Uttarakhand
Kedarkantha Trek 2026 : बर्फीले हिमालय में नौसिखियों से लेकर अनुभवी ट्रेकर्स तक का सपना

लोकेशन: केदारकांठा, उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड
अगर आप 2026 में हिमालय की पहली “समिट ट्रेक” की तलाश कर रहे हैं—जहाँ बर्फ़, जंगल, खुले बुग्याल, साफ़ आसमान और दमदार शिखर दृश्य एक साथ मिलें—तो Kedarkantha Trek 2026 आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। यह ट्रेक भारत के उन चुनिंदा ट्रेक्स में है जो नौसिखियों के लिए भी सुरक्षित, संरचित और रोमांचक माने जाते हैं, और अनुभवी ट्रेकर्स के लिए भी उतना ही संतोषजनक अनुभव देते हैं।
Kedarkantha Trek 2026 क्यों है भारत का सबसे लोकप्रिय विंटर ट्रेक?
केदारकांठा को अक्सर “भारत का बेस्ट विंटर ट्रेक” कहा जाता है—और इसके ठोस कारण हैं।
- सर्दियों में खुला रहने वाला शिखर ट्रेक
जब दिसंबर–फरवरी में हिमालय के ज़्यादातर ट्रेक बंद हो जाते हैं, केदारकांठा तब भी ट्रेकर्स का स्वागत करता है। - नौसिखियों के लिए परफेक्ट समिट अनुभव
12,500 फीट की ऊँचाई तक पहुँचने का रोमांच, तकनीकी पर्वतारोहण के बिना। - हर मौसम में अलग रंग
बर्फ़ीली सर्दी, खिले रोडोडेंड्रोन वाला बसंत, हरे-भरे ग्रीष्म और सुनहरा पतझड़—चारों मौसमों में यह ट्रेक अलग कहानी सुनाता है। - 360-डिग्री हिमालयन पैनोरमा
शिखर से स्वर्गारोहिणी, बंदरपूंछ, कालानाग और गंगोत्री रेंज की भव्य झलक।
और पढ़े – केदारकंठा ट्रेक बनाम ब्रह्मताल ट्रेक
Kedarkantha Trek का भूगोल और प्राकृतिक सौंदर्य
केदारकांठा एक स्वतंत्र शिखर (Free-Standing Peak) है। यही वजह है कि ट्रेक के शुरुआती दिनों से ही आपको शिखर दिखाई देता रहता है—जो हर कदम पर मोटिवेशन देता है।
जंगल जो इस ट्रेक को खास बनाते हैं
- चीड़, देवदार, बलूत और मेपल के घने जंगल
- सर्दियों में बर्फ़ से ढकी शाखाएँ और काई—एक परीकथा जैसा दृश्य
- बसंत में पक्षियों की चहचहाहट और रोडोडेंड्रोन के लाल फूल
खुले बुग्याल और कैंपसाइट
- खुजाई, भोजा ढाड़ी, पुखरोला जैसे विस्तृत खुले मैदान
- सूर्यास्त और सूर्योदय के लिए फेमस स्पॉट
- तंबू से बाहर निकलते ही हिमालय की दीवार-सी चोटियाँ

Kedarkantha Trek 2026: हर मौसम का अलग अनुभव
❄️ सर्दी (दिसंबर–फरवरी)
- तापमान: दिन 8–10°C | रात 0 से –10°C
- अनुभव: घुटनों तक बर्फ़, स्नो-कैंपिंग, हार्ड-पैक्ड स्नो पर समिट क्लाइम्ब
- क्यों जाएँ: भारत का #1 विंटर ट्रेक, खासकर पहली बर्फ़ीली समिट के लिए
नोट: 15 दिसंबर से जनवरी के मध्य तक भीड़ अधिक रहती है—अग्रिम बुकिंग ज़रूरी।
🌸 बसंत (मार्च–अप्रैल)
- अनुभव: पिघलती बर्फ़, खिले रोडोडेंड्रोन, साफ़ आसमान
- क्यों जाएँ: फोटोग्राफी और नेचर-लवर्स के लिए बेस्ट
☀️ गर्मी (मई–जून)
- अनुभव: हरे-भरे जंगल, रंगीन जंगली फूल
- क्यों जाएँ: आरामदायक तापमान, कम भीड़
🍁 पतझड़ (मध्य सितंबर–नवंबर)
- अनुभव: सुनहरे-लाल जंगल, क्रिस्टल-क्लियर व्यू
- क्यों जाएँ: सबसे साफ़ समिट व्यू और शांति
Kedarkantha Trek 2026 का पूरा यात्रा कार्यक्रम (दो प्रमुख मार्ग)

