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उत्तराखंड में बर्फ़बारी का आनंद लेने के लिए शानदार हिल स्टेशन्स, दिल्ली से मात्र इतनी है दूरी…

Snowfall Places in Uttarakhand : ये उत्तराखंड के बेस्ट Snowfall Destination
Snowfall Places in Uttarakhand : उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। जैसे ही सर्दियों का मौसम दस्तक देता है, ये राज्य किसी जादुई दुनिया में बदल जाता है। पहाड़ों की चोटियों, देवदार के पेड़ों और घरों पर जमी बर्फ इस प्रदेश को बेहद आकर्षक बना देती है। यही कारण है कि सर्दियों में उत्तराखंड बर्फबारी देखने के शौकीनों के लिए एक खूबसूरत पर्यटन स्थल बन जाता है।
मुख्य बिंदु
Best Destination in Uttarakhand for Snowfall
इसके अलावा, जब चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछ जाती है, तो पूरा वातावरण मन को मोह लेने वाला हो जाता है। यदि आप भी सर्दियों में उत्तराखंड घूमने का मन बना रहे हैं, तो यहां की बर्फबारी आपकी यात्रा को यादगार बना सकती है।
उत्तराखंड का नाम आते ही मन में खूबसूरत घाटियों, शांत हिल स्टेशनों और पवित्र नदियों की इमेज उभरने लगती है। लेकिन सर्दियों में ये राज्य अपनी अलग ही छटा बिखेरता है। हल्की-हल्की गिरती बर्फ, शांत वातावरण और पहाड़ों की नीरवता मन को गहरी शांति देती है। उत्तराखंड की ये जगहें आपकी फैमिली या दोस्तों के साथ परफेक्ट विंटर डेस्टिनेशन हो सकती हैं। तो अगर आप भी इस बार बर्फ़बारी का आनंद लेना चाहते हैं तो ये जगहें आपके लिए ख़ास बन सकती हैं।
औली (Auli snowfall)
औली (Auli snowfall) सर्दियों के मौसम में एक मनमोहक बर्फीले स्वर्ग में तब्दील हो जाता है। जैसे ही दिसंबर का महीना शुरू होता है, औली बर्फ की सफ़ेद चादर ओढ़े नजर आता है। जो आमतौर पर मार्च तक जारी रहता है। इसी दौरान औली में भारी बर्फ गिरने से स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसे शीतकालीन खेलों की रौनक बढ़ जाती है। जबकि, कुछ वर्षों में बर्फबारी थोड़ी देर से होती है। जिससे पर्यटकों को इंतजार करना पड़ता है, लेकिन जैसे ही बर्फ गिरती है, ये हिल स्टेशन सैलानियों से गुलजार हो जाता है। इस दौरान औली का तापमान अक्सर शून्य से नीचे चला जाता है, जो खासतौर पर कपल्स और एडवेंचर लवर्स को आकर्षित करता है।

How to Reach Auli
दिल्ली से औली पहुंचने के लिए पहले हरिद्वार या ऋषिकेश तक बस या ट्रेन से जाया जा सकता है। वहां से टैक्सी या बस के जरिए जोशीमठ पहुंचा जाता है। इसके बाद जोशीमठ से औली के लिए टैक्सी या प्रसिद्ध केबल कार (Ropeway) का विकल्प उपलब्ध है।
चकराता ( Snowfall in chakrata )
चकराता उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित एक शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो सर्दियों में बर्फबारी के कारण खास आकर्षण बन जाता है। दिसंबर से मार्च के बीच यहां ठंड का असर बढ़ जाता है और ऊँचाई वाले इलाकों में अच्छी बर्फ देखने को मिलती है, खासकर जनवरी के महीने में। बर्फ से ढके देवदार के जंगल, ऊँचे पहाड़ और शांत वातावरण चकराता को एक आदर्श snowfall destination बनाते हैं। टाइगर फॉल्स और मोयला टॉप जैसे स्थान सर्दियों में और भी मनमोहक नजर आते हैं। हालांकि, यह एक कैंटोनमेंट क्षेत्र है, इसलिए कुछ स्थानों पर प्रतिबंध लागू रहते हैं, लेकिन फिर भी प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर चाहने वालों के लिए यह जगह बेहद खास है।

How to Reach Chakrata
चकराता पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक विकल्प है। देहरादून से चकराता की दूरी लगभग 87–90 किलोमीटर है, जिसे टैक्सी या बस से आसानी से तय किया जा सकता है। ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए देहरादून रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी स्टेशन है, जबकि हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटक देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट तक पहुंच सकते हैं, जो चकराता से करीब 113 किलोमीटर दूर है। इसके बाद एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस के जरिए चकराता पहुंचना सरल रहता है।
हर्षिल (Snowfall in Harsil)
हर्षिल (Harsil) उत्तराखंड की एक खूबसूरत घाटी है, जहां दिसंबर से फरवरी के बीच अच्छी बर्फबारी देखने को मिलती है। इस दौरान पूरी घाटी बर्फ की सफेद चादर में ढक जाती है और यह क्षेत्र एक मनमोहक विंटर वंडरलैंड का रूप ले लेता है। बर्फबारी के समय यहां का तापमान आमतौर पर 0°C के आसपास रहता है, जबकि रात में पारा और भी नीचे चला जाता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में बर्फबारी अपने चरम पर होती है, जिससे शांत वातावरण और बर्फ से ढके पहाड़ पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में हर्षिल ठंडे मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है।

