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धर्म-कर्म

Pradosh Vrat 2026: तिथि, पूजा विधि, महत्व और संपूर्ण जानकारी

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Pradosh Vrat 2026

Pradosh Vrat 2026

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित होता है और हर महीने कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस समय शिव और शक्ति की आराधना करने से जीवन में फैली नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक, शारीरिक व आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

जो श्रद्धालु नियम, संयम और भक्ति भाव से प्रदोष व्रत रखते हैं, उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। यही कारण है कि शिव भक्त इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से करते हैं और इसे जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला व्रत माना जाता है।

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है। यह व्रत सूर्यास्त के बाद के समय, यानी प्रदोष काल में किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और भक्तों की प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं।

Pradosh Vrat 2026 उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रहेगा जो स्वास्थ्य, धन, पारिवारिक सुख, वैवाहिक जीवन में मधुरता और मानसिक शांति की कामना करते हैं।


Pradosh Vrat 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि:

  • त्रयोदशी तिथि आरंभ: 15 जनवरी 2026, रात 8 बजकर 16 मिनट
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 16 जनवरी 2026, रात 10 बजकर 21 मिनट

पंचांग के आधार पर माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। शुक्रवार होने के कारण यह व्रत और भी शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे पारिवारिक सुख और दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।


प्रदोष व्रत 2026 में दिन का महत्व

हर प्रदोष व्रत का महत्व उसके वार के अनुसार बदलता है। जैसे:

  • सोम प्रदोष: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए
  • मंगल प्रदोष: साहस और कार्यों में सफलता के लिए
  • शुक्र प्रदोष: वैवाहिक सुख और पारिवारिक आनंद के लिए
  • शनि प्रदोष: कर्म दोष और बाधाओं से मुक्ति के लिए

जनवरी 2026 का प्रदोष व्रत शुक्रवार को होने से यह विशेष रूप से गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना जा रहा है।


प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Step-by-Step)

Pradosh Vrat 2026 में पूजा विधि को सही तरीके से करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। नीचे पूरी प्रक्रिया दी गई है:

1. प्रातःकाल की तैयारी

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • स्वच्छ और सात्त्विक वस्त्र धारण करें
  • व्रत का संकल्प लें

2. दिनभर संयम

  • पूरे दिन सात्त्विक विचार रखें
  • व्रत के दौरान क्रोध, नकारात्मक सोच और असत्य से दूर रहें

3. संध्या समय पूजा

  • प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करें
  • घर के पूजा स्थान में शिवलिंग स्थापित करें या नजदीकी शिव मंदिर जाएं
  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और आक के फूल अर्पित करें

4. मंत्र जाप और कथा

  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें

5. आरती और समापन

  • भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती करें
  • परिवार की सुख-शांति और कल्याण की कामना करें

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से प्रदोष व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को रखने से:

  • पाप कर्मों का नाश होता है
  • ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है
  • शिव कृपा से जीवन में स्थिरता आती है

यह व्रत व्यक्ति को आत्मसंयम और अनुशासन की ओर प्रेरित करता है।


प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक रूप से प्रदोष व्रत आत्मशुद्धि का माध्यम है। उपवास और संध्या पूजा के माध्यम से मन भौतिक इच्छाओं से हटकर ईश्वर भक्ति में लीन होता है। इससे:

  • मानसिक तनाव कम होता है
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
  • आत्मिक शांति की अनुभूति होती है

Pradosh Vrat 2026 से मिलने वाले लाभ

प्रदोष व्रत रखने से श्रद्धालुओं को कई लाभ प्राप्त होते हैं:

  • जीवन की बाधाओं से मुक्ति
  • कार्यों में सफलता
  • स्वास्थ्य में सुधार
  • आर्थिक स्थिरता
  • पारिवारिक और वैवाहिक सुख

इसी कारण इसे शिव भक्तों के लिए अत्यंत प्रभावशाली व्रत माना गया है।


प्रदोष व्रत में क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • प्रदोष काल में ही पूजा करें
  • शुद्ध और सात्त्विक भोजन ग्रहण करें
  • शिव मंत्रों का जाप करें

