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पूर्व सांसद Prajwal Revanna को बलात्कार मामले में उम्रकैद, 11 लाख रुपये जुर्माना

बेंगलुरु: जनता दल (सेक्युलर) से निष्कासित नेता और पूर्व लोकसभा सांसद Prajwal Revanna को घरेलू नौकरानी से बलात्कार के मामले में शनिवार को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो पूरी रकम पीड़िता को दी जाएगी।
34 वर्षीय Prajwal Revanna पर यौन शोषण और बलात्कार के कुल चार मामले दर्ज थे। इनमें से एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत से कम सजा की अपील की
सजा सुनाए जाने से पहले Prajwal Revanna ने अदालत से कम सजा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीति में तेजी से आगे बढ़ने के अलावा कोई गलती नहीं की। कोर्ट में वे रो भी पड़े और बोले, “मैंने कुछ गलत नहीं किया… मैं छह महीने से अपने माता-पिता से भी नहीं मिला।”
कोर्ट ने दलीलें नहीं मानी
अदालत ने प्रज्वल की दलीलों को ठुकराते हुए कहा कि मामला गंभीर है और उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई। साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को मुआवज़े के तौर पर दी जाए।
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Border 2 में किस किरदार मे नज़र आए दिलजीत दोसांझ जाने उस परमवीर चक्र विजेता की विजय गाथा…

Nirmal Jit Singh Sekhon : परमवीर चक्र विजेता भारतीय वायु सेना का एक मात्र अधिकारी
Nirmal Jit Singh Sekhon: 23 जनवरी 2026 को रिलीज हुई फिल्म Border 2 ने 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े कई वीरों की कहानियों को दोबारा सामने रखा। इन्हीं में एक नाम था Nirmal Jit Singh Sekhon, जिनका किरदार फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने निभाया। ये भूमिका सिर्फ एक सैनिक की नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान की कहानी को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु
Nirmal Jit Singh Sekhon: वायुसेना के इतिहास का विशेष नाम
Nirmal Jit Singh Sekhon भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर तैनात थे। उन्हें अनुशासित, निडर और तेज निर्णय लेने वाले पायलट के रूप में जाना जाता था। देश के लिए उनका योगदान इतना असाधारण रहा कि वे भारतीय वायुसेना के इतिहास में परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले एकमात्र अधिकारी बने।
1971 का युद्ध: जब अकेले आसमान में डट गए सेखों
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान दिसंबर का महीना चल रहा था। 14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर एयरबेस पर अचानक हालात बदल गए। पाकिस्तानी वायुसेना ने हवाई हमले की कोशिश की, जबकि उस समय भारतीय एयरबेस पर सुरक्षा संसाधन बेहद सीमित थे।
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इसी नाजुक स्थिति में Flying Officer Nirmal Jit Singh Sekhon ने बिना किसी हिचक के अपने Gnat फाइटर जेट को उड़ाने का फैसला लिया। ये फैसला आसान नहीं था। सामने कई दुश्मन विमान थे और समर्थन लगभग ना के बराबर था।
Nirmal Jit Singh ने आसमान में अकेले ही मोर्चा संभाला
सेखों ने पीछे हटने के बजाय आसमान में अकेले ही मोर्चा संभाला। उन्होंने दुश्मन विमानों को श्रीनगर एयरबेस के करीब आने से रोकने की कोशिश की और अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। ये मुकाबला किसी रणनीतिक जीत से ज्यादा कर्तव्य और साहस का प्रतीक बन गया।
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इस संघर्ष में वे वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनका यह बलिदान भारतीय सैन्य इतिहास में अमर हो गया। बाद में भारत सरकार ने उनके अद्वितीय साहस को सम्मान देते हुए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया।