How to Reach Harsil
हर्षिल पहुँचने के लिए सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक ऑप्शन है। आप निकटम रेलवे स्टेशन देहरादून तक ट्रेन या निकटतम एयरपोर्ट जौलीग्रांट तक हवाई यात्रा कर के आ सकते हैं। जहाँ से आगे का सफर आपको सड़क मार्ग से तय करना होगा। इसके लिए आप देहरादून, ऋषिकेश या हरिद्वार से शेयर टैक्सी या रोडवेज की बसों के माध्यम से हर्षिल पहुँच सकते हैं।
दिल्ली/मैदान से: हरिद्वार/ऋषिकेश -> देहरादून -> उत्तरकाशी -> हर्षिल (एनएच 34/108 पर)
धनौल्टी ( Snowfall in Dhanaulti )
धनौल्टी उत्तराखंड का एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। जिसकी समुद्र तल ऊंचाई 2286 मीटर है। वैसे तो साल भर यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक होती है। और पर्यटक देश-विदेश से यहां घूमने आते हैं। लेकिन सर्दियों में यहाँ का दृश्य और भी रमणीय हो जाता है। उत्तराखण्ड में बर्फ़बारी का आनंद लेने के लिए धनौल्टी एक परफेक्ट विंटर डेस्टिनेशन है। यहाँ आप फैमिली या दोस्तों के साथ घूमने और बर्फ़बार का आनंद लेने के लिए आ सकते हैं। दिसंबर से फरवरी यहाँ पर बर्फ़बारी का आनंद लेने के लिए सबसे बेस्ट टाइम है।

How Reach Dhanaulti
धनौल्टी पहुँचने के लिए सबसे अच्छा है सड़क मार्ग (बस, टैक्सी, कार) जो देहरादून या ऋषिकेश से मसूरी होते हुए या सीधे चंबा-ऋषिकेश रूट से जाता है। निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) और निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून/ऋषिकेश हैं। जहाँ से आगे बस या टैक्सी लेनी पड़ती है, और दिल्ली से ये लगभग 300-325 किमी दूर है।
मुक्तेश्वर ( Snowfall in Mukteshwar )
मुक्तेश्वर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में एक फेमस हिल स्टेशन है। जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फबारी के लिए प्रसिद्ध है। मुक्तेश्वर में बर्फबारी (Snowfall Destination) देखने के लिए दिसंबर के अंत से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा होता है, जब यहाँ का तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और घाटियाँ बर्फ से ढक जाती हैं, जिससे यह स्थान सर्दियों में बेहद खूबसूरत और दर्शनीय बन जाता है।
How to Reach Mukteshwar
मुक्तेश्वर पहुँचने के लिए सबसे पहले आप पंतनगर एयरपोर्ट (लगभग 110 किमी) हवाई जहाज़ से या काठगोदाम/हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से ट्रेन द्वारा आएं। इसके बाद नैनीताल या भवाली तक टैक्सी या बस लें और फिर स्थानीय बस या टैक्सी से मुक्तेश्वर पहुँचें (नैनीताल से लगभग 51 किमी, भवाली से 40 किमी)। रास्ता देवदार के जंगलों और फलों के बगीचों से होकर गुजरता है, जिससे यात्रा और भी खूबसूरत बन जाती है।
रानीखेत (Ranikhet in Winters)
रानीखेत उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है। जो सर्दियों में अपने साथ बर्फबारी भी लेकर आता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में ये Snowfall Destination पूरी तरह बर्फ की चादर से ढक जाता है। जिससे तापमान काफी गिर जाता है। बर्फीले परिदृश्य और ठंडी हवाओं के बीच रानीखेत का नजारा पर्यटकों को एक जादुई अनुभव प्रदान करता है, जो इसे सर्दियों में घूमने के लिए एक अच्छी जगह बनती है। ये एक छावनी ऐरा भी है। इसे अंग्रेजों ने बसाया था बर्फ़बारी के साथ आप यहां पर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी ले सकते हैं।
How to Reach Ranikhet
रानीखेत पहुँचने के लिए आप टैक्सी या बस से सुंदर पहाड़ियों से होते हुए अंतिम 2–4 घंटे का सफर तय कर सकते हैं, क्योंकि यहाँ कोई सीधा हवाई अड्डा या प्रमुख रेलवे स्टेशन नहीं है। दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से भी यात्रा की जा सकती है, जो लगभग 350 किमी/8–10 घंटे का है। निकटतम हवाई अड्डों में पंतनगर हवाई अड्डा (PNQ) लगभग 110–119 किमी दूर है, जहाँ दिल्ली से उड़ानें उपलब्ध हैं और हवाई अड्डे से कैब आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा, जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (DED), देहरादून लगभग 150 किमी दूर है।
उत्तराखंड में Snowfall देखने के लिए Best Places कौन से हैं?
