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महंगाई की अनियंत्रित वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट, आरबीआई ने किया अलर्ट…

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई पर नियंत्रण नहीं मिलने को लेकर गंभीर चेतावनी दी है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है। आरबीआई के नवंबर महीने के बुलेटिन में कहा गया है कि यदि महंगाई की दर में और तेज बढ़ोतरी होती है, तो इससे वास्तविक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
महंगाई के कारण जीवन-यापन पर दबाव
आरबीआई के मुताबिक, अक्टूबर महीने में खुदरा महंगाई दर में तेज उछाल देखने को मिला है, जो सितंबर में दिए गए आरबीआई की चेतावनियों को सही साबित करता है। खाद्य वस्तुओं और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई बढ़ी है। इसके साथ ही, घरों में काम करने वालों और खाना पकाने वालों के वेतन में वृद्धि से जीवन-यापन का खर्च और बढ़ गया है, जिससे आम आदमी पर दबाव पड़ा है।
उद्योग और एक्सपोर्ट्स पर असर
आरबीआई ने चेतावनी दी है कि महंगाई के कारण वस्तुओं और सेवाओं में इनपुट लागत में वृद्धि हो रही है, जिससे बिक्री मूल्य भी बढ़ रहे हैं। इस बढ़ोतरी का असर कॉरपोरेट्स की कमाई और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर पड़ा है। शहरी क्षेत्रों में खपत में कटौती देखी जा रही है, जो उद्योगों और एक्सपोर्ट्स के लिए नुकसानकारी हो सकती है। अगर महंगाई को बिना नियंत्रण के बढ़ने दिया गया तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्योग जगत और एक्सपोर्ट्स को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
मिडिल क्लास पर महंगाई का बोझ
आरबीआई ने स्वीकार किया है कि महंगाई के कारण शहरी क्षेत्रों में खपत में कमी आई है। एफएमसीजी कंपनियों के तिमाही नतीजों से भी यह बात सामने आई है कि महंगाई के चलते शहरी क्षेत्रों में एफएमसीजी और खाद्य वस्तुओं की डिमांड में गिरावट आई है। नेस्ले के सीईओ सुरेश नारायण ने कहा कि जिनके पास पैसा है वे खूब खर्च कर रहे हैं, लेकिन मिडिल क्लास के लिए हालात बहुत कठिन हो गए हैं। अक्टूबर 2024 में खुदरा महंगाई दर 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि खाद्य महंगाई दर भी लगभग 11 प्रतिशत (10.87%) रही।
आर्थिक स्थिति पर नजर रखना जरूरी
आरबीआई ने इस बढ़ती महंगाई की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अगर इससे जल्द निपटा नहीं गया, तो यह भारत की आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। महंगाई को काबू करने के लिए जरूरी है कि सरकार और केंद्रीय बैंक मिलकर ठोस कदम उठाएं।
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मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला!, सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गाना हुआ अनिवार्य

Vande Mataram in Hindi : अब वंदे मातरम के छह छंद हुए आनिवार्य, जानें कौन से हैं वो ?
Vande Mataram in Hindi : केंद्र की मोदी सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर बड़ा फैसला लिया है। अब हर सरकारी कार्यक्रम में वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गाना हुआ अनिवार्य
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को बड़ा ऐलान किया है। अब सरकारी कार्यकर्मों में वंदे मातरम गीत गाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए गृह विभाग ने नई गाइडलाइंस भी जारी कर दी हैं। जिसके मुताबिक वंदे मातरम् के छह अंतरे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में गाना या बजाना अनिवार्य कर दिया है।
पहले राष्ट्रगान और फिर बजेगा छह छंदों वाला वंदेमातरम
बता दें कि अब से देशभर में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों के साथ ही विद्यालयों में पहले राष्ट्रगान बजाया जाएगा। इसके बाद पूरे छह छंदों वाला वंदेमातरम को भी गाना या बजाना अनिवार्य कर दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी को जारी गाइडलाइन सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, विभिन्न मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजी गई है।

वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर लिया गया फैसला
आपको बता दें कि इसी साल राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को 150 साल पूरे हो गए हैं। इसी अवसर पर मोदी सरकार ने ये फैसला लिया है। हालांकि इस से पहले राष्ट्रीय गीत के गायन या वादन के लिए कोई औपचारिक नियमावली नहीं थी. लेकिन अब इसे अनिवार्य कर दिया गया है।
वंदे मातरम के अनिवार्य किए गए छह छंद (Vande Mataram in Hindi)
| छंद संख्या | पाठ |
|---|---|
| छंद–1 | वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यशामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीं, फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीं। सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ |
| छंद–2 | वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले, कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले। अबला केन मा एत बले, बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं, रिपुदलवारिणीं मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ |
| छंद–3 | वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म। त्वं हि प्राणाः शरीरे, बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति। तोमारई प्रतिमा गडि, मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ |
| छंद–4 | वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी। वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्। नमामि कमलां अमलां अतुलां, सुजलां सुफलां मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ |
| छंद–5 | वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां, धरणीं भरणीं मातरम्। शत्रु-दल-वारिणीं, मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ |
| छंद–6 | वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति मातरम्। वन्दे मातरम्॥ |
धर्म-कर्म
रमजान 2026 : कब रखा जाएगा पहला रोजा , जानें रमजान से जुड़ी हर जरूरी बात…

रमजान 2026: पवित्र महीने को लेकर तैयारियां तेज
दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए रमजान सिर्फ एक धार्मिक महीना नहीं बल्कि आत्मिक अनुशासन, दया और सामाजिक एकता का समय माना जाता है। साल 2026 का रमजान खास इसलिए भी है क्योंकि यह सर्द मौसम में पड़ रहा है, जिससे कई जगह रोज़े के दौरान मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक रह सकता है। इस बीच कई देशों में रमजान की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और धार्मिक संगठनों ने टाइमटेबल, चैरिटी गाइडलाइन और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं।
रमजान 2026 कब शुरू होगा?