क्या न करें

  • व्रत के दिन तामसिक भोजन से बचें
  • झूठ और नकारात्मक व्यवहार न करें
  • पूजा में जल्दबाजी न करें

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निष्कर्ष

Pradosh Vrat भगवान शिव की आराधना का एक पवित्र और शक्तिशाली अवसर है। यह व्रत न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी जीवन को संतुलित करता है। श्रद्धा और नियम से किया गया प्रदोष व्रत भक्तों को शांति, समृद्धि और शिव कृपा प्रदान करता है।


Disclaimer

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंडित या आधिकारिक पंचांग की पुष्टि अवश्य करें।


❓ Pradosh Vrat 2026 कब है?

जनवरी 2026 में माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन के लिए शुभ माना जाता है।

❓ क्या Pradosh Vrat 2026 सभी लोग रख सकते हैं?

हां, Pradosh Vrat 2026 स्त्री, पुरुष, युवा और वृद्ध सभी रख सकते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो मानसिक शांति, स्वास्थ्य और जीवन में स्थिरता की कामना करते हैं।

❓ प्रदोष व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और भक्त को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

❓ प्रदोष व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और भक्त को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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अष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर कंफ्यूजन, जानें कब करें कन्या पूजन, क्या है शुभ मुहूर्त ?

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Ashtami or Navami 2026

Ashtami or Navami 2026 : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इस दौरान भक्त उपवास रखकर माता रानी की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी के अवसर पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराकर सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की जाती है। कई भक्त अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, जबकि कुछ लोग नवमी तिथि को यह अनुष्ठान पूरा करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियां क्या हैं और कन्या पूजन के लिए कौन-से शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

शारदीय नवरात्रि 2026 में कब है अष्टमी?

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। ये तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन कर सकते हैं। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को घर आमंत्रित कर उनके चरण धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

अष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है।

Ashtami or Navami 2026

नवमी पर कब करें कन्या पूजन?

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर आरंभ होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि के समय के कारण कुछ परंपराओं में 19 अक्टूबर को नवमी के अनुष्ठान किए जा सकते हैं, जबकि उदयातिथि के आधार पर पूजा करने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर को नवमी मनाकर कन्या पूजन कर सकते हैं।

नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

नवमी के अवसर पर 19 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। वहीं, 20 अक्टूबर को भी अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। भक्त इस दौरान मां दुर्गा की आराधना और कन्या पूजन कर सकते हैं।

अष्टमी हो या नवमी, दोनों ही तिथियों पर कन्या पूजन को नवरात्रि की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा माना जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक मान्यताओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि चुनकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

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National

नवरात्रि पर मां के 9 रूप बदल सकते हैं किस्मत! जानें किसकी पूजा से दूर होंगे कष्ट

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Navratri 2026

Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। हर दिन मां के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है और उनसे जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना की जाती है।

मां शैलपुत्री की पूजा से मिलेगी दृढ़ता

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। देवी का यह स्वरूप धैर्य, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की कामना की जाती है। जो लोग जीवन में अस्थिरता या निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं, वे माता की पूजा कर मनोबल प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

भोग: मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

Navratri 2026

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से बढ़ेगा आत्मबल

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, संयम और संकल्प शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मन को एकाग्र रखने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थी और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत कर रहे लोग भी माता से एकाग्रता और आत्मबल की कामना करते हैं।

भोग: माता को शक्कर, सफेद मिठाई या पंचामृत अर्पित किया जाता है।

मां चंद्रघंटा की आराधना से दूर होगा भय

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। देवी का यह स्वरूप साहस, शौर्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से भय और मानसिक अशांति से मुक्ति तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्राप्त करने की कामना की जाती है।

भोग: मां चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा से मिलेगी सकारात्मकता

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उन्हें सृष्टि की ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में ऊर्जा, उत्साह, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की जाती है। देवी का यह स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

भोग: मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा सुख-शांति का आशीर्वाद

पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है और उनकी माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य और करुणा का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा से परिवार में सुख-शांति, प्रेम और खुशहाली की कामना की जाती है।