सबसे लोकप्रिय Snowfall Places हैं: Auli, Harsil, Dhanaulti, Mukteshwar, Ranikhet, Chakrata।
Snowfall Destination तक पहुँचने के लिए नज़दीकी Airport कौन सा है?
निकटतम Airports: Pantnagar Airport, Jolly Grant Airport (Dehradun), और Indira Gandhi Airport (Delhi)।
Auli में Snowfall देखने के लिए कैसे पहुँचे?
पहले Haridwar/Rishikesh तक ट्रेन या बस लें, फिर Joshimath तक टैक्सी या बस, और अंत में Auli के लिए Ropeway या टैक्सी लें।
उत्तराखंड में Snowfall का Best Time कब है?
Best Time है December से February, जब पहाड़ और घाटियाँ बर्फ से ढक जाती हैं और दृश्य बेहद मनोरम बन जाते हैं।
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Uttarakhand
Kedarkantha Trek 2026 : बर्फीले हिमालय में नौसिखियों से लेकर अनुभवी ट्रेकर्स तक का सपना

लोकेशन: केदारकांठा, उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड
अगर आप 2026 में हिमालय की पहली “समिट ट्रेक” की तलाश कर रहे हैं—जहाँ बर्फ़, जंगल, खुले बुग्याल, साफ़ आसमान और दमदार शिखर दृश्य एक साथ मिलें—तो Kedarkantha Trek 2026 आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। यह ट्रेक भारत के उन चुनिंदा ट्रेक्स में है जो नौसिखियों के लिए भी सुरक्षित, संरचित और रोमांचक माने जाते हैं, और अनुभवी ट्रेकर्स के लिए भी उतना ही संतोषजनक अनुभव देते हैं।
Kedarkantha Trek 2026 क्यों है भारत का सबसे लोकप्रिय विंटर ट्रेक?
केदारकांठा को अक्सर “भारत का बेस्ट विंटर ट्रेक” कहा जाता है—और इसके ठोस कारण हैं।
- सर्दियों में खुला रहने वाला शिखर ट्रेक
जब दिसंबर–फरवरी में हिमालय के ज़्यादातर ट्रेक बंद हो जाते हैं, केदारकांठा तब भी ट्रेकर्स का स्वागत करता है। - नौसिखियों के लिए परफेक्ट समिट अनुभव
12,500 फीट की ऊँचाई तक पहुँचने का रोमांच, तकनीकी पर्वतारोहण के बिना। - हर मौसम में अलग रंग
बर्फ़ीली सर्दी, खिले रोडोडेंड्रोन वाला बसंत, हरे-भरे ग्रीष्म और सुनहरा पतझड़—चारों मौसमों में यह ट्रेक अलग कहानी सुनाता है। - 360-डिग्री हिमालयन पैनोरमा
शिखर से स्वर्गारोहिणी, बंदरपूंछ, कालानाग और गंगोत्री रेंज की भव्य झलक।
और पढ़े – केदारकंठा ट्रेक बनाम ब्रह्मताल ट्रेक
Kedarkantha Trek का भूगोल और प्राकृतिक सौंदर्य
केदारकांठा एक स्वतंत्र शिखर (Free-Standing Peak) है। यही वजह है कि ट्रेक के शुरुआती दिनों से ही आपको शिखर दिखाई देता रहता है—जो हर कदम पर मोटिवेशन देता है।
जंगल जो इस ट्रेक को खास बनाते हैं
- चीड़, देवदार, बलूत और मेपल के घने जंगल
- सर्दियों में बर्फ़ से ढकी शाखाएँ और काई—एक परीकथा जैसा दृश्य
- बसंत में पक्षियों की चहचहाहट और रोडोडेंड्रोन के लाल फूल
खुले बुग्याल और कैंपसाइट
- खुजाई, भोजा ढाड़ी, पुखरोला जैसे विस्तृत खुले मैदान
