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Year Ender : साल 2025 ने उत्तराखंड को दिए गहरे जख्म, सड़क हादसों में 1,128 से ज्यादा लोगों की मौत, कौन जिम्मेदार ?

Year Ender 2025 Uttarakhand : साल दर साल उत्तराखंड में सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ता ही चला जा रहा है। हल साल सड़क हादसों में कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। साल 2025 उत्तराखंड के लिए सड़क हादसों से भरा साल रहा। पिछले साल के मुकाबले सड़क हादसों में इस साल 145 से ज्यादा मौतें हुई ।
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साल 2025 ने उत्तराखंड को दिए गहरे जख्म
साल 2025 Uttarakhand के लिए सड़क सुरक्षा के मामले में बेहद भयावह और चिंताजनक साबित हुआ है। साल भर में राज्य में सड़क हादसों (Road Accidents In Uttarakhand) में जान-माल की भारी क्षति, गंभीर हादसे और दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या ने लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। सड़क हादसों ने 10 या पचास नहीं बल्कि एक हजार से भी ज्यादा लोगों को कभी ना भरने वाला जख्म दे दिया।
सड़क हादसों में 1,128 से ज्यादा लोगों की मौत
साल 2025 में पहाड़ों में सड़क हादसों का ग्राफ मैदानी इलाकों से भी ऊपर निकल गया है। 2025 में Uttarakhand में बीते 11 महीनों के अंदर 1669 सड़क हादसे हो चुके हैं। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 1,594 था। यानि इस साल पांच प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बात करें पिछले साल सड़क हादसे में मारे गए लोगों की तो ये संख्या 983 थी जबकि इस साल ये संख्या बढ़कर 1128 पर पहुंच गई है।

2025 में पहली बार पलटा हादसों का ग्राफ़
पहले उत्तराखंड में सबसे ज़्यादा हादसे मैदानी इलाकों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में होते थे।
लेकिन 2025 में पहली बार ग्राफ़ पूरी तरह पलट गया है। लेकिन अब पहाड़ों पर भी ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले पहाड़ों पर हुए सड़क हादसों (Road Accidents In Uttarakhand) में बढ़ोतरी हुई है।
- बागेश्वर में हादसे 233.33% ….दो सौ तैंतीस प्रतिशत बढ़ गए।
- नैनीताल: +175% एक सौ पचहत्तर प्रतिशत
- रुद्रप्रयाग: +125%
- चमोली: +120%
- पिथौरागढ़: +31% इकतीस
- चंपावत: +55%
- देहरादून के अंदर हादसे 6.40 प्रतिशत घटे।

2025 में हुए ये बड़े हादसे
जनवरी – पौड़ी गढ़वाल – मैक्स खाई में – 6 मौत
मार्च – मसूरी रोड – लग्जरी कार से कुचलकर 6 मजदूरों की मौत
अप्रैल – टिहरी – कार नदी में – एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत
मई – चमोली – स्कॉर्पियो खाई में – 5 मौतें
जून – रुद्रप्रयाग – बस हादसा – 15 मौतें
नवंबर – कुंजापुरी मंदिर बस हादसा – 5 मौतें
दिसंबर – चंपावत बारात की गाड़ी – 5 मौतें
दिसंबर – ऋषिकेश-हरिद्वार XUV500 – 4 की मौत
दिसंबर – कैंची धाम स्कॉर्पियो – 3 पर्यटकों की मौत – अल्मोड़ा भिकियासैंण – 7 की मौत

बढ़ते हादसों का जिम्मेदार कौन ?
Uttarakhand में पहाड़ों पर बढ़ते सड़क हादसों के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इसमें सबसे बड़ी वजह मौसम की मार है। इसके साथ ही जर्जर और संकरी सड़कें, तेज़ रफ्तार वाहन, थके हुए ड्राइवर और लगातार बढ़ता पर्यटन दबाव हादसों की वजह बन रहा है। इस साल के आंकड़ें चौंकाने वाले जिस से ये स्पष्ट होता है लगातार ये ग्राफ बढ़ रहा है। जिस से ये सवाल उठता है कि आखिर कब तक सड़क हादसे में लोग जान गंवाते रहेंगे और इन हादसों पर लगाम कब लगेगा। इसस से भी बड़ा सवाल ये है कि इन हादसों का जिम्मेदार कौन है ?
FAQs: Road Accidents In Uttarakhand 2025
Q1. साल 2025 में उत्तराखंड में कितने लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई?
साल 2025 में उत्तराखंड में सड़क हादसों में 1,128 से ज्यादा लोगों की जान गई, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है।
Q2. क्या 2025 में पहाड़ी जिलों में सड़क हादसे ज्यादा हुए हैं?
हां, 2025 में पहली बार पहाड़ी जिलों में सड़क हादसों का ग्राफ मैदानी इलाकों से ऊपर चला गया है।
Q3. किस जिले में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई?
बागेश्वर जिले में सड़क हादसों में 233.33% की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Q4. उत्तराखंड में सड़क हादसों की मुख्य वजहें क्या हैं?
हादसों की प्रमुख वजहों में
- खराब और संकरी सड़कें
- मौसम की मार
- तेज रफ्तार
- थके हुए ड्राइवर
- बढ़ता पर्यटन दबाव
शामिल हैं।
Q5. क्या देहरादून में भी सड़क हादसे बढ़े हैं?
नहीं, 2025 में देहरादून जिले में सड़क हादसों में 6.40% की कमी दर्ज की गई है।
Q6. 2025 में उत्तराखंड के सबसे बड़े सड़क हादसे कौन से रहे?
2025 में रुद्रप्रयाग बस हादसा (15 मौतें), मसूरी रोड हादसा, अल्मोड़ा भिकियासैंण बस दुर्घटना और कई खाई में गिरने की घटनाएं सबसे बड़े हादसों में शामिल रहीं।
Q7. क्या उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं?
हालांकि सरकार द्वारा समय-समय पर कदम उठाए गए हैं, लेकिन 2025 के आंकड़े बताते हैं कि सड़क सुरक्षा पर अभी और सख्त व प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का आखिरी दिन आज, कल से अस्तित्व में आएगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

