Uttarakhand
मुख्यमंत्री सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम पहुंचे उत्तरकाशी, चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं का लिया जायजा…होटल और यात्रा से जुड़े व्यवसायियों के साथ की बैठक।

उत्तरकाशी – सचिव मुख्यमंत्री आर.मीनाक्षी सुंदरम गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की यात्रा व्यवस्था की मॉनीटरिंग के लिए आज से जिले के भ्रमण पर हैं। आज सुदंरम ने गंगोत्री धाम एवं इसके अनेक पड़ावों का निरीक्षण कर यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

उन्होंने तीर्थयात्रियों से यात्रा सुविधाओं के बारे में फीडबैक लेने के साथ ही यात्रा से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक कर कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाए रखने के शासन-प्रशासन के द्वारा सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
इस बारे में विभिन्न पक्षों से प्राप्त होने वाले उपयोगी व व्यावहारिक सुझावों पर अमल कर यात्रा व्यवस्थाओं का कार्यान्वयन किया जाएगा। सचिव मुख्यमंत्री ने कहा कि धामों व यात्रा मार्गों पर अनावश्यक भीड़-भाड़ से अव्यवस्था न हो इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिना पंजीकरण के और पंजीकरण के तय दिन से इतर अन्य दिनों में आने वाले लोगों को यात्रा करने की कतई अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्हांने कहा कि चारधाम यात्रा हमारी आस्था, पहचान और आर्थिकी का से जुड़ी है, लिहाजा हम सबका यही प्रयास रहना चाहिए कि यात्री यहां से बेहतर अनुभव लेकर जांये और चारधाम यात्रा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अपने भ्रमण के पहले दिन गंगोत्री धाम का निरीक्षण कर तीर्थयात्रियों एवं पंडा-पुरोहितों से वार्ता करने के बाद सचिव मुख्यमंत्री आर. मीनाक्षी सुंदरम ने देर सायं जिला मुख्यालय पहॅुचने पर अधिकारियों और होटल तथा यात्रा से जुड़े व्यवसायियों के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर यात्रा व्यवस्था को लेकर उनके सुझावों को सुना।
इस मौके पर विधायक गंगोत्री सुरेश चौहान ने कहा कि वाहनों के बढते दबाव को देखते हुए जाम की समस्या से निपटने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित रूप से गेट सिस्टम के तहत संचालित करने की व्यवस्था ही तात्कालिक समाधान है। लेकिन इसे इस तरह संचालित किया जाय कि यात्रियों को असुविधा न हो और स्थानीय कारोबारियों के हित भी सुरक्षित रहें। होटल एसोशियेसन के पदाधिकारी अजय पुरी, शैलेन्द्र मटूड़ा, आमोद पंवार सहित अन्य लोगों ने भी वन-वे व गेट व्यवस्था को लेकर सुझाव रखे।
इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट एवं पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने वाहनों के दबाव के कारण जाम की समस्या से निपटने के लिए लागू की गई व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रशासन का यही प्रयास है कि जरूरी होने पर ही यात्रियों को सुविधाजनक जगहों पर ही रोका जाय। उन्होंने कहा कि यात्रा व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों एवं हितधारकों के व्यावहारिक सुझावों के अनुरूप यातायात योजना एवं अन्य व्यवस्थाओं में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे लेकिन इसमें यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा का सबसे पहले ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने यात्रियों की सहायता के लिए सभी पक्षों से तत्पर रहने और जाम की दशा में अधिक कीमत वसूलने वाले व्यवसायियों के विरूद्ध अपने संगठन के स्तर से भी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
बैठक में सचिव सुंदरम ने बताया कि इस बार रिकार्ड तोड़ संख्या में यात्रियों के आने से व्यवस्था बनाने में कुछ समस्याये आई लेकिन इनका तात्कालिक समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही दीर्शकालीन उपायों पर भी प्रमुखता से ध्यान दिया जा रहा है। यमुनोत्री एवं गंगोत्री मार्ग पर सिंगल लेन की सड़कों को डबल लेन बनाए जाने से जाम की समस्या नहीं रहेगी।
शासन-प्रशासन इस संड़कों के चौड़ीकरण के लिए कार्रवाई कर रहा है। गंगोत्री मार्ग के चौड़ीकरण के लिए ईको सेंससेटिव जोन के तहत आवश्यक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और वन भूमि से संबंधित स्वीकृतियां हासिल करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। एक-दो साल में यह सड़क डबल लेन होने पर समस्या नहीं रहेगी। इसी तरह यमुनोत्री रोड के चौड़ीकरण, धाम के लिए रोपवे सहित वैकल्पिक पैदल मार्ग के निर्माण एवं अन्य अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु प्रयास किया जा है। उन्होंने कहा कि वह खुद यमुनोत्री क्षेत्र में जाकर क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं की पड़ताल करेंगे।
इस बीच आज गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में आज कुल 25975 श्रद्धालु पहॅुचे। इन दोनो धामों के यात्रा मार्गों पर आज आवागमन सुचारू और सुव्यवस्थित रहा। यमुनोत्री धाम में आज 11275 तीर्थयात्री तथा गंगोत्री धाम में 14700 तीर्थयात्री आए। प्रशासन के द्वारा सड़कों पर वाहनों का दबाव बढने पर जाम की समस्या से निपटने के लिए नियंत्रित रूप से वाहनों को गेट सिस्टम के तहत रवाना कराने की व्यवस्था आज भी लागू की गई थी जिसके फलस्वरूप यमुनोत्री के बाद अब गंगोत्री मार्ग पर भी वाहनों का आवागमन अधिक सुचारू व सुव्यवस्थित हो गया है। टै्रफिक विनयिमन हेतु रोके गए जरूरतमंद यात्रियों के लिए प्रशासन के द्वारा रामलीला मैदान उत्तरकाशी एवं पालीगाड में भंडारे की व्यवस्था संचालित की गई है और यात्रा रूटों पर कस्बों से दूर के होल्ड एरिया में जरूरतमंद लोगों हेतु पानी एवं जलपान तथा भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए गए है।
बैठक में महानिदेशक सूचना वंशीधर तिवारी, यात्रा मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात टिहरी जिले के मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी रजा अब्बास, उप जिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी सहित अनेक अधिकारियों ने भाग लिया। उधर महानिदेशक, सूचना वंशीधर तिवारी ने भी जिला मुख्यालय उत्तरकाशी पहॅूंचने पर पत्रकारों से वार्ता कर चारधाम यात्रा व्यवस्था के बारे वार्ता की।
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Udham Singh Nagar
रुद्रपुर में मौलाना को भड़काऊ बयान देना पड़ा भारी, मुदकमा दर्ज, विधायक ने भी दिया जवाब