खगोलीय गणनाओं और धार्मिक अनुमानों के आधार पर:
- खाड़ी देशों में रमजान 18 फरवरी 2026 की शाम के बाद शुरू होने की संभावना
- भारत सहित दक्षिण एशिया में पहला रोज़ा 19 फरवरी 2026 को होने की उम्मीद
- रमजान आमतौर पर 29 या 30 दिन का होता है
खबरों और खगोलीय अनुमानों के अनुसार दक्षिण एशिया में रमजान अक्सर खाड़ी देशों से एक दिन बाद शुरू होता है।
खगोलीय अनुमानों के मुताबिक 2026 में पहला रोज़ा 19 फरवरी को पड़ सकता है, हालांकि अंतिम फैसला चांद दिखने के बाद ही लिया जाता है।
ईद-उल-फितर 2026 कब होगी?
रमजान खत्म होने के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है।
- अनुमानित तारीख: 20 या 21 मार्च 2026
- अगर रमजान 29 दिन का रहा तो ईद 20 मार्च
- अगर 30 दिन का रहा तो ईद 21 मार्च
यह अनुमान चंद्रमा दिखने पर निर्भर करता है।
रमजान का धार्मिक और सामाजिक महत्व
रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है। इस दौरान मुसलमान:
- रोज़ा रखते हैं
- कुरान पढ़ते हैं
- नमाज़ बढ़ा देते हैं
- दान और मदद करते हैं
इस महीने को आत्म शुद्धि और आध्यात्मिक सुधार का समय माना जाता है।
रोज़ा क्या होता है और इसका उद्देश्य क्या है?
रोज़ा रखने का मतलब सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं होता। इसका मकसद होता है:
- आत्म नियंत्रण बढ़ाना
- जरूरतमंद लोगों की तकलीफ समझना
- आध्यात्मिक जुड़ाव मजबूत करना
रमजान के दौरान सुबह सहरी और शाम इफ्तार का खास महत्व होता है।
आखिरी 10 दिन क्यों खास होते हैं?
रमजान के आखिरी 10 दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इन्हीं दिनों में लैलतुल कद्र आने की मान्यता होती है।
यह रात इस्लाम में सबसे पवित्र रातों में से एक मानी जाती है, जिसमें इबादत का बहुत बड़ा महत्व होता है।
ज़कात और दान की परंपरा
रमजान में चैरिटी का महत्व बहुत ज्यादा होता है।
हाल ही में कुछ देशों में रमजान से पहले ज़कात और चैरिटी की दरें भी घोषित की गई हैं ताकि जरूरतमंदों तक मदद पहुंच सके।
दान के मुख्य प्रकार:
- ज़कात
- सदक़ा
- ज़कात-उल-फितर
दुनिया भर में रमजान की तैयारियां
कई देशों में रमजान के दौरान काम और स्कूल टाइमिंग बदली जाती है ताकि लोग धार्मिक गतिविधियों पर ध्यान दे सकें।
कुछ जगहों पर स्कूल शेड्यूल में बदलाव और छुट्टियां भी घोषित की गई हैं ताकि परिवार और बच्चे धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।
रमजान हर साल अलग तारीख पर क्यों आता है?