Uttarakhand News : उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लागू कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी मदरसों को अब नई व्यवस्था के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी।
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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का आखिरी दिन आज
मंगलवार, 30 जून यानी कि आज उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अंतिम कार्य दिवस है। इसके बाद 1 जुलाई से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण आधिकारिक रूप से कार्यभार संभालेगा। प्रदेश के सभी 452 मदरसों को नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कल से अस्तित्व में आएगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
नई नियमावली के अनुसार किसी भी मदरसे को मिलने वाली मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध रहेगी। इसके अलावा संस्थानों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से विधिवत संबद्धता भी प्राप्त करनी होगी। प्राधिकरण समय-समय पर मदरसों का भौतिक निरीक्षण करेगा और निर्धारित मानकों के पालन की समीक्षा करेगा।

सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान भी प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। संस्थानों को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा तथा आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।
1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था होगी लागू
मान्यता प्रक्रिया के दौरान संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि संबंधी दस्तावेज, वित्तीय स्थिति, शिक्षकों की योग्यता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। अगर कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी मान्यता निरस्त की जा सकती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 14 मई 2026 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान संबंधी मान्यता नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई थी। इसी निर्णय के आधार पर 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
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अल्मोड़ा में भीषण सड़क हादसा, चार लोगों की मौके पर ही मौत, दो की हालत गंभीर

Almora Accident : उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में सोमवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां कार खाई में गिरने के कारण चार लोगों की मौत हो गई। जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि ये दुर्घटना लमगड़ा विकासखंड के चायखान-बेगानिया मोटर मार्ग पर बलिया क्षेत्र के पास हुई है।
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अल्मोड़ा में खाई में गिरी कार, 4 की मौत
मिली जानकारी के मुताबिक मारुति ऑल्टो कार चायखान-बेगानिया मार्ग से गुजर रही थी। बलिया के समीप पहुंचते ही चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे कार सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के समय वाहन में चालक सहित कुल छह लोग सवार थे।
दुर्घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। साथ ही पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान चलाया।

दर्दनाक हादसे में दो गंभीर रूप से घायल
इस हादसे में चार लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लमगड़ा ले जाया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने दोनों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल अल्मोड़ा रेफर कर दिया।
पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं दुर्घटना के कारणों की जांच भी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी मार्गों पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
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पौड़ी में गुलदार ने घास काटने गई महिला को बनाया निवाला, घसीटते हुए ले गया जंगल की ओर…

Pauri News : पौड़ी गढ़वाल जिले के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के नैनीडांडा विकासखंड स्थित बणासी तल्ली गांव में शनिवार सुबह गुलदार के हमले में एक महिला की जान चली गई। इस दर्दनाक घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय और शोक का माहौल है।
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पौड़ी में गुलदार ने महिला को बनाया निवाला
पौड़ी गढ़वाल में एक बार फिर गुलदार का आतंक देखने को मिला है। अपने पालतू मवेशियों के लिए घास लेने गई महिला को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया। मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह गांव की दो महिलाएं शांति देवी और सुशीला देवी रोजमर्रा की तरह जंगल में घास काटने गई थीं।
इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक सुशीला देवी पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक और तेज था कि महिला को बचाव का मौका नहीं मिला। गुलदार उन्हें घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया।
गुलदार ने घास काटने के दौरान किया हमला
हमले के समय साथ मौजूद शांति देवी ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जंगल में महिला की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद घटनास्थल से कुछ दूरी पर सुशीला देवी का शव बरामद हुआ। इस घटना से पूरे क्षेत्र में मातम छा गया।

वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही गुलदार की तलाश के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। घटना की सूचना क्षेत्रीय विधायक महंत दिलीप रावत को भी दे दी गई है।
हादसे के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के प्रति नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसके साथ ही लोगों ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने और जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की है।
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