📍 कोटगाँव मार्ग (क्लासिक और लोकप्रिय)
दिन 1: देहरादून → कोटगाँव
- दूरी: 195 किमी | समय: 10–11 घंटे
दिन 2: कोटगाँव → खुजाई
- दूरी: 5.3 किमी | समय: ~5 घंटे
- ऊँचाई: 6,400 → 9,460 फीट
दिन 3: खुजाई → भोजा ढाड़ी
- दूरी: 3 किमी | समय: ~3.5 घंटे
दिन 4: भोजा ढाड़ी → केदारकांठा शिखर → खुजाई
- दूरी: 9 किमी | समय: 7–8 घंटे
- समिट ऊँचाई: 12,500 फीट
दिन 5: खुजाई → कोटगाँव
- दूरी: 5.3 किमी | समय: 4–5 घंटे
दिन 6: कोटगाँव → देहरादून
📍 गाईचावां गाँव मार्ग (कम भीड़, ज़्यादा शांत)
दिन 1: देहरादून → गाईचावां
दिन 2: गाईचावां → जुलोटा
दिन 3: जुलोटा → पुखरोला
दिन 4: पुखरोला → शिखर → अखोटी थाच
दिन 5: अखोटी थाच → गाईचावां
दिन 6: गाईचावां → देहरादून
Kedarkantha Trek कितना कठिन है? (Difficulty Analysis)
⛰️ भूभाग
- अंतिम दिन 5 घंटे की लगातार चढ़ाई
- सर्दियों में हार्ड स्नो और खड़ी ढलान
🌦️ मौसम
- अचानक बर्फ़बारी या बारिश ट्रेक को चुनौतीपूर्ण बना सकती है
🧗 ऊँचाई
- 6,400 → 12,500 फीट (लगभग 6,100 फीट गेन)
- AMS का हल्का जोखिम—सही एक्लिमेटाइज़ेशन ज़रूरी
👉 निष्कर्ष: यह ट्रेक Moderate श्रेणी में आता है और सही तैयारी के साथ नौसिखियों के लिए भी सुरक्षित है।
Kedarkantha Trek 2026 के लिए तैयारी कैसे करें?
फिटनेस
- 5 किमी जॉगिंग (30–35 मिनट)
- स्क्वैट्स, लंजेस, प्लैंक्स
- ट्रेक से 4–6 हफ्ते पहले ट्रेनिंग शुरू करें
ज़रूरी गियर
- 5-लेयर विंटर क्लोदिंग
- वाटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज़
- ट्रेकिंग पोल, माइक्रोस्पाइक्स (सर्दियों में)
सुरक्षा, आपातकाल और नज़दीकी अस्पताल
- आपात निकास: कोटगाँव, सांकरी, गाईचावां
- नज़दीकी मेडिकल सहायता: मोरी, पुरोला
- गंभीर स्थिति: मसूरी / देहरादून (8–9 घंटे)
Kedarkantha Trek 2026: क्यों इसे अपनी बकेट-लिस्ट में डालें?
- यह सिर्फ़ एक ट्रेक नहीं, पहली समिट की कहानी है
- यहाँ रोमांच है, पर डर नहीं
- प्रकृति है, पर असहजता नहीं
- और सबसे बढ़कर—यह ट्रेक आपको आत्मविश्वास देता है कि आप हिमालय के लिए बने हैं
अगर 2026 में हिमालय आपको बुला रहा है, तो Kedarkantha Trek उसका सबसे खूबसूरत जवाब है।
FAQs
❓ Kedarkantha Trek 2026 कहाँ है?
उत्तर: केदारकांठा ट्रेक उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में स्थित है। यह गोविंद वन्यजीव विहार क्षेत्र के अंतर्गत आता है और सांकरी, कोटगाँव या गाईचावां गाँव से शुरू होता है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर: केदारकांठा शिखर की अधिकतम ऊँचाई लगभग 12,500 फीट है।
❓ क्या Kedarkantha Trek 2026 नौसिखियों के लिए सही है?
उत्तर: हाँ। Kedarkantha Trek 2026 को भारत का सबसे लोकप्रिय Beginner-Friendly Winter Trek माना जाता है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 कितने दिनों का होता है?
उत्तर: यह ट्रेक आमतौर पर 6 दिनों का होता है, जिसमें देहरादून से आने-जाने का समय शामिल है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 का बेस्ट टाइम क्या है?
उत्तर:
- दिसंबर–फरवरी: बर्फ़ और विंटर ट्रेकिंग
- मार्च–अप्रैल: रोडोडेंड्रोन और साफ़ मौसम
- मई–जून: हरियाली
- सितंबर–नवंबर: क्लियर माउंटेन व्यू
(जुलाई–अगस्त में ट्रेक बंद रहता है)
❓ Kedarkantha Trek 2026 कितना कठिन है?
उत्तर: यह ट्रेक Moderate Difficulty श्रेणी में आता है। अंतिम दिन 7–8 घंटे की खड़ी चढ़ाई सबसे चुनौतीपूर्ण होती है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 में बर्फ़ कब मिलती है?
उत्तर: आमतौर पर दिसंबर के अंत से मार्च तक पूरे ट्रेक पर बर्फ़ देखने को मिलती है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 के लिए फिटनेस कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: ट्रेकर्स को 5 किमी जॉगिंग, बेसिक कार्डियो और पैरों की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पहले से करनी चाहिए।
❓ Kedarkantha Trek 2026 में AMS का खतरा है क्या?
उत्तर: 12,000 फीट से ऊपर जाने पर हल्का AMS हो सकता है, लेकिन सही एक्लिमेटाइज़ेशन से जोखिम कम रहता है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 क्यों इतना लोकप्रिय है?
उत्तर:
- भारत का सबसे प्रसिद्ध विंटर ट्रेक
- शुरुआती ट्रेकर्स के लिए पहली समिट
- घने जंगल, खुले बुग्याल और 360° हिमालयन व्यू
Breakingnews
बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने किया पुलिस मुख्यालय कूच, गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना

Uttarakhand Politics : राज्य की ध्वस्त पड़ी कानून व्यवस्था के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने आज प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, के नेतृत्व में पुलिस मुख्यालय का घेराव कर सरकार को चेतावनी दी कि अगर राज्य की कानून व्यवस्था पटरी पर नहीं आई तथा लगातार हो रही हत्याओं पर लगाम नहीं लगा तो कांग्रेस पार्टी उग्र आन्दोलन को मजबूर होगी।
Table of Contents
बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने किया पुलिस मुख्यालय कूच
ध्वस्त कानून व्यवस्था के चलते राज्यभर में लगातार हो रही निर्मम हत्याओं के विरोध में आज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालते हुए पुलिस मुख्यालय का घेराव करते हुए पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपते हुए उत्तराखंड में दिन-दहाड़े हो रहे हत्याकांडों एवं बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग की।
कांग्रेस ने पुलिस महानिदेशक को सौंपा ज्ञापन
पुलिस मुख्यालय घेराव के उपरान्त पुलिस महानिदेशक को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस पार्टी ने कहा कि विगत कुछ समय से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जनपदों में दिन-दहाड़े घटित हो रही हत्या और गंभीर आपराधिक घटनाओं से आमजन में भय, असुरक्षा व चिंता का वातावरण व्याप्त है।

उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय और देवभूमि कहे जाने वाले राज्य की राजधानी और अन्य महानगरों में हाल के दिनों में दिन-दहाड़े घटित हुई हत्याकांड की घटनाओं ने समूचे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं से आम नागरिकों में भय, असुरक्षा एवं आक्रोश का वातावरण व्याप्त है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कानून का भय नगण्य होता प्रतीत हो रहा है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं, अपितु राज्य की सामाजिक शांति व नागरिकों के विश्वास को भी प्रभावित कर रही हैं।
गणेश गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य की कानून-व्यवस्था की ये स्थिति अत्यंत चिंताजनक और अस्वीकार्य है। राज्य की कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से चरमरा चुकी है तथा अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त हो चुका है।

इसका ताजा उदाहरण विगत 15 दिन के अन्दर राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जिलों में दिन दहाड़े 5 जघन्य हत्याकांड की घटनायें हैं। पुलिस की नाक के नीचे हुई इन हत्याकांड की घटनाओं में शामिल सभी अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है जो कि गम्भीर चिन्ता का विषय है। इसके साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर जमकर निशाना साधा।
Haridwar
महाशिवरात्रि से पहले हरिद्वार में एक्शन में खाद्य विभाग, निरीक्षण में खामियां मिलने पर 7 को नोटिस जारी

Haridwar News : हरिद्वार में महाशिवरात्रि से पहले खाद्य विभाग एक्शन में नजर आ रहा है। खाद्य विभाग ने आज कावड़ पटरी मार्ग चिड़ियापुर से लेकर हरकी पैड़ी तक सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान खामियां मिलने पर सात कारोबारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
Table of Contents
महाशिवरात्रि से पहले हरिद्वार में खाद्य विभाग की सख्ती
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त सचिन कुर्वे और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में कावड़ पटरी मार्ग चिड़ियापुर, चंडीघाट और हरकी पैड़ी क्षेत्र में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया।

निरीक्षण में खामियां मिलने पर 7 को नोटिस जारी
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी के नेतृत्व में टीम ने कुल 28 खाद्य प्रतिष्ठानों और कोल्ड ड्रिंक स्टोरेज केंद्रों की जांच की। निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं मिलने पर 7 खाद्य कारोबारियों को नोटिस जारी किया गया। मौके पर एक्सपायरी हो चुकी स्लाइस, स्टिंग, फैंटा, लिम्का सहित कुल 118 बोतलें जब्त कर नष्ट करवाई गईं।
मिलावट किसी भी सूरत में नहीं की जाएगी बर्दाश्त
निरीक्षण के दौरान स्लाइस, क्रीमवेल केसर बादाम मिल्कशेक और स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के नमूने लेकर जांच के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला रुद्रपुर भेजे गए हैं। ज्वालापुर स्थित निर्मल इंटरप्राइजेज डिस्ट्रीब्यूटर सेंटर में भी खामियां पाई गईं। जहां खाद्य सामग्री जमीन पर रखी मिली और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

केंद्र संचालक को तीन दिन में जवाब देने का नोटिस जारी किया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ किया है कि पर्व के दौरान मिलावट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
big news
कौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?, जिन्हें सौंपी गई राजधानी देहरादून की कमान, जानें यहां

