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सीएम धामी का अनोखा अंदाज, जंगलों में बिखरी हुई पिरूल की पत्तियों को एकत्र करते हुए आए नजर.. दिया सन्देश।

रुद्रप्रयाग – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रुद्रप्रयाग पहुंचे..इस बीच जंगलों में बिखरी हुई पिरूल की पत्तियों को एकत्र करते हुए नजर आए इसके साथ ही जन-जन को इसके साथ जुड़ने का संदेश दिया। पिरूल की सूखी पत्तियां वनाग्नि का सबसे बड़ा कारण होती हैं।

सीएम ने प्रदेश की समस्त जनता से अनुरोध करते हुए कहा कि आप भी अपने आस-पास के जंगलों को बचाने के लिए युवक मंगल दल, महिला मंगल दल और स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर इसे अभियान के रुप में संचालित करने का प्रयास करें।
वनाग्नि को रोकने के लिए सरकार ‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन पर भी कार्य कर रही है। इस मिशन के तहत जंगल की आग को कम करने के उद्देश्य से पिरूल कलेक्शन सेंटर पर ₹50/किलो की दर से पिरूल खरीदे जाएंगे। इस मिशन का संचालन पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा किया जाएगा इसके लिए ₹50 करोड़ का कार्पस फंड पृथक रूप से रखा जाएगा।
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मुख्यमंत्री धामी का दिल्ली दौरा, क्या सरकार में होने जा रहा कोई बड़ा फेरबदल ?, अटकलों का बाजार गर्म

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में फिर गरमाया चर्चाओं का बाजार, होने जा रहा है सरकार में बड़ा बदलाव !
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Uttarakhand Politics : उत्तराखंड की राजनीति में सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार में कई बार बड़े बदलाव की सुगबुगाहट होती रहती है। फिर चाहे वो कैबिनेट में खाली पड़ी पांच सीटों को भरना हो या कुछ मंत्रियों के पर कतरना हो।
ये सभी सवाल सत्ता, विपक्ष और जनता के बीच इसलिए चर्चा का विषय बन जाते है क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बीते कुछ समय से हर माह दिल्ली दरबार में अपनी हाजरी लगाते हैं। उनके दिल्ली दौरे पर इन बातों को और अधिक बल मिल जाता है।
मुख्यमंत्री धामी के दिल्ली दौरे से चर्चाओं के बाजार गर्म
आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फिर एक बार दिल्ली दौरे पर जा रहे हैं तो फिर से कयासबाजी शुरू हो गई है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन का आधिकारिक राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर चुनाव होना है जिसकी आधिकारिक घोषणा 20 जनवरी को हो जाएगी।

इसके साथ ही जिस तरह भाजपा संगठन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पर युवा नेतृत्व को तरजीह दी है ऐसे में कहा जा रहा है कि संगठन उत्तराखंड में भी कुछ बड़े बदलाव कर सकता है। इसे लेकर लंबे समय से चर्चाएं भी हो रही हैं।
क्या सरकार में होने जा रहा कोई बड़ा फेरबदल ?
कयासों का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि साल 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार और संगठन नहीं चाहता है कि आमजनता के बीच गलत छवि जाए। सत्ता पक्ष के भीतर भी ये बातें गाहे-बगाहे चल रही हैं कि कुछ नेताओं के विवादित या पार्टी विरोधी बयान देने से पार्टी असहज हो रही है।

अंकिता भंडारी मामले के बाद विपक्ष लगातार हमलावर
वहीं दूसरी तरफ राज्य में दिवंगत अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले ने जहां विपक्ष को मुद्दा दिया तो वहीं भाजपा सरकार को कटघरे में भी खड़ा किया। हालांकि मुख्यमंत्री धामी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर सीबीआई को ये मामला ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी सरकार पर लगातार हमलावर है।