- सूर्यास्त और सूर्योदय के लिए फेमस स्पॉट
- तंबू से बाहर निकलते ही हिमालय की दीवार-सी चोटियाँ

Kedarkantha Trek 2026: हर मौसम का अलग अनुभव
❄️ सर्दी (दिसंबर–फरवरी)
- तापमान: दिन 8–10°C | रात 0 से –10°C
- अनुभव: घुटनों तक बर्फ़, स्नो-कैंपिंग, हार्ड-पैक्ड स्नो पर समिट क्लाइम्ब
- क्यों जाएँ: भारत का #1 विंटर ट्रेक, खासकर पहली बर्फ़ीली समिट के लिए
नोट: 15 दिसंबर से जनवरी के मध्य तक भीड़ अधिक रहती है—अग्रिम बुकिंग ज़रूरी।
🌸 बसंत (मार्च–अप्रैल)
- अनुभव: पिघलती बर्फ़, खिले रोडोडेंड्रोन, साफ़ आसमान
- क्यों जाएँ: फोटोग्राफी और नेचर-लवर्स के लिए बेस्ट
☀️ गर्मी (मई–जून)
- अनुभव: हरे-भरे जंगल, रंगीन जंगली फूल
- क्यों जाएँ: आरामदायक तापमान, कम भीड़
🍁 पतझड़ (मध्य सितंबर–नवंबर)
- अनुभव: सुनहरे-लाल जंगल, क्रिस्टल-क्लियर व्यू
- क्यों जाएँ: सबसे साफ़ समिट व्यू और शांति
Kedarkantha Trek 2026 का पूरा यात्रा कार्यक्रम (दो प्रमुख मार्ग)

📍 कोटगाँव मार्ग (क्लासिक और लोकप्रिय)
दिन 1: देहरादून → कोटगाँव
- दूरी: 195 किमी | समय: 10–11 घंटे
दिन 2: कोटगाँव → खुजाई
- दूरी: 5.3 किमी | समय: ~5 घंटे
- ऊँचाई: 6,400 → 9,460 फीट
दिन 3: खुजाई → भोजा ढाड़ी
- दूरी: 3 किमी | समय: ~3.5 घंटे
दिन 4: भोजा ढाड़ी → केदारकांठा शिखर → खुजाई
- दूरी: 9 किमी | समय: 7–8 घंटे
- समिट ऊँचाई: 12,500 फीट
दिन 5: खुजाई → कोटगाँव
- दूरी: 5.3 किमी | समय: 4–5 घंटे
दिन 6: कोटगाँव → देहरादून
📍 गाईचावां गाँव मार्ग (कम भीड़, ज़्यादा शांत)
दिन 1: देहरादून → गाईचावां
दिन 2: गाईचावां → जुलोटा
दिन 3: जुलोटा → पुखरोला
दिन 4: पुखरोला → शिखर → अखोटी थाच
दिन 5: अखोटी थाच → गाईचावां
दिन 6: गाईचावां → देहरादून
Kedarkantha Trek कितना कठिन है? (Difficulty Analysis)
⛰️ भूभाग
- अंतिम दिन 5 घंटे की लगातार चढ़ाई
- सर्दियों में हार्ड स्नो और खड़ी ढलान
🌦️ मौसम
- अचानक बर्फ़बारी या बारिश ट्रेक को चुनौतीपूर्ण बना सकती है
🧗 ऊँचाई
- 6,400 → 12,500 फीट (लगभग 6,100 फीट गेन)
- AMS का हल्का जोखिम—सही एक्लिमेटाइज़ेशन ज़रूरी
👉 निष्कर्ष: यह ट्रेक Moderate श्रेणी में आता है और सही तैयारी के साथ नौसिखियों के लिए भी सुरक्षित है।
Kedarkantha Trek 2026 के लिए तैयारी कैसे करें?
फिटनेस
- 5 किमी जॉगिंग (30–35 मिनट)
- स्क्वैट्स, लंजेस, प्लैंक्स
- ट्रेक से 4–6 हफ्ते पहले ट्रेनिंग शुरू करें
ज़रूरी गियर
- 5-लेयर विंटर क्लोदिंग
- वाटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज़
- ट्रेकिंग पोल, माइक्रोस्पाइक्स (सर्दियों में)
सुरक्षा, आपातकाल और नज़दीकी अस्पताल
- आपात निकास: कोटगाँव, सांकरी, गाईचावां
- नज़दीकी मेडिकल सहायता: मोरी, पुरोला
- गंभीर स्थिति: मसूरी / देहरादून (8–9 घंटे)
Kedarkantha Trek 2026: क्यों इसे अपनी बकेट-लिस्ट में डालें?
