Uttarakhand
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं और शिक्षक-कर्मचारियों को मास्क पहनकर आना हुआ अनिवार्य।
देहरादून – उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं और शिक्षक-कर्मचारियों को मास्क पहनकर आना अनिवार्य होगा। इस आशय का आदेश मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. मुकुल कुमार सती ने देहरादून जिले के सभी सरकारी, निजी और अशासकीय स्कूलों के प्रधानाचार्यों को जारी किया है।

साथ ही महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के साथ-साथ देहरादून के जिलाधिकारी, सीएमओ और सभी खंड शिक्षा अधिकारियों व मंडलीय अपर निदेशक को भी इस संबंध में कार्यवाही के लिए पत्र भेजा है।
स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भेजे गए पत्र में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि कोरोना संक्रमण से बचाव और रोकथाम के लिए स्कूलों में थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाए। साथ ही स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी एसओपी का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाए। पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पत्र का हवाला दिया है जिसमें सर्दी बढ़ने के साथ देश में कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका जताई गई है।
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उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, देर रात हुए IAS और PCS अधिकारियों के बंपर तबादले, देखें लिस्ट

Uttarakhand IAS Transfers : उत्तराखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित प्रशासनिक फेरबदल को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आईएएस अधिकारियों के व्यापक स्तर पर तबादले किए हैं। इसके साथ ही पीसीएस और सचिवालय सेवा के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
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देर रात हुए IAS और PCS अधिकारियों के बंपर तबादले
देर रात उत्तराखंड में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। 19 आईएएस और 9 पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस नई सूची में कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं।
गढ़वाल कमिश्नर के पद से लेकर देहरादून के जिलाधिकारी की जिम्मेदारियों में परिवर्तन किया गया है। वहीं बागेश्वर के जिलाधिकारी के पद पर भी बदलाव किया गया है।
19 आईएएस और 9 पीसीएस अधिकारियों के हुए तबादले



Uttarakhand
देहरादून जिला प्रशासन की बड़ी पहल: दिव्यांगों, वृद्धों और बेसहारा महिलाओं के लिए शुरू हुई निःशुल्क ईवी वाहन सेवा..

डीडीआरसी और नारी निकेतन को मिली निःशुल्क ईवी वाहन सेवा, डीएम ने दिखाई हरी झंडी
देहरादून। जनपद देहरादून में दिव्यांगजनों, वृद्धजनों तथा बेसहारा महिलाओं और बच्चों की सुविधा एवं सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की है। जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल ने शनिवार को जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (DDRC) एवं केदारपुरम स्थित राजकीय नारी निकेतन के लिए अलग-अलग निःशुल्क ईवी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर इस सेवा का विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि दिव्यांग एवं वृद्धजनों का जीवन सरल बनाना तथा उन्हें आवश्यक सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने याद दिलाया कि दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर समस्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सितंबर 2025 में गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में राज्य का पहला जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) स्थापित किया गया था। यहाँ फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, दिव्यांग प्रमाण पत्र, कृत्रिम अंग वितरण सहित अनेक सेवाएं एकीकृत रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

परिवहन की दिक्कतों से मिलेगी मुक्ति
जिलाधिकारी ने बताया कि डीडीआरसी से जुड़े दिव्यांग एवं वृद्धजनों को उपचार एवं अन्य कार्यों के लिए कई बार राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांग संस्थान (NIEPVD/NIBH), समाज कल्याण विभाग तथा विभिन्न अस्पतालों में आना-जाना पड़ता है। सार्वजनिक परिवहन में इन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, जिसके स्थायी समाधान के लिए अब यह समर्पित निःशुल्क ईवी वाहन सेवा उपलब्ध कराई गई है।
नारी निकेतन और बाल गृह के वासियों को बड़ा सहारा
वहीं, केदारपुरम स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन में वर्तमान में 180 से अधिक महिलाएं, बालिकाएं एवं बच्चे रह रहे हैं। ये सभी बेसहारा, परित्यक्त, शोषित एवं विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले लोग हैं। इन्हें समय-समय पर मेडिकल चेकअप और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। निःशुल्क ईवी वाहन सेवा शुरू होने से अब संस्थान में रहने वाली महिलाओं एवं बच्चों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
“यह पहल केवल एक सुविधा मात्र नहीं है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक कदम है। ईवी वाहनों से जहाँ एक ओर प्रदूषण पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी ओर समाज के सबसे जरूरतमंद वर्ग को एक सुरक्षित आवागमन का अहसास होगा।” — सविन बंसल, जिलाधिकारी (देहरादून)
कार्यक्रम में ये अधिकारी रहे मौजूद
वाहन सेवा के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार सहित जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
Ramnagar
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट , हरिद्वार में हुई बाघों की मौत के बाद बढ़ी चौकसी…

हरिद्वार में बाघों की मौत के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट
रामनगर : हरिद्वार वन प्रभाग में सामने आए कथित टाइगर पोचिंग (बाघ के अवैध शिकार) मामले के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। कॉर्बेट प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ाते हुए विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। अगले 15 दिनों तक रिजर्व क्षेत्र में गश्त, निगरानी और इंटेलिजेंस गतिविधियों को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और विशेष अभियान
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि हरिद्वार वन प्रभाग में टाइगर पोचिंग से जुड़े गंभीर मामले के बाद पूरे कॉर्बेट क्षेत्र में अलर्ट घोषित किया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग और ब्लैक मार्च: संवेदनशील सीमाओं और इंटरस्टेट बॉर्डर क्षेत्रों, खासतौर पर उत्तर प्रदेश सीमा से लगे इलाकों में वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी रखेंगी।
- रात्री गश्त और SOG सक्रिय: रात्रिकालीन गश्त को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को एक्टिव मोड पर रखा गया है।
- छुट्टियों पर रोक: सभी रेंज अधिकारियों, एएफओ (AFO) तथा फील्ड स्टाफ को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं और फिलहाल किसी भी अधिकारी व कर्मचारी की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है।
- लोकल इंटेलिजेंस नेटवर्क: आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी के लिए लोकल इंटेलिजेंस नेटवर्क को सक्रिय कर दिया गया है। उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने साफ कहा है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, सूचना या मुखबिर से मिले इनपुट पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
क्या था हरिद्वार का मामला?
बीते सोमवार को हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट (कंपार्टमेंट संख्या नौ) में करीब दो साल की उम्र के दो बाघों के शव बरामद होने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया था।
- घटना का कारण: पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने बताया कि एक बाघिन ने उनकी भैंस का शिकार किया था। इसके बाद कथित तौर पर उसी भैंस के मांस पर खेतों में इस्तेमाल होने वाला जहरीला पदार्थ डाल दिया गया, जिसे खाने से दोनों बाघों की मौत हो गई।
- अंगों की तस्करी की कोशिश: आरोप है कि बाघों की मौत के बाद उनके पैर काटकर अंगों को बेचने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन उससे पहले ही वन विभाग ने कार्रवाई कर दी।
- कार्रवाई: इस मामले में जंगल में रहने वाले कुछ वन गुज्जरों पर जहरीला पदार्थ देकर बाघों को मारने का आरोप लगा है। जांच के दौरान चार आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि एक आरोपी अभी फरार है।
कॉर्बेट प्रशासन का कहना है कि वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए हर स्तर पर सख्ती बरती जाएगी और किसी भी अवैध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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