अंकिता भंडारी मामले में उर्मिला सनावर ने सरकार को पूरी तरह असहज करने का काम किया। जहां उन्होंने भाजपा के बड़े नेताओं पर बड़े गंभीर आरोप भी लगाए। इसके बाद से ही उत्तराखंड की राजनीति (Uttarakhand Politics) में चर्चाओं के बाजार गर्म हैं। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मामले में डैमेज कंट्रोल करने की भी पूरी कोशिश की लेकिन ये काम करता हुआ नजर नहीं आया। इस मुद्दे को लेकर अब भी लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
भाजपा संगठन, सरकार और मंत्रिमंडल में हो सकता है बदलाव
चूंकि अब भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा होनी बाकी रह गई है। ऐसे में सरकार के कई मंत्री, विधायक दिल्ली दरबार में हाजरी लगाते हुए देखे जा सकते हैं। जिसके बाद कई तरह की अफवाहें तैर रही हैं। विशेष सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन, सरकार और मंत्रिमंडल में आगामी कुछ दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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अंकिता भंडारी मामले में कांग्रेस फैला रही भ्रम, बीजेपी ने विरोध में सभी 304 मंडलों में एक साथ किया प्रदर्शन

Ankita Bhandari case : अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और तथ्यहीन आरोपों के विरोध में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा ने उत्तराखंड प्रदेश के सभी 304 मंडलों में एक साथ सशक्त विरोध प्रदर्शन किया।
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Ankita Bhandari case में कांग्रेस फैला रही है भ्रम
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि चौहान भट्ट ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक जघन्य और संवेदनशील अपराध पर भी कांग्रेस केवल सियासी रोटियां सेकने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास न तो प्रदेश के विकास का कोई विज़न है और न ही जनहित से जुड़ा कोई ठोस एजेंडा, इसी कारण वो जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रही है।
चुनाव नजदीक आ रहे हैं इसलिए कांग्रेस को याद आ रहा न्याय
रुचि चौहान भट्ट ने कहा कि साढ़े तीन वर्षों तक चुप रहने के बाद अब, जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस मामले को दोबारा उछाल रही है। ये कांग्रेस की हताशा और दिशाहीन राजनीति को उजागर करता है।

एसआईटी जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहले ही ये साफ किया जा चुका है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में किसी भी प्रकार की ‘वीआईपी’ संलिप्तता नहीं थी। उत्तराखंड की धामी सरकार ने संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए घटना के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा, एसआईटी का गठन किया और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की।
मुद्दे को चुनावी हथियार बनाना केवल एक राजनीतिक स्टंट
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि 500 पन्नों की चार्जशीट और 100 से अधिक गवाहों के बयान के आधार पर दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई गई। साथ ही सरकार द्वारा पीड़ित परिवार की हर स्तर पर मदद के साथ पीड़ित परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले गए, सशक्त पैरवी हुई और इसी का परिणाम है कि आरोपियों को जमानत तक नहीं मिल सकी।

आज प्रदेश के 304 मंडलों में महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर कांग्रेस के झूठे और भ्रामक आरोपों की पोल खोली। भाजपा महिला मोर्चा का कहना है कि जब न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है, तब भी कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाना केवल एक राजनीतिक स्टंट है।
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अंकिता हत्याकांड में त्रिवेंद्र के बाद BJP के इस वरिष्ठ नेता की CBI जांच की मांग, कहा- नामजद नेताओं को दे देना चाहिए इस्तीफा

