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Gold Silver Rate Today : सोने और चांदी की कीमतों में आज भी गिरावट जारी , जाने आज का ताज़ा भाव…

Gold Silver Rate Today: सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
Gold Silver Rate Today (2 फरवरी 2026): भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जो कोहराम मचा है, उसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद सोने और चांदी की कीमतें अब ताश के पत्तों की तरह ढह रही हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर हाजिर बाजार तक, हर तरफ ‘लोअर सर्किट’ और ‘पैनिक सेलिंग’ का माहौल है।
विशेष रूप से चांदी में आई गिरावट ने दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अगर आप भी सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार का ताजा हाल और एक्सपर्ट्स की राय जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
चांदी की कीमतों में ‘महाविस्फोट’, 37% तक टूटे दाम
पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव देखा गया है, वह किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं है। 23 जनवरी 2026 को जो चांदी Rs3.34 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी, वह अब अपने उस शिखर से करीब 37% नीचे ट्रेड कर रही है।
- MCX का हाल: रविवार को विशेष सत्र के दौरान चांदी 9% लुढ़क कर Rs2.65 लाख के स्तर पर आ गई थी।
- आज का भाव: 2 फरवरी 2026 को चांदी का भाव Rs2,30,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है, जो पिछले सप्ताह के Rs 4,20,000 (30 जनवरी) के ऑल-टाइम हाई से Rs1.20 लाख सस्ता है।
सोने में भी भारी गिरावट, ₹1.36 लाख पहुंचा भाव
सोने के निवेशकों के लिए भी समय चुनौतीपूर्ण है। गुरुवार को सोना Rs1.93 लाख प्रति 10 ग्राम के अपने उच्चतम स्तर पर था, लेकिन अब यह वहां से लगभग 20% सस्ता हो चुका है।


क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट? 4 मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारकों का मेल है:
- केविन वार्श की नियुक्ति और मजबूत डॉलर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वार्श को अगला फेड चेयरमैन बनाने का संकेत दिया है। वार्श को ‘महंगाई के प्रति सख्त’ (Inflation Hawk) माना जाता है। इस खबर से डॉलर इंडेक्स में जबरदस्त उछाल आया, जिससे डॉलर-प्राइस वाली धातुओं (सोना-चांदी) पर दबाव बढ़ गया।
- CME मार्जिन में बढ़ोतरी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए CME ग्रुप ने सोने और चांदी के वायदा अनुबंधों (Futures) पर मार्जिन बढ़ा दिया है। चांदी के लिए इसे 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है, जिससे सट्टेबाजों को अपनी पोजीशन छोड़नी पड़ी।
- बजट 2026 का असर: भारत सरकार द्वारा बजट में आयात शुल्क (Import Duty) को लेकर जो अनिश्चितता थी, उसने भी निवेशकों को मुनाफावसूली के लिए उकसाया।
- तकनीकी सुधार (Technical Correction): एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतें अपनी वास्तविक वैल्यू से बहुत ऊपर चली गई थीं। व्हाइट ओक कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो जो आमतौर पर 80:1 होता है, गिरकर 46:1 पर आ गया था। इतिहास गवाह है कि जब भी चांदी सोने के मुकाबले इतनी महंगी हुई है, उसके बाद उसमें बड़ी गिरावट आई है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? अब क्या करें निवेशक?
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रणव मेर के अनुसार, “कीमतें जितनी तेजी से ऊपर गई थीं, उतनी ही तेजी से नीचे आ रही हैं। अगले कुछ दिनों में बाजार में और तकनीकी सुधार देखा जा सकता है।”
निवेशकों के लिए सलाह: > व्हाइट ओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि साल 2011 में जब चांदी ने टॉप बनाया था, तो उसे रिकवर होने में 9 साल लग गए थे। इसलिए, इस समय ‘पैनिक’ होकर सारा पैसा एक साथ न लगाएं।
रणनीति क्या होनी चाहिए?
