धर्म-कर्म
Pradosh Vrat 2026: तिथि, पूजा विधि, महत्व और संपूर्ण जानकारी

Pradosh Vrat 2026
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित होता है और हर महीने कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस समय शिव और शक्ति की आराधना करने से जीवन में फैली नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक, शारीरिक व आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
जो श्रद्धालु नियम, संयम और भक्ति भाव से प्रदोष व्रत रखते हैं, उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। यही कारण है कि शिव भक्त इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से करते हैं और इसे जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला व्रत माना जाता है।
Table of Contents
प्रदोष व्रत क्या है?
प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है। यह व्रत सूर्यास्त के बाद के समय, यानी प्रदोष काल में किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और भक्तों की प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं।
Pradosh Vrat 2026 उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रहेगा जो स्वास्थ्य, धन, पारिवारिक सुख, वैवाहिक जीवन में मधुरता और मानसिक शांति की कामना करते हैं।
Pradosh Vrat 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि:
- त्रयोदशी तिथि आरंभ: 15 जनवरी 2026, रात 8 बजकर 16 मिनट
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 16 जनवरी 2026, रात 10 बजकर 21 मिनट
पंचांग के आधार पर माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। शुक्रवार होने के कारण यह व्रत और भी शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे पारिवारिक सुख और दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
प्रदोष व्रत 2026 में दिन का महत्व
हर प्रदोष व्रत का महत्व उसके वार के अनुसार बदलता है। जैसे:
- सोम प्रदोष: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए
- मंगल प्रदोष: साहस और कार्यों में सफलता के लिए
- शुक्र प्रदोष: वैवाहिक सुख और पारिवारिक आनंद के लिए
- शनि प्रदोष: कर्म दोष और बाधाओं से मुक्ति के लिए
जनवरी 2026 का प्रदोष व्रत शुक्रवार को होने से यह विशेष रूप से गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना जा रहा है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Step-by-Step)
Pradosh Vrat 2026 में पूजा विधि को सही तरीके से करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। नीचे पूरी प्रक्रिया दी गई है:
1. प्रातःकाल की तैयारी
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
- स्वच्छ और सात्त्विक वस्त्र धारण करें
- व्रत का संकल्प लें
2. दिनभर संयम
- पूरे दिन सात्त्विक विचार रखें
- व्रत के दौरान क्रोध, नकारात्मक सोच और असत्य से दूर रहें
3. संध्या समय पूजा
- प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करें
- घर के पूजा स्थान में शिवलिंग स्थापित करें या नजदीकी शिव मंदिर जाएं
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और आक के फूल अर्पित करें
4. मंत्र जाप और कथा
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें
5. आरती और समापन
- भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती करें
- परिवार की सुख-शांति और कल्याण की कामना करें
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से प्रदोष व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को रखने से:
- पाप कर्मों का नाश होता है
- ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है
- शिव कृपा से जीवन में स्थिरता आती है
यह व्रत व्यक्ति को आत्मसंयम और अनुशासन की ओर प्रेरित करता है।
प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
आध्यात्मिक रूप से प्रदोष व्रत आत्मशुद्धि का माध्यम है। उपवास और संध्या पूजा के माध्यम से मन भौतिक इच्छाओं से हटकर ईश्वर भक्ति में लीन होता है। इससे:
- मानसिक तनाव कम होता है
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
- आत्मिक शांति की अनुभूति होती है
Pradosh Vrat 2026 से मिलने वाले लाभ
प्रदोष व्रत रखने से श्रद्धालुओं को कई लाभ प्राप्त होते हैं:
- जीवन की बाधाओं से मुक्ति
- कार्यों में सफलता
- स्वास्थ्य में सुधार
- आर्थिक स्थिरता
- पारिवारिक और वैवाहिक सुख
इसी कारण इसे शिव भक्तों के लिए अत्यंत प्रभावशाली व्रत माना गया है।
प्रदोष व्रत में क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- प्रदोष काल में ही पूजा करें
- शुद्ध और सात्त्विक भोजन ग्रहण करें
- शिव मंत्रों का जाप करें
क्या न करें
- व्रत के दिन तामसिक भोजन से बचें
- झूठ और नकारात्मक व्यवहार न करें
- पूजा में जल्दबाजी न करें
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निष्कर्ष
Pradosh Vrat भगवान शिव की आराधना का एक पवित्र और शक्तिशाली अवसर है। यह व्रत न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी जीवन को संतुलित करता है। श्रद्धा और नियम से किया गया प्रदोष व्रत भक्तों को शांति, समृद्धि और शिव कृपा प्रदान करता है।
Disclaimer
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंडित या आधिकारिक पंचांग की पुष्टि अवश्य करें।
❓ Pradosh Vrat 2026 कब है?
जनवरी 2026 में माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन के लिए शुभ माना जाता है।
❓ क्या Pradosh Vrat 2026 सभी लोग रख सकते हैं?
हां, Pradosh Vrat 2026 स्त्री, पुरुष, युवा और वृद्ध सभी रख सकते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो मानसिक शांति, स्वास्थ्य और जीवन में स्थिरता की कामना करते हैं।
❓ प्रदोष व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और भक्त को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
❓ प्रदोष व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और भक्त को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आस्था
कब है Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 ? जानें शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का सटीक समय और पूजा विधि..

Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Overview
साल 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026) को लेकर भक्तों के बीच तारीखों का बड़ा असमंजस है कि यह व्रत 3 जून को रखा जाएगा या 4 जून को। पंचांग की गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि 3 जून 2026 को रात 09:22 बजे शुरू होकर 4 जून 2026 को रात 11:31 बजे समाप्त होगी। चूंकि संकष्टी चतुर्थी में चंद्रोदय (Moonrise) के समय पूजा और अर्घ्य देने का विधान है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत बुधवार, 3 जून 2026 को ही रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 10:04 बजे रहेगा।
3 या 4 जून संकष्टी चतुर्थी?
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूजनीय’ और ‘विघ्नहर्ता’ माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है। गणेश जी को प्रसन्न करने और जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) का व्रत सबसे फलदायी माना गया है।
साल 2026 में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026) बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है। यह कोई आम चतुर्थी नहीं है, बल्कि यह तीन साल में एक बार आने वाली अधिक मास (Adhik Maas) या मलमास की संकष्टी चतुर्थी है। आइए इस विशेष लेख में विस्तार से जानते हैं कि साल 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी की सही तारीख क्या है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, आपके शहर में चांद कब निकलेगा और इस दिन किस विधि से पूजा करने पर बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
क्यों बेहद खास है ‘विभुवन संकष्टी चतुर्थी’?
हिंदू पंचांग में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को ही विभुवन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
- तीन साल का इंतजार: चूंकि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह व्रत भी प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर ही पड़ता है।
- बुधवार का दुर्लभ संयोग: साल 2026 में इस व्रत का महत्व इसलिए और अधिक बढ़ गया है क्योंकि 3 जून को बुधवार का दिन है। बुधवार का दिन पूर्ण रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। ऐसे में बुधवार के दिन संकष्टी चतुर्थी का आना एक अत्यंत दुर्लभ और महासंयोग माना जा रहा है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों को कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी।
तारीख को लेकर क्यों है कंफ्यूजन? 3 या 4 जून?
पंचांग भेद और तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण अक्सर व्रत और त्योहारों की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। साल 2026 की अधिक मास संकष्टी चतुर्थी को लेकर भी ऐसा ही भ्रम बना हुआ है। आइए ज्योतिषीय गणना के आधार पर इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं:
- चतुर्थी तिथि का आरंभ: 3 जून 2026, बुधवार को रात 09 बजकर 22 मिनट पर।
- चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 4 जून 2026, गुरुवार को रात 11 बजकर 31 मिनट पर।
शास्त्रों का नियम: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन (Moon Sighting) और चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य होता है। बिना चंद्रोदय की पूजा के यह व्रत अधूरा माना जाता है।
- 3 जून की रात: चतुर्थी तिथि रात 09:22 बजे लग रही है और इस रात को चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद रहेगी।
- 4 जून की रात: इस दिन भले ही पूरे दिन चतुर्थी तिथि रहेगी, लेकिन रात को 11:31 बजे समाप्त हो जाएगी।
चूंकि 3 जून को रात के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान है और इसी रात को भक्तों को व्रत का पारण चांद देखकर करना है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का उपवास 3 जून 2026, बुधवार को ही रखा जाना शास्त्र सम्मत है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त और चौघड़िया (Shubh Muhurat)
3 जून 2026 को दिनभर में पूजा के कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें भगवान गणेश की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी:
सुबह का शुभ मुहूर्त (Morning Puja Muhurat)
- लाभ चौघड़िया: सुबह 05:23 बजे से सुबह 07:07 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: सुबह 07:07 बजे से सुबह 08:51 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक
शाम और रात का शुभ मुहूर्त (Evening Puja Muhurat)
- लाभ चौघड़िया: शाम 05:31 बजे से शाम 07:15 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: रात 08:31 बजे से रात 09:47 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: रात 09:47 बजे से रात 11:03 बजे तक
चंद्रोदय का सटीक समय (Moonrise Timing)
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण भाग रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है।
3 जून 2026 को चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 04 मिनट (10:04 PM) रहेगा।
(नोट: भारत के अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है।)
चंद्रमा को अर्घ्य देने से न केवल भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं, बल्कि जिन जातकों की कुंडली में चंद्र दोष होता है या मानसिक तनाव रहता है, उन्हें भी चंद्र देव की कृपा से शांति और मजबूती मिलती है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
यदि आप इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो नीचे दी गई शास्त्रीय विधि के अनुसार पूजा करें ताकि आपको अपनी पूजा का पूर्ण फल मिल सके:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें: व्रत के दिन सुबह जल्दी (सूर्योदय से पूर्व) उठें। घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करें। (इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है)।
- व्रत का संकल्प लें: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान गणेश के सामने बैठें और अपनी मनोकामना कहते हुए पूरे दिन निराहार या फलाहारी व्रत रखने का संकल्प लें।
- पूजा स्थल की तैयारी: एक लकड़ी की चौकी पर साफ पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- गंगाजल का छिड़काव: पूरे पूजा स्थल और स्वयं पर गंगाजल छिड़क कर पवित्रीकरण करें।
- पंचामृत स्नान: भगवान गणेश की धातु की मूर्ति है तो उन्हें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं।
- दूर्वा और सिंदूर: गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें अर्पित करें। याद रखें, बप्पा को दूर्वा अत्यंत प्रिय है और इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
- भोग लगाएं: गणेश जी को मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतु फल और पान का पत्ता अर्पित करें।
- दीपक और मंत्र जाप: बप्पा के सामने गाय के घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गणेश जी के प्रभावी मंत्रों का जाप करें (जैसे: ॐ गं गणपतये नमः या वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥)।
- कथा और आरती: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर या घी के दीपक से गणेश जी की आरती करें।
- शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य: शाम के समय दोबारा हाथ-पैर धोकर गणेश जी की आरती करें। रात को 10:04 बजे जब चंद्रोदय हो, तब एक तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, चंदन, अक्षत और फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद अपना व्रत खोलें (पारण करें)।
पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें? (Do’s and Don’ts)
- क्या करें:
- पूजा में हमेशा अक्षत (चावल) का उपयोग करें, लेकिन ध्यान रहे कि चावल के दाने टूटे हुए (खंडित) या सूखे नहीं होने चाहिए। चावल को थोड़ा गीला करके ही चढ़ाएं।
- दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब या जरूरतमंदों को तिल, अन्न या वस्त्र का दान करें।
- क्या न करें:
- गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों (Tulsi Leaves) का उपयोग भूलकर भी न करें। पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी ने तुलसी जी को अपनी पूजा से वर्जित किया है।
- व्रत के दिन घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन न बनाएं।
- किसी के प्रति मन में क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष की भावना न लाएं और न ही किसी को अपशब्द कहें।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ (Significance & Benefits)
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति तीन साल में एक बार आने वाली इस विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत सच्चे मन से रखता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- संकटों का नाश: ‘संकष्टी’ का अर्थ ही होता है संकटों को हरने वाली। जीवन में आ रही बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
- संतान सुख और दीर्घायु: महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए यह व्रत विशेष रूप से रखती हैं।
- आर्थिक समृद्धि: बुधवार के संयोग के कारण इस दिन पूजा करने से घर में रुकी हुई धन संपदा वापस आती है और व्यापार में उन्नति होती है।
- मानसिक शांति: चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन एकाग्रचित्त बनता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
साल 2026 की विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi 2026) आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक अनुपम अवसर है। 3 जून 2026, बुधवार को भगवान गणेश की विधि-विधान से की गई पूजा आपके जीवन के सभी विघ्न-बाधाओं को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी। आप सभी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं! बप्पा आपके जीवन को खुशियों से भर दें।
Chamoli
चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के खुले कपाट, ‘जय बाबा रुद्रनाथ’ के जयघोष से गूंज उठा पूरा क्षेत्र

