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Dollar vs Rupee 2026 : डॉलर के मुकाबले बेहाल हुआ रूपया , रिकॉर्ड निचले स्तर पर पंहुचा..

डॉलर बनाम रुपया (Dollar vs Rupee): 2026 में भारतीय मुद्रा का ऐतिहासिक संकट और भविष्य की संभावनाएं
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 एक ऐसी अग्निपरीक्षा बनकर उभरा है, जहां वित्तीय गलियारों से लेकर आम आदमी की रसोई तक सिर्फ एक ही चर्चा है—रुपये की ऐतिहासिक गिरावट। पिछले वर्ष, यानी 2025 में भारतीय रुपये ने लगभग 3.5% की कमजोरी देखी थी, जिसने इसे एशियाई मुद्राओं की सूची में सबसे निचले पायदानों पर लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन 2026 की शुरुआत ने उन तमाम आशंकाओं को हकीकत में बदल दिया, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 और 91 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
यह लेख इस मुद्रा संकट के पीछे छिपे अर्थशास्त्र, वैश्विक राजनीति के दांव-पेंच और आने वाले समय में आपकी जेब पर पड़ने वाले असर का एक विस्तृत विश्लेषण है।
1. Dollar vs Rupee : रुपये के गिरने का गणित , एक सरल विश्लेषण
मुद्रा का मूल्य किसी भी देश की आर्थिक सेहत का थर्मामीटर होता है। जब हम कहते हैं कि रुपया गिर रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि डॉलर की तुलना में रुपये की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हो गई है।
भारत एक आयात-प्रधान देश है। हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल से लेकर उन्नत तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स तक विदेशों से मंगवाते हैं। इन सबका भुगतान अंतरराष्ट्रीय मानक मुद्रा यानी अमेरिकी डॉलर में होता है। जब विनिमय दर (Exchange Rate) 80 से बढ़कर 91 हो जाती है, तो इसका अर्थ है कि उसी एक डॉलर के सामान के लिए अब हमें 11 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। यही अतिरिक्त बोझ देश में महंगाई के रूप में वापस लौटता है।

2. क्यों टूट रहा है रुपया? प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारण
रुपये की इस गिरावट को केवल घरेलू चश्मे से देखना गलत होगा। इसके पीछे वैश्विक महाशक्तियों की नीतियां और बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य जिम्मेदार हैं:
A. ‘ट्रंप इम्पैक्ट’ और नई व्यापार नीतियां:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से वैश्विक बाजारों में एक तरह की अनिश्चितता व्याप्त है। ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत सहित कई विकासशील देशों पर ऊंचे टैरिफ (Import Duty) लगाए गए हैं। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार कठिन हो गया है और विदेशी निवेशकों में घबराहट पैदा हुई है।
B. विदेशी निवेशकों की वापसी (Capital Outflow):
जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं या वहां की नीतियां घरेलू उद्योगों के पक्ष में होती हैं, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) की ओर ले जाते हैं। डॉलर की इस निकासी ने भारतीय बाजार में इसकी कमी पैदा कर दी है, जिससे रुपया कमजोर हुआ है।
C. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions):
यूक्रेन-रूस और मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी संघर्षों ने वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। अनिश्चितता के माहौल में डॉलर हमेशा एक ‘मजबूत ढाल’ की तरह व्यवहार करता है, जिससे उसकी मांग पूरी दुनिया में बढ़ जाती है।
3. ‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘ग्लोबल ब्राइट स्पॉट’ तक का सफर
आज से लगभग 15 साल पहले, भारत को दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं यानी ‘Fragile Five’ में गिना जाता था। तब भारत की जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों ही चिंताजनक स्थिति में थे।
