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UNESCO heritage सूची में शामिल हुआ दिवाली का त्यौहार, अब तक केवल 20 त्यौहारों को मिला है स्थान

Diwali in UNESCO Heritage : खुशियों के त्यौहार दिवाली को यूनेस्को की सूची में शामिल कर लिया गया है। Diwali का पर्व अब आधिकारिक रूप से यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में शामिल हो गया है।
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UNESCO की हेरिटेज सूची में शामिल हुई दिवाली (Diwali in UNESCO Heritage)
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची यानी कि UNESCO Heritage List में दिवाली ने अपनी जगह बना ही ली है। साल 2025 की सूची के साथ ये घोषणा की गई है। जिसके बाद से पूरे देश में खुशी का माहौल है। आपको बता दें कि इस सूची में दुनिया की केवल 20 धरोहरों को जगह मिली है।

UNESCO Heritage List क्या है ?
UNESCO का मुख्य उद्देश्य दुनिया की अनमोल धरोहरों की पहचान कर उनकी सुरक्षा करना है। इसी के तहत World Heritage List बनाई गई है। जिसमें दो तरह की धरोहरें सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरें शामिल होती हैं। इसके साथ ही एक और श्रेणी इसके तहत आती है जो कि अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर है। इसके तहत त्योहार, परंपराएँ, नृत्य, संगीत, रिवाज़ आदि को संरक्षित किया जाता है।

क्या है यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर ?
अब आपको बताते हैं कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर क्या है जिसमें दिवाली को शामिल किया गया है। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर उन परंपराओं और रीति-रिवाज़ों को कहा जाता है जो किसी देश या समाज की संस्कृति का जीवंत हिस्सा होते हैं।
ये ऐसी धरोहरें हैं जिन्हें छुआ नहीं जा सकता, लेकिन लोग उन्हें अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में निभाते हैं। इसमें दुनियाभर के कई त्योहार, नृत्य, संगीत, लोकगीत, कहानियाँ आदि आते हैं। ये धरोहरें अपने समुदाय की पहचान होती हैं और इस वैश्वीकरण के दौर में भी अपनी पहचान बनाए हुए है।

यूनेस्को की सूची में शामिल भारत की धरोहरें
भारत की कई परंपराएँ जैसे रामलीला, गरबा, दुर्गा पूजा, योग, छाऊ नृत्य, कुंभ मेला, कालबेलिया नृत्य इस सूची में पहले से शामिल हैं। बता दें कि इसमें से प्रमुख नौरोज (2016), जंडियाला गुरु (पंजाब) के ठठेरों की धातु कला (2014), मणिपुर का संकीर्तन (2013), लद्दाख की बौद्ध मंत्रोच्चार परंपरा (2012), कुंभ मेला (2017), छऊ नृत्य, कालबेलिया नृत्य और मुदियेट्टू (2010), गढ़वाल का रम्माण पर्व (2009), तथा कुटियाट्टम संस्कृत थिएटर, रामलीला और वैदिक मंत्र (2008) और कोलकाता की दुर्गा पूजा (2021 शामिल हैं। इन धरोहरों को इस सूची में शामिल करने का मकसद है इन्हें पहचान देना, सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।
Diwali in UNESCO Heritage – FAQs
1. दिवाली को किस सूची में शामिल किया गया है?
दिवाली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है।
2. दिवाली को कब UNESCO Heritage में शामिल किया गया?
साल 2025 की सूची में दिवाली को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है।
3. यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) क्या होती है?
यह उन परंपराओं, त्योहारों, नृत्य, संगीत, अनुष्ठानों और रिवाज़ों की सूची है जो किसी देश की जीवित संस्कृति का हिस्सा होती हैं। इन धरोहरों को छू नहीं सकते, लेकिन लोग इन्हें जीवन में निभाते हैं।
4. यूनेस्को Heritage List क्या है?
यूनेस्को की Heritage List दुनिया की अनमोल और महत्वपूर्ण धरोहरों—चाहे वे प्राकृतिक, सांस्कृतिक या अमूर्त हों—की पहचान और सुरक्षा के लिए बनाई गई वैश्विक सूची है।
5. दिवाली को UNESCO की सूची में शामिल करने का क्या महत्व है?
इससे दिवाली को वैश्विक मान्यता, सांस्कृतिक महत्व और विश्व स्तर पर सुरक्षा मिली है। साथ ही भारत की सांस्कृतिक छवि और मजबूत हुई है।
6. क्या UNESCO Heritage List में बहुत सारी धरोहरें शामिल होती हैं?
नहीं। 2025 की सूची में दुनिया की केवल 20 अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों को ही जगह मिली है।
7. भारत की और कौन-कौन सी परंपराएँ पहले से UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल हैं?
भारत की कई परंपराएँ पहले से शामिल हैं, जैसे:
- रामलीला
- वैदिक मंत्र
- कुटियाट्टम
- गरबा
- दुर्गा पूजा
- योग
- छऊ नृत्य
- कालबेलिया नृत्य
- मुदियेट्टू
- कुंभ मेला
- संकीर्तन (मणिपुर)
- लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार
- नौरोज़
- ठठेरों की धातु कला
- गढ़वाल का रम्माण पर्व
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LPG गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, अब 10 या 20 दिन नहीं इतने दिन बाद मिलेगा सिलेंडर