भोग: इस दिन माता को केले का भोग अर्पित किया जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा से मिलेगी बाधाओं से लड़ने की शक्ति

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति और सफलता प्राप्त करने की कामना की जाती है। देवी को महिषासुर का वध करने वाली मां के रूप में भी पूजा जाता है।

भोग: मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा है।

मां कालरात्रि की पूजा से दूर होगा भय और संकट

सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करती हैं। उनकी पूजा करके भक्त जीवन की परेशानियों, अनिश्चितताओं और संकटों का सामना करने के लिए शक्ति और साहस की कामना करते हैं।

भोग: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां महागौरी की पूजा से मिलती है शांति

नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी मनाई जाती है और मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है। अष्टमी पर कई परिवारों में कन्या पूजन भी किया जाता है।

भोग: मां महागौरी को नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में देवी को सिद्धियां प्रदान करने वाली और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माना जाता है। उनकी आराधना से ज्ञान, सफलता, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में संतुलन की कामना की जाती है। नवमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन और हवन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।

भोग: मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है।

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Uttarakhand

11 या 12 कब से शुरू होंगे शारदीय नवरात्रि ? जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Navratri 2026 Dates

Navratri 2026 Date : शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होता है। नवरात्रि के दौरान भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और विधि-विधान से माता रानी की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों देवी दुर्गा की उपासना करने से सुख, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कब से शुरू होंगे शारदीय नवरात्रि 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 की रात 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 11 अक्टूबर 2026 की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि का पहला दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।

नवररात्रि के पहले दिन होती है घट स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसी दिन घरों और मंदिरों में घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा-अर्चना का शुभारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। हालांकि, देवी के आगमन से जुड़ी मान्यताएं परंपराओं और पंचांग की व्याख्याओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

Navratri 2026 Date

शारदीय नवरात्रि 2026 में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। इसी के साथ घरों में मां दुर्गा की पूजा और नवरात्रि के व्रत का संकल्प लिया जाता है।

11 अक्टूबर 2026 को घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

Navratri 2026 Date

नवरात्रि की पूजा के लिए जरूरी सामग्री

मां दुर्गा की पूजा और घट स्थापना के लिए पहले से ही आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेनी चाहिए। इससे पूजा के दौरान किसी वस्तु की कमी नहीं होती। नवरात्रि की पूजा के लिए इन सामग्रियों की आवश्यकता होती है –

  • कलश स्थापना के लिए: लोटा या कलश, स्वच्छ जल, गंगाजल, मौली, सुपारी, दूर्वा और नारियल।
  • माता के श्रृंगार के लिए: लाल चुनरी, वस्त्र, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, गजरा, कंघी, शीशा, पायल, इत्र और मेहंदी।
  • पूजा-अर्चना के लिए: फूल, फूलों की माला, पान, साबुत चावल, धूप-बत्ती, कपूर और पीतल का दीपक।
  • दीपक जलाने के लिए: घी या तिल का तेल और रुई की बत्तियां।
  • जौ बोने के लिए: मिट्टी, मिट्टी का पात्र, जौ और आवश्यकतानुसार जल।
  • भोग के लिए: फल, मिठाई, बताशे और अन्य प्रसाद सामग्री।
  • अन्य सामग्री: कलावा, सूखा नारियल और श्रद्धा के अनुसार दान की वस्तुएं।
Navratri 2026 Date

शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व

शारदीय नवरात्रि को शक्ति की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को साहस, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा होती है और कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, दुर्गा पूजा पंडाल तथा धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। ऐसे में भक्त घट स्थापना के शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री की तैयारी पहले से कर सकते हैं, ताकि नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना श्रद्धा और विधि-विधान से की जा सके।

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“सासाराम की मुस्लिम महिलाओं ने रचाया मेहंदी से ‘ऑपरेशन सिन्दूर’, पीएम मोदी के स्वागत में गूंजा एकता का संदेश|

Breakingnews1 year ago

भदोही में खाकी शर्मसार: रिश्वत लेते पकड़े गए पुलिसकर्मी, वीडियो वायरल |

Breakingnews1 year ago

“चकराता के टाइगर फॉल में प्रकृति का कहर — भारी पेड़ और पत्थरों के गिरने से 2 की मौके पर मौत, कई घायल |