आज 2026 में, भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। हमारे पास लगभग 900 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) है, जो मार्च 2014 के मुकाबले लगभग तीन गुना है। इसके बावजूद रुपये का गिरना यह दर्शाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं अब एक-दूसरे से इतनी जटिलता से जुड़ी हुई हैं कि घरेलू मजबूती भी बाहरी झटकों से पूरी तरह रक्षा नहीं कर सकती।
4. रुपये की कमजोरी का चौतरफा असर
रुपये में गिरावट एक ‘दोधारी तलवार’ की तरह है। इसके कुछ नुकसान हैं तो कुछ अप्रत्यक्ष लाभ भी।
नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact):
- आयातित महंगाई (Imported Inflation): कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होती है और अंततः सब्जियों से लेकर अनाज तक सब कुछ महंगा हो जाता है।
- विदेशी शिक्षा और पर्यटन: जो छात्र अमेरिका या यूरोप में पढ़ाई कर रहे हैं, उनके माता-पिता के लिए फीस चुकाना अब पहले से 15% अधिक महंगा हो गया है। इसी तरह विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को अपना बजट बढ़ाना पड़ रहा है।
- कॉर्पोरेट कर्ज: जिन भारतीय कंपनियों ने विदेशों से डॉलर में कर्ज लिया है, उनके लिए ब्याज और मूलधन की वापसी अब एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गई है।
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact):
- निर्यातकों की चांदी: आईटी (IT), फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनियों को फायदा होता है क्योंकि उन्हें अपनी सेवाओं के बदले डॉलर मिलते हैं, जिन्हें भुनाने पर अब ज्यादा रुपये प्राप्त होते हैं।
- रेमिटेंस (Remittance): विदेशों में काम करने वाले भारतीय जब अपने घर पैसा भेजते हैं, तो उनकी कमाई की वैल्यू भारत में बढ़ जाती है। इससे देश के ग्रामीण इलाकों में उपभोग (Consumption) को बढ़ावा मिलता है।
5. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रणनीति
आरबीआई मूकदर्शक बनकर रुपये को गिरते हुए नहीं देख रहा है। केंद्रीय बैंक समय-समय पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बाजार में बेचता है ताकि रुपये की तरलता (Liquidity) बनी रहे और इसमें अचानक आने वाली गिरावट को नियंत्रित किया जा सके। आरबीआई का मुख्य उद्देश्य ‘रुपये के स्तर’ को बचाना नहीं, बल्कि इसमें होने वाली ‘अत्यधिक अस्थिरता’ (Volatility) को रोकना है।
6. भविष्य का अनुमान: 2026 का अंत कैसा होगा?
विशेषज्ञों के बीच रुपये के भविष्य को लेकर मिली-जुली राय है:
- नकारात्मक परिदृश्य: यदि वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ता है और अमेरिका अपनी टैरिफ नीतियों को और सख्त करता है, तो रुपया 92 से 93 के स्तर तक भी जा सकता है।
- सकारात्मक परिदृश्य: भारत और अमेरिका के बीच यदि कोई ‘ट्रेड डील’ सफल होती है, तो विदेशी निवेश वापस लौटेगा। ऐसी स्थिति में रुपया साल के अंत तक 87 से 88 के स्तर पर वापस आ सकता है।
निष्कर्ष
रुपये का 91 के पार जाना निश्चित रूप से एक चेतावनी संकेत है, लेकिन यह भारत की आर्थिक मंदी का प्रतीक नहीं है। यह वैश्विक शक्तियों के बीच चल रहे ‘मुद्रा युद्ध’ और बदलती व्यापार नीतियों का परिणाम है। एक जागरूक नागरिक के रूप में, हमें आने वाले समय में अपनी बचत और निवेश योजनाओं को मुद्रा के उतार-चढ़ाव के अनुरूप ढालना होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के पास इस झटके को सहने के लिए पर्याप्त भंडार और मजबूत बुनियाद है। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि भारत इस संकट को अवसर में बदलकर अपने निर्यात को कितना बढ़ावा दे पाता है।
महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
Q1. क्या रुपये के गिरने से शेयर बाजार भी गिरेगा?
आमतौर पर रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं, जिससे गिरावट आ सकती है। हालांकि, आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के शेयरों में तेजी देखी जा सकती है।
Q2. डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती के लिए सरकार क्या कर सकती है?