- यह सिर्फ़ एक ट्रेक नहीं, पहली समिट की कहानी है
- यहाँ रोमांच है, पर डर नहीं
- प्रकृति है, पर असहजता नहीं
- और सबसे बढ़कर—यह ट्रेक आपको आत्मविश्वास देता है कि आप हिमालय के लिए बने हैं
अगर 2026 में हिमालय आपको बुला रहा है, तो Kedarkantha Trek उसका सबसे खूबसूरत जवाब है।
FAQs
❓ Kedarkantha Trek 2026 कहाँ है?
उत्तर: केदारकांठा ट्रेक उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में स्थित है। यह गोविंद वन्यजीव विहार क्षेत्र के अंतर्गत आता है और सांकरी, कोटगाँव या गाईचावां गाँव से शुरू होता है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर: केदारकांठा शिखर की अधिकतम ऊँचाई लगभग 12,500 फीट है।
❓ क्या Kedarkantha Trek 2026 नौसिखियों के लिए सही है?
उत्तर: हाँ। Kedarkantha Trek 2026 को भारत का सबसे लोकप्रिय Beginner-Friendly Winter Trek माना जाता है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 कितने दिनों का होता है?
उत्तर: यह ट्रेक आमतौर पर 6 दिनों का होता है, जिसमें देहरादून से आने-जाने का समय शामिल है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 का बेस्ट टाइम क्या है?
उत्तर:
- दिसंबर–फरवरी: बर्फ़ और विंटर ट्रेकिंग
- मार्च–अप्रैल: रोडोडेंड्रोन और साफ़ मौसम
- मई–जून: हरियाली
- सितंबर–नवंबर: क्लियर माउंटेन व्यू
(जुलाई–अगस्त में ट्रेक बंद रहता है)
❓ Kedarkantha Trek 2026 कितना कठिन है?
उत्तर: यह ट्रेक Moderate Difficulty श्रेणी में आता है। अंतिम दिन 7–8 घंटे की खड़ी चढ़ाई सबसे चुनौतीपूर्ण होती है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 में बर्फ़ कब मिलती है?
उत्तर: आमतौर पर दिसंबर के अंत से मार्च तक पूरे ट्रेक पर बर्फ़ देखने को मिलती है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 के लिए फिटनेस कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: ट्रेकर्स को 5 किमी जॉगिंग, बेसिक कार्डियो और पैरों की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पहले से करनी चाहिए।
❓ Kedarkantha Trek 2026 में AMS का खतरा है क्या?
उत्तर: 12,000 फीट से ऊपर जाने पर हल्का AMS हो सकता है, लेकिन सही एक्लिमेटाइज़ेशन से जोखिम कम रहता है।
❓ Kedarkantha Trek 2026 क्यों इतना लोकप्रिय है?
उत्तर:
- भारत का सबसे प्रसिद्ध विंटर ट्रेक
- शुरुआती ट्रेकर्स के लिए पहली समिट
- घने जंगल, खुले बुग्याल और 360° हिमालयन व्यू
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Kedarkantha Trek vs Brahmatal Trek : आपके लिए कौन सा विंटर ट्रेक सबसे बेहतर है?