Border 2 में दिलजीत दोसांझ की भूमिका
फिल्म Border 2 में दिलजीत दोसांझ ने Nirmal Jit Singh Sekhon का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने गंभीर और भावनात्मक रूप में देखा। यह भूमिका उनके अब तक के करियर की सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में गिनी गई।
फिल्म में दिलजीत का किरदार युद्ध के शोर से ज्यादा उस पल के फैसले पर केंद्रित रहा, जब एक पायलट ने जान की परवाह किए बिना अपने एयरबेस और देश की रक्षा को प्राथमिकता दी।
क्यों खास रहा ये किरदार
- ये किरदार किसी काल्पनिक कहानी पर नहीं, बल्कि वास्तविक इतिहास पर आधारित रहा
- 1971 युद्ध की हवाई लड़ाई का दुर्लभ चित्रण दिखाया गया
- भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान मिला
- नई पीढ़ी को एक भूले-बिसरे नायक से परिचय कराया गया
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फिल्म और दर्शकों की प्रतिक्रिया
Border 2 के रिलीज के बाद इस किरदार को लेकर खास चर्चा हुई। दर्शकों और समीक्षकों ने माना कि Nirmal Jit Singh Sekhon की कहानी फिल्म का सबसे भावनात्मक और प्रभावशाली हिस्सा रही। दिलजीत दोसांझ के अभिनय को संयमित और सम्मानजनक बताया गया।

निष्कर्ष
Nirmal Jit Singh Sekhon सिर्फ एक युद्ध नायक नहीं थे, बल्कि वह उदाहरण थे कि संकट के समय एक निर्णय इतिहास बन सकता है। Border 2 के जरिए उनकी कहानी एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श में आई और यह याद दिलाया कि 1971 के युद्ध में सिर्फ ज़मीन पर नहीं, बल्कि आसमान में भी भारत के वीरों ने इतिहास रचा था।
Who was Nirmal Jit Singh Sekhon?
Nirmal Jit Singh Sekhon भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग ऑफिसर थे, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान श्रीनगर एयरबेस की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। वे भारतीय वायुसेना के एकमात्र अधिकारी हैं जिन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
Why is Nirmal Jit Singh Sekhon famous?
Nirmal Jit Singh Sekhon इसलिए प्रसिद्ध हैं क्योंकि उन्होंने 14 दिसंबर 1971 को दुश्मन वायुसेना के कई विमानों का सामना अकेले किया और अंतिम सांस तक लड़ते हुए देश की रक्षा की।
Did Nirmal Jit Singh Sekhon receive the Param Vir Chakra?
Yes. Nirmal Jit Singh Sekhon को उनके अद्वितीय साहस और बलिदान के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
Is Border 2 based on real war stories?
Yes. Border 2 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े वास्तविक सैन्य नायकों और उनके बलिदान पर आधारित फिल्म है।
Business
Gold Silver Rate Today : सोने-चांदी ने रचा नया इतिहास, 20 जनवरी 2026 को ₹1.50 लाख के पार पहुंचा गोल्ड; चांदी @3.20 लाख…

Gold Silver Rate Today : सोने-चांदी ने रचा नया इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार के लिए मंगलवार, 20 जनवरी 2026 की सुबह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी व्यापार नीतियों (Trump Tariffs) के डर ने निवेशकों को ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की ओर धकेल दिया है। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा, जहाँ दोनों ही कीमती धातुओं ने अपने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए नए शिखर को छू लिया है।
आज एमसीएक्स (MCX) पर सोने का भाव Rs 1,50 लाख के स्तर को छू गया, जबकि चांदी ने पहली बार Rs 3,20,000 प्रति किलोग्राम का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
1. सोने की कीमतों में तूफानी तेजी: विस्तृत विश्लेषण
आज सुबह जब बाजार खुला, तो 5 फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना Rs 136 की मामूली बढ़त के साथ Rs 1,45,775 पर था, लेकिन देखते ही देखते इसमें जबरदस्त खरीदारी लौटी। और बढ़त 1,50,000 के पार चली गयी ।
ताजा आंकड़ों पर एक नजर:
- इंट्राडे हाई: सोने ने कारोबारी सत्र के दौरान Rs 1,52,500 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया।
- अप्रैल 2026 डिलीवरी: लंबी अवधि के अनुबंधों (April Futures) में तेजी और भी अधिक रही, जहाँ भाव Rs 1,59,699 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए।
- कारण: जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसी वैश्विक संस्थाओं ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि 2026 तक सोना $5,000 प्रति औंस (लगभग Rs 1.58 लाख प्रति 10 ग्राम) तक जा सकता है। आज की तेजी उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

