धर्म-कर्म
कब है vijaya ekadashi 2026 ? जाने , तिथि शुभ मुहूर्त और पूजन काल…

Vijaya Ekadashi 2026 : विजय, शांति और आध्यात्मिक शक्ति का पावन पर्व
विजया एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और मानसिक शांति पाने का विशेष अवसर मानी जाती है। “विजया” शब्द का अर्थ ही विजय या सफलता होता है, इसलिए इस दिन किए गए जप-तप और पूजा को अत्यंत फलदायी बताया गया है।
यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरण का पर्व भी है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं, भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और अपने जीवन की नकारात्मकताओं को दूर करने का संकल्प लेते हैं।
Vijaya Ekadashi 2026 की तिथि और समय
वर्ष 2026 में विजया एकादशी की तिथि इस प्रकार रहेगी:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे
इस अवधि के दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि एकादशी तिथि के दौरान किया गया व्रत और पूजा विशेष फल प्रदान करती है।
शुभ मुहूर्त और पूजन काल
धार्मिक दृष्टि से शुभ मुहूर्त में पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है। विजया एकादशी 2026 के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- चर मुहूर्त: सुबह 06:48 से सुबह 08:15 तक
- लाभ मुहूर्त: सुबह 08:15 से सुबह 09:41 तक
- अमृत मुहूर्त: सुबह 09:41 से सुबह 11:08 तक
इन मुहूर्तों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अमृत मुहूर्त को विशेष रूप से सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान की गई आराधना को दीर्घकालिक शुभ फल देने वाला बताया गया है।
व्रत पारण का समय
एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि को किया जाता है, जिसे पारण कहा जाता है। विजया एकादशी 2026 के लिए पारण का समय इस प्रकार रहेगा:
- व्रत पारण: 14 फरवरी 2026, सुबह 07:00 बजे से सुबह 09:14 बजे के बीच
- द्वादशी समाप्ति समय: शाम 04:01 बजे
पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। यह व्रत की पूर्णता का प्रतीक होता है और माना जाता है कि सही समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
विजया एकादशी को विशेष रूप से विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन के कठिन संघर्षों में सफलता मिलती है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि मानसिक शांति और आत्मबल को भी बढ़ाता है।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस दिन किया गया उपवास और भक्ति व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। यह आत्मनियंत्रण और अनुशासन का भी संदेश देता है। कई लोग इस दिन अपने जीवन की नकारात्मक आदतों को छोड़ने का संकल्प लेते हैं।
व्रत रखने की विधि
विजया एकादशी का व्रत सरल लेकिन नियमबद्ध माना जाता है। श्रद्धालु प्रातःकाल उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।
पूजन की सामान्य विधि इस प्रकार होती है:
- भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और दीप अर्पित करना
- धूप-दीप जलाकर मंत्र जाप करना
- विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करना
- दिनभर उपवास रखना और फलाहार लेना
- शाम के समय आरती करना
कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फल और दूध का सेवन करते हैं। व्रत की मुख्य भावना भक्ति और संयम होती है, इसलिए श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- भगवान विष्णु का स्मरण और मंत्र जाप
- जरूरतमंदों को दान देना
- सात्विक भोजन और विचार रखना
- मन को शांत और सकारात्मक रखना
क्या न करें
- क्रोध, झूठ और विवाद से बचें
- तामसिक भोजन का सेवन न करें
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें
- अनावश्यक तनाव न लें
इन नियमों का पालन करने से व्रत का आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक गहरा माना जाता है।
सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव
विजया एकादशी केवल व्यक्तिगत साधना का दिन नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मकता फैलाने का भी अवसर है। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन किया जाता है। लोग परिवार के साथ मिलकर पूजा करते हैं और धार्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं।