Kedarkantha Trek vs Brahmatal Trek
उत्तराखंड की हसीन वादियों में जब सर्दियों की चादर बिछती है, तो हर एडवेंचर प्रेमी के मन में एक ही सवाल होता है— केदारकांठा (Kedarkantha) या ब्रह्मताल (Brahmatal)? दोनों ही ट्रेक अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं, लेकिन आपकी पसंद और अनुभव के हिसाब से कौन सा ट्रेक “परफेक्ट” है, यह जानना बहुत जरूरी है।
इस ब्लॉग में हम इन दोनों दिग्गज विंटर ट्रेक्स की गहराई से तुलना करेंगे ताकि आप 2026 की अपनी अगली हिमालयी यात्रा का सही फैसला ले सकें।
केदारकांठा ट्रेक (Kedarkantha Trek): विंटर ट्रेकिंग की रानी
केदारकांठा ट्रेक को भारत का सबसे लोकप्रिय विंटर ट्रेक माना जाता है। उत्तरकाशी जिले के गोविंद वन्यजीव अभयारण्य (Govind Wildlife Sanctuary) में स्थित यह ट्रेक अपनी ‘क्लासिक समिट’ (Summit) के लिए जाना जाता है।
मुख्य आकर्षण:
- 360 डिग्री हिमालयी दृश्य: समिट पर पहुँचते ही आपको स्वर्गारोहिणी, बंदरपूंछ और ब्लैक पीक जैसी चोटियों का अद्भुत नज़ारा मिलता है।
- जुडा का तालाब (Juda Ka Talab): चीड़ के घने जंगलों के बीच स्थित यह जमी हुई झील किसी सपने जैसी लगती है।
- शुरुआती लोगों के लिए आसान: अगर आप पहली बार ट्रेकिंग कर रहे हैं, तो यह ट्रेक आपके लिए सबसे सुरक्षित और बेहतरीन अनुभव होगा।

ब्रह्मताल ट्रेक (Brahmatal Trek): झीलों और रिज का जादुई सफर
चमोली जिले में स्थित ब्रह्मताल ट्रेक उन लोगों के लिए है जो भीड़भाड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता की तलाश में हैं। यह ट्रेक अपनी बर्फीली झीलों और लंबी ‘रिज वॉक’ (Ridge Walk) के लिए मशहूर है।
मुख्य आकर्षण:
- जमी हुई झीलें: यहाँ आपको बेकल ताल और ब्रह्मताल जैसी दो खूबसूरत झीलें देखने को मिलती हैं।
- त्रिशूल और नंदा घुंटी के नज़ारे: इस ट्रेक के दौरान माउंट त्रिशूल और नंदा घुंटी चोटियाँ इतनी करीब महसूस होती हैं कि लगता है आप उन्हें छू लेंगे।
- एकांत और शांति: केदारकांठा के मुकाबले यहाँ भीड़ कम होती है, जो इसे फोटोग्राफर्स और शांति पसंद लोगों की पहली पसंद बनाता है।

Kedarkantha Trek vs Brahmatal Trek : तुलनात्मक तालिका (Comparison Table)
| विशेषता | केदारकांठा ट्रेक (Kedarkantha) | ब्रह्मताल ट्रेक (Brahmatal) |
| अधिकतम ऊंचाई | 12,500 फीट | 12,250 फीट |
| कठिनाई स्तर | आसान से मध्यम (Beginner Friendly) | मध्यम (Moderate) |
| कुल दूरी | लगभग 20 किमी | लगभग 24 किमी |
| समय अवधि | 5 दिन | 6 दिन |
| बेस कैंप | सांकरी (Sankri) | लोहाजंग (Lohajung) |
| सबसे अच्छा समय | दिसंबर से अप्रैल | दिसंबर से मार्च |
| मुख्य अनुभव | समिट क्लाइम्ब और सनराइज | जमी हुई झीलें और रिज वॉक |
गहराई से तुलना: आपको क्या चुनना चाहिए?
1. ट्रेक की कठिनाई और शारीरिक क्षमता
केदारकांठा का रास्ता काफी सुगम है और इसमें चढ़ाव धीरे-धीरे आता है। केवल समिट वाले दिन आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, ब्रह्मताल में आपको ज्यादा दूरी तय करनी होती है और बर्फीले रास्तों पर चलने के लिए थोड़ी ज्यादा स्टैमिना (Stamina) की जरूरत होती है।
2. दृश्यों का अंतर (Landscapes)
केदारकांठा घने देवदार और ओक के जंगलों से घिरा हुआ है। यहाँ की कैंपिंग साइट्स बहुत जादुई होती हैं। दूसरी ओर, ब्रह्मताल में आप जंगलों से बाहर निकलकर ऊंचे ‘रिज’ (पहाड़ की धार) पर चलते हैं, जहाँ से विशाल हिमालयी पर्वतमालाएं आपके साथ-साथ चलती हैं।
3. भीड़ और माहौल
यदि आप नए लोगों से मिलना और कैंपफायर के साथ रौनक पसंद करते हैं, तो केदारकांठा बेस्ट है। लेकिन अगर आप अपनी तन्हाई और पहाड़ों की खामोशी को महसूस करना चाहते हैं, तो ब्रह्मताल की ओर रुख करें।
जरूरी तैयारी और टिप्स (2026 अपडेट)
- रजिस्ट्रेशन: उत्तराखंड सरकार के नियमों के अनुसार अपना ऑनलाइन ई-पास और रजिस्ट्रेशन पहले ही करा लें।
- गियर: विंटर ट्रेक के लिए वाटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज, कम से कम 3 लेयर के गर्म कपड़े और माइक्रो-स्पाइक्स (Micro-spikes) साथ रखें।
- फिटनेस: ट्रेक पर जाने से कम से कम 1 महीना पहले कार्डियो एक्सरसाइज शुरू कर दें।
निष्कर्ष (Final Verdict)
- केदारकांठा चुनें यदि: आप पहली बार पहाड़ों पर जा रहे हैं और कम समय में एक महान समिट का अनुभव करना चाहते हैं।
- ब्रह्मताल चुनें यदि: आप पहले एक-दो ट्रेक कर चुके हैं और आपको जमी हुई झीलों और शांत रास्तों से प्यार है।
उत्तराखंड के ये दोनों ही ट्रेक आपको जीवनभर की यादें देंगे। तो आप इस साल कहाँ जा रहे हैं? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
आपके पाठकों के मन में केदारकांठा और ब्रह्मताल ट्रेक को लेकर कई सवाल हो सकते हैं। लेख की Google रैंकिंग सुधारने के लिए ये FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) सेक्शन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह Google के “People Also Ask” सेक्शन में आने में मदद करता है।
यहाँ आपके आर्टिकल के लिए सबसे महत्वपूर्ण FAQ दिए गए हैं:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. केदारकांठा और ब्रह्मताल में से कौन सा ट्रेक शुरुआती (Beginners) के लिए बेहतर है?
