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उत्तराखंड में आज से जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू, स्व-गणना कर राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किया शुभारंभ

Uttarakhand Census 2027 : उत्तराखंड में आज से जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो गया है। जनगणना-2027 की प्रक्रिया का शुभारंभ आज 10 अप्रैल 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) द्वारा लोक भवन में स्व-गणना (Self Enumeration) के माध्यम से किया।
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उत्तराखंड में आज से जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू
उत्तराखंड में आज से जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो गया है। राज्यपाल की स्व-गणना के माध्यम से इसका शुभारंभ हो गया है। इसके साथ ही प्रदेश में जनगणना के प्रथम चरण की गतिविधियाँ प्रारंभ हो गई हैं। यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है, जिसमें डेटा संग्रहण डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किया जा रहा है। साथ ही, नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा प्रदान की गई है, जो एक सुरक्षित और वेब-आधारित प्रणाली है।
स्व-गणना कर राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किया शुभारंभ
उत्तराखंड जनगणना 2027 (Uttarakhand Census 2027) की शुरूआत राज्यपाल ने स्वगणना कर की। सीएम पुष्कर सिंह धामी भी आज स्वगणना करेंगे। बता दें कि स्वजनगणना यानी कि जनगणना के पोर्टल पर जाकर आप खुद आपनी जानकारी भर सकते हैं। इसके लिए आपको 33 सवालों का जवाब देने होगा।

राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से की स्वजनगणना करने की अपील
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें और स्व-गणना के माध्यम से सटीक एवं पूर्ण जानकारी प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यह वेब पोर्टल आसान और यूजर फ्रेंडली बनाया गया है, जिसमें आम आदमी भी बिना परेशानी के सभी सूचनाएं भर सकता है।
राज्यपाल ने युवाओं एवं सामाजिक संस्थाओं से भी आग्रह किया कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और अन्य लोगों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग में सहायता प्रदान करें, ताकि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।
30 दिनों तक की जा सकेगी स्वगणना
बता दें कि उत्तराखण्ड में प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई, 2026 तक, 30 दिनों की अवधि में पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व प्रदेशवासियों को 10 अप्रैल से 24 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की सुविधा प्रदान की गई है।

https://se.census.gov.in/ इस अवधि में नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरण के माध्यम से लॉग इन कर स्वयं एवं अपने परिवार की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर सकते हैं।
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बड़ी खबर : देहरादून से पाकिस्तानी ISI एजेंट का हैंडलर गिरफ्तार, लंबे समय से था ISI एजेंट शहजाद भट्टी के संपर्क में

Dehradun News : राजधानी देहरादून से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। देहरादून एसटीएफ ने पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट के हैंडलर को गिरफ्तार किया है।
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देहरादून से पाकिस्तानी ISI एजेंट का हैंडलर गिरफ्तार
देहरादून एसटीएफ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े एक हैंडलर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी लंबे समय से देहरादून में रह रहा था।

लंबे समय से था ISI एजेंट शहजाद भट्टी के संपर्क में
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि तालीबानी विक्रांत कश्यप एक लंबे समय से देहरादून में रह रहा था। जो कि यहां एक कार वर्कशॉप में काम कर रहा था।
तालीबानी विक्रांत कश्यप पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी के संपर्क में था। देहरादून में रहकर वो तहरीक ए तालिबान हिंदुस्तान का प्रचार कर रहा था।
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कृषि विभाग को मिला स्थाई निदेशक, दिनेश कुमार को सौंपी गई जिम्मेदारी, आदेश जारी

Uttarakhand News : लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड कृषि विभाग को स्थाई निदेशक मिल गया है। इस पद पर दिनेश कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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दिनेश कुमार बने कृषि विभाग के स्थाई निदेशक
उत्तराखंड के कृषि विभाग में लंबे समय से लंबित चल रही नियुक्ति पर अब फैसला हो गया है। विभाग को स्थायी निदेशक मिल गया है।
सरकार ने वरिष्ठ अधिकारी दिनेश कुमार को पदोन्नत करते हुए इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद कृषि विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

दिनेश कुमार की नियुक्ति के आदेश जारी
कृषि विभाग के स्थाई निदेशक के पद पर दिनेश कुमार की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए हैं। बता दें कि ये पद 25 नवंबर 2025 से खाली चल रहा था। इसके साथ ही बीते कुछ समय से कृषि विभाग में स्थायी निदेशक के अभाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही थीं। विधानसभा सत्र में भी ये मुद्दा उठा था।
Dehradun
Dehradun News: DM सेविन बंसल का बड़ा फैसला, अल्ट्रासाउंड और रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटर पर सख्त नियम लागू

डायग्नोस्टिक सेंटरों की होगी कड़ी जांच, बिना मानक नहीं मिलेगा लाइसेंस
DEHRADUN NEWS: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिले में संचालित और प्रस्तावित अल्ट्रासाउंड और रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के पंजीकरण और नवीनीकरण को लेकर कड़े मानक तय कर दिए गए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के मुताबिक अब किसी भी सेंटर को बिना निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे आमजन को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
मुख्य बिंदु
पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रिया पर सख्ती
जिला प्रशासन द्वारा बीते छह महीनों से लगातार ऐसे डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच और मूल्यांकन किया जा रहा है, जो नए पंजीकरण के लिए आवेदन कर रहे हैं या पहले से संचालित होकर नवीनीकरण चाहते हैं। DM सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि केवल वही केंद्र अनुमति प्राप्त कर सकेंगे, जो सभी निर्धारित मानकों का पूर्ण रूप से पालन करेंगे। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जिले में अनियमित रूप से संचालित हो रहे केंद्रों पर नियंत्रण स्थापित करना और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को बढ़ाना है।

कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य
सभी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड और रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के लिए क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान करने वाले केंद्रों को पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत सभी नियमों का सख्ती से अनुपालन करना होगा, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
आवश्यक मानक और सुरक्षा व्यवस्थाएं
पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले सभी केंद्रों को स्वच्छता, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण की वैध व्यवस्था, सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी जैसी अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होगा। प्रशासन ने इन सभी पहलुओं को जनसुरक्षा से सीधे जुड़ा बताते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई और प्रशासन का उद्देश्य
जिलाधिकारी सविन बंसल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी आवेदनों की गहन जांच की जाए और केवल पात्र केंद्रों को ही अनुमति प्रदान की जाए। यदि किसी भी सेंटर में अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखना और आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है, ताकि लोग भरोसे के साथ चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठा सकें।
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