आध्यात्मिक रूप से यह दिन आत्मविश्लेषण का अवसर देता है। व्यक्ति अपने भीतर झांककर अपने दोषों को पहचानने और उन्हें सुधारने का प्रयास करता है। यही कारण है कि विजया एकादशी को आत्मशुद्धि और आत्मबल का पर्व भी कहा जाता है।
निष्कर्ष
विजया एकादशी 2026 आस्था, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का संगम है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता केवल बाहरी प्रयासों से नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और विश्वास से भी प्राप्त होती है। इस दिन रखा गया व्रत व्यक्ति को मानसिक दृढ़ता, आध्यात्मिक शांति और जीवन की चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा देता है।
जो लोग श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके लिए यह दिन केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बन जाता है।
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Raashifal 14 July 2026: भौमवती अमावस्या और व्याघात योग का महासंयोग, जानें सभी 12 राशियों का भाग्यफल

Raashifal 14 July 2026 : वैदिक ज्योतिष में हर दिन का अपना एक विशेष महत्व होता है क्योंकि ग्रहों और नक्षत्रों की चाल लगातार बदलती रहती है। जब हम 14 जुलाई 2026 की बात करते हैं, तो यह दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस दिन आषाढ़ मास की भौमवती अमावस्या (Ashadha Amavasya) का पावन संयोग बन रहा है। इसके साथ ही आकाशमंडल में व्याघात योग और पुनर्वसु नक्षत्र की जुगलबंदी देखने को मिलेगी।
ग्रहों के इस बड़े हेरफेर का सीधा असर मानव जीवन और सभी 12 राशियों पर पड़ने वाला है। कुछ राशियों के लिए जहां तरक्की के नए द्वार खुलेंगे, वहीं कुछ राशियों को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। आइए विस्तार से जानते हैं कि आपके करियर, व्यापार, स्वास्थ्य और प्रेम जीवन के लिए क्या सौगात लेकर आ रहा है।
Table of Contents
Raashifal 14 July 2026 का दैनिक पंचांग और शुभ मुहूर्त (Daily Panchang)
किसी भी दिन के राशिफल को गहराई से समझने के लिए उस दिन के पंचांग और ग्रहों की स्थिति को जानना आवश्यक है। 14 जुलाई 2026 को मंगलवार का दिन है, जो मंगल देव और संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है।
| पंचांग तत्व | विवरण (14 जुलाई 2026) |
| दिनांक | 14 जुलाई 2026 |
| वार (दिन) | मंगलवार (Tuesday) |
| मास व पक्ष | आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष |
| तिथि | आषाढ़ अमावस्या (दोपहर 03:12 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा) |
| नक्षत्र | पुनर्वसु नक्षत्र (रात्रि 12:09 बजे तक) |
| योग | व्याघात योग (दोपहर 11:57 बजे तक, फिर हर्षण योग) |
| चंद्र राशि | मिथुन राशि (शाम 06:48 बजे तक, उसके बाद कर्क राशि) |
| सूर्य राशि | मिथुन राशि |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:59 AM से 12:55 PM तक (शुभ कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ) |
| राहुकाल | दोपहर 03:55 PM से 05:38 PM तक (इस दौरान शुभ कार्य वर्जित हैं) |
विशेष नोट: चूंकि इस बार आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान और स्नान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और जीवन के समस्त आर्थिक संकट दूर होते हैं।
सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल (Rashifal 14 July 2026)
1. मेष राशिफल (Aries Horoscope) – Mesh Rashifal
मेष राशि के जातकों के लिए 14 जुलाई 2026 का दिन सामान्य से बेहतर रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिस्पर्धात्मक भावना आपको दूसरों से आगे रखेगी।
- करियर और व्यापार: ऑफिस में आपके काम की गति तेज रहेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नए निवेश के लिए योजना बना सकते हैं।
- आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग बन रहे हैं, लेकिन अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
- स्वास्थ्य व संबंध: जीवनसाथी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रहेंगे। माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
- शुभ उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें और बंदरों को गुड़-चना खिलाएं।
2. वृषभ राशिफल (Taurus Horoscope) – Vrishabha Rashifal
वृषभ राशि वाले लोगों के लिए यह दिन मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा। आज आपको वाणी पर संयम रखने की सख्त जरूरत है।
