Haridwar
बोले की बारात में गण और भूत-प्रेत, पिशाच का रूप धारण कर शिवभक्त डीजे की धुन पर जमकर थिरके।

हरिद्वार – महाशिवरात्रि के मौके पर देवों की नगरी हरिद्वार में भव्य शिव बरात निकाली गई। इस दौरान सड़कों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। गण और भूत-प्रेत, पिशाच का रूप धारण कर शिवभक्त डीजे की धुन पर जमकर थिरके।

महाशिवरात्रि पर आज सर्वार्थ सिद्धि योग, चतुर्ग्रही योग और शिव योग है। इसके साथ ही शुक्र प्रदोष व्रत बन रहा है। इन दिन तीनों योगों का निर्माण होना अद्धभुत संयोग है। मंदिरों में रात से ही शिवभक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई।

दक्षिण काली पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने बताया कि कुल पांच पहर में भगवान शिव के महा अनुष्ठान पर्व होता है। रात 9:00 बजे से लेकर सुबह 5:30 बजे तक विशेष पूजा का विधान है। इसमें भस्म आरती पंचामृत से अभिषेक और शिव विवाह के मुहूर्त तक अनवरत अनुष्ठान चलता रहेगा।
वहीं, भोले की ससुराल दक्ष नगरी कनखल में भी महाशिवरात्रि की धूम है। पौराणिक दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर और हरिद्वार के अन्य सभी शिवालयों में शिव भक्त भगवान शंकर का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कनखल में भगवान शंकर की ससुराल में स्थापित शिवलिंग दुनिया का पहला शिवलिंग है और यहां हुआ भगवान शंकर और सती विवाह दुनिया का पहला विवाह था।
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‘ध्वज वंदन समारोह’ में शामिल हुए सीएम धामी और केंद्रीय पर्यटन मंत्री, कहा- देवभूमि के मूल स्वरूप को बचाने के लिए सरकार कर रही काम

Haridwar News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
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‘ध्वज वंदन समारोह’ में शामिल हुए सीएम धामी और केंद्रीय पर्यटन मंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का साक्षात भावात्मक अभिव्यक्ति है। माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा और नई दृष्टि दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता, यह उस युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है।
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।
देवभूमि के मूल स्वरूप को बचाने के लिए सरकार कर रही काम
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू किया गया है। सख्त दंगारोधी कानून एवं धर्मांतरण कानून भी लाया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक अवैध अतिक्रमण को हटाया गया है।
केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग का निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी चेतना को जाग्रत करना
शताब्दी समारोह के दलनायक और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि ये समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है। बल्कि ये युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है। उन्होंने कहा कि ये सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं कर रहा, वरन् ये आयोजन स्वयं आपके सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा कि “गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा। कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।” उन्होंने जनसमूह से आत्मपरिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन की प्रथम शर्त बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण की नींव सशक्त होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है, ताकि विचार, आचरण और कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव हो सके।
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हरिद्वार में भीषण सड़क हादसा, कार और ई-रिक्शे की टक्कर में 3 की मौत, 4 की हालत गंभीर

Haridwar News : लक्सर मार्ग पर कार और ई-रिक्शे की भिड़ंत, तीन की मौके पर ही मौत
Haridwar News : हरिद्वार में लक्सर मार्ग पर भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां एक कार और ई-रिक्शा की जोरदार टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि गंभीर रूप से घायल हो गए।
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Haridwar में कार और ई-रिक्शे की टक्कर में 3 की मौत
हरिद्वार जिले में लक्सर मार्ग पर जबरदस्त सड़क हादसा हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक हरिद्वार के लक्सर मार्ग स्थित फेरूपुर क्षेत्र में कार–ई-रिक्शा की जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे में ई-रिक्शे के उड़े परखच्चे
Haridwar मार्ग पर फेरूपुर के पास एक कार अनियंत्रित हो गई। कार और ई-रिक्शा के बीच हुई जबरदस्त टक्कर में ई-रिक्शे के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर रेस्क्यू शुरू किया।

तेज रफ्तार को माना जा रहा हादसे का कारण
पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान विकास कुमार (निवासी फेरूपुर), चरण सिंह (निवासी कलियर, रुड़की) और आस मुहम्मद (निवासी नसीरपुर खुर्द, लक्सर) के रूप में हुई है। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को हादसे का कारण माना जा रहा है। जबकि मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, कड़ाके की ठंड में श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में लगाई डुबकी

Haridwar : मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही हर की पौड़ी सहित विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान के लिए पहुंचे।
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Haridwar में मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब
मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने गंगा में पुण्य स्नान कर दान-पुण्य किया और पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया। हर की पौड़ी का ब्रह्मकुंड “हर-हर गंगे” के जयकारों से गूंज उठा और घाटों पर श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
कड़ाके की ठंड में श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में लगाई डुबकी
स्नान पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करते हुए घाटों, मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त फोर्स तैनात की।
सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की गई। वहीं यातायात को सुचारू रखने के लिए विशेष प्लान लागू किया गया। मौनी अमावस्या पर दान, मौन और तर्पण का विशेष महत्व है हरिद्वार हर कि पौडी क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सेवा भाव का वातावरण बना रहा।
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