2. चांदी की चमक: ‘गरीबों का सोना’ बना अमीरों की पसंद
चांदी ने आज रिटर्न के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। शुरुआती सत्र में लाल निशान में रहने के बाद, सिल्वर फ्यूचर्स ने 3.11% की छलांग लगाई।
- नया रिकॉर्ड: चांदी का भाव अब Rs 3,20,000 के बेहद करीब (Rs 3,19,949/kg) पहुंच चुका है।
- औद्योगिक मांग: विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षित निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और सेमीकंडक्टर उद्योगों से आ रही भारी मांग ने चांदी को ‘2026 की मेगा थीम’ बना दिया है।
3. Gold Silver Rate Today : प्रमुख शहरों में आज का भाव (20 जनवरी 2026)
भारत के विभिन्न शहरों में कर (Taxes) और स्थानीय मांग के आधार पर भाव थोड़े भिन्न हो सकते हैं। नीचे प्रमुख महानगरों के ताजा रेट दिए गए हैं:
| शहर | 24 कैरेट सोना (प्रति 10g) | 22 कैरेट सोना (प्रति 10g) | चांदी (प्रति kg) |
| दिल्ली | ₹1,50,075 | ₹1,35,155 | ₹3,20,000 |
| मुंबई | ₹1,50,040 | ₹1,35,000 | ₹3,20,000 |
| देहरादून | ₹1,49,410 | ₹1,36,860 | ₹3,20,000 |
| कोलकाता | ₹1,50,320 | ₹1,35,000 | ₹3,20,000 |
| हैदराबाद | ₹1,49,480 | ₹1,35,000 | ₹3,30,000 |
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल (Global Market Trends)
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पीली धातु (Yellow Metal) की चमक कम नहीं हो रही है।
- कॉमैक्स गोल्ड: 2.01% चढ़कर Rs 4,687.7 प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गया।
- स्पॉट गोल्ड: Rs 4,685.57 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
- डॉलर इंडेक्स: अमेरिकी डॉलर में आई हल्की कमजोरी ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने को सस्ता कर दिया है, जिससे मांग में और उछाल आया है।
5. क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (Expert Opinion & Analysis)
बाजार के दिग्गज और कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन ‘T’ काम कर रहे हैं:
- Tension (भू-राजनीतिक): रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों को अनिश्चितता के समय सोने की ओर खींच रहा है।
- Tariffs (व्यापार युद्ध): अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित नए आयात शुल्कों (Greenland & Trade War) ने वैश्विक व्यापार संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिससे करेंसी मार्केट में डर का माहौल है।
- Trends (सेंट्रल बैंक बाइंग): दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेषकर चीन और भारत, अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की निर्भरता कम करने के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
6. निवेश रणनीति: क्या अभी खरीदना सही है?
मेहरा इक्विटीज के विशेषज्ञों के अनुसार, सोना वर्तमान में Rs 1,44,050–Rs 1,42,310 के मजबूत सपोर्ट जोन पर है। यदि आप लंबी अवधि (1-2 साल) के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो ‘बाय ऑन डिप’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति सबसे बेहतर है।
- ज्वेलरी बनाम निवेश: यदि आपका उद्देश्य केवल निवेश है, तो 22 कैरेट की जगह डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर विचार करें, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और शुद्धता की समस्या नहीं होती।
7. निष्कर्ष
20 जनवरी 2026 का दिन भारतीय सर्राफा इतिहास में दर्ज हो गया है। ₹1.50 लाख के करीब पहुंचता सोना और Rs 3.20 लाख को छूती चांदी यह साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में भी तेजी जारी रह सकती है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार की अस्थिरता (Volatility) को ध्यान में रखना चाहिए।
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Does God Exist? जावेद अख़्तर कौन हैं, उनके जन्मदिन पर पढ़िए चुनिंदा शेर..