- करियर और व्यापार: कार्यस्थल पर किसी से वाद-विवाद में न पड़ें। सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाकर चलें। व्यापारी वर्ग को आज उधारी देने से बचना चाहिए।
- आर्थिक स्थिति: आर्थिक रूप से दिन थोड़ा धीमा रह सकता है। अचानक कोई बड़ा खर्च सामने आ सकता है।
- स्वास्थ्य व संबंध: पारिवारिक जीवन में थोड़ा तनाव हो सकता है। खान-पान में लापरवाही के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
- शुभ उपाय: भौमवती अमावस्या के अवसर पर किसी जरूरतमंद को लाल मसूर की दाल दान करें।
3. मिथुन राशिफल (Gemini Horoscope) – Mithun Rashifal
चंद्रमा आज शाम तक आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं। मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन आत्मनिरीक्षण और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का है।
- करियर और व्यापार: नौकरीपेशा जातकों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में नए कॉन्ट्रैक्ट मिलने की संभावना है जो भविष्य में बड़ा लाभ देंगे।
- आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे। पुराने फंसे हुए पैसे वापस मिल सकते हैं।
- स्वास्थ्य व संबंध: मानसिक शांति का अनुभव करेंगे। पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का मौका मिलेगा।
- शुभ उपाय: पक्षियों को दाना डालें और ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
4. कर्क राशिफल (Cancer Horoscope) – Kark Rashifal
व्याघात योग और भौमवती अमावस्या का यह संयोग कर्क राशि वालों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आज आपको हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा।
- करियर और व्यापार: कार्यक्षेत्र में विरोधी सक्रिय रह सकते हैं, जो आपकी छवि बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। बिजनेस में कोई भी बड़ा सौदा आज न करें।
- आर्थिक स्थिति: धन हानि के संकेत मिल रहे हैं। लॉटरी, सट्टा या शेयर बाजार में आज निवेश करने से पूरी तरह बचें।
- स्वास्थ्य व संबंध: मानसिक तनाव और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। गाड़ी चलाते समय बेहद सावधानी बरतें।
- शुभ उपाय: शिवलिंग पर कच्चा दूध और पानी मिलाकर अर्पित करें।
5. सिंह राशिफल (Leo Horoscope) – Singh Rashifal
सिंह राशि के जातकों के लिए 14 जुलाई का दिन खुशियों की सौगात लेकर आ रहा है। भाग्य का आपको भरपूर साथ मिलेगा।
- करियर और व्यापार: अगर आप नौकरी बदलने का सोच रहे हैं, तो आज अच्छे ऑफर मिल सकते हैं। व्यापार में अप्रत्याशित मुनाफा होने की उम्मीद है।
- आर्थिक स्थिति: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सुख-सुविधाओं की वस्तुओं पर धन खर्च हो सकता है।
- स्वास्थ्य व संबंध: स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी।
- शुभ उपाय: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और उसमें थोड़ा कुमकुम मिलाएं।
6. कन्या राशिफल (Virgo Horoscope) – Kanya Rashifal
कन्या राशि के जातकों के लिए आज का दिन काम के सिलसिले में बेहद व्यस्त रहने वाला है। आपकी मेहनत रंग लाएगी।
- करियर और व्यापार: कार्यस्थल पर काम का बोझ बढ़ सकता है, लेकिन आपकी कार्यकुशलता की सराहना होगी। व्यापारियों के लिए दिन प्रगतिकारक रहेगा।
- आर्थिक स्थिति: बजट बनाकर चलें। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग बन रहे हैं।
- स्वास्थ्य व संबंध: अत्यधिक काम की वजह से शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। परिवार के सदस्यों के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का प्लान बन सकता है।
- शुभ उपाय: भगवान गणेश को दूर्वा (घास) चढ़ाएं और मोदक का भोग लगाएं।
7. तुला राशिफल (Libra Horoscope) – Tula Rashifal
तुला राशि के लोगों के लिए आज का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों में बीतेगा। भाग्य का सितारा बुलंद रहने वाला है।
- करियर और व्यापार: उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी सफलता मिल सकती है। व्यापारिक यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी।
- आर्थिक स्थिति: निवेश के लिए दिन बहुत अच्छा है। लॉन्ग-टर्म इनवेस्टमेंट से भविष्य में बड़ा फायदा होगा।