- किश्तों में खरीदारी (Staggered Buying): अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो मौजूदा गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका है, लेकिन इसे किश्तों में करें।
- स्टॉप लॉस का ध्यान रखें: शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि बाजार में ‘लोअर सर्किट’ लगने का खतरा अभी टला नहीं है।
- रुपये की चाल पर नजर: यदि वैश्विक स्तर पर गिरावट जारी रहती है, तो गिरता हुआ रुपया भी आपके निवेश को डूबने से नहीं बचा पाएगा।
निष्कर्ष: सावधानी ही बचाव है
सोने और चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट नए खरीदारों के लिए दरवाजे जरूर खोल रही है, लेकिन “गिरते हुए चाकू को पकड़ने” की कोशिश न करें। बाजार को स्थिर होने दें और अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार ही निवेश करें।
National
संसद में पेश हुआ आम बजट 2026-27, जानिए किसके हिस्से क्या आया….

Budget 2026-27: विकसित भारत की दिशा में तीन कर्तव्यों पर आधारित दूरदर्शी रोडमैप
मुख्य बिंदु
Budget 2026-27: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया। इस बजट को तीन राष्ट्रीय कर्तव्यों से प्रेरित बताया गया. सरकार ने इसे युवा शक्ति संचालित, गरीब-कल्याण केंद्रित और समावेशी विकास का बजट करार दिया है।
आम बजट 2026-27 विकसित भारत 2047 के लिए निर्णायक: वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये बजट भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर निर्णायक रूप से आगे ले जाने का प्रयास है, जिसमें आर्थिक वृद्धि, मानव क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास को समान प्राथमिकता दी गई है।
बजट की मूल भावना: तीन राष्ट्रीय कर्तव्य
वित्त मंत्री के मुताबिक, बजट 2026-27 तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित है—
1️⃣ आर्थिक वृद्धि को तेज करना और बनाए रखना
इस कर्तव्य का उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने की क्षमता विकसित करना और भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना है।
2️⃣ लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण
युवाओं, महिलाओं, पेशेवरों और श्रमिकों को सशक्त बनाकर उन्हें भारत की विकास यात्रा का भागीदार बनाना इस कर्तव्य का मूल उद्देश्य है।
3️⃣ सबका साथ, सबका विकास
ये दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि हर परिवार, समुदाय और क्षेत्र को संसाधनों, अवसरों और सुविधाओं तक समान पहुंच मिले।
युवा शक्ति और वंचित वर्गों पर विशेष फोकस
वित्त मंत्री ने कहा कि ये बजट गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। सरकार का लक्ष्य समावेशी विकास के साथ महत्वाकांक्षा का संतुलन बनाते हुए देश को आगे बढ़ाना है।
आर्थिक वृद्धि के लिए छह रणनीतिक हस्तक्षेप क्षेत्र
पहले कर्तव्य के अंतर्गत सरकार ने छह प्रमुख क्षेत्रों में हस्तक्षेप की घोषणा की—
- रणनीतिक और सीमावर्ती क्षेत्रों में विनिर्माण विस्तार
- विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्निर्माण
- एमएसएमई को “चैम्पियन” के रूप में विकसित करना
- अवसंरचना पर सशक्त निवेश
- दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता
- शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास
बायोफॉर्मा शक्ति: भारत को वैश्विक फार्मा हब बनाने की तैयारी
भारत को वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केंद्र बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से बायोफॉर्मा शक्ति योजना की घोषणा की गई। इसके तहत—
- बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा
- 3 नए NIPER और 7 मौजूदा संस्थानों का उन्नयन
- 1000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स
- दवा नियामक प्रणाली को और सशक्त करना
वस्त्र और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती
श्रम-गहन वस्त्र क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना, टेक्स-इको पहल और समर्थ 2.0 जैसी योजनाएं लाई गई हैं।