उत्तर: केदारकांठा ट्रेक शुरुआती लोगों के लिए थोड़ा बेहतर माना जाता है। इसका रास्ता अच्छी तरह से चिह्नित है और चढ़ाई ब्रह्मताल की तुलना में थोड़ी कम थकाऊ है। हालांकि, अगर आपकी फिटनेस अच्छी है, तो आप ब्रह्मताल से भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं।
Q2. क्या इन ट्रेक्स पर जाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत होती है?
उत्तर: हाँ, उत्तराखंड में उच्च हिमालयी ट्रेक्स के लिए वन विभाग (Forest Department) द्वारा अधिकृत डॉक्टर से हस्ताक्षरित मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है। इसके बिना आपको बेस कैंप से आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
Q3. क्या सर्दियों में इन झीलों (Juda Ka Talab या Brahmatal) का पानी पीने लायक होता है?
उत्तर: सर्दियों में ये झीलें पूरी तरह जम जाती हैं। ट्रेक के दौरान गाइड बर्फ पिघलाकर पानी तैयार करते हैं या झरनों के बहते पानी का उपयोग करते हैं। हमेशा क्लोरीन टैबलेट या फिल्टर बोतल साथ रखने की सलाह दी जाती है।
Q4. केदारकांठा या ब्रह्मताल ट्रेक के लिए सबसे अच्छा महीना कौन सा है?
उत्तर: यदि आप भारी बर्फबारी देखना चाहते हैं, तो दिसंबर के अंतिम सप्ताह से फरवरी के मध्य तक का समय सबसे अच्छा है। यदि आप खिले हुए बुरांश (Rhododendron) के फूल देखना चाहते हैं, तो मार्च का महीना उत्तम है।
Q5. क्या इन ट्रेक्स पर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध है?
उत्तर: सांकरी (केदारकांठा बेस) और लोहाजंग (ब्रह्मताल बेस) में BSNL और Jio का नेटवर्क सीमित रूप से मिलता है। लेकिन जैसे ही आप ट्रेक पर ऊपर चढ़ते हैं, नेटवर्क पूरी तरह चला जाता है। अपने परिवार को पहले ही सूचित कर दें कि आप कुछ दिनों के लिए “ऑफ-ग्रिड” रहेंगे।
Q6. क्या मैं बिना गाइड के केदारकांठा या ब्रह्मताल ट्रेक कर सकता हूँ?