Chamoli News : उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पंच केदारों में चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार, 18 मई को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विधिवत खोल दिए गए।
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चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के खुले कपाट
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज यानी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के बीच मंदिर के कपाट खोले गए। दोपहर 12:45 बजे आयोजित इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग मौजूद रहे। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा रुद्रनाथ’ के जयघोष से गूंज उठा।

अगले छह महीने यहीं होंगे बाबा रूद्रनाथ के दर्शन
कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा रुद्रनाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और राज्य की खुशहाली की कामना की। धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। कपाट खुलने के साथ ही बाबा रुद्रनाथ ग्रीष्मकाल के लिए अपने मूल धाम में विराजमान हो गए हैं।
Chamoli
बद्रीनाथ धाम पहुंचे राज्यपाल गुरमीत सिंह, पूजा-अर्चना कर लिया भगवान बद्रीविशाल का आशीर्वाद

Chamoli News : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमित सिंह (सेनि) आज बद्रीनाथ धाम पहुंचे। जहां उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए।
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बद्रीनाथ धाम पहुंचे राज्यपाल गुरमीत सिंह
शनिवार को राज्यपाल गुरमीत सिंह ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
धाम पहुंचने पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और मुख्य कार्याधिकारी ,सोहन सिंह रांगड़ ने मंदिर परिसर में राज्यपाल का स्वागत किया।

राज्यपाल ने की बद्रीनाथ धाम के दिव्य वातावरण की सराहना
राज्यपाल ने बद्रीनाथ धाम की आध्यात्मिक महत्ता और दिव्य वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति द्वारा की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए उन्हें सराहनीय बताया।
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