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है।
- इस्लामिक साल: लगभग 354 दिन
- अंग्रेजी कैलेंडर साल: 365 दिन
इस वजह से रमजान हर साल लगभग 10–11 दिन पहले आ जाता है।
2026 का “विंटर रमजान” क्यों खास है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 का रमजान ठंडे मौसम के आसपास पड़ रहा है, जिसे कई जगह “विंटर रमजान” कहा जा रहा है।
इसका मतलब:
- कुछ देशों में रोज़े के घंटे कम हो सकते हैं
- मौसम के कारण रोज़ा रखना आसान लग सकता है
रमजान के बाद ईद का जश्न
ईद-उल-फितर रमजान के बाद आने वाला सबसे बड़ा त्योहार होता है।
ईद के दिन:
- खास नमाज़
- परिवार मिलन
- ईदी देना
- दान करना
यह त्योहार भाईचारे और खुशी का प्रतीक माना जाता है।
रमजान 2026 – मुख्य तथ्य
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| संभावित शुरुआत | 18–19 फरवरी 2026 |
| भारत में शुरुआत | लगभग 19 फरवरी 2026 |
| संभावित अवधि | 29–30 दिन |
| ईद-उल-फितर | 20–21 मार्च 2026 |
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
खगोलीय विशेषज्ञों के अनुसार चांद 17 फरवरी के आसपास बन सकता है लेकिन उस दिन दिखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए 19 फरवरी से रोज़े शुरू होने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
निष्कर्ष
रमजान 2026 सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान का महीना नहीं बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक सुधार का समय है। यह महीना इंसान को संयम, सहनशीलता और मदद की भावना सिखाता है।
दुनिया भर में लोग इस पवित्र महीने का इंतजार करते हैं क्योंकि यह आत्म सुधार और समाज सेवा का मौका देता है।
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कैब इंडस्ट्री में बड़ा धमाका : 5 फरवरी से शुरू हुई ‘Bharat Taxi App’, ओला-उबर को देगी टक्कर!

Bharat Taxi App : कैब इंडस्ट्री में बड़ी क्रांति, अब न सर्ज प्राइसिंग का डर और न कमीशन का बोझ
भारतीय परिवहन (Transportation) के इतिहास में 5 फरवरी 2026 की तारीख एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर ‘भारत टैक्सी ऐप’ (Bharat Taxi App) का आधिकारिक आगाज़ हो चुका है। यह महज एक और कैब बुकिंग ऐप नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ‘गेम चेंजर’ मॉडल है जो ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने और ड्राइवर्स व यात्रियों के हितों की रक्षा करने के लिए मैदान में उतरा है।
सरकार के समर्थन और सहकारी (Cooperative) भावना के साथ शुरू हुई यह सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में अपनी दस्तक दे चुकी है, जिसे जल्द ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे महानगरों में चरणों में विस्तारित किया जाएगा।
क्यों चर्चा में है भारत टैक्सी ऐप? (Unique Value Proposition)
भारत में अब तक कैब एग्रीगेटर्स का जो मॉडल रहा है, उसमें अक्सर दो शिकायतें सबसे प्रमुख रही हैं: पहली, यात्रियों से वसूला जाने वाला बेतहाशा ‘सर्ज प्राइस’ (Surge Pricing) और दूसरी, ड्राइवर्स से लिया जाने वाला भारी-भरकम कमीशन (जो अक्सर 25% से 30% तक होता है)। भारत टैक्सी ऐप ने इन दोनों ही समस्याओं की जड़ पर प्रहार किया है।
ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल: अब ड्राइवर ही बनेंगे मालिक
इस ऐप की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खूबी इसका ‘ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल’ है। पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स पर ड्राइवर केवल एक ‘पार्टनर’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन भारत टैक्सी में वे प्लेटफॉर्म के सह-मालिक (Co-owners) होंगे।
- ज़ीरो कमीशन: भारत टैक्सी अपने ड्राइवर्स से किसी भी ट्रिप पर कोई कमीशन नहीं लेगा। यानी यात्री जो भुगतान करेगा, उसका पूरा हिस्सा सीधे ड्राइवर की जेब में जाएगा।
- शेयरहोल्डिंग: इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले प्रत्येक ड्राइवर को सहकारी संस्था के 5 शेयर दिए जाएंगे। इससे ड्राइवर्स का संगठन के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा और वे खुद को एक कर्मचारी के बजाय एक उद्यमी महसूस करेंगे।
- न्यूनतम मेंबरशिप फीस: कमीशन के बजाय, ड्राइवर्स को केवल एक मामूली मेंबरशिप फीस देनी होगी। इसे अपनी सुविधा के अनुसार दैनिक, साप्ताहिक या मासिक आधार पर चुकाया जा सकता है।
यात्रियों के लिए क्या है खास? (Passenger Benefits)