Javed Akhtar Birthday: शब्दों का जादूगर, विचारों का योद्धा और भारतीय सिनेमा की जीवित विरासत
Javed Akhtar Birthday: जावेद अख़्तर केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा, साहित्य और विचारधारा का एक ऐसा अध्याय हैं, जिसने दशकों तक समाज को शब्द, सोच और साहस दिया। 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में जन्मे जावेद अख्तर आज हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली पटकथा लेखक, गीतकार, कवि और निर्भीक विचारक के रूप में जाने जाते हैं।
मुख्य बिंदु
Javed Akhtar on Does God Exist
आज जावेद अख़्तर का 81 वां जन्म दिन है। वर्तमान समय में शायद ही ऐसा कोई होगा जो जावेद अख्तर को न जनता होगा। अगर आप उन्हें नहीं भी जानते हो फिर भी उनके गाने या शायरी कभी न कभी सोशल मीडिया की फीड से आपकी जुबान तक जरूर पहुंचे होंगे। हाल ही में लल्लनटॉप के मंच पर”क्या ईश्वर है” चर्चा के बाद तो जावेद अख्तर का नाम डिजिटल युग के छोटे-बड़े हर इंसान की जुबान पर था। जावेद अख्तर और मुफ़्ती शामाइल के बीच चली इस बहस ने उनके तर्कों पर हर किसी को सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
साहित्यिक विरासत से सिनेमा तक का सफर
जावेद अख्तर को शब्द विरासत में मिले। उनके पिता जान निसार अख्तर उर्दू के प्रतिष्ठित कवि और गीतकार थे, जबकि उनके दादा और परदादा भी साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। बचपन लखनऊ में बीता, जहाँ तहज़ीब और शायरी ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। भोपाल के सैफिया कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे सपनों की नगरी मुंबई पहुँचे—जेब खाली थी, लेकिन हौसले बेहिसाब।
सलीम-जावेद: जिसने हिंदी सिनेमा की दिशा बदल दी
1970 के दशक में जावेद अख्तर की किस्मत तब बदली जब उनकी जोड़ी सलीम खान के साथ बनी। सलीम-जावेद नाम की इस ऐतिहासिक जोड़ी ने हिंदी फिल्मों को नया नायक दिया—“Angry young men”।
ज़ंजीर, दीवार, शोले, डॉन, त्रिशूल और शक्ति जैसी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि समाज के गुस्से, संघर्ष और आत्मसम्मान को परदे पर उतार दिया। सलीम-जावेद भारतीय सिनेमा के पहले ऐसे पटकथा लेखक बने जिन्हें स्टारडम मिला।
गीतों में संवेदना, शब्दों में क्रांति (Songs, shayari of javed akhtar)
1980 के दशक में जोड़ी के टूटने के बाद जावेद अख्तर ने गीत लेखन को अपना मुख्य माध्यम बनाया। उनके गीत मनोरंजन से कहीं आगे जाकर संवेदना, सामाजिक चेतना और मानवीय भावनाओं की आवाज़ बने।
“एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा”,
“संदेशे आते हैं”,
“कल हो ना हो”,
“मितवा”,
“तेरे लिए”
जैसे गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में बसे हैं।
बेबाक विचारक और सामाजिक हस्तक्षेप
जावेद अख्तर सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि एक निर्भीक सार्वजनिक बुद्धिजीवी हैं। वे खुलकर धर्मनिरपेक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, तर्कवाद और लैंगिक समानता की वकालत करते रहे हैं। स्वयं को “सभी धर्मों के प्रति समान अवसर वाला नास्तिक” बताने वाले अख्तर ने सामाजिक पाखंड पर हमेशा सवाल उठाए।
2010 से 2016 तक वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे और संसद में कला व संस्कृति की सशक्त आवाज बने।
पुरस्कार और सम्मान
जावेद अख्तर को मिले सम्मान उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण हैं:
- पद्म श्री (1999)
- पद्म भूषण (2007)
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (2013)
- रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड (2020) – पाने वाले पहले भारतीय
- 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- 16 फिल्मफेयर पुरस्कार
निजी जीवन: कला का पारिवारिक वृक्ष
जावेद अख्तर की पहली शादी हनी ईरानी से हुई, जिनसे उनके दो बच्चे—फरहान अख्तर और जोया अख्तर—हुए, जो आज खुद सिनेमा के बड़े नाम हैं। बाद में उन्होंने अभिनेत्री शबाना आज़मी से विवाह किया। यह परिवार भारतीय सिनेमा का एक रचनात्मक स्तंभ माना जाता है।
आज भी प्रासंगिक
2024 में आई अमेज़न प्राइम की डॉक्यूमेंट्री ‘Angry Young Men’ ने एक बार फिर सलीम-जावेद की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ा। वहीं 2025 में “क्या ईश्वर का अस्तित्व है?” विषय पर हुई बहस में जावेद अख्तर की तार्किक दृष्टि ने वैश्विक ध्यान खींचा।
जावेद अख्तर के जन्मदिन पर पढ़िए उनके लिखे चुनिंदा शेर
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
गलत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता

नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो
हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग

हमको तो बस तलाश नए रास्तों की है,
हम हैं मुसाफिर ऐसे जो मंजिल से आए हैं

इस शहर में जीने के अंदाज निराले हैं
होठों पे लतीफ़े हैं आवाज में छाले हैं

मैं पा सका न कभी इस खलिश से छुटकारा
वह मुझसे जीत भी सकता था जाने क्यों हारा

अगर लहरों को है दरिया में रहना
तो उनको होगा चुपचाप अब बहना

तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूं फिर भी शायद
निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

तब हम दोनों वक्त चुरा कर लाते थे
अब मिलते हैं जब भी फुर्सत होती है

जावेद अख्तर कौन हैं?
जावेद अख्तर भारत के प्रसिद्ध कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैं। वे हिंदी सिनेमा और आधुनिक उर्दू शायरी में अपने गहरे विचारों और प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते
जावेद अख्तर क्यों प्रसिद्ध हैं?
जावेद अख्तर अपनी अर्थपूर्ण गीत रचनाओं, प्रगतिशील सोच और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक विचारों के कारण प्रसिद्ध हैं।
Famous Books of Javed Akhtar
जावेद अख्तर की प्रमुख पुस्तकें हैं:
तरकश
लावा
टॉकिंग सॉन्ग्स
Javed Akhtar birthday date
17 january 1945, ग्वालियर
जावेद अख्तर को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
जावेद अख्तर को:पद्म श्रीपद्म भूषणराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारकई फिल्मफेयर पुरस्कारमिल चुके हैं।
Does God exist (क्या ईश्वर है) ?
हाल ही में जावेद अख्तर और मुफ़्ती शमाइल के बीच हुई बहस से जावेद काफी चर्चाओं में आए।
mufti shamail कौन है?
मुफ़्ती शमाइल नदवी एक भारतीय इस्लामी विद्वान हैं, जो जावेद अख़्तर के साथ “क्या ईश्वर है?” विषय पर हुई बहस के लिए चर्चा में आए।
क्या जावेद अख्तर नास्तिक हैं
हां जावेद अख्तर नास्तिक हैं
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