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UPSC Civil Services Exam 2026: नोटिफिकेशन स्थगित, पढे ताजा अपडेट..

UPSC Civil Services Exam 2026
UPSC Civil Services Exam 2026 का इंतजार कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए अहम खबर सामने आई है। Union Public Service Commission (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 और भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा का नोटिफिकेशन फिलहाल स्थगित कर दिया है। पहले यह नोटिफिकेशन 14 जनवरी को जारी होने वाला था, लेकिन अब आयोग ने इसे टाल दिया है। इस संबंध में एक आधिकारिक नोटिस भी जारी किया गया है, जिसे उम्मीदवार UPSC की वेबसाइट upsc.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।
यह खबर उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नोटिफिकेशन टलने का मतलब क्या है, आगे क्या हो सकता है और उम्मीदवारों को अभी क्या करना चाहिए।
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क्यों टला UPSC Civil Services Exam 2026 का नोटिफिकेशन?
UPSC की ओर से जारी नोटिस में बताया गया है कि प्रशासनिक कारणों के चलते सिविल सेवा परीक्षा 2026 और IFS परीक्षा के नोटिफिकेशन की तारीख स्थगित की गई है। आयोग ने यह भी साफ किया है कि नई तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी।
मतलब यह कि:
- अभी आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं होगी
- नई अधिसूचना (Notification) की तारीख अलग से घोषित की जाएगी
- उम्मीदवारों को फिलहाल इंतजार करना होगा
हालांकि, UPSC ने यह संकेत दिया है कि यह देरी स्थायी नहीं है और कुछ ही दिनों में स्थिति साफ हो सकती है।
क्या कुछ दिन बाद जारी हो सकता है नोटिफिकेशन?
हां, ऐसी पूरी संभावना है। आमतौर पर UPSC जब नोटिफिकेशन स्थगित करता है, तो कुछ समय बाद नई तारीख के साथ उसे जारी कर देता है। इस बार भी आयोग ने कहा है कि नोटिफिकेशन जल्द ही नोटिफाई किया जाएगा।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे:
- रोजाना UPSC की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें
- किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें
- केवल आधिकारिक नोटिस को ही सही मानें
UPSC Civil Services Exam 2026 के लिए आवेदन कैसे करें?
जो उम्मीदवार UPSC Civil Services Exam 2026 के लिए आवेदन करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए आवेदन प्रक्रिया जानना जरूरी है। नोटिफिकेशन जारी होते ही आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, जो पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
आवेदन करने के स्टेप्स
- सबसे पहले UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं
- होमपेज पर “UPSC Civil Services Exam 2026 Registration” लिंक दिखाई देगा
- लिंक पर क्लिक करने के बाद नया पेज खुलेगा
- यहां मांगी गई सभी जरूरी जानकारी ध्यान से भरें
- रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद अपने अकाउंट में लॉग इन करें
- निर्धारित आवेदन शुल्क जमा करें
- सभी डिटेल्स चेक करने के बाद फॉर्म सबमिट करें
- आवेदन फॉर्म का PDF डाउनलोड कर अपने पास सुरक्षित रखें
यह प्रक्रिया आसान है, लेकिन एक छोटी सी गलती भी आवेदन रद्द करा सकती है। इसलिए फॉर्म भरते समय पूरी सावधानी जरूरी है।
क्या परीक्षा शेड्यूल पर पड़ेगा असर?
यह सवाल इस समय लगभग हर उम्मीदवार के मन में है। नोटिफिकेशन टलने के बाद स्वाभाविक रूप से यह चिंता होती है कि क्या परीक्षा की तारीख भी बदलेगी।
UPSC कैलेंडर के अनुसार:
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) की संभावित तारीख: 24 मई 2026
अभी परीक्षा में काफी समय बाकी है। ऐसे में:
- प्रीलिम्स की तारीख बदलने की संभावना कम है
- हां, अगर नोटिफिकेशन और आवेदन प्रक्रिया में ज्यादा देरी होती है, तो आवेदन की अंतिम तारीख में बदलाव हो सकता है
पिछले वर्षों के ट्रेंड देखें तो UPSC आमतौर पर परीक्षा तिथि को यथावत रखने की कोशिश करता है।
उम्मीदवार अभी क्या करें?
नोटिफिकेशन भले ही टल गया हो, लेकिन यह समय बिल्कुल भी बर्बाद करने का नहीं है।
अभी करने योग्य बातें
- अपनी तैयारी जारी रखें, ब्रेक न लें
- सिलेबस और पिछले साल के प्रश्न पत्रों पर फोकस करें
- करेंट अफेयर्स की नियमित तैयारी करें
- UPSC की आधिकारिक वेबसाइट को ही अपडेट का स्रोत बनाएं
जो उम्मीदवार इस देरी से घबरा रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि यह अतिरिक्त समय उनकी तैयारी को और मजबूत करने का मौका भी है।
निष्कर्ष
UPSC Civil Services Exam 2026 का नोटिफिकेशन फिलहाल स्थगित किया गया है, लेकिन यह कोई नकारात्मक संकेत नहीं है। आयोग ने साफ कर दिया है कि नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। परीक्षा की संभावित तारीख में अभी बदलाव के आसार कम हैं।
उम्मीदवारों को चाहिए कि वे धैर्य बनाए रखें, तैयारी पर फोकस रखें और केवल आधिकारिक अपडेट पर ही भरोसा करें। UPSC जैसी परीक्षा में सफलता के लिए निरंतरता और सही जानकारी सबसे ज्यादा जरूरी होती है।
FAQs
Q1. UPSC Civil Services Exam 2026 का नोटिफिकेशन क्यों टला है?
प्रशासनिक कारणों की वजह से नोटिफिकेशन फिलहाल स्थगित किया गया है।
Q2. क्या UPSC ने नई तारीख घोषित कर दी है?
नहीं, अभी नई तारीख घोषित नहीं की गई है। इसे जल्द नोटिफाई किया जाएगा।
Q3. क्या प्रीलिम्स परीक्षा की तारीख बदलेगी?
फिलहाल इसकी संभावना कम है। UPSC कैलेंडर के अनुसार प्रीलिम्स 24 मई 2026 को प्रस्तावित है।
Q4. आवेदन कहां से करना होगा?
आवेदन UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in के जरिए ऑनलाइन किया जाएगा।
Q5. नोटिफिकेशन से जुड़ी अपडेट कहां मिलेगी?
उम्मीदवारों को केवल UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को ही फॉलो करना चाहिए।
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अष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर कंफ्यूजन, जानें कब करें कन्या पूजन, क्या है शुभ मुहूर्त ?