एक आम यात्री हमेशा दो चीजें चाहता है: सस्ता सफर और पारदर्शिता। भारत टैक्सी इन दोनों पैमानों पर खरी उतरती दिख रही है।
किराए में 30% तक की बचत
कंपनी का दावा है कि भारत टैक्सी का किराया मौजूदा मार्केट रेट्स से लगभग 20 से 30 फीसदी तक कम होगा। चूंकि कंपनी बीच में अपना कमीशन नहीं रख रही है, इसलिए उस बचत का सीधा लाभ यात्रियों को सस्ते किराए के रूप में दिया जा रहा है।
सर्ज प्राइसिंग का खात्मा
अक्सर देखा जाता है कि बारिश होने पर या ऑफिस ऑवर्स के दौरान कैब का किराया अचानक दोगुना या तिगुना हो जाता है। भारत टैक्सी ने स्पष्ट किया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ‘नो सर्ज प्राइसिंग’ नीति लागू होगी। मौसम खराब हो या ट्रैफिक जाम, यात्री को वही किराया देना होगा जो बुकिंग के समय स्क्रीन पर दिखेगा।
विविध विकल्प
भारत टैक्सी ऐप केवल कारों तक सीमित नहीं है। इसमें यात्रियों को उनकी ज़रूरत और बजट के हिसाब से तीन प्रमुख विकल्प मिलेंगे:
- बाइक (Bike Taxi) – कम दूरी और ट्रैफिक से बचने के लिए।
- ऑटो (Auto Rickshaw) – किफायती और आसान सफर के लिए।
- कार (Cabs/Taxis) – कंफर्टेबल लंबी दूरी की यात्रा के लिए।
ड्राइवर्स की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा (Social Security)
भारत टैक्सी केवल बिजनेस पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि यह अपने ड्राइवर्स (जिन्हें ‘सारथी’ कहा जा सकता है) के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्लेटफॉर्म ने लॉन्च के साथ ही निम्नलिखित लाभों की घोषणा की है:
- दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance): ड्यूटी के दौरान किसी भी अनहोनी की स्थिति में ड्राइवर को 5 लाख रुपये का कवर दिया जाएगा।
- स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance): ड्राइवर और उसके परिवार की सेहत का ख्याल रखते हुए 5 लाख रुपये का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा भी प्रदान किया जाएगा।
- पारदर्शी भुगतान: भुगतान प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि ड्राइवर्स को उनके पैसे के लिए हफ्तों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
आंकड़ों में भारत टैक्सी का दबदबा
लॉन्चिंग के समय ही भारत टैक्सी ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। यह दिखाता है कि मार्केट में इस तरह के विकल्प की कितनी सख्त ज़रूरत थी।
| विवरण | आंकड़े |
| लॉन्च की तारीख | 5 फरवरी 2026 |
| प्रारंभिक शहर | दिल्ली-एनसीआर |
| पंजीकृत ड्राइवर्स | 3 लाख से ज्यादा |
| शुरुआती यूजर्स | 1 लाख से ज्यादा |
| संभावित बचत | 30% तक (यात्रियों के लिए) |
| कमीशन दर | 0% (शून्य) |
कैब इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?
भारत टैक्सी का आना भारतीय गिग इकोनॉमी (Gig Economy) के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे बड़ी विदेशी कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: जब ग्राहकों को सस्ता और ड्राइवर्स को बेहतर विकल्प मिलेगा, तो अन्य कंपनियां भी अपनी दरों और कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव करने पर मजबूर होंगी।
- ड्राइवर संतुष्टि: अगर ड्राइवर्स को बेहतर कमाई और सम्मान मिलता है, तो कैब कैंसिलेशन (Cancellation) जैसी समस्याएं कम होंगी, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: सहकारी मॉडल होने के कारण, पैसा विदेशी कंपनियों के खातों में जाने के बजाय देश के भीतर और सीधे काम करने वाले लोगों के पास रहेगा।
निष्कर्ष: एक नई उम्मीद का उदय
भारत टैक्सी ऐप का उद्देश्य केवल एक कमर्शियल ऐप बनना नहीं, बल्कि एक समावेशी (Inclusive) पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। जहां तकनीक का इस्तेमाल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सेवा और सशक्तिकरण के लिए किया जा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो यह आने वाले समय में न केवल परिवहन, बल्कि अन्य डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए भी एक मानक (Benchmark) बन जाएगा।
यदि आप भी दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और महंगे किराए व सर्ज प्राइसिंग से परेशान हैं, तो ‘भारत टैक्सी ऐप’ को आज़माना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह न केवल आपकी जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि देश के लाखों ड्राइवर्स को एक सम्मानजनक जीवन जीने में मदद भी करेगा।
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