- स्वास्थ्य व संबंध: मन शांत और प्रसन्न रहेगा। जीवनसाथी का हर मोड़ पर सहयोग प्राप्त होगा।
- शुभ उपाय: किसी मंदिर में कपूर का दान करें और माता लक्ष्मी की आरती करें।
8. वृश्चिक राशिफल (Scorpio Horoscope) – Vrishchik Rashifal
मंगल की यह अमावस्या वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मिले-जुले प्रभाव देगी। कुछ मामलों में आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
- करियर और व्यापार: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों से अनबन हो सकती है। अपनी योजनाओं को गुप्त रखें। व्यापार में कोई भी नया प्रयोग करने के लिए यह सही समय नहीं है।
- आर्थिक स्थिति: खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है जिससे बजट बिगड़ सकता है। कर्ज लेने या देने से बचें।
- स्वास्थ्य व संबंध: चोट या दुर्घटना की आशंका है, इसलिए वाहन चलाते समय सतर्क रहें। जीवनसाथी के साथ विवाद को तूल न दें।
- शुभ उपाय: हनुमान जी के मंदिर में जाकर सुंदरकांड का पाठ करें या सुनें।
9. धनु राशिफल (Sagittarius Horoscope) – Dhanu Rashifal
धनु राशि के जातकों के लिए पार्टनरशिप में किए गए कार्य आज बड़ी सफलता लेकर आएंगे। वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
- करियर और व्यापार: यदि आप साझेदारी में व्यापार करते हैं, तो आज का दिन बेहतरीन मुनाफा देगा। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या सैलरी इंक्रीमेंट की खबर मिल सकती है।
- आशिष्ट स्थिति: आर्थिक लाभ के मजबूत योग हैं। भौतिक सुख-साधनों में वृद्धि होगी।
- स्वास्थ्य व संबंध: स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। पुराने दोस्तों से मुलाकात मन को तरोताजा कर देगी।
- शुभ उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें और माथे पर चंदन का तिलक लगाएं।
10. मकर राशिफल (Capricorn Horoscope) – Makar Rashifal
मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती है।
- करियर और व्यापार: कार्यस्थल पर आपके विरोधी परास्त होंगे। आपकी कार्यशैली से बॉस प्रभावित होंगे। व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
- आर्थिक स्थिति: आय स्थिर रहेगी, लेकिन पुराने कर्जों से मुक्ति मिलने की शुरुआत हो सकती है।
- स्वास्थ्य व संबंध: सेहत के प्रति सचेत रहें, जोड़ों में दर्द या मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं। ननिहाल पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
- शुभ उपाय: शनि चालीसा का पाठ करें और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
11. कुंभ राशिफल (Aquarius Horoscope) – Kumbh Rashifal
कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन रचनात्मक कार्यों और बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन करने का है। संतान पक्ष से सुखद समाचार मिलेगा।
- करियर और व्यापार: कला, लेखन और मीडिया से जुड़े लोगों को बड़ा मंच मिल सकता है। व्यापार में नए विचारों के साथ आगे बढ़ेंगे, जिससे लाभ होगा।
- आर्थिक स्थिति: धन लाभ के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। लॉटरी या अचानक कहीं से रुका हुआ पैसा मिल सकता है।
- स्वास्थ्य व संबंध: प्रेम जीवन जी रहे लोगों के लिए आज का दिन रोमांस से भरपूर रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य तौर पर अच्छा रहेगा।
- शुभ उपाय: अमावस्या के दिन पितरों के नाम से जल में तिल मिलाकर तर्पण करें और किसी गरीब को भोजन कराएं।
12. मीन राशिफल (Pisces Horoscope) – Meen Rashifal
मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन मिला-जुला रहेगा। सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा, लेकिन मानसिक भटकाव भी हो सकता है।
- करियर और व्यापार: नौकरीपेशा लोगों को आज ऑफिस की राजनीति से दूर रहना चाहिए। व्यापार में सामान्य गति से काम चलता रहेगा। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में जल्दबाजी न करें।
- आर्थिक स्थिति: घरेलू सुख-साधनों और घर के रेनोवेशन पर धन खर्च होने की संभावना है।
- स्वास्थ्य व संबंध: माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। पारिवारिक माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए खुद को शांत रखें।
- शुभ उपाय: भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
भौमवती अमावस्या 2026: क्या करें और क्या न करें?