Uttarakhand News : अंकिता भंडारी हत्याकांड इन दिनों एक बार फिर उत्तराखंड में चर्चाओं का विषय बन गया है। बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर के खुलासों के बाद से उत्तराखंड की राजनीति में उबाल आ गया है। लगातार कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है और सीबीआई जांच की मांग कर रही है। लेकिन अब बीजेपी के अपने ही वरिष्ठ नेता इस मामले की सीबीआई जांच और नामजद नेताओं से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
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अंकिता हत्याकांड में BJP के वरिष्ठ नेता की CBI जांच की मांग
Ankita Bhandari murder case को लेकर एक्सट्रेस उर्मिला सनावर के दावों को लेकर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान हाल ही में सामने आया था। जिसमें उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। जिसके बाद अब एक और भाजपा के वरिष्ठ नेता ने इसस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
इस मामले को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी से प्रदेश की छवि धूमिल हो रही है। उनका मानना है कि “अंकिता भंडारी प्रकरण निश्चित रूप से गंभीर विषय है। आम जनमानस के मन में किसी प्रकार की शंका-आशंका ना रहे, इस हेतु जो भी कानूनी कार्यवाही अथवा CBI जाँच आदि की जानी हो, तो करनी चाहिए।”
नामजद नेताओं को दे देना चाहिए इस्तीफा – अजेंद्र अजय
अजेंद्र अजय ने ना केवल सीबीआई जांच की मांग की है बल्कि उन्होंने नामजद नेताओं के इस्तीफे की भी मांग की है। उन्होंने कहा है कि “मेरा ये भी सुझाव है कि इस प्रकरण में जो भी नेता दोषारोपित किए गए हैं, उनको पार्टी हित और जन विश्वास कायम रखने के लिए नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्याग- पत्र देना चाहिए। उन्हें स्वयं ये घोषणा करनी चाहिए कि वे अपने को निर्दोष साबित करेंगे और तत्पश्चात पार्टी में कोई पद स्वीकार करेंगे।”

राजनीति अपनी जगह है, सामाजिक सौहार्द अपनी जगह
सीबीआई जांच और इस्तीफे की मांग ही नहीं अजेंद्र अजय ने इस मामले को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक को सलाह दे डाली। उनका कहना है कि “भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जी को आवश्यक नहीं है कि वो प्रत्येक मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें। मीडिया के समक्ष पार्टी का पक्ष आदि रखने के लिए प्रवक्ता इत्यादि की व्यवस्था बनाई गई है।
अंकिता भंडारी प्रकरण में जाति को लेकर जो बयान मीडिया व सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, वो पार्टी के लिए हानिकारक है। इससे भी अधिक प्रदेश के सामाजिक ताने- बाने के लिए भी घातक है। राजनीति अपनी जगह है, सामाजिक सौहार्द अपनी जगह है।”
त्रिवेंद्र के बाद अजय अजेंद्र के बयान से मचा सियासी घमासान
Ankita Bhandari murder case में उर्मिला सनावर के सनसनीखेज खुलासों और दावों के बाद उत्तराखंड में सियासी उबाल देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर पहाड़ से लेकर मैदान तक लोग और समाजसेवी संगठन सड़कों पर हैं और अंकिता हत्याकाडं में वीआईपी को फांसी दिए जाने और मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। तो वहीं कांग्रेस और यूकेडी भी इस मामले को लेकर लगातार हमलावर है। कांग्रेस और यूकेडी मामले की सीबीआई जांच की मांग और वीआईपी के खुलासे की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस का कहना है कि जब सरकार प्रदेश के छोटे-छोटे मामलों की सीबीआई जांच करा सकती है तो इस मामले की सीबीआई जांच क्यों नहीं करा रही है। इसके साथ ही कांग्रेस ये आरोप लगा रही है कि सरकार आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है।
जब बीजेपी के नेता भी कर रहे मांग तो क्यों नहीं हो रही CBI जांच
अंकिता भंडारी मामले को लेकर उर्मिला सनावर के दावों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि उर्मिला सनावर के दावे अगर झूठे भी हैं तो सरकार उनकी जाचं क्यों नहीं करवा रही ?, जब सनावर खुद सारे सबूत देने को तैयार है तो जांच एजेंसी और सरकार इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रही है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जो उठ रहा है जिसे लेकर विपक्ष, समाजसेवी और आम जनता तक सवाल पूछ रही है कि जब सरकार पेपर लीक जैसे मामलों की सीबीआई जांच करवा सकती है। तो इस मामले में इतने सालों से इतनी मांग के बाद भी सरकार सीबीआई जांच क्यों नहीं करवा रही है?
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