Rudraprayag
तीर्थ यात्रियों का गौचर हेलीपैड पर किया जा रहा स्वास्थ्य परिक्षण, जरूरत पड़ने पर दिया जा रहा प्राथमिक उपचार।

चमोली/गौचर – मौसम साफ होने के साथ ही केदार घाटी में आज केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए MI 17 और चिनूक के माध्यम से रेस्क्यू फिर से शुरू हो चुका है। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी स्वयं लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे है।
सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। आज शुरू हुए ऑपरेशन में अभी तक 133 लोगों को सुरक्षित एयर लिफ्ट कर रेस्क्यू किया जा चुका है। रेस्क्यू किए जा रहे तीर्थ यात्रियों का गौचर हेलीपैड पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें प्राथमिक उपचार भी दिया जा रहा है।
वहीँ केदारनाथ क्षेत्र में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में प्रशासन को स्थानीय लोगों द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। ग्राम प्रधान चौमासी मुलायम सिंह तिंदोरी, सोनप्रयाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अंकित गैरोला, धर्मेश नौटियाल (शेरसी), दीर्घायु गोस्वामी (गौरीकुंड), पूर्व प्रधानगण, समस्त ग्रामवासी, घोड़ा-खच्चर संचालक, BKTC के पदाधिकारी एवं सदस्य, तीर्थ पुरोहित समाज, GMVN के कर्मचारीगण भी बढ़ चढ़कर स्थानीय प्रशासन के साथ बचाव कार्यों में जुटे हैं।
सीएम धामी ने कहा कि आप सभी लोगों के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अतिवृष्टि की वजह से होने वाले बड़े नुकसान को रोका जा सका है। आप सभी का हृदय की गहराइयों से आभार।
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सड़क पर अचानक आई भैंस…, अगले ही पल स्कॉर्पियो से भिड़ी कार, एक की दर्दनाक मौत

Rudrapur News : उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के पंतनगर थाना क्षेत्र में देर रात एक भीषण सड़क हादसे ने चार लोगों की जिंदगी बदल दी। कार के आगे भैंस आने के कारण दर्दनाक हादसा हो गया। जिसमें कार सवार एक शख्स की मौत हो गई।
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सड़क पर अचानक आई भैंस, अगले ही पल स्कॉर्पियो से भिड़ी कार
हल्द्वानी से आ रही एक स्विफ्ट कार पहले सड़क पर अचानक आए एक भैंस से टकरा गई। टक्कर के बाद चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार सामने से आ रही स्कॉर्पियो से जा भिड़ी। हादसे में स्विफ्ट कार में सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि तीन अन्य का अस्पताल में उपचार जारी है।
दर्दनाक हादसे में एक शख्स की मौत
जानकारी के अनुसार यह हादसा शुक्रवार रात करीब 11 बजे टांडा जंगल क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग से कुछ पहले हुआ। स्विफ्ट कार में सवार सभी लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक एक भैंस सड़क पर आ गई। चालक को संभलने का मौका नहीं मिला और कार सीधे भैंस से टकरा गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि भैंस की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार का संतुलन बिगड़ने से वो दूसरी लेन में चली गई और सामने से रुद्रपुर की ओर आ रही स्कॉर्पियो से आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि स्विफ्ट कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

कार सवार तीन गंभीर रूप से घायल
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने एक घायल को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीन घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर चिकित्सकों की लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच की शुरू
पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सड़क पर अचानक पशु के आने के कारण यह हादसा हुआ, लेकिन पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।
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रूद्रप्रयाग में अचानक बढ़ा मंदाकिनी का जल स्तर, बीच नदी में फंसे जेसीबी का ड्राइवर और हेल्पर

Rudraprayag News : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शनिवार को एक बड़ा हादसा टल गया। मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के कारण एक जेसीबी और उसका चालक समेत हेल्पर नदी में ही फंस गए।
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रूद्रप्रयाग में अचानक बढ़ा मंदाकिनी का जल स्तर
ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। जिससे नदी के बीच निर्माण कार्य में लगी एक जेसीबी मशीन तेज बहाव में फंस गई। मशीन में मौजूद चालक और उसका सहयोगी चारों तरफ से उफनती नदी के पानी से घिर गए।
बीच नदी में फंसे जेसीबी का ड्राइवर और हेल्पर
जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना पुलिस नियंत्रण कक्ष को मोबाइल के माध्यम से मिली। बताया गया कि सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना के कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद मंदाकिनी नदी का जलप्रवाह अचानक कई गुना बढ़ गया। जलस्तर में आई इस तेजी के कारण नदी के बीच काम कर रही जेसीबी बाहर नहीं निकल सकी और उसमें सवार दोनों लोग फंस गए।
बचाव दल ने सावधानी और सूझबूझ से बचे दोनों
सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र ने बिना देर किए राहत और बचाव अभियान शुरू कराया। एसडीआरएफ, जल पुलिस और नगर पंचायत अगस्त्यमुनि की संयुक्त टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और हालात का जायजा लिया।

तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल ने सावधानी और सूझबूझ के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद नदी के बीच फंसे जेसीबी चालक और उसके सहयोगी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
प्रशासन ने लोगों से की नदी के आस-पास ना जाने की अपील
समय पर की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि लगातार हो रही बारिश के दौरान नदी-नालों के आसपास जाने से बचें और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पूरी सतर्कता बरतें। साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान मौसम और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने की भी सलाह दी गई है।
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बाबा तुंगनाथ के दरबार में उमड़ा जनसैलाब, अब तक किए 1.18 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन

Rudraprayag News : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। 21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक 1,18,381 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं।
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बाबा तुंगनाथ के दरबार में उमड़ा जनसैलाब
चोपता से तुंगनाथ तक का पैदल मार्ग इन दिनों श्रद्धालुओं से गुलजार है। हिमालय की बर्फीली चोटियां, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण यात्रा को खास बना रहे हैं। बढ़ती श्रद्धालु संख्या से चोपता, बणियाकुंड और आसपास के क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट और स्थानीय कारोबार को भी अच्छा लाभ मिल रहा है।
अब तक किए 1.18 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन
मंदिर समिति, वन विभाग, तीर्थ पुरोहित समाज और स्थानीय संस्थाएं मिलकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधाओं का ध्यान रख रही हैं। तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित के अनुसार, अब तक दर्शन करने वालों में 60,962 पुरुष, 50,815 महिलाएं, 6,384 बच्चे, 151 साधु-संत और 69 विदेशी श्रद्धालु शामिल हैं।

लगातार बढ़ रही है श्रद्धालुओं की संख्या
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक ने बताया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला जाने वाले पर्यटकों को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या यह साबित कर रही है कि तुंगनाथ धाम अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड का एक प्रमुख आध्यात्मिक और पर्वतीय पर्यटन केंद्र भी बनता जा रहा है।
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