Breakingnews1 year ago

मेरठ में महिला के साथ सड़क पर अश्लील हरकत करने वाला युवक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की गिरफ्त में |

Breakingnews1 year ago

वायरल-होने-का-शौक-पड़ा-भारी-—-देहरादून-पुलिस-ने-स्टंटबाज़-युवती-पर-की-चालानी-कार्रवाई |

Breakingnews1 year ago

ब्रेकिंग न्यूज़ | चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक के हापला बाजार में उद्यान विभाग के कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

Nainital1 year ago

नैनीताल: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किए मां नैना देवी के दर्शन, प्रदेश की सुख-शांति की कामना की….

Crime2 years ago

खेत की मेढ़ काटने को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष का वीडियो सोशल मिडिया पर वायरल….

Dehradun2 years ago

उत्तराखंड: पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और डीजीपी अभिनव कुमार आमने-सामने, त्रिवेंद्र ने आखिर क्यों DGP को दी हद में रहने की सलाह ?

Dehradun2 years ago

VIDEO: सुबह मॉर्निंग वॉक पर हाइवे पर निकला हाथी, पूर्व सैनिक घयाल, अस्पताल में भर्ती

Madhya Pradesh2 years ago

शिक्षक दिवस के अवसर पर इस शराबी शिक्षक का वीडियो सोशल मिडिया पर जमकर हो रहा वायरल !

Crime2 years ago

VIDEO: महिला की शिकायत पर हुआ नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज, दुष्कर्म का आरोप।

Dehradun1 year ago

देहरादून: मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का किया भव्य स्वागत…

Breakingnews1 year ago

ब्रेकिंग न्यूज़ देहरादून: आईपीएस रचिता जुयाल ने निजी कारणों से दिया इस्तीफा…

Crime1 year ago

हल्द्वानी: बनभूलपुरा क्षेत्र में युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या, एक हिरासत में…

Dehradun1 year ago

देहरादून में स्मार्ट ऑटोमेटेड पार्किंग का कार्य अंतिम चरण में, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत…

Chamoli1 year ago

श्रद्धालुओं को ठगने बद्रीनाथ पहुंचा मोबाइल माफिया गैंग , पुलिस ने 6 को रंगे हाथों पकड़ा…

Crime1 year ago

कारोबारी को सेल्समैन ने लगाया 9 लाख से ज्यादा का चूना, फर्जी पेमेंट बुक से की ठगी, मुकदमा दर्ज…

Rudraprayag1 year ago

रुद्रप्रयाग: जखोली में फिर गुलदार का कहर, महिला की मौत से दहशत, वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश….

Dehradun1 year ago

देहरादून समेत उत्तराखंड के कई जिलों में आज भी बारिश, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट किया जारी….

Dehradun1 year ago

अंकिता भंडारी हत्याकांड में इंसाफ की जीत, धामी सरकार की सख्ती से टूटा रसूखदारों का गुरूर…

Dehradun1 year ago

ऋषिकेश रेंज के जंगल में पत्ते लेने गए युवकों पर बाघ का हमला, एक की मौत, दूसरा घायल….

Dehradun1 year ago

राजभवन नैनीताल में मनाया गया गोवा स्थापना दिवस, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का दिया संदेश….

Dehradun1 year ago

उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों के लिए बनेगा विशेष ट्रेनिंग सेंटर: मुख्यमंत्री धामी

Rudraprayag1 year ago

केदारनाथ धाम यात्रा: सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग पर नहीं होगा घोड़े-खच्चरों का संचालन….

Nainital1 year ago

20वें गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट का राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किया उद्घाटन, पहले दिन 70 गोल्फरों ने लिया भाग…

Crime1 year ago

अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला…

Breakingnews1 year ago

रामनगर: क़ब्रिस्तान की ज़मीन को लेकर विवाद, दफनाने से पहले उठा बवाल |

Breakingnews1 year ago

हरिद्वार: गंगा घाट किनारे पेड़ पर लिपटा मिला अजगर, वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

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