Dehradun
सर्दियों में गर्म पानी के नुकसान: क्या आप भी इसका अधिक सेवन कर रहे हैं?

देहरादून : पानी हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है, और गुनगुना पानी पीने से हमारे स्वास्थ्य पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। गुनगुना पानी पाचन क्रिया, रक्त संचार और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। हालांकि, अत्यधिक गर्म पानी पीने से शरीर में पानी का असंतुलन हो सकता है और यह आपके सोने के पैटर्न को भी प्रभावित कर सकता है।
गर्म पानी के लाभ
गुनगुना पानी पीने से शरीर में पानी का सही संतुलन बना रहता है और कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। गुनगुना पानी पाचन को बेहतर बनाता है, रक्त संचार को सुधारता है और तनाव को कम करता है। इसके अलावा, यह आपकी त्वचा को भी हाइड्रेटेड रखता है।
गर्म पानी पीने के जोखिम
बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से शरीर में जलन हो सकती है। यह आपके जीभ, गले या आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, अत्यधिक गर्म पानी पीने से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है और इससे जलन या जलन का एहसास भी हो सकता है। जब भी आप गर्म पानी पीते हैं, तो इसका तापमान जांचने के लिए एक छोटे घूंट का सेवन करना चाहिए।
जलने का खतरा
गर्म पानी पीने का एक प्रमुख जोखिम जलने का होता है। यदि पानी बहुत ज्यादा गर्म होता है, तो यह आपकी जीभ और गले को जला सकता है। इसके लिए, उबालने से पहले पानी का तापमान जरूर जांचें और सुनिश्चित करें कि पानी आपकी त्वचा के लिए सुरक्षित हो।
गर्म पेय पदार्थों से बचें
कॉफी या चाय जैसे गर्म पेय पदार्थ अक्सर उबालने पर परोसे जाते हैं। इनका अत्यधिक सेवन चिंता और बेचैनी पैदा कर सकता है। बेहतर होगा कि आप इनकी जगह सादा गुनगुना पानी पीने पर विचार करें।
क्या है सबसे अच्छा तापमान?
2008 के एक अध्ययन के अनुसार, गर्म पेय पदार्थों को पीने के लिए 136°F (57.8°C) का तापमान सबसे अच्छा होता है। यह तापमान जलने के जोखिम को कम करता है, जबकि गर्म पानी का सुखद अनुभव प्रदान करता है।
इसलिए, यदि आप गर्म पानी पीने के लाभ लेना चाहते हैं, तो इसका तापमान सही होना चाहिए। अत्यधिक गर्म पानी से बचने के लिए, इसे शरीर के सामान्य तापमान से थोड़ा गर्म रखें।
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Dehradun
प्रोजेक्ट्स की धीमी गति पर मुख्य सचिव ने जताई नाराजगी, कार्य जल्द पूरे करने के निर्देश

Dehradun News : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरूवार को सचिवालय में पूंजीगत व्यय, सीएसएस योजनाएं, एसएएससीआई, एसएनए स्पर्श एवं विभागों की व्यय योजनाओं के सम्बन्ध में विभिन्न विभागों के साथ बैठक ली।
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प्रोजेक्ट्स की धीमी गति पर मुख्य सचिव ने जताई नाराजगी
मुख्य सचिव ने वाह्य सहायतित योजनाओं (ईएपी) के सम्बन्ध में अधिकारियों को धीमी प्रगति वाले प्रोजेक्ट्स में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति के लिए विभागाध्यक्ष एवं सचिव जिम्मेदार होंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान एवं कृषि विभाग को मिलकर बड़े एवं एकीकृत प्रोजेक्ट्स पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सेब, कीवी और ऐरोमा के क्षेत्र में इंटीग्रेटेड फार्मिंग की दिशा में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि फिशरीज के अंतर्गत ट्राउट उत्पादन में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कोल्ड स्टोरेज की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने पशुपालन विभाग एवं सहकारिता विभाग को मिलकर लाइवस्टॉक एवं फिशरीज को लेकर इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट तैयार किया जाने के निर्देश दिए।
प्रदेशभर में कोल्ड स्टोरेज चेन की जाए तैयार
मुख्य सचिव ने ऐपल मिशन के तहत सेब के उत्पादन के लिए नर्सरी एवं कोल्ड स्टोरेज चैन तैयार किए जाने हेतु अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में जहां जहाँ आवश्यकता है, कोल्ड स्टोरेज चैन तैयार की जाए ताकि प्रदेश का कोई भी किसान खुद अपने किसी भी उत्पाद कोल्ड स्टोर में रखकर अनुकूल समय पर अपने उत्पाद बाज़ार में उतार सकता है।

मुख्य सचिव ने पीएमजीएसवाई के तहत प्रदेशभर में भूमि मुआवजा वितरण कार्य अभियान चलाकर शून्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को जिलावार डेटा उपलब्ध कराते हुए इस वित्तीय वर्ष में भूमि मुआवजा पूर्ण रूप से वितरित किए जाने हेतु लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग चैन लिंक फेंसिंग के लिए प्राप्त प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता तय करते हुए प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजे जायें।
जल संरक्षण के लिए किए जाएं प्रयास
मुख्य सचिव ने स्प्रिंग एवं रिवर रेजूविनेशन प्राधिकरण के तहत जल संरक्षण हेतु बैराज एवं चेक डैम के प्रोजेक्ट्स संबंधित विभागों द्वारा तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने सारा के तहत फंड्स को पूर्णतः यूटिलाइज़ किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने परिवहन विभाग को नए बस स्टेशन, चार्जिंग स्टेशन के कार्यों में तेजी लाते हुए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किए जाने के निर्देश दिए।
Uttarakhand
बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, इस दिन से बढ़ेंगे दाम…