सरकार आयात पर निर्भरता कम करके (जैसे एथेनॉल ब्लेंडिंग या इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देना) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को सरल बनाकर रुपये को मजबूती दे सकती है।
Q3. क्या मुझे अभी डॉलर खरीदना चाहिए?
यदि आपकी भविष्य की योजनाएं (जैसे शिक्षा या यात्रा) डॉलर से जुड़ी हैं, तो अस्थिरता को देखते हुए धीरे-धीरे डॉलर खरीदना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन सट्टेबाजी (Speculation) से बचना चाहिए।
Business
Gold Silver Rate Today : सोने-चांदी ने रचा नया इतिहास, 20 जनवरी 2026 को ₹1.50 लाख के पार पहुंचा गोल्ड; चांदी @3.20 लाख…

Gold Silver Rate Today : सोने-चांदी ने रचा नया इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार के लिए मंगलवार, 20 जनवरी 2026 की सुबह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी व्यापार नीतियों (Trump Tariffs) के डर ने निवेशकों को ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की ओर धकेल दिया है। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा, जहाँ दोनों ही कीमती धातुओं ने अपने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए नए शिखर को छू लिया है।
आज एमसीएक्स (MCX) पर सोने का भाव Rs 1,50 लाख के स्तर को छू गया, जबकि चांदी ने पहली बार Rs 3,20,000 प्रति किलोग्राम का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
1. सोने की कीमतों में तूफानी तेजी: विस्तृत विश्लेषण
आज सुबह जब बाजार खुला, तो 5 फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना Rs 136 की मामूली बढ़त के साथ Rs 1,45,775 पर था, लेकिन देखते ही देखते इसमें जबरदस्त खरीदारी लौटी। और बढ़त 1,50,000 के पार चली गयी ।
ताजा आंकड़ों पर एक नजर:
- इंट्राडे हाई: सोने ने कारोबारी सत्र के दौरान Rs 1,52,500 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया।
- अप्रैल 2026 डिलीवरी: लंबी अवधि के अनुबंधों (April Futures) में तेजी और भी अधिक रही, जहाँ भाव Rs 1,59,699 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए।
- कारण: जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसी वैश्विक संस्थाओं ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि 2026 तक सोना $5,000 प्रति औंस (लगभग Rs 1.58 लाख प्रति 10 ग्राम) तक जा सकता है। आज की तेजी उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

2. चांदी की चमक: ‘गरीबों का सोना’ बना अमीरों की पसंद
चांदी ने आज रिटर्न के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। शुरुआती सत्र में लाल निशान में रहने के बाद, सिल्वर फ्यूचर्स ने 3.11% की छलांग लगाई।
- नया रिकॉर्ड: चांदी का भाव अब Rs 3,20,000 के बेहद करीब (Rs 3,19,949/kg) पहुंच चुका है।
- औद्योगिक मांग: विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षित निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और सेमीकंडक्टर उद्योगों से आ रही भारी मांग ने चांदी को ‘2026 की मेगा थीम’ बना दिया है।
3. Gold Silver Rate Today : प्रमुख शहरों में आज का भाव (20 जनवरी 2026)
भारत के विभिन्न शहरों में कर (Taxes) और स्थानीय मांग के आधार पर भाव थोड़े भिन्न हो सकते हैं। नीचे प्रमुख महानगरों के ताजा रेट दिए गए हैं:
| शहर | 24 कैरेट सोना (प्रति 10g) | 22 कैरेट सोना (प्रति 10g) | चांदी (प्रति kg) |
| दिल्ली | ₹1,50,075 | ₹1,35,155 | ₹3,20,000 |
| मुंबई | ₹1,50,040 | ₹1,35,000 | ₹3,20,000 |
| देहरादून | ₹1,49,410 | ₹1,36,860 | ₹3,20,000 |
| कोलकाता | ₹1,50,320 | ₹1,35,000 | ₹3,20,000 |
| हैदराबाद | ₹1,49,480 | ₹1,35,000 | ₹3,30,000 |
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल (Global Market Trends)
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पीली धातु (Yellow Metal) की चमक कम नहीं हो रही है।
- कॉमैक्स गोल्ड: 2.01% चढ़कर Rs 4,687.7 प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गया।
- स्पॉट गोल्ड: Rs 4,685.57 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
- डॉलर इंडेक्स: अमेरिकी डॉलर में आई हल्की कमजोरी ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने को सस्ता कर दिया है, जिससे मांग में और उछाल आया है।
5. क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (Expert Opinion & Analysis)
बाजार के दिग्गज और कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन ‘T’ काम कर रहे हैं:
- Tension (भू-राजनीतिक): रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों को अनिश्चितता के समय सोने की ओर खींच रहा है।
- Tariffs (व्यापार युद्ध): अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित नए आयात शुल्कों (Greenland & Trade War) ने वैश्विक व्यापार संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिससे करेंसी मार्केट में डर का माहौल है।
- Trends (सेंट्रल बैंक बाइंग): दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेषकर चीन और भारत, अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की निर्भरता कम करने के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
6. निवेश रणनीति: क्या अभी खरीदना सही है?
