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Dollar vs Rupee 2026 : डॉलर के मुकाबले बेहाल हुआ रूपया , रिकॉर्ड निचले स्तर पर पंहुचा..

डॉलर बनाम रुपया (Dollar vs Rupee): 2026 में भारतीय मुद्रा का ऐतिहासिक संकट और भविष्य की संभावनाएं
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 एक ऐसी अग्निपरीक्षा बनकर उभरा है, जहां वित्तीय गलियारों से लेकर आम आदमी की रसोई तक सिर्फ एक ही चर्चा है—रुपये की ऐतिहासिक गिरावट। पिछले वर्ष, यानी 2025 में भारतीय रुपये ने लगभग 3.5% की कमजोरी देखी थी, जिसने इसे एशियाई मुद्राओं की सूची में सबसे निचले पायदानों पर लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन 2026 की शुरुआत ने उन तमाम आशंकाओं को हकीकत में बदल दिया, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 और 91 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
यह लेख इस मुद्रा संकट के पीछे छिपे अर्थशास्त्र, वैश्विक राजनीति के दांव-पेंच और आने वाले समय में आपकी जेब पर पड़ने वाले असर का एक विस्तृत विश्लेषण है।
1. Dollar vs Rupee : रुपये के गिरने का गणित , एक सरल विश्लेषण
मुद्रा का मूल्य किसी भी देश की आर्थिक सेहत का थर्मामीटर होता है। जब हम कहते हैं कि रुपया गिर रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि डॉलर की तुलना में रुपये की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हो गई है।
भारत एक आयात-प्रधान देश है। हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल से लेकर उन्नत तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स तक विदेशों से मंगवाते हैं। इन सबका भुगतान अंतरराष्ट्रीय मानक मुद्रा यानी अमेरिकी डॉलर में होता है। जब विनिमय दर (Exchange Rate) 80 से बढ़कर 91 हो जाती है, तो इसका अर्थ है कि उसी एक डॉलर के सामान के लिए अब हमें 11 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। यही अतिरिक्त बोझ देश में महंगाई के रूप में वापस लौटता है।

