Dehradun
सिरदर्द को अनदेखा करना हो सकता है इस जानलेवा बीमारी का संकेत, जानें इसके लक्षण…..

देहरादून : सिरदर्द अक्सर होने पर उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। हर साल लगभग ढाई लाख लोग ब्रेन ट्यूमर के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। 2020 में ही इस बीमारी ने 2.46 लाख लोगों की मौत का कारण बनी थी। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर कुछ मामलों में इतनी धीमी गति से बढ़ता है कि इसके लक्षण आसानी से पहचान में नहीं आते। यही कारण है कि इसे समय रहते पहचानना और इलाज कराना बेहद जरूरी है।
ब्रेन ट्यूमर क्या है?
ब्रेन ट्यूमर तब होता है जब मस्तिष्क के आसपास की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं, जो अंततः कैंसर का रूप ले सकती हैं। शोध के अनुसार, मस्तिष्क में 120 से ज्यादा प्रकार के ट्यूमर हो सकते हैं। अगर परिवार में किसी को ब्रेन ट्यूमर हुआ है, तो आपको और भी ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसके अलावा, प्लास्टिक और केमिकल्स इंडस्ट्री में काम करने वालों को भी इसके प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। खराब लाइफस्टाइल, आहार में गड़बड़ी और पर्यावरणीय कंडीशन भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं।
ब्रेन ट्यूमर के सामान्य लक्षण:
- सिर में लगातार दर्द या दबाव रहना, जो सुबह के समय बढ़ सकता है।
- मतली और उल्टी की समस्या।
- आंखों की समस्याएं जैसे धुंधला नजर आना।
- हाथ या पैर में संवेदनहीनता।
- शारीरिक संतुलन में समस्या और बोलने में कठिनाई।
- समय के साथ याददाश्त में कमी आना।
- बार-बार चक्कर महसूस होना।
क्या ब्रेन ट्यूमर कैंसर है?
ब्रेन ट्यूमर कैंसर का कारण बन सकता है, लेकिन हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता। इसका इलाज समय पर किया जाए तो व्यक्ति को पूरी तरह से ठीक होने का अवसर मिल सकता है।
सिरदर्द को न करें अनदेखा
यदि आपको सिर में लगातार दर्द हो और वह सुबह के समय अधिक महसूस होता हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।
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डीजी आईटीबीपी ने सीएम धामी से की मुलाकात, सीमांत क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा समन्वय पर हुई चर्चा

Dehradun News : रविवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर राज्य की सीमाओं की सुरक्षा, सीमांत क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आपदा प्रबंधन में समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
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डीजी आईटीबीपी ने सीएम धामी से की मुलाकात
डीजी आईटीबीपी ने आज सीएम धामी से मुलाकात की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में आईटीबीपी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्य में आईटीबीपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में तैनात जवान न केवल देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों में भी सहभागी बन रहे हैं।
सीमांत क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा समन्वय पर हुई चर्चा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत जिलों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, स्वास्थ्य, संचार और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और आईटीबीपी के बीच बेहतर समन्वय से सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।

डीजी आईटीबीपी शत्रुजीत कपूर ने मुख्यमंत्री को सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं, आधुनिक संसाधनों तथा बल की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आईटीबीपी को दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी समन्वय बनाए रखने का आश्वासन दिया।
राहत और बचाव कार्यों में आईटीबीपी की सक्रिय भूमिका पर हुई चर्चा
बैठक में आपदा प्रबंधन, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में आईटीबीपी की सक्रिय भूमिका पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय आईटीबीपी ने सदैव तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर प्रदेशवासियों का विश्वास जीता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सुरक्षित सीमा, सशक्त उत्तराखंड” के संकल्प के साथ राज्य सरकार सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य कर रही है, ताकि सीमांत क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास की त्रिस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
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संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम, ई-संस्कृत संभाषण शिविर का किया शुभारंभ

Dehradun News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों को प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र और ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ और उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।
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संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान ऊंचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, रामायण से लेकर महाभारत तक, आयुर्वेद से लेकर खगोलशास्त्र तक, गणित से लेकर दर्शनशास्त्र तक हमारे ज्ञान की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की स्मृति मात्र नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की संभावना भी है।
संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण है। पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी आज भी विश्व के भाषाविदों के लिए आश्चर्य का विषय है। आज विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत की वैज्ञानिकता पर विभिन्न प्रकार के शोध किए जाते हैं।

ई-संस्कृत संभाषण शिविर का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में सबके सामने रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रही है। राज्य में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। राज्य में पहली बार ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत की गई है।

राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे नवाचार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन, अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशाला और संस्कृत छात्र प्रतियोगिता जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग एवं रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर इसे नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किये हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं को बढ़ाया गया है। प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम बनाये गये हैं। संस्कृत को बढ़ावा देने के अलग स्ट्रीम बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं।
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सीएम धामी ने कैंप कार्यालय में सुना “मन की बात” कार्यक्रम, कहा- ये जनता से सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम

Dehradun News : देहरादून में आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंप कार्यालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 131वां संस्करण सुना। कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि ये जनता से सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम है।
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सीएम धामी ने कैंप कार्यालय में सुना “मन की बात” कार्यक्रम
सीएम धामी ने देहरादून में कैंप कार्यालय में “मन की बात” कार्यक्रम सुना। आज के संस्करण में आदरणीय प्रधानमंत्री ने अंगदान के महत्व, डिजिटल अरेस्ट एवं KYC से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता, भारत की सांस्कृतिक एकता, बोर्ड परीक्षाओं में सम्मिलित विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने विचार साझा किए।
पीएम ने किया India AI Impact Summit का उल्लेख
सीएम धामी ने कहा कि आज के कार्यक्रम में India AI Impact Summit का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि किस प्रकार भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। भारत मंडपम में आयोजित इस समिट में विश्व के अनेक देशों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के अग्रणी और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े नवप्रवर्तक एक मंच पर एकत्र हुए।
ये कार्यक्रम जनता से सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम – सीएम धामी
सीएम धामी ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम केवल रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-जन से सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम है, जो प्रत्येक संस्करण में नागरिकों को जागरूकता, सकारात्मकता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जोड़ता है।
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