मेहरा इक्विटीज के विशेषज्ञों के अनुसार, सोना वर्तमान में Rs 1,44,050–Rs 1,42,310 के मजबूत सपोर्ट जोन पर है। यदि आप लंबी अवधि (1-2 साल) के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो ‘बाय ऑन डिप’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति सबसे बेहतर है।
- ज्वेलरी बनाम निवेश: यदि आपका उद्देश्य केवल निवेश है, तो 22 कैरेट की जगह डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर विचार करें, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और शुद्धता की समस्या नहीं होती।
7. निष्कर्ष
20 जनवरी 2026 का दिन भारतीय सर्राफा इतिहास में दर्ज हो गया है। ₹1.50 लाख के करीब पहुंचता सोना और Rs 3.20 लाख को छूती चांदी यह साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में भी तेजी जारी रह सकती है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार की अस्थिरता (Volatility) को ध्यान में रखना चाहिए।
Job
NABARD में जारी की 162 पदों के लिए अधिसूचना , जाने आवेदन प्रक्रिया और संपूर्ण गाइड..

NABARD Development Assistant Recruitment 2026: एक सुनहरा अवसर
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने वर्ष 2026 के लिए डेवलपमेंट असिस्टेंट (Development Assistant) और डेवलपमेंट असिस्टेंट (हिंदी) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। ग्रामीण भारत की समृद्धि के लिए समर्पित इस शीर्ष बैंकिंग संस्थान में करियर बनाना लाखों युवाओं का सपना होता है।
इस वर्ष कुल 162 रिक्तियां घोषित की गई हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो बैंकिंग क्षेत्र में क्लर्क स्तर की नौकरी के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं।
2. महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)
किसी भी भर्ती प्रक्रिया में समय का पालन सबसे महत्वपूर्ण होता है। नाबार्ड भर्ती 2026 के लिए मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:
| कार्यक्रम | महत्वपूर्ण तिथि |
| शॉर्ट नोटिफिकेशन (Employment News) | 15 जनवरी 2026 |
| विस्तृत अधिसूचना जारी होने की तारीख | 17 जनवरी 2026 (Notification Link) |
| ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि | 17 जनवरी 2026 |
| आवेदन करने की अंतिम तिथि | 03 फरवरी 2026 |
| प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) तिथि | मार्च 2026 (संभावित) |
| मुख्य परीक्षा (Mains) तिथि | अप्रैल/मई 2026 (संभावित) |
3. रिक्तियों का विवरण (Vacancy Breakdown)
नाबार्ड ने इन पदों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:
3.1 डेवलपमेंट असिस्टेंट (Development Assistant)
इस श्रेणी के लिए 159 पद आरक्षित हैं। इन पदों पर चयनित उम्मीदवार नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों में प्रशासनिक और बैंकिंग कार्यों को संभालेंगे।
3.2 डेवलपमेंट असिस्टेंट – हिंदी (Development Assistant Hindi)
इसके लिए कुल 3 पद निर्धारित किए गए हैं। इनका मुख्य कार्य आधिकारिक दस्तावेजों का हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद करना और राजभाषा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
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4. पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria)
आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे नाबार्ड द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