वहीं, एमएसएमई को भविष्य का विकास इंजन मानते हुए 10,000 करोड़ रुपये का SME विकास कोष प्रस्तावित किया गया है।
रिकॉर्ड सार्वजनिक पूंजीगत व्यय
सरकार ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को—
- 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ से
- 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है
यह अवसंरचना, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देगा।
हाई-स्पीड रेल और लॉजिस्टिक्स में बड़ा कदम
पर्यावरण-अनुकूल यात्री परिवहन के लिए 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे मार्ग शामिल हैं।
इसके अलावा नए फ्रेट कॉरिडोर और राष्ट्रीय जलमार्गों के विस्तार की भी घोषणा की गई।
शिक्षा, कौशल और पर्यटन पर विशेष जोर
- 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट लैब
- हर जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास
- 20 पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइडों का कौशल उन्नयन
- राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना
खेलो इंडिया मिशन: खेल क्षेत्र में क्रांति
खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेल अवसंरचना, प्रशिक्षण, कोचिंग और खेल विज्ञान को नई दिशा दी जाएगी।
कृषि और ग्रामीण सशक्तिकरण
- भारत विस्तार नामक बहुभाषी AI कृषि टूल
- लखपति दीदी योजना का विस्तार
- सहकारी समितियों को अतिरिक्त कर रियायतें
प्रत्यक्ष कर सुधार: नया आयकर अधिनियम 2025
- नया आयकर कानून अप्रैल 2026 से लागू
- सरल नियम और फॉर्म
- TCS और TDS दरों में कटौती
- दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाना
आईटी, क्लाउड और विदेशी निवेश को बढ़ावा
- आईटी सेवाओं के लिए एकल सेफ हार्बर श्रेणी
- सीमा 300 करोड़ से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये
- विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को 2047 तक टैक्स हॉलीडे
सीमा शुल्क और व्यापार सुगमता
- निजी उपयोग के आयात पर टैरिफ 20% से घटाकर 10%
- 17 जीवनरक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क छूट
- डिजिटल सिंगल विंडो कस्टम क्लीयरेंस
राजकोषीय स्थिति और घाटा
- FY 2026-27 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.3%
- ऋण-GDP अनुपात में गिरावट
- मजबूत वित्तीय अनुशासन का संकेत
ये भी पढ़ें – India Post GDS Recruitment 2026: 10वीं पास युवाओं के लिए बिना परीक्षा सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका..
रिकॉर्ड तोड़ दाम : सोने की कीमत एक लाख 80 हजार पार, चांदी की कीमत भी पहुंची चार लाख
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आम बजट 2026-27 पेश करेंगी निर्मला सीतारामण, PM मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी

Aam Budget 2026-27: आज होगा संसद में पेश होगा आम बजट, सबकी निगाहें टैक्स दरों पर
मुख्य बिंदु
Aam Budget 2026-27: आज रविवार 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में लगातार 9 वीं बार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी. साथ ही ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का लगातार 15 वां बजट होगा. ये बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है.
आम बजट 2026-27 : संसद में आज होगा पेश
आज रविवार 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में लगातार 9 वां बजट पेश करेंगी. आजाद भारत के इतिहास में पहली बार बजट रविवार को पेश किया जाएगा. ये प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का लगातार 15 वां बजट होगा. इस बजट दुनिया भर के तमाम अर्थशास्त्रियों की निगाहें टिकी रहेंगी, क्यूंकि ये ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है.
सबकी निगाहों पर होगा आम बजट 2026
इसके साथ ही देश के हर वर्ग की निगाहें भी इस बजट पर टिकी हुई हैं. मिडिल क्लास से लेकर अपर क्लास तक, किसान हो या व्यवसाई सबकी नजर बजट पर रहेंगी. ये आम बजट सरकार के लिए भी एक अग्निपरीक्षा है, क्यूंकि इस वक़्त देश भर में महंगाई चरम पर है, घरेलू मांग बड़ी हुई है और इकॉनमी पर संकट छाया हुआ है.