14 जुलाई 2026 को बनने वाली भौमवती अमावस्या के दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना हर राशि के जातक के लिए कल्याणकारी साबित हो सकता है:
क्या करें:
- पितृ तर्पण: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पितरों के नाम से तर्पण करें। ऐसा करने से पितृदोष शांत होता है।
- दान-पुण्य: काले तिल, ऊनी वस्त्र, अन्न या लाल रंग की वस्तुओं का दान आज के दिन विशेष फलदाई माना जाता है।
- हनुमान पूजा: चूंकि यह मंगलवार की अमावस्या है, इसलिए हनुमान जी को चोला चढ़ाना और बूंदी का भोग लगाना कर्ज से मुक्ति दिलाता है।
क्या न करें:
- तामसिक भोजन से बचें: आज के दिन मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें।
- नया कार्य शुरू न करें: राहुकाल के दौरान या व्याघात योग की उपस्थिति में कोई भी नया या बेहद महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
- वाद-विवाद: आज किसी भी असहाय, बुजुर्ग या महिला का अपमान न करें, अन्यथा कुंडली में ग्रह दोष बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, Rashifal 14 July 2026 का यह दिन बदलावों और अध्यात्म का एक अनोखा मिश्रण है। मेष, सिंह, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए जहां समय बेहद अनुकूल और आर्थिक प्रगति वाला है, वहीं कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों को अपनी सेहत, वाणी और धन के मामले में विशेष सावधानी बरतनी होगी।
याद रखें कि ज्योतिषीय भविष्यफल ग्रहों के गोचर पर आधारित एक सामान्य मार्गदर्शन है। आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली के ग्रहों की स्थिति के आधार पर परिणामों में भिन्नता हो सकती है। सचेत रहें, कर्म प्रधान बनें और सकारात्मक सोच के साथ दिन की शुरुआत करें!
आस्था
कब है Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 ? जानें शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का सटीक समय और पूजा विधि..

Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Overview
साल 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026) को लेकर भक्तों के बीच तारीखों का बड़ा असमंजस है कि यह व्रत 3 जून को रखा जाएगा या 4 जून को। पंचांग की गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि 3 जून 2026 को रात 09:22 बजे शुरू होकर 4 जून 2026 को रात 11:31 बजे समाप्त होगी। चूंकि संकष्टी चतुर्थी में चंद्रोदय (Moonrise) के समय पूजा और अर्घ्य देने का विधान है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत बुधवार, 3 जून 2026 को ही रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 10:04 बजे रहेगा।
3 या 4 जून संकष्टी चतुर्थी?