4.1 शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification)
- डेवलपमेंट असिस्टेंट: किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातक (Bachelor’s Degree) की डिग्री। (SC/ST/PWBD/EXS उम्मीदवारों के लिए केवल पासिंग मार्क्स अनिवार्य हैं)।
- डेवलपमेंट असिस्टेंट (हिंदी): अंग्रेजी/हिंदी माध्यम में स्नातक की डिग्री जिसमें हिंदी और अंग्रेजी अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के रूप में हों। उम्मीदवार को अनुवाद (Translation) का अच्छा ज्ञान होना चाहिए।
4.2 आयु सीमा (Age Limit)
1 जनवरी 2026 को उम्मीदवार की आयु निम्नलिखित होनी चाहिए:
- न्यूनतम आयु: 21 वर्ष
- अधिकतम आयु: 35 वर्ष
आयु में छूट:
- OBC (Non-Creamy Layer): 3 वर्ष
- SC/ST: 5 वर्ष
- PWBD (General): 10 वर्ष
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5. चयन प्रक्रिया (Selection Process)
नाबार्ड डेवलपमेंट असिस्टेंट भर्ती 2026 के लिए चयन प्रक्रिया दो मुख्य चरणों और एक भाषा परीक्षण पर आधारित है।
5.1 चरण 1: प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam)
यह एक ऑनलाइन वस्तुनिष्ठ (Objective) परीक्षा है। इसमें सफल होने वाले उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाता है।
5.2 चरण 2: मुख्य परीक्षा (Main Exam)
इसमें वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक (Descriptive) दोनों प्रकार के पेपर शामिल होते हैं। अंतिम चयन सूची मुख्य परीक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाती है।
5.3 चरण 3: भाषा प्रवीणता परीक्षा (Language Proficiency Test – LPT)
यदि किसी उम्मीदवार ने 10वीं या 12वीं कक्षा में संबंधित राज्य की क्षेत्रीय भाषा का अध्ययन नहीं किया है, तो उसे LPT से गुजरना होगा। यह क्वालीफाइंग प्रकृति का होता है।
6. परीक्षा पैटर्न (Exam Pattern 2026)
6.1 प्रारंभिक परीक्षा पैटर्न
| अनुभाग (Section) | प्रश्नों की संख्या | अधिकतम अंक | समय |
| अंग्रेजी भाषा | 40 | 40 | कुल 60 मिनट |
| संख्यात्मक अभियोग्यता (Quant) | 30 | 30 | |
| रीजनिंग एबिलिटी | 30 | 30 | |
| कुल | 100 | 100 |
6.2 मुख्य परीक्षा पैटर्न
| अनुभाग (Section) | प्रश्नों की संख्या | अधिकतम अंक | समय |
| रीजनिंग | 30 | 30 | 90 मिनट (Objective) |
| संख्यात्मक अभियोग्यता | 30 | 30 | |
| सामान्य जागरूकता (GA) | 50 | 50 | |
| कंप्यूटर ज्ञान | 40 | 40 | |
| अंग्रेजी (Descriptive) | — | 50 | 30 मिनट |
| कुल | — | 200 | 120 मिनट |
7. आवेदन शुल्क (Application Fee)
आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन (Debit Card/Credit Card/Net Banking/UPI) के माध्यम से किया जा सकता है।
- General / OBC / EWS: Rs 450 + ₹50 (सूचना शुल्क) = Rs 500/-
- SC / ST / PWBD / EXS: शून्य + Rs 50 (सूचना शुल्क) = Rs 50/-
- नाबार्ड स्टाफ: कोई शुल्क नहीं।
8. वेतन और भत्ते (Salary & Perks)
नाबार्ड में डेवलपमेंट असिस्टेंट का पद काफी आकर्षक माना जाता है। 2026 के वेतनमान के अनुसार:
- शुरुआती सकल वेतन (Gross Pay): लगभग Rs 32,000 – Rs 35,000 प्रति माह।
- अतिरिक्त लाभ: महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement), परिवहन भत्ता, और रियायती दरों पर ऋण की सुविधा।
9. ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (How to Apply Online)
- नाबार्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.nabard.org पर जाएं।