2. क्यों टूट रहा है रुपया? प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारण
रुपये की इस गिरावट को केवल घरेलू चश्मे से देखना गलत होगा। इसके पीछे वैश्विक महाशक्तियों की नीतियां और बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य जिम्मेदार हैं:
A. ‘ट्रंप इम्पैक्ट’ और नई व्यापार नीतियां:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से वैश्विक बाजारों में एक तरह की अनिश्चितता व्याप्त है। ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत सहित कई विकासशील देशों पर ऊंचे टैरिफ (Import Duty) लगाए गए हैं। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार कठिन हो गया है और विदेशी निवेशकों में घबराहट पैदा हुई है।
B. विदेशी निवेशकों की वापसी (Capital Outflow):
जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं या वहां की नीतियां घरेलू उद्योगों के पक्ष में होती हैं, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) की ओर ले जाते हैं। डॉलर की इस निकासी ने भारतीय बाजार में इसकी कमी पैदा कर दी है, जिससे रुपया कमजोर हुआ है।
C. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions):
यूक्रेन-रूस और मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी संघर्षों ने वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। अनिश्चितता के माहौल में डॉलर हमेशा एक ‘मजबूत ढाल’ की तरह व्यवहार करता है, जिससे उसकी मांग पूरी दुनिया में बढ़ जाती है।
3. ‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘ग्लोबल ब्राइट स्पॉट’ तक का सफर
आज से लगभग 15 साल पहले, भारत को दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं यानी ‘Fragile Five’ में गिना जाता था। तब भारत की जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों ही चिंताजनक स्थिति में थे।
आज 2026 में, भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। हमारे पास लगभग 900 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) है, जो मार्च 2014 के मुकाबले लगभग तीन गुना है। इसके बावजूद रुपये का गिरना यह दर्शाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं अब एक-दूसरे से इतनी जटिलता से जुड़ी हुई हैं कि घरेलू मजबूती भी बाहरी झटकों से पूरी तरह रक्षा नहीं कर सकती।
4. रुपये की कमजोरी का चौतरफा असर
रुपये में गिरावट एक ‘दोधारी तलवार’ की तरह है। इसके कुछ नुकसान हैं तो कुछ अप्रत्यक्ष लाभ भी।
नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact):
- आयातित महंगाई (Imported Inflation): कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होती है और अंततः सब्जियों से लेकर अनाज तक सब कुछ महंगा हो जाता है।
- विदेशी शिक्षा और पर्यटन: जो छात्र अमेरिका या यूरोप में पढ़ाई कर रहे हैं, उनके माता-पिता के लिए फीस चुकाना अब पहले से 15% अधिक महंगा हो गया है। इसी तरह विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को अपना बजट बढ़ाना पड़ रहा है।
- कॉर्पोरेट कर्ज: जिन भारतीय कंपनियों ने विदेशों से डॉलर में कर्ज लिया है, उनके लिए ब्याज और मूलधन की वापसी अब एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गई है।
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact):
- निर्यातकों की चांदी: आईटी (IT), फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनियों को फायदा होता है क्योंकि उन्हें अपनी सेवाओं के बदले डॉलर मिलते हैं, जिन्हें भुनाने पर अब ज्यादा रुपये प्राप्त होते हैं।
- रेमिटेंस (Remittance): विदेशों में काम करने वाले भारतीय जब अपने घर पैसा भेजते हैं, तो उनकी कमाई की वैल्यू भारत में बढ़ जाती है। इससे देश के ग्रामीण इलाकों में उपभोग (Consumption) को बढ़ावा मिलता है।
5. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रणनीति
आरबीआई मूकदर्शक बनकर रुपये को गिरते हुए नहीं देख रहा है। केंद्रीय बैंक समय-समय पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बाजार में बेचता है ताकि रुपये की तरलता (Liquidity) बनी रहे और इसमें अचानक आने वाली गिरावट को नियंत्रित किया जा सके। आरबीआई का मुख्य उद्देश्य ‘रुपये के स्तर’ को बचाना नहीं, बल्कि इसमें होने वाली ‘अत्यधिक अस्थिरता’ (Volatility) को रोकना है।
6. भविष्य का अनुमान: 2026 का अंत कैसा होगा?
विशेषज्ञों के बीच रुपये के भविष्य को लेकर मिली-जुली राय है:
- नकारात्मक परिदृश्य: यदि वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ता है और अमेरिका अपनी टैरिफ नीतियों को और सख्त करता है, तो रुपया 92 से 93 के स्तर तक भी जा सकता है।
- सकारात्मक परिदृश्य: भारत और अमेरिका के बीच यदि कोई ‘ट्रेड डील’ सफल होती है, तो विदेशी निवेश वापस लौटेगा। ऐसी स्थिति में रुपया साल के अंत तक 87 से 88 के स्तर पर वापस आ सकता है।
निष्कर्ष
रुपये का 91 के पार जाना निश्चित रूप से एक चेतावनी संकेत है, लेकिन यह भारत की आर्थिक मंदी का प्रतीक नहीं है। यह वैश्विक शक्तियों के बीच चल रहे ‘मुद्रा युद्ध’ और बदलती व्यापार नीतियों का परिणाम है। एक जागरूक नागरिक के रूप में, हमें आने वाले समय में अपनी बचत और निवेश योजनाओं को मुद्रा के उतार-चढ़ाव के अनुरूप ढालना होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के पास इस झटके को सहने के लिए पर्याप्त भंडार और मजबूत बुनियाद है। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि भारत इस संकट को अवसर में बदलकर अपने निर्यात को कितना बढ़ावा दे पाता है।
महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
Q1. क्या रुपये के गिरने से शेयर बाजार भी गिरेगा?
आमतौर पर रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं, जिससे गिरावट आ सकती है। हालांकि, आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के शेयरों में तेजी देखी जा सकती है।
Q2. डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती के लिए सरकार क्या कर सकती है?
सरकार आयात पर निर्भरता कम करके (जैसे एथेनॉल ब्लेंडिंग या इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देना) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को सरल बनाकर रुपये को मजबूती दे सकती है।
Q3. क्या मुझे अभी डॉलर खरीदना चाहिए?
यदि आपकी भविष्य की योजनाएं (जैसे शिक्षा या यात्रा) डॉलर से जुड़ी हैं, तो अस्थिरता को देखते हुए धीरे-धीरे डॉलर खरीदना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन सट्टेबाजी (Speculation) से बचना चाहिए।
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अष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर कंफ्यूजन, जानें कब करें कन्या पूजन, क्या है शुभ मुहूर्त ?

Ashtami or Navami 2026 : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इस दौरान भक्त उपवास रखकर माता रानी की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी के अवसर पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराकर सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की जाती है। कई भक्त अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, जबकि कुछ लोग नवमी तिथि को यह अनुष्ठान पूरा करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियां क्या हैं और कन्या पूजन के लिए कौन-से शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
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शारदीय नवरात्रि 2026 में कब है अष्टमी?
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। ये तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन कर सकते हैं। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को घर आमंत्रित कर उनके चरण धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
अष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है।