Rudrapur News : ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में त्रिशूल चौक पर ईद उल मिलादुन्नबी के जलूस के दौरान एक ऐसा भड़काऊ बयान वायरल हुआ जो कि मौलवी को भारी पड़ गया है। इस विवादित भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर अब तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस एशन मे आई और मुकदमा दर्ज कर दिया और जाँच शुरू कर दी है।
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रुद्रपुर में मौलाना को भड़काऊ बयान देना पड़ा भारी
ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में ईद-उल-मिलादुन्नबी के दौरान रुद्रपुर के त्रिशूल चौक पर हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच एक विवादित बयान दे डाला, जिसके बाद सियासत में उबाल आ गया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस एक्शन में आई और विवादित बयान देने वाले मौलवी पर मुकदमा दर्ज कर दिया।
वीडियो में वक्ता द्वारा कहा गया कि अगर मदरसे बंद कर दिए तो फिर देखना मुसलमान क्या हाल करेंगे। ये किसी की सुनने वाले नहीं हैं। ये तो अपने मौलाना की इज्जत करते हैं, तो सुन लेते हैं, वरना आज भी वही जज्बा है, जब शहादत के समय था, जब जंग हुई थी और नबी जब परेशान हुए थे। इस तरह के बयान मुस्लिम वक्ता द्वारा दिए गए, जिसके बाद माहौल गरमा गया है और भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने इसका जवाब दिया है।

