंगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैक्स बदलाव के बाद सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की कीमतों में कम से कम 15% या उससे ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है।
Jefferies के विश्लेषकों के अनुसार:
- कंपनियों को बढ़े हुए टैक्स का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना ही पड़ेगा
- मुनाफा बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाना लगभग तय है
इसका मतलब है कि आम उपभोक्ता के लिए सिगरेट और गुटखा पहले से ज्यादा महंगे हो जाएंगे।

शेयर बाजार में हलचल: ITC और Godfrey Phillips को झटका
Tobacco Price Hike की खबर का असर शेयर बाजार में भी तुरंत दिखा।
- ITC का शेयर करीब 9.8% तक गिर गया, जो 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है
- Godfrey Phillips India Ltd. के शेयरों में करीब 17.6% की तेज गिरावट दर्ज की गई
ITC के कुल रेवेन्यू का 40% से ज्यादा हिस्सा सिगरेट बिजनेस से आता है। वहीं Godfrey Phillips Marlboro और Four Square जैसे ब्रांड बेचती है।
संसद की मंजूरी और लागू होने की तारीख
दिसंबर में संसद ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दी थी:
- पान मसाला पर Health and National Security Cess
- तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
अब सरकार ने आधिकारिक तौर पर 1 फरवरी 2026 को इन करों के लागू होने की तारीख तय कर दी है। उसी दिन से मौजूदा GST Compensation Cess पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
उपभोक्ताओं और उद्योग पर क्या पड़ेगा असर?
उपभोक्ताओं के लिए
- सिगरेट और तंबाकू उत्पाद महंगे होंगे
- खपत में कमी आ सकती है
- अवैध या सस्ते विकल्पों की ओर रुझान बढ़ने की आशंका
उद्योग के लिए
- बिक्री पर दबाव
- कीमत बढ़ाने का फैसला
- शेयर बाजार में अस्थिरता
स्वास्थ्य नीति या राजस्व बढ़ाने की रणनीति?
सरकार इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जोड़कर देख रही है। तंबाकू से जुड़ी बीमारियों पर होने वाला खर्च कम करना एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। वहीं आलोचकों का कहना है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने की रणनीति का भी हिस्सा है।
निष्कर्ष
1 फरवरी 2026 से लागू होने वाला नया टैक्स ढांचा तंबाकू बाजार की तस्वीर बदल सकता है।GST और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क मिलकर सिगरेट और अन्य उत्पादों को पहले से कहीं ज्यादा महंगा बना देंगे। आने वाले महीनों में इसका असर बिक्री, शेयर बाजार और उपभोक्ता व्यवहार पर साफ दिखाई देगा।
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FAQs
Q1. Tobacco Price Hike कब से लागू होगी?
1 फरवरी 2026 से।
Q2. सिगरेट पर कुल कितना टैक्स लगेगा?
40% GST के अलावा अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगा, जो सिगरेट की लंबाई पर निर्भर करेगा।
Q3. क्या बीड़ी पर भी उतना ही टैक्स लगेगा?
नहीं, बीड़ी पर 18% GST लागू होगा।
Q4. क्या सिगरेट की कीमत 15% से ज्यादा बढ़ सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक कीमतें 15% या उससे ज्यादा बढ़ सकती हैं।
Q5. GST Compensation Cess का क्या होगा?
1 फरवरी 2026 से यह पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
Pauri
उत्तराखंड का ये गांव हो गया वीरान, भालू के हमलों से परेशान होकर मज़बूरी में लिया फैसला