नवमी पर कब करें कन्या पूजन?
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर आरंभ होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि के समय के कारण कुछ परंपराओं में 19 अक्टूबर को नवमी के अनुष्ठान किए जा सकते हैं, जबकि उदयातिथि के आधार पर पूजा करने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर को नवमी मनाकर कन्या पूजन कर सकते हैं।
नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
नवमी के अवसर पर 19 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। वहीं, 20 अक्टूबर को भी अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। भक्त इस दौरान मां दुर्गा की आराधना और कन्या पूजन कर सकते हैं।
अष्टमी हो या नवमी, दोनों ही तिथियों पर कन्या पूजन को नवरात्रि की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा माना जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक मान्यताओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि चुनकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
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नवरात्रि पर मां के 9 रूप बदल सकते हैं किस्मत! जानें किसकी पूजा से दूर होंगे कष्ट

Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। हर दिन मां के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है और उनसे जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
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मां शैलपुत्री की पूजा से मिलेगी दृढ़ता
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। देवी का यह स्वरूप धैर्य, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की कामना की जाती है। जो लोग जीवन में अस्थिरता या निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं, वे माता की पूजा कर मनोबल प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
भोग: मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से बढ़ेगा आत्मबल
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, संयम और संकल्प शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मन को एकाग्र रखने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थी और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत कर रहे लोग भी माता से एकाग्रता और आत्मबल की कामना करते हैं।
भोग: माता को शक्कर, सफेद मिठाई या पंचामृत अर्पित किया जाता है।

मां चंद्रघंटा की आराधना से दूर होगा भय
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। देवी का यह स्वरूप साहस, शौर्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से भय और मानसिक अशांति से मुक्ति तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्राप्त करने की कामना की जाती है।
भोग: मां चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा से मिलेगी सकारात्मकता
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उन्हें सृष्टि की ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में ऊर्जा, उत्साह, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की जाती है। देवी का यह स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
भोग: मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा सुख-शांति का आशीर्वाद
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है और उनकी माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य और करुणा का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा से परिवार में सुख-शांति, प्रेम और खुशहाली की कामना की जाती है।
भोग: इस दिन माता को केले का भोग अर्पित किया जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा से मिलेगी बाधाओं से लड़ने की शक्ति
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति और सफलता प्राप्त करने की कामना की जाती है। देवी को महिषासुर का वध करने वाली मां के रूप में भी पूजा जाता है।
भोग: मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा है।

मां कालरात्रि की पूजा से दूर होगा भय और संकट
सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करती हैं। उनकी पूजा करके भक्त जीवन की परेशानियों, अनिश्चितताओं और संकटों का सामना करने के लिए शक्ति और साहस की कामना करते हैं।
भोग: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां महागौरी की पूजा से मिलती है शांति
नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी मनाई जाती है और मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है। अष्टमी पर कई परिवारों में कन्या पूजन भी किया जाता है।
भोग: मां महागौरी को नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में देवी को सिद्धियां प्रदान करने वाली और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माना जाता है। उनकी आराधना से ज्ञान, सफलता, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में संतुलन की कामना की जाती है। नवमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन और हवन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।

भोग: मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
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1 अक्टूबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम, आपकी जेब और दस्तावेजों पर पड़ेगा असर

New Rules : हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कुछ नए नियम और बदलाव लेकर आती है। अब अक्टूबर की शुरुआत होने वाली है और 1 अक्टूबर 2026 से LPG सब्सिडी, बैंक एफडी और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है।
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1 अक्टूबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम
कल यानी एक अक्टूबर से होने वाले बदलावों का सीधा असर आम ग्राहकों और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े कामकाज पर पड़ सकता है। ऐसे में अगर आप LPG सिलिंडर लेते हैं, बैंक में FD है या जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़ा काम है, तो इन बदलावों को जानना आपके लिए जरूरी है।
LPG सब्सिडी को लेकर देखने को मिलेगा बदलाव
सब्सिडी वाले सिलिंडर के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। हालांकि, BAA नहीं कराने पर LPG सिलिंडर की सप्लाई बंद नहीं होगी, लेकिन ग्राहक को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल सकता है और सिलिंडर बाजार दर पर लेना पड़ सकता है।

आरबीआई ने बल्क डिपॉजिट को लेकर नए नियम किए जारी
RBI के नए नियम के तहत अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बैंक अपनी जरूरत के अनुसार ऐसी एफडी पर ब्याज दर तय कर सकेंगे।
बैंकों को हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी नई ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी। 10 मिनट के ग्रेस पीरियड के बाद यानी 10:10 बजे तक दरें वेबसाइट पर उपलब्ध होनी जरूरी होंगी।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए भी बदले नियम
1 अक्टूबर से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित प्रावधान लागू होंगे। दो साल से अधिक देरी से पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। वहीं, एक से दो साल की देरी पर जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
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