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूजनीय’ और ‘विघ्नहर्ता’ माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है। गणेश जी को प्रसन्न करने और जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) का व्रत सबसे फलदायी माना गया है।
साल 2026 में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026) बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है। यह कोई आम चतुर्थी नहीं है, बल्कि यह तीन साल में एक बार आने वाली अधिक मास (Adhik Maas) या मलमास की संकष्टी चतुर्थी है। आइए इस विशेष लेख में विस्तार से जानते हैं कि साल 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी की सही तारीख क्या है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, आपके शहर में चांद कब निकलेगा और इस दिन किस विधि से पूजा करने पर बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
क्यों बेहद खास है ‘विभुवन संकष्टी चतुर्थी’?
हिंदू पंचांग में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को ही विभुवन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
- तीन साल का इंतजार: चूंकि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह व्रत भी प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर ही पड़ता है।
- बुधवार का दुर्लभ संयोग: साल 2026 में इस व्रत का महत्व इसलिए और अधिक बढ़ गया है क्योंकि 3 जून को बुधवार का दिन है। बुधवार का दिन पूर्ण रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। ऐसे में बुधवार के दिन संकष्टी चतुर्थी का आना एक अत्यंत दुर्लभ और महासंयोग माना जा रहा है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों को कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी।
तारीख को लेकर क्यों है कंफ्यूजन? 3 या 4 जून?
पंचांग भेद और तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण अक्सर व्रत और त्योहारों की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। साल 2026 की अधिक मास संकष्टी चतुर्थी को लेकर भी ऐसा ही भ्रम बना हुआ है। आइए ज्योतिषीय गणना के आधार पर इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं:
- चतुर्थी तिथि का आरंभ: 3 जून 2026, बुधवार को रात 09 बजकर 22 मिनट पर।
- चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 4 जून 2026, गुरुवार को रात 11 बजकर 31 मिनट पर।
शास्त्रों का नियम: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन (Moon Sighting) और चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य होता है। बिना चंद्रोदय की पूजा के यह व्रत अधूरा माना जाता है।
- 3 जून की रात: चतुर्थी तिथि रात 09:22 बजे लग रही है और इस रात को चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद रहेगी।
- 4 जून की रात: इस दिन भले ही पूरे दिन चतुर्थी तिथि रहेगी, लेकिन रात को 11:31 बजे समाप्त हो जाएगी।
चूंकि 3 जून को रात के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान है और इसी रात को भक्तों को व्रत का पारण चांद देखकर करना है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का उपवास 3 जून 2026, बुधवार को ही रखा जाना शास्त्र सम्मत है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त और चौघड़िया (Shubh Muhurat)
3 जून 2026 को दिनभर में पूजा के कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें भगवान गणेश की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी:
सुबह का शुभ मुहूर्त (Morning Puja Muhurat)
- लाभ चौघड़िया: सुबह 05:23 बजे से सुबह 07:07 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: सुबह 07:07 बजे से सुबह 08:51 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक
शाम और रात का शुभ मुहूर्त (Evening Puja Muhurat)
- लाभ चौघड़िया: शाम 05:31 बजे से शाम 07:15 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: रात 08:31 बजे से रात 09:47 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: रात 09:47 बजे से रात 11:03 बजे तक
चंद्रोदय का सटीक समय (Moonrise Timing)
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण भाग रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है।
3 जून 2026 को चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 04 मिनट (10:04 PM) रहेगा।
(नोट: भारत के अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है।)
चंद्रमा को अर्घ्य देने से न केवल भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं, बल्कि जिन जातकों की कुंडली में चंद्र दोष होता है या मानसिक तनाव रहता है, उन्हें भी चंद्र देव की कृपा से शांति और मजबूती मिलती है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
यदि आप इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो नीचे दी गई शास्त्रीय विधि के अनुसार पूजा करें ताकि आपको अपनी पूजा का पूर्ण फल मिल सके:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें: व्रत के दिन सुबह जल्दी (सूर्योदय से पूर्व) उठें। घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करें। (इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है)।