Pauri : भालू की दहशत से पौड़ी में गांव हुआ खाली, मज़बूरी में लेना पड़ा फैसला
मुख्य बिंदु
पौड़ी गढ़वाल (Pauri): उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगली जानवरों के हमले ज़े लोग खौफ में हैं। राज्य निर्माण के बाद पिछले वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा मानव-वन्य जीव संघर्ष के मामले सामने आए। जिनमें कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, इसके चलते पौड़ी जिले के पोखड़ा ब्लॉक के एक गांव में भालू के हमले से दहशत में आए लोगों ने पूरा गांव खाली कर दिया है। बीते दिनों गाँव के आखिरी परिवार ने भी अपना पैतृक घर छोड़ दिया है।
पौड़ी जिले में भालू के हमले से पूरा गांव हुआ खाली
एक तरफ जहाँ सरकार अपनी तारीफ़ करते नहीं थकती है। वहीँ दूसरी ओर पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगली जानवरों के हमलों को नियंत्रित करने के लिए पूरा तंत्र फेल होता दिख रहा है। विभाग के पास सैकड़ों की तादात में शिकायत जाने के बाद भी कोई ठोस रणनीति जमीन पर प्रभावी नहीं दिख रही है। इसके चलते अब पौड़ी जिले के पोखड़ा ब्लॉक में की पणिया ग्राम सभा के तोक गांव बस्ताग के एक परिवार ने बीते दिनों अपना पैतृक गाँव छोड़ दिया है। जिसके बाद पूरा गाँव वीरान हो गया है।
बीते दिनों आखिरी परिवार भी विस्थापित
बता दें कि, पूरा गांव पहले ही पलायन कर चुका था। जिसके बाद कई लोगों ने भालू के हमले से परेशान होकर विस्थापन किया था। ऐसे में यही एक आखिरी परिवार था जो गाँव को आबाद कर रहा था। लेकिन अब भालू के बढ़ते हमलों से इस परिवार का हौंसला भी टूट गया है। जिसके बाद वो भी पड़ोस के गांव पाणिया में विस्थापित हो चुके हैं।
जनवरी महीने में महज तीन दिनों के भीतर भालू ने उनके छह मवेशियों को अपना शिकार बना लिया। लगातार जान के खतरे और आजीविका पर मंडराते संकट को देखते हुए उन्हें पूरे परिवार के साथ गांव छोड़ने का कठोर फैसला लेना पड़ा। उनका कहना है कि अब तक न तो प्रशासन की ओर से कोई आर्थिक सहायता मिली है और न ही कोई अधिकारी हालचाल लेने पहुंचा है।
– हरिप्रसाद, पलायन करने वाले ग्रामीण
मज़बूरी में लेना पड़ा गाँव छोड़ने का फैसला
परिवार के सदस्यों का कहना है कि ये निर्णय उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि मजबूरी में लिया है। गांव में रहना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भालू दिन के उजाले में भी गांव के आसपास घूमते नजर आ रहे हैं। इस कारण महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक दहशत में हैं। इसके अलावा भालू लगातार मवेशियों को निशाना बना रहा है, जिससे परिवार को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है ।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पहले से ही जीवन यापन चुनौतीपूर्ण है और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने हालात को और अधिक कठिन बना दिया है। ऐसे में सरकार से जल्द ठोस और व्यावहारिक निर्णय लेने की मांग की जा रही है, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से अपने गांवों में रह सकें।
–बलवंत सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य, पोखड़ा
इस पूरे मामले पर वन विभाग का कहना है कि बस्तांग गांव में मवेशियों की मौत से जुड़े प्रकरण में मुआवजा प्रक्रिया प्रगति पर है। संबंधित रेंजर से रिपोर्ट मांगी गई है और प्रभावित परिवार को शीघ्र मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही भालू को पकड़ने के लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
– महातिम यादव, डीएफओ
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श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर, नंदा राजजात यात्रा 2026 पर बड़ा फैसला, जानिए क्या कहा……..