मिडिल क्लास को महंगाई से राहत की उम्मीद
लोगों को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। एक ओर मिडिल क्लास तो दूसरी ओर व्यापारी वर्ग, हर कोई इसे लेकर उत्सुक नजर आ रहा है। खास तौर पर महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद आम लोगों के बीच सबसे बड़ी चिंता और अपेक्षा बनी हुई है। माना जा रहा है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं जैसे दाल, तेल, चावल, सब्जियां, दवाइयां और बिजली-पानी पर टैक्स में कमी की जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो घरेलू खर्च में कुछ राहत मिलेगी और आम आदमी की जेब में थोड़ी बचत संभव होगी।
टैक्स सिस्टम हो सकता है पारदर्शी
गौरतलब है कि सरकार ने पिछले बजटों में भी महंगाई को काबू में रखने के लिए कई कदम उठाए थे और इस बार भी उसी दिशा में ठोस फैसलों की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा, टैक्स सिस्टम को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा सकता है, ताकि करदाताओं को टैक्स भरने में कम दिक्कत हो और अनावश्यक झंझट से राहत मिले। कुल मिलाकर, यह बजट आम आदमी की जरूरतों और आर्थिक राहत पर केंद्रित रहने की उम्मीद जगाता है।
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ELI Scheme 2026: युवाओं को नौकरी और उद्योगों को मजबूती देने वाली ऐतिहासिक रोजगार योजना

ELI Scheme 2026
भारत आज जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें सबसे बड़ा सवाल यही है – नौकरी कैसे मिले और नौकरी कैसे दी जाए? लाखों युवा हर साल पढ़ाई पूरी कर रोजगार की तलाश में निकलते हैं, वहीं दूसरी ओर कई उद्योग बढ़ती लागत और जोखिम के कारण नई भर्तियों से बचते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए सरकार लेकर आई है ELI Scheme 2026 (Employment Linked Incentive Scheme)।
यह योजना सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल है। इसमें पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं और नौकरी देने वाले नियोक्ताओं—दोनों को सीधा लाभ मिलता है।
ELI Scheme 2026 क्या है? (What is ELI Scheme 2026)
ELI Scheme 2026 एक रोजगार-आधारित प्रोत्साहन योजना है, जिसमें सरकार उन कंपनियों और संस्थानों को आर्थिक सहायता देती है जो नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखते हैं। साथ ही, जो युवा पहली बार औपचारिक नौकरी में कदम रखते हैं, उन्हें भी वित्तीय लाभ दिया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो:
“नौकरी दो – प्रोत्साहन लो, नौकरी पाओ – आर्थिक मदद पाओ”
यह योजना औपचारिक रोजगार (Formal Employment) को बढ़ावा देती है और EPFO जैसे सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करती है।
ELI Scheme 2026 लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
भारत में रोजगार से जुड़ी कुछ बड़ी चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं:
- पहली नौकरी पाने में युवाओं को कठिनाई
- कंपनियों के लिए नई भर्ती महंगी पड़ना
- असंगठित क्षेत्र में नौकरी, लेकिन सुरक्षा नहीं
- स्किल और अनुभव के बीच गैप
ELI Scheme 2026 इन सभी समस्याओं को एक साथ संबोधित करती है। सरकार का उद्देश्य है कि नियोक्ताओं का बोझ कम हो, ताकि वे ज्यादा लोगों को नौकरी देने के लिए प्रेरित हों।
ELI Scheme 2026 के प्रमुख उद्देश्य
इस योजना के पीछे सरकार के स्पष्ट और व्यावहारिक लक्ष्य हैं:
- देश में नए रोजगार का सृजन
- पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को अवसर
- EPFO के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाना
- MSME और निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन
- असंगठित रोजगार को औपचारिक ढांचे में लाना
- युवाओं में आर्थिक साक्षरता विकसित करना
ELI Scheme 2026 के दो मुख्य भाग
🔹 भाग-A: पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए
यह हिस्सा पूरी तरह युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