LPG Booking New Rules : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के कारण देश में गैस संकट गहराता जा रहा है। लोगों को LPG सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसी बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार ने LPG गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
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LPG गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
सरकार ने देश में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियम बदल दिए हैं। मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के चलते और कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के मकसद से ये फैसला लिया गया है। बता दें कि रीफिल बुकिंग के लिए न्यूनतम इंतजार अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
मिडिल ईस्ट में युद्ध का एलपीजी की सप्लाई पर पड़ा असर
एनएनआई द्वारा सूत्रों के हवाले से दी गई खबर के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र और मिडिल ईस्ट में हो रहे युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। जिसका सीधा असर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की सप्लाई पर पड़ा है। इसी के चलते ये कदम उठाया गया है।

अब 10 या 20 दिन नहीं इतने दिन बाद मिलेगा सिलेंडर
आपको बता दें कि अब तक लोग 15 दिन के गैप में ही एलपीजी सिलेंडर बुक करते थे। जो कि 55 दिन तक का होता था। लेकिन अब कम से कम 25 दिनों को लोगों को इंतजार करना होगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक ‘ऐसे मामले सामने आए हैं कि जो लोग पहले 55 दिनों में एलपीजी सिलेंडर बुक करते थे, उन्होंने 15 दिनों में सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया है।
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UPSC 2026 में AIR-1 लाने वाले ‘अनुज अग्निहोत्री’ की कहानी जानकर चौंक जाएंगे

अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026: डॉक्टर से IAS बनने तक का प्रेरणादायक सफर
Anuj Agnihotri UPSC Topper: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। इस वर्ष परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल करने वाले उम्मीदवार अनुज अग्निहोत्री हैं। राजस्थान के जोधपुर जिले के छोटे से गांव राहता से आने वाले अनुज अग्निहोत्री की सफलता की कहानी आज पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। डॉक्टर से प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर यह साबित करता है कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
कौन हैं अनुज अग्निहोत्री (Who is Anuj Agnihotri)
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026 राजस्थान के जोधपुर जिले के राहता गांव के निवासी हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले अनुज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों से पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे अनुज ने आगे चलकर मेडिकल क्षेत्र को चुना और जोधपुर स्थित प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIMS) जोधपुर से वर्ष 2023 में मेडिकल की पढ़ाई पूरी की।
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मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद भी अनुज का लक्ष्य सिर्फ डॉक्टर बनकर रहना नहीं था। वे समाज और देश के लिए बड़े स्तर पर काम करना चाहते थे। यही सोच उन्हें सिविल सेवा की ओर ले गई और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की।
DANICS अधिकारी से IAS तक का सफर
UPSC परीक्षा देने से पहले अनुज अग्निहोत्री दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सिविल सेवा (DANICS) में कार्यरत थे। यह सेवा दिल्ली और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
DANICS में काम करते हुए अनुज को प्रशासनिक कार्यों का व्यावहारिक अनुभव मिला। इस अनुभव ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा के लिए और अधिक प्रेरित किया। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया। डॉक्टर से लेकर DANICS अधिकारी और अब IAS बनने तक का उनका सफर उनके दृढ़ संकल्प और मेहनत को दर्शाता है।
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UPSC परीक्षा के तीनों चरणों में शानदार प्रदर्शन
UPSC सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा में तीन चरण होते हैं:
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
- मुख्य परीक्षा (Mains)
- व्यक्तित्व परीक्षण / इंटरव्यू
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026 ने इन तीनों चरणों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सामान्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए परीक्षा के हर चरण में अपनी प्रतिभा साबित की।
UPSC CSE मुख्य परीक्षा 2025 अगस्त 2025 में आयोजित हुई थी। इसके बाद सफल उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू यानी व्यक्तित्व परीक्षण आयोजित किए गए, जो फरवरी 2026 में समाप्त हुए। अंतिम मेरिट सूची जारी होने पर अनुज अग्निहोत्री ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया।
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UPSC CSE 2025 result की प्रमुख बातें
UPSC द्वारा जारी अंतिम परिणाम के अनुसार कुल 958 उम्मीदवारों को विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अनुशंसित किया गया है। इनमें प्रमुख सेवाएं शामिल हैं:
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)
- भारतीय विदेश सेवा (IFS)
- भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
- विभिन्न केंद्रीय सेवाएं (Group A और Group B)
हालांकि अंतिम नियुक्ति भारत सरकार द्वारा घोषित रिक्तियों के आधार पर की जाएगी।
IAS में कुल रिक्तियां
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में कुल 180 रिक्तियां घोषित की गई हैं। इनका वर्गवार वितरण इस प्रकार है:
- सामान्य वर्ग – 74
- ओबीसी – 47
- अनुसूचित जाति – 28
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 18
- अनुसूचित जनजाति – 13
IFS में रिक्तियां
भारतीय विदेश सेवा (IFS) में कुल 55 पद घोषित किए गए हैं:
- सामान्य वर्ग – 22
- ओबीसी – 15
- अनुसूचित जाति – 8
- EWS – 6
- अनुसूचित जनजाति – 4
इन पदों पर नियुक्ति UPSC परीक्षा के नियमों और मेरिट के आधार पर की जाएगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने अनुज अग्निहोत्री
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026 की सफलता यह साबित करती है कि किसी भी क्षेत्र की पृष्ठभूमि सिविल सेवा की तैयारी में बाधा नहीं बनती। मेडिकल क्षेत्र से आने के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में शानदार सफलता हासिल की। उनकी कहानी ये भी दिखाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में पहला स्थान हासिल करना उनके मजबूत इरादों का प्रमाण है।
1. Who is Anuj Agnihotri UPSC Topper?
अनुज अग्निहोत्री UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के टॉपर हैं, जिन्होंने AIR-1 हासिल किया।
2. अनुज अग्निहोत्री कहाँ के रहने वाले हैं?
वे राजस्थान के जोधपुर जिले के राहता गांव के रहने वाले हैं।
4. UPSC से पहले अनुज अग्निहोत्री क्या करते थे?
UPSC से पहले वे DANICS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार सिविल सेवा) में कार्यरत थे।
5. UPSC CSE 2025 में कितने उम्मीदवार चयनित हुए?
UPSC CSE 2025 में कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ है।
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पश्चिम बंगाल में धामी ने भरी हुंकार, ममता सरकार पर साधा निशाना, कहा- बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति ने विकास रोका
हिंगलगंज से धामी ने भरी हुंकार, परिवर्तन यात्रा की शुरुआत, बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़
West Bengal: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने हिंगलगंज विधानसभा क्षेत्र से परिवर्तन यात्रा की शुरुआत की। परिवर्तन यात्रा के तहत आयोजित जनसभा और रोड शो में भी उन्होंने भाग लिया। बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए पहुंचे।
मुख्य बिंदु
सनातनी हिन्दू न मामता दीदी के अण्डों से डरता है न डंडों से: सीएम धामी
अपने संबोधन में धामी ने सनातन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि “सनातनी हिंदू कभी डरता नहीं, वो सत्य और राष्ट्र के लिए खड़ा रहता है”। उनके इस वक्तव्य पर जनसभा में जोरदार उत्साह देखने को मिला। सीएम धामी बोले सनातनी हिन्दू न ममता दीदी के अण्डों से डरता है और न उनके डंडों से.
धामी का हमला: बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति ने विकास रोका
धामी ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया गया है।उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को कर्मवीर बनाने के बजाय भत्तावीर बनाया जा रहा है। इससे युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हो रहा है।
अपने संबोधन में उठाया अवैध घुसपैठ का मुद्दा
धामी ने कहा कि आज पश्चिम बंगाल करोड़ों के कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और मातृशक्ति स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के कर्मचारियों को भी उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है। कार्मिकों को उनका डीए और महंगाई भत्ता तक समय पर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य कमजोर हो रहा है। धामी ने सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस गंभीर विषय पर राज्य सरकार की चुप्पी चिंताजनक है।
भाजपा सरकार आते ही ख़त्म होगी अराजक व्यवस्था
धामी ने कहा कि भाजपा का स्पष्ट संकल्प है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही अराजक व्यवस्था समाप्त की जाएगी और राज्य में सुशासन, सुरक्षा और विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा।उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ सर्वोच्च सिद्धांत है और इसी विचार के साथ पार्टी देश और समाज की सेवा कर रही है।
देशभर में ख्याति पा रहा धामी का सुशासन मॉडल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने धाकड़ और निर्णायक फैसलों के कारण देशभर में अलग पहचान बना चुके हैं। उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून, अवैध मदरसों पर कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने जैसे फैसले अन्य राज्यों के लिए भी नजीर बन रहे हैं। यही कारण है कि आज उत्तराखंड से बाहर भी लोग धामी को सुनना चाहते हैं और उनके नेतृत्व को मजबूत व निर्णायक शासन का प्रतीक मानते हैं।
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