UPCL PRICE HIKE 2026: उत्तराखंड में जल्द लागू होंगी नई बिजली दरें, आयोग करेगा चार शहरों में जनसुनवाई
मुख्य बिंदु
UPCL PRICE HIKE 2026: उत्तराखण्ड में एक अप्रैल 2026 से नई बिजली दरें लागू जो जाएंगी। जिसे लेकर प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग 18 फरवरी से राज्य के चार शहरों में इसे लेकर जनसुनवाई करेगा। नई बिजली दरों में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।
उत्तराखंड में 1 अप्रैल से लागू होंगी नई बिजली दरें
उत्तराखंड राज्य में एक अप्रैल 2026 से नई बिजली दरों को लागू करने के सम्बन्ध में प्रस्ताव जारी किया जा चुका है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग इस मामले में 18 फरवरी से देहरादून, कर्णप्रयाग, रुद्रपुर और मुनस्यारी में जनसुनवाई करेगा।
जनसुनवाई में उपभोगता दे सकेंगे सुझाव
इस जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता अपना सुझाव या आपत्ति आयोग के सामने दर्ज करा सकते हैं। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने कहा कि जनसुनवाई के बाद आयोग सभी तथ्यों को देखने के बाद ही टैरिफ प्रस्ताव पर निर्णय लेगा। जिसके बाद नई बिजली दरें एक अप्रैल से लागू की जाएंगी।
पढ़ें ये भी – गणतंत्र दिवस परेड़ में कर्तव्य पथ पर नहीं दिखेगी उत्तराखंड की झांकी, रोस्टर के चलते हुआ फैसला
UPCL ने 16.23 प्रतिशत बढ़ोतरी का दिया प्रस्ताव
बात दें कि, राज्य के तीनों ऊर्जा निगमों ने इस बार 18.50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। जिसमें UPCL ने 16.23 प्रतिशत, पिटकुल ने लगभग तीन प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा पहली बार UJVANL का टैरिफ प्रस्ताव माइनस 1.2 प्रतिशत है। विद्युत नियामक आयोग ने इन सभी याचिकाओं पर उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से 31 जनवरी तक सुझाव मांगे हैं।
UPCL बिजली दरें 2026 में कब से लागू होंगी?
उत्तराखंड में नई UPCL बिजली दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएंगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) इस पर अंतिम फैसला जनसुनवाई के बाद करेगा।
UPCL ने बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है?
UPCL ने बिजली दरों में 16.23 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जबकि राज्य के तीनों ऊर्जा निगमों ने मिलकर औसतन 18.50 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की है।
UPCL Price Hike 2026
घरेलू उपभोक्ताओं का बिजली बिल बढ़ सकता है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
Dehradun
देहरादून में ऑटो रिक्शा चालकों का सीएम आवास कूच, रेपिडो को बंद करने की है मांग

Dehradun News : देहरादून में दून ऑटो रिक्शा यूनियन ने आज अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर सीएम आवास कूच किया। पुलिस ने प्रदर्शन कारियों को ग्लोब चौक के पास बेरिकेट लगा कर रोक दिया है।
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देहरादून में ऑटो रिक्शा चालकों का सीएम आवास कूच
Dehradun में ऑटो रिक्शा चालकों का सीएम आवास कूच किया। पुलिस ने उन्हें सीएम आवास से पहले ही बैरिकेड लगाकर रोक लिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के जरिए सरकार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रर्दशनकारियों ने जमकर नारेबाजी भी की।
Dehradun में चक्का जाम करने की दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वो पूर्व में भी कई बार सरकार को अपनी मांगों को लेकर पत्र लिख चुके हैं। लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। प्रदर्शन कारियों ने सरकार को चेतावनी दी। अगर उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं करती तो वो आने वाले दिनों में देहरादून में चक्का जाम करेंगे।
लंबे समय से ऑटो चालक कर रहे हैं मांग
- 1. निजी नंबर प्लेट पर चल रहे दोपहिया वाहन लंबे समय से ऑनलाइन माध्यम से वाणिज्यिक गतिविधियां कर रहे हैं। इससे सीएनजी ऑटो रिक्शा चालकों के रोजगार पर सीधा और गंभीर असर पड़ रहा है, इसलिए ऐसे वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
- 2. शहर में इलेक्ट्रॉनिक ऑटो और ई-रिक्शाओं की संख्या जरूरत से कहीं अधिक हो चुकी है। इसके कारण पारंपरिक सीएनजी ऑटो चालकों को सवारी नहीं मिल पा रही है और ट्रैफिक दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में नए ई-ऑटो/ई-रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद किया जाना आवश्यक है।
- 3. ऑटो रिक्शा (3+1) परमिट की वर्तमान 25 किलोमीटर सीमा को बढ़ाकर 40 किलोमीटर किया जाए या फिर ऑटो चालकों को जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक सवारी ले जाने की अनुमति दी जाए।

- 4. वर्तमान में ई-रिक्शा मुख्य मार्गों पर संचालित हो रहे हैं, जबकि शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार इन्हें मोहल्लों की आंतरिक गलियों तक सीमित किया जाना चाहिए। इस विषय में कई बार प्रशासन से वार्ता के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
- 5.देहरादून जनपद में फिटनेस सेंटर को शहर के केंद्र में स्थापित किया जाए या उसकी व्यवस्था को बेहतर किया जाए। साथ ही आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त फिटनेस सेंटर भी खोले जाएं।
- 6. इलेक्ट्रॉनिक ऑटो और ई-रिक्शा के क्रय-विक्रय एवं रजिस्ट्रेशन के समय मूल निवास प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र और वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य किए जाएं। वाहन बेचने या खरीदने वाला चालक उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
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