विधायक शिव अरोड़ा ने भी दिया जवाब
भड़काऊ भाषण को लेकर कहा कि बारावफात पर रुद्रपुर के त्रिशूल चौक पर कुछ कट्टरपंथी ये धमकाते हैं कि मुसलमान क्या हाल करेंगे, अगर मदरसे बंद कर दिए गए तो। ये जितने भी अवैध मदरसे हैं, ये आतंकवादी और दंगाई पैदा होते हैं, वह बंद ही नहीं, नस्तेनाबूद होंगे। ये मुख्यमंत्री धामी की सरकार है। यहां दंगाइयों और आतंकवादियों को पैदा करने वाले मदरसों की कोई जगह नहीं है।
और कांग्रेस की मानसिकता, जो तुम्हें मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने के सपने दिखाती थी, ऐसे सपने देखना बंद करो। और ये जो धमकाने की हिमाकत कर रहे हो, सुधर जाओ, नहीं तो ऐसा हाल होगा कि सात पुश्तें याद रखेंगी।
सरकारी जमीनें ली गईं हैं वापस
विधायक ने कहा कि रुद्रपुर ईदगाह की जमीन की बात है, वो सरकारी जमीन थी, वापस ली गई और दुनिया की कोई ताकत उस जमीन को तुम्हें वापस नहीं दिला सकती। और यहां के नए-नए नेता, जो कांग्रेसी बने हैं, वो इसी जलसे में कूद-कूदकर मुबारकबाद देते फिर रहे थे और जब हिंदुओं को धमकाया गया कि मुसलमान क्या हाल करेंगे, तब उनकी जुबान सिल जाती है।
Dehradun
रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का लाभ ले रहीं महिलाएं, कल भी रोडवेज में होगा मुफ्त सफर

Dehradun News : उत्तराखंड में आज रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना कर रही हैं। वहीं भाई भी बहनों की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प ले रहे हैं।
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रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का लाभ ले रहीं महिलाएं
रक्षाबंधन के इस खास मौके पर उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी है। राज्य की महिलाएं आज यानी 28 अगस्त के साथ-साथ 29 अगस्त को भी उत्तराखंड रोडवेज की बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगी।
दो दिन महिलाओं से नहीं लिया जाएगा बस का किराया
सरकार के आदेश के मुताबिक, रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तराखंड के भीतर संचालित उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को 100 प्रतिशत किराया छूट दी जा रही है। यानी प्रदेश की सीमा के भीतर रोडवेज बस से सफर करने वाली महिलाओं से टिकट का किराया नहीं लिया जाएगा।

महिला सम्मान और सशक्तिकरण से जोड़ा फैसला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार का प्रयास है कि रक्षाबंधन जैसे पर्व पर महिलाओं को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। मुफ्त बस सेवा का उद्देश्य उनके आवागमन को आसान बनाना और आर्थिक बोझ कम करना है।
सरकार करेगी रोडवेज के खर्च की भरपाई
महिलाओं को मुफ्त यात्रा देने से उत्तराखंड परिवहन निगम पर पड़ने वाले आर्थिक भार की भरपाई भी राज्य सरकार करेगी। शासन की ओर से जारी आदेश में इस व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है।
अपर सचिव उत्तराखंड शासन रीना जोशी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, निशुल्क यात्रा के कारण परिवहन निगम को होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
Dehradun
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी और मजबूत, 13 संवेदनशील झीलों पर सरकार की नजर

Uttarakhand News : उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज करने का फैसला लिया है। सरकार अब संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की नियमित निगरानी के साथ-साथ संभावित आपदा से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर चेतावनी तंत्र विकसित करेगी।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी और मजबूत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की वैज्ञानिक तरीके से लगातार निगरानी की जाए। इसके तहत झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भूगोल और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों का समय-समय पर आकलन किया जाएगा।
संवेदनशील इलाकों में लगेंगे आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम
सरकार की योजना ऐसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की है, जहां ग्लेशियर झीलों के कारण अचानक बाढ़ या अन्य आपदा का खतरा अधिक हो सकता है। इसके लिए सेंसर, जलस्तर मापने वाले उपकरण और बेहतर संचार प्रणाली जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ चेतावनी प्रणाली लगाने से काम पूरा नहीं होगा। संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षित निकासी मार्ग, प्रभावित क्षेत्र का पूर्व चिन्हांकन, स्थानीय चेतावनी व्यवस्था और राहत-बचाव की तैयारियों को भी मजबूत किया जाए।

नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में तैयारियों की समीक्षा
नेपाल में हाल में सामने आई आपदा के बाद उत्तराखंड में भी संभावित जोखिमों को लेकर प्रशासन ने तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रुहेला और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखाई देने पर उसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है।
उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें से चार झीलों का सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
अब बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में झील की मौजूदा स्थिति, पानी के स्तर में बदलाव, संभावित खतरे और झील के नीचे आने वाले क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
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