NANDA DEVI RAJ JAT YATRA 2026: श्रीनंदा राजजात समिति ने लिया बड़ा फैसला
NANDA DEVI RAJ JAT YATRA 2026: उत्तराखंड में इस वर्ष 2026 में होने वाली नंदा राज जात (ठुली जात) यात्रा का हर कोई इन्तजार कर रहा है। बता दें कि हिमालयी महाकुंभ के नाम से प्रचलित ये यात्रा प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित की जाती है। आखिरी बार ये यात्रा साल 2014 में हुई थी। लेकिन इस बार नंदा राज जात यात्रा समिति ने बड़ा फैसला लिया है।
मुख्य बिंदु
नंदा राजजात यात्रा 2026 पर समिति का बड़ा फैसला
इस वर्ष वसंत पंचमी के दिन नंदा राजजात यात्रा के कार्यक्रम के लिए दिन तय किया जाना था। इससे पहले नंदा राज जात यात्रा को लेकर रुट मैप भी जारी कर दिया गया है। लेकिन समिति ने अब बड़ा फैसला लेते हुए बताया कि इस वर्ष ये धार्मिक यात्रा नहीं हो पाएगी।
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एशिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा- नंदा देवी राजजात यात्रा
नंदा देवी राज जात यात्रा एशिया की सबसे लम्बी धार्मिक यात्रा है। ये यात्रा उत्तराखंड के चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड में जाकर आम लोगों के लिए पूरी हो जाती है। जिसके बाद वहां से आगे चौसिंगिया खाडू (चार सींग वाले भेड़) को अकेले हिमालय के लिए रवाना किया जाता है। ये यात्रा 20 दिन में कठिन हिमालयी बुग्यालों से होते हुए 280 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करती है।

इस वर्ष नहीं हो पाएगी यात्रा, साल 2027 में संभावित
इस वर्ष यात्रा का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा था। लेकिन नंदा देवी राजजात यात्रा समिति ने बड़ा फैसला लेते हुए बताया कि हिमालयी क्षेत्रों में पूरा काम न होने से ये यात्रा इस वर्ष नहीं हो पाएगी। श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ राकेश कुंवर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हिमालयी क्षेत्र में काम पूरे नहीं हो पाए हैं। इसलिए ये राजजात अब 2027 में आयोजित होगी।
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Dehradun
F.R.I. देहरादून में अब नहीं घूम सकेंगे पर्यटक, जानिए क्यों लगाई गई रोक

FRI Dehradun: देहरादून आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी खबर, सुरक्षा व्यवस्था के चलते FRI में एंट्री पर रोक
FRI dehradun: देहरादून में घूमने आने वालों के लिए वन अनुसंधान संस्थान एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है। लेकिन अब यहाँ आने वाले पर्यटकों के सम्बन्ध में प्रबंधन की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया है। वन अनुसंधान संस्थान के प्रबंधन ने अस्थाई रूप से FRI में घूमने जाने वाले पर्यटकों पर रोक लगा दी है।
मुख्य बिंदु
फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट (FRI) घूमने जाने वालों पर लगी रोक
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित FRI वन अनुसंधान संस्थान में घूमने जाने वाले पर्यटकों पर प्रबंधन द्वारा अस्थाई तौर पर रोक लगा दी गई है। बता दें, कि FRI में प्रतिदिन 500 से 700 के बीच पर्यटक घूमने जाते हैं, जबकि वीकेंड और छुट्टी के दिन ये संख्या और भी बढ़ जाती है। फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट देहरादून घूमने आने वालों के लिए एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है। ऐसे में प्रबंधन समिति के इस निर्णय से पर्यटकों को बड़ा झटका लगा है।
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सुरक्षा व्यवस्था के चलते FRI बना नो एंट्री जोन
फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट के कुल सचिव विकास सिंह राणा ने इस संबंध में में आदेश जारी किया। जिसमें उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के चलते FRI में पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगाई गई है। ये आदेश तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेश तक लागू रहेगा। लेकिन पूर्व अनुमति के चलते शैक्षणिक भ्रमण जारी रहेगा।
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आदेश की स्पष्ट वजह नहीं बताई गई
फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट की ओर से जारी आदेश में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है, लेकिन इसके पीछे की स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है। ऐसे में, हाल ही में कई सुरक्षा कर्मचारियों को हटाए जाने की कार्रवाई से इस फैसले को जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर कुलसचिव विकास राणा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। जिसके चलते सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े इन परिवर्तनों के तहत यह निर्णय लिया गया है।
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