उत्तर: सुरक्षा कारणों और स्थानीय नियमों के अनुसार, उत्तराखंड में बिना स्थानीय गाइड के ट्रेकिंग करना अब प्रतिबंधित और असुरक्षित है। स्थानीय गाइड न केवल रास्ता जानते हैं, बल्कि वे मौसम और आपातकालीन स्थिति में आपकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।
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Border 2 में किस किरदार मे नज़र आए दिलजीत दोसांझ जाने उस परमवीर चक्र विजेता की विजय गाथा…

Nirmal Jit Singh Sekhon : परमवीर चक्र विजेता भारतीय वायु सेना का एक मात्र अधिकारी
Nirmal Jit Singh Sekhon: 23 जनवरी 2026 को रिलीज हुई फिल्म Border 2 ने 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े कई वीरों की कहानियों को दोबारा सामने रखा। इन्हीं में एक नाम था Nirmal Jit Singh Sekhon, जिनका किरदार फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने निभाया। ये भूमिका सिर्फ एक सैनिक की नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान की कहानी को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु
Nirmal Jit Singh Sekhon: वायुसेना के इतिहास का विशेष नाम
Nirmal Jit Singh Sekhon भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर तैनात थे। उन्हें अनुशासित, निडर और तेज निर्णय लेने वाले पायलट के रूप में जाना जाता था। देश के लिए उनका योगदान इतना असाधारण रहा कि वे भारतीय वायुसेना के इतिहास में परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले एकमात्र अधिकारी बने।
1971 का युद्ध: जब अकेले आसमान में डट गए सेखों
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान दिसंबर का महीना चल रहा था। 14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर एयरबेस पर अचानक हालात बदल गए। पाकिस्तानी वायुसेना ने हवाई हमले की कोशिश की, जबकि उस समय भारतीय एयरबेस पर सुरक्षा संसाधन बेहद सीमित थे।
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इसी नाजुक स्थिति में Flying Officer Nirmal Jit Singh Sekhon ने बिना किसी हिचक के अपने Gnat फाइटर जेट को उड़ाने का फैसला लिया। ये फैसला आसान नहीं था। सामने कई दुश्मन विमान थे और समर्थन लगभग ना के बराबर था।
Nirmal Jit Singh ने आसमान में अकेले ही मोर्चा संभाला
सेखों ने पीछे हटने के बजाय आसमान में अकेले ही मोर्चा संभाला। उन्होंने दुश्मन विमानों को श्रीनगर एयरबेस के करीब आने से रोकने की कोशिश की और अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। ये मुकाबला किसी रणनीतिक जीत से ज्यादा कर्तव्य और साहस का प्रतीक बन गया।
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इस संघर्ष में वे वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनका यह बलिदान भारतीय सैन्य इतिहास में अमर हो गया। बाद में भारत सरकार ने उनके अद्वितीय साहस को सम्मान देते हुए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया।

Border 2 में दिलजीत दोसांझ की भूमिका
फिल्म Border 2 में दिलजीत दोसांझ ने Nirmal Jit Singh Sekhon का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने गंभीर और भावनात्मक रूप में देखा। यह भूमिका उनके अब तक के करियर की सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में गिनी गई।
फिल्म में दिलजीत का किरदार युद्ध के शोर से ज्यादा उस पल के फैसले पर केंद्रित रहा, जब एक पायलट ने जान की परवाह किए बिना अपने एयरबेस और देश की रक्षा को प्राथमिकता दी।
क्यों खास रहा ये किरदार
- ये किरदार किसी काल्पनिक कहानी पर नहीं, बल्कि वास्तविक इतिहास पर आधारित रहा
- 1971 युद्ध की हवाई लड़ाई का दुर्लभ चित्रण दिखाया गया
- भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान मिला
- नई पीढ़ी को एक भूले-बिसरे नायक से परिचय कराया गया
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फिल्म और दर्शकों की प्रतिक्रिया
Border 2 के रिलीज के बाद इस किरदार को लेकर खास चर्चा हुई। दर्शकों और समीक्षकों ने माना कि Nirmal Jit Singh Sekhon की कहानी फिल्म का सबसे भावनात्मक और प्रभावशाली हिस्सा रही। दिलजीत दोसांझ के अभिनय को संयमित और सम्मानजनक बताया गया।

निष्कर्ष
Nirmal Jit Singh Sekhon सिर्फ एक युद्ध नायक नहीं थे, बल्कि वह उदाहरण थे कि संकट के समय एक निर्णय इतिहास बन सकता है। Border 2 के जरिए उनकी कहानी एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श में आई और यह याद दिलाया कि 1971 के युद्ध में सिर्फ ज़मीन पर नहीं, बल्कि आसमान में भी भारत के वीरों ने इतिहास रचा था।
Who was Nirmal Jit Singh Sekhon?
Nirmal Jit Singh Sekhon भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग ऑफिसर थे, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान श्रीनगर एयरबेस की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। वे भारतीय वायुसेना के एकमात्र अधिकारी हैं जिन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
Why is Nirmal Jit Singh Sekhon famous?
Nirmal Jit Singh Sekhon इसलिए प्रसिद्ध हैं क्योंकि उन्होंने 14 दिसंबर 1971 को दुश्मन वायुसेना के कई विमानों का सामना अकेले किया और अंतिम सांस तक लड़ते हुए देश की रक्षा की।
Did Nirmal Jit Singh Sekhon receive the Param Vir Chakra?
Yes. Nirmal Jit Singh Sekhon को उनके अद्वितीय साहस और बलिदान के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
Is Border 2 based on real war stories?
Yes. Border 2 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े वास्तविक सैन्य नायकों और उनके बलिदान पर आधारित फिल्म है।
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