Ashtami or Navami 2026 : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इस दौरान भक्त उपवास रखकर माता रानी की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी के अवसर पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराकर सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की जाती है। कई भक्त अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, जबकि कुछ लोग नवमी तिथि को यह अनुष्ठान पूरा करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियां क्या हैं और कन्या पूजन के लिए कौन-से शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
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शारदीय नवरात्रि 2026 में कब है अष्टमी?
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। ये तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन कर सकते हैं। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को घर आमंत्रित कर उनके चरण धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
अष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है।

नवमी पर कब करें कन्या पूजन?
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर आरंभ होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि के समय के कारण कुछ परंपराओं में 19 अक्टूबर को नवमी के अनुष्ठान किए जा सकते हैं, जबकि उदयातिथि के आधार पर पूजा करने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर को नवमी मनाकर कन्या पूजन कर सकते हैं।
नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
नवमी के अवसर पर 19 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। वहीं, 20 अक्टूबर को भी अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। भक्त इस दौरान मां दुर्गा की आराधना और कन्या पूजन कर सकते हैं।
अष्टमी हो या नवमी, दोनों ही तिथियों पर कन्या पूजन को नवरात्रि की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा माना जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक मान्यताओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि चुनकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
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नवरात्रि पर मां के 9 रूप बदल सकते हैं किस्मत! जानें किसकी पूजा से दूर होंगे कष्ट

Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। हर दिन मां के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है और उनसे जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
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मां शैलपुत्री की पूजा से मिलेगी दृढ़ता
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। देवी का यह स्वरूप धैर्य, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की कामना की जाती है। जो लोग जीवन में अस्थिरता या निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं, वे माता की पूजा कर मनोबल प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
भोग: मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से बढ़ेगा आत्मबल
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, संयम और संकल्प शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मन को एकाग्र रखने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थी और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत कर रहे लोग भी माता से एकाग्रता और आत्मबल की कामना करते हैं।
भोग: माता को शक्कर, सफेद मिठाई या पंचामृत अर्पित किया जाता है।

मां चंद्रघंटा की आराधना से दूर होगा भय
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। देवी का यह स्वरूप साहस, शौर्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से भय और मानसिक अशांति से मुक्ति तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्राप्त करने की कामना की जाती है।
भोग: मां चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा से मिलेगी सकारात्मकता
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उन्हें सृष्टि की ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में ऊर्जा, उत्साह, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की जाती है। देवी का यह स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
भोग: मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा सुख-शांति का आशीर्वाद
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है और उनकी माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य और करुणा का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा से परिवार में सुख-शांति, प्रेम और खुशहाली की कामना की जाती है।
भोग: इस दिन माता को केले का भोग अर्पित किया जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा से मिलेगी बाधाओं से लड़ने की शक्ति
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति और सफलता प्राप्त करने की कामना की जाती है। देवी को महिषासुर का वध करने वाली मां के रूप में भी पूजा जाता है।
भोग: मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा है।

मां कालरात्रि की पूजा से दूर होगा भय और संकट
सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करती हैं। उनकी पूजा करके भक्त जीवन की परेशानियों, अनिश्चितताओं और संकटों का सामना करने के लिए शक्ति और साहस की कामना करते हैं।
भोग: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां महागौरी की पूजा से मिलती है शांति
नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी मनाई जाती है और मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है। अष्टमी पर कई परिवारों में कन्या पूजन भी किया जाता है।
भोग: मां महागौरी को नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में देवी को सिद्धियां प्रदान करने वाली और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माना जाता है। उनकी आराधना से ज्ञान, सफलता, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में संतुलन की कामना की जाती है। नवमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन और हवन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।

भोग: मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
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1 अक्टूबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम, आपकी जेब और दस्तावेजों पर पड़ेगा असर

New Rules : हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कुछ नए नियम और बदलाव लेकर आती है। अब अक्टूबर की शुरुआत होने वाली है और 1 अक्टूबर 2026 से LPG सब्सिडी, बैंक एफडी और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है।
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1 अक्टूबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम
कल यानी एक अक्टूबर से होने वाले बदलावों का सीधा असर आम ग्राहकों और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े कामकाज पर पड़ सकता है। ऐसे में अगर आप LPG सिलिंडर लेते हैं, बैंक में FD है या जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़ा काम है, तो इन बदलावों को जानना आपके लिए जरूरी है।
LPG सब्सिडी को लेकर देखने को मिलेगा बदलाव
सब्सिडी वाले सिलिंडर के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। हालांकि, BAA नहीं कराने पर LPG सिलिंडर की सप्लाई बंद नहीं होगी, लेकिन ग्राहक को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल सकता है और सिलिंडर बाजार दर पर लेना पड़ सकता है।

आरबीआई ने बल्क डिपॉजिट को लेकर नए नियम किए जारी
RBI के नए नियम के तहत अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बैंक अपनी जरूरत के अनुसार ऐसी एफडी पर ब्याज दर तय कर सकेंगे।
बैंकों को हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी नई ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी। 10 मिनट के ग्रेस पीरियड के बाद यानी 10:10 बजे तक दरें वेबसाइट पर उपलब्ध होनी जरूरी होंगी।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए भी बदले नियम
1 अक्टूबर से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित प्रावधान लागू होंगे। दो साल से अधिक देरी से पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। वहीं, एक से दो साल की देरी पर जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
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