मुख्य विशेषताएं:
- पहली बार EPFO से जुड़ने वाले कर्मचारी पात्र
- 6 महीने की निरंतर नौकरी पूरी करने पर पहली किस्त
- 12 महीने पूरे होने और वित्तीय साक्षरता कोर्स के बाद दूसरी किस्त
कुल प्रोत्साहन राशि:
➡️ ₹15,000 (दो किस्तों में)
यह पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में भेजा जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
🔹 भाग-B: नियोक्ताओं (Employers) के लिए
इस भाग का मकसद है कंपनियों और उद्योगों को नई भर्ती के लिए प्रोत्साहित करना।
नियोक्ताओं को मिलने वाले लाभ:
- प्रति नए कर्मचारी ₹1,000 से ₹3,000 प्रति माह तक प्रोत्साहन
- यह सहायता 2 वर्षों तक दी जाती है
- निर्माण (Manufacturing) क्षेत्र को 4 वर्षों तक लाभ
इससे कंपनियों के लिए कर्मचारियों की लागत कम होती है और वे ज्यादा भर्तियां कर पाती हैं।
ELI Scheme 2026 की पात्रता (Eligibility Criteria)
👤 कर्मचारियों के लिए
- पहली बार औपचारिक नौकरी
- EPFO में नया पंजीकरण
- तय वेतन सीमा के भीतर आय
- आधार और बैंक खाता लिंक होना अनिवार्य
🏢 नियोक्ताओं के लिए
- EPFO में पंजीकृत प्रतिष्ठान
- योजना अवधि के दौरान नई भर्तियां
- समय पर ECR फाइल करना
- सभी रिकॉर्ड डिजिटल और सत्यापित होना
ELI Scheme 2026 के लाभ (Key Benefits)
✔️ युवाओं के लिए
- पहली नौकरी का अवसर
- सामाजिक सुरक्षा (PF)
- अतिरिक्त आर्थिक सहायता
- वित्तीय प्रबंधन की समझ
✔️ उद्योगों के लिए
- कर्मचारी लागत में कमी
- स्थायी वर्कफोर्स
- उत्पादकता में बढ़ोतरी
- सरकारी सहयोग और भरोसा
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
ELI Scheme 2026 का प्रभाव कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा:
- मैन्युफैक्चरिंग
- टेक्सटाइल और गारमेंट
- कंस्ट्रक्शन
- लॉजिस्टिक्स
- हॉस्पिटैलिटी
- MSME सेक्टर
- स्टार्टअप्स
ये वही क्षेत्र हैं जहां बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी दी जा सकती है।
ELI Scheme 2026 का आर्थिक प्रभाव
यह योजना केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है:
- बेरोजगारी दर में गिरावट
- घरेलू खपत में वृद्धि
- टैक्स बेस का विस्तार
- स्किल्ड मैनपावर का निर्माण
- ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती
संभावित चुनौतियां
हर योजना की तरह इसमें भी कुछ चुनौतियां हो सकती हैं:
- फर्जी भर्तियों का जोखिम
- छोटे उद्योगों में जानकारी की कमी
- तकनीकी समस्याएं
- भुगतान में देरी
हालांकि डिजिटल निगरानी और EPFO डेटा के जरिए इन जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
ELI Scheme 2026 युवाओं के लिए क्यों अहम है?
आज का युवा सिर्फ नौकरी नहीं चाहता, वह सुरक्षित और स्थिर भविष्य चाहता है। यह योजना:
- फ्रेशर्स को मौका देती है
- कंपनियों को फ्रेश टैलेंट अपनाने के लिए प्रेरित करती है
- अनुभव और आय – दोनों की शुरुआत कराती है
निष्कर्ष (Conclusion)
ELI Scheme 2026 भारत में रोजगार नीति की दिशा बदलने वाली योजना है। यह युवाओं, उद्योगों और सरकार—तीनों के हितों को संतुलित करती है। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह योजना बेरोजगारी कम करने और आर्थिक विकास को तेज करने में अहम भूमिका निभाएगी।
यह कहना गलत नहीं होगा कि ELI Scheme 2026 ‘नौकरी और विकास’ के बीच की सबसे मजबूत कड़ी है।
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FAQs: ELI Scheme 2026
Q1. ELI Scheme 2026 क्या है?
यह रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना है, जिसमें नई भर्ती पर सरकार आर्थिक सहायता देती है।
Q2. क्या पहली बार नौकरी करने वालों को लाभ मिलेगा?
हां, उन्हें Rs15,000 तक की सहायता मिलती है।
Q3. नियोक्ताओं को कितना लाभ मिलता है?
Rs1,000–Rs3,000 प्रति कर्मचारी प्रति माह।
Q4. क्या यह योजना पूरे भारत में लागू है?
हां, यह राष्ट्रीय स्तर की योजना है।
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