IPS Pramendra Dobhal : असफलता से IPS के शिखर तक, देहरादून के नए कप्तान प्रमेंद्र डोभाल की अनकही कहानी
IPS Pramendra Dobhal : राजधानी देहरादून में 14 दिनों में 4 हत्याओं की घटनाएं सामने आने के बाद से ही पुलिस महकमे में बड़े बदलाव की चर्चाएं हो रही थी। 15वें दिन सुबह-सुबह हुई पांचवी हत्या ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया। शाम होते-होते एक आदेश जारी हुआ और चर्चाओं पर विराम लग गया। ये आदेश पुलिस महकमे में बड़े बदलाव का था। जिसमें राजधानी देहरादून के एसएसपी अजय सिंह को हटाते हुए IPS प्रमेंद्र डोभाल को दून की जिम्मेदारी सौंपी गई।
Table of Contents
कौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?
IPS प्रमेंद्र डोभाल को देहरादून का नया एसएसपी बनाया गया है। ये सिर्फ खबर नहीं पदस्थापना की खबर नहीं बल्कि उस शख्सियत के संघर्ष की गाथा है जिसने ये साबित कर दिया कि ‘मार्कशीट के नंबर’ भविष्य का फैसला नहीं कर सकते।
प्रमेंद्र डोभाल का जन्म उत्तराखंड में एक साधारण परिवार में हुआ और उनका बचपन अनुशासन और संघर्ष के बीच बीता। पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया। ये वही अधिकारी हैं जो दसवीं में फेल हो गए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वो आईपीएस अधिकारी हैं।
असफलता से IPS के शिखर तक
आईपीएस प्रमेंद्र डोभाल की कहानी में सबसे प्रेरणादायक मोड़ उनकी 10वीं कक्षा में आया जब वो फेल हो गए। आज के दौर में जहां छात्र एक-दो अंक कम आने पर अवसाद में चले जाते हैं, वहीं उन्होंने हाईस्कूल में फेल होने के बाद भी हार नहीं मानी।

एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने जीवन का ये किस्सा साझा करते हुए बताया था कि उस समय समाज और आसपास के लोगों का नजरिया बदल गया था। लेकिन उस विफलता ने उनके भीतर एक ऐसी आग जला दी जिसने उन्हें ‘साधारण’ से ‘असाधारण’ बना दिया। उन्होंने हार मानने के बजाय दोगुनी मेहनत से पढ़ाई की और अपनी शिक्षा पूरी की। ये उनके जीवन का वो “EEAT” फैक्टर है जो उन्हें युवाओं के लिए एक विश्वसनीय मार्गदर्शक (Expert) बनाता है।
खाकी का सफर : PPS से IPS तक का गौरवमयी मार्ग
प्रमेंद्र डोभाल का पुलिस सेवा में करियर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। एक PPS अधिकारी के रूप में उन्होंने चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जैसे संवेदनशील जिलों में काम किया।

व्यक्तिगत जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रमेंद्र डोभाल केवल वर्दी तक सीमित नहीं हैं। वो एक अच्छे पाठक और खेल प्रेमी भी हैं। अक्सर वो स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करते हैं। उनका एक ही संदेश होता है:
“अगर मैं 10वीं में फेल होने के बाद यहाँ तक पहुँच सकता हूँ, तो दुनिया का कोई भी छात्र कुछ भी हासिल कर सकता है।”
उनकी सादगी का आलम यह है कि वह अक्सर बिना तामझाम के औचक निरीक्षण पर निकल जाते हैं ताकि जमीनी हकीकत जान सकें।
Cricket14 hours agoआयरलैंड बनाम ओमान ड्रीम 11 प्रेडिक्शन – एक्सपर्ट एनालिसिस + 11 जीत दिलाने वाले टिप्स…
Uttarakhand22 hours agoउत्तराखंड पुलिस में बड़ा बदलाव, 8 जिलों के बदले गए कप्तान..यहाँ देखें ट्रांसफर लिस्ट..
big news4 hours agoकौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?, जिन्हें सौंपी गई राजधानी देहरादून की कमान, जानें यहां
Cricket8 hours agoENG vs SCO Dream11 Prediction Match 23 : पिच रिपोर्ट, संभावित प्लेइंग 11 और फैंटेसी टीम…
Chamoli6 hours agoस्नो स्कीइंग विंटर कार्निवल-2026 का हुआ आगाज, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने किया शुभारम्भ
Dehradun24 hours agoमानवता की मिसाल: CM राहत कोष में रिटायर्ड ब्रिगेडियर का ₹10 लाख योगदान
Cricket5 hours agoन्यूज़ीलैण्ड बनाम दक्षिण अफ्रीका के बीच ग्रुप-डी का अहम मुकाबला आज , जाने स्क्वॉड और फैंटेसी टिप्स…
Kotdwar23 hours agoलालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग को कोर्ट से मंजूरी, 18 गांवों के 40 हजार ग्रामीणों को सीधा लाभ









