- व्रत का संकल्प लें: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान गणेश के सामने बैठें और अपनी मनोकामना कहते हुए पूरे दिन निराहार या फलाहारी व्रत रखने का संकल्प लें।
- पूजा स्थल की तैयारी: एक लकड़ी की चौकी पर साफ पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- गंगाजल का छिड़काव: पूरे पूजा स्थल और स्वयं पर गंगाजल छिड़क कर पवित्रीकरण करें।
- पंचामृत स्नान: भगवान गणेश की धातु की मूर्ति है तो उन्हें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं।
- दूर्वा और सिंदूर: गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें अर्पित करें। याद रखें, बप्पा को दूर्वा अत्यंत प्रिय है और इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
- भोग लगाएं: गणेश जी को मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतु फल और पान का पत्ता अर्पित करें।
- दीपक और मंत्र जाप: बप्पा के सामने गाय के घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गणेश जी के प्रभावी मंत्रों का जाप करें (जैसे: ॐ गं गणपतये नमः या वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥)।
- कथा और आरती: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर या घी के दीपक से गणेश जी की आरती करें।
- शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य: शाम के समय दोबारा हाथ-पैर धोकर गणेश जी की आरती करें। रात को 10:04 बजे जब चंद्रोदय हो, तब एक तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, चंदन, अक्षत और फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद अपना व्रत खोलें (पारण करें)।
पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें? (Do’s and Don’ts)
- क्या करें:
- पूजा में हमेशा अक्षत (चावल) का उपयोग करें, लेकिन ध्यान रहे कि चावल के दाने टूटे हुए (खंडित) या सूखे नहीं होने चाहिए। चावल को थोड़ा गीला करके ही चढ़ाएं।
- दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब या जरूरतमंदों को तिल, अन्न या वस्त्र का दान करें।
- क्या न करें:
- गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों (Tulsi Leaves) का उपयोग भूलकर भी न करें। पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी ने तुलसी जी को अपनी पूजा से वर्जित किया है।
- व्रत के दिन घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन न बनाएं।
- किसी के प्रति मन में क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष की भावना न लाएं और न ही किसी को अपशब्द कहें।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ (Significance & Benefits)
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति तीन साल में एक बार आने वाली इस विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत सच्चे मन से रखता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- संकटों का नाश: ‘संकष्टी’ का अर्थ ही होता है संकटों को हरने वाली। जीवन में आ रही बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
- संतान सुख और दीर्घायु: महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए यह व्रत विशेष रूप से रखती हैं।
- आर्थिक समृद्धि: बुधवार के संयोग के कारण इस दिन पूजा करने से घर में रुकी हुई धन संपदा वापस आती है और व्यापार में उन्नति होती है।
- मानसिक शांति: चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन एकाग्रचित्त बनता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
साल 2026 की विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi 2026) आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक अनुपम अवसर है। 3 जून 2026, बुधवार को भगवान गणेश की विधि-विधान से की गई पूजा आपके जीवन के सभी विघ्न-बाधाओं को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी। आप सभी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं! बप्पा आपके जीवन को खुशियों से भर दें।
Chamoli
चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के खुले कपाट, ‘जय बाबा रुद्रनाथ’ के जयघोष से गूंज उठा पूरा क्षेत्र

Chamoli News : उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पंच केदारों में चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार, 18 मई को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विधिवत खोल दिए गए।
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चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के खुले कपाट
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज यानी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के बीच मंदिर के कपाट खोले गए। दोपहर 12:45 बजे आयोजित इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग मौजूद रहे। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा रुद्रनाथ’ के जयघोष से गूंज उठा।

अगले छह महीने यहीं होंगे बाबा रूद्रनाथ के दर्शन
कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा रुद्रनाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और राज्य की खुशहाली की कामना की। धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। कपाट खुलने के साथ ही बाबा रुद्रनाथ ग्रीष्मकाल के लिए अपने मूल धाम में विराजमान हो गए हैं।
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