- ‘Career Notices’ टैब पर क्लिक करें।
- “Apply Online for Development Assistant 2026” लिंक खोजें।
- ‘Click here for New Registration’ पर क्लिक करें और अपना नाम, ईमेल और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
- पंजीकरण के बाद प्राप्त प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें।
- अपनी शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरण भरें।
- फोटो, हस्ताक्षर और बाएं हाथ के अंगूठे का निशान अपलोड करें।
- आवेदन शुल्क का भुगतान करें और ‘Submit’ बटन दबाएं।
10. तैयारी के लिए महत्वपूर्ण सुझाव (Preparation Strategy)
- पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र: परीक्षा के स्तर को समझने के लिए पिछले 5 वर्षों के पेपर हल करें।
- सामान्य जागरूकता: पिछले 6 महीनों के करंट अफेयर्स और बैंकिंग जागरूकता (विशेषकर कृषि क्षेत्र) पर ध्यान केंद्रित करें।
- मॉक टेस्ट: अपनी गति और सटीकता बढ़ाने के लिए साप्ताहिक कम से कम 2 मॉक टेस्ट दें।
- डिस्क्रिप्टिव इंग्लिश: मुख्य परीक्षा के लिए पत्र लेखन और निबंध का नियमित अभ्यास करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
NABARD Development Assistant Recruitment 2026 उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो एक स्थिर और सम्मानजनक बैंकिंग नौकरी की तलाश में हैं। 162 रिक्तियां कम लग सकती हैं, लेकिन सही रणनीति और कड़ी मेहनत के साथ इस पद को हासिल किया जा सकता है। आवेदन की अंतिम तिथि (3 फरवरी 2026) का इंतजार न करें और आज ही अपना फॉर्म भरें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या नाबार्ड डेवलपमेंट असिस्टेंट के लिए इंटरव्यू होता है?
उत्तर: नहीं, इसमें साक्षात्कार (Interview) नहीं होता है। चयन पूरी तरह से मुख्य परीक्षा के अंकों के आधार पर होता है।
Q2. क्या मैं एक से अधिक राज्यों के लिए आवेदन कर सकता हूँ?
उत्तर: नहीं, आप केवल एक राज्य के लिए आवेदन कर सकते हैं जहाँ की क्षेत्रीय भाषा का आपको ज्ञान हो।
Q3. क्या इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग है?
उत्तर: हाँ, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/4 (0.25) अंक काटे जाएंगे।
Q4. क्या बीए/बीकॉम वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि आपके पास 50% अंक हैं, तो आप आवेदन कर सकते हैं।
Q5. आधिकारिक अधिसूचना कहाँ से डाउनलोड करें?
उत्तर: आप इसे नाबार्ड की वेबसाइट [suspicious link removed] के करियर सेक्शन से डाउनलोड कर सकते हैं।
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आदित्य धर ने किया धुरंधर 2 का आधिकारिक ऐलान, इस दिन बड़े पर्दे आएगी नज़र..

Dhurandhar 2 Release Date : अफवाहों पर लगा पूर्णविराम
बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक आदित्य धर ने आखिरकार अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर 2’ (Dhurandhar 2) की रिलीज डेट को लेकर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से इंडस्ट्री में यह चर्चा जोरों पर थी कि फिल्म की रिलीज में देरी हो सकती है। कयास लगाए जा रहे थे कि मेकर्स किसी बड़े बॉक्स ऑफिस क्लैश से बचने के लिए डेट आगे बढ़ाएंगे।
हालांकि, 16 जनवरी 2026 को आदित्य धर ने एक प्रशंसक के इंस्टाग्राम पोस्ट का जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया कि फिल्म अपनी पूर्व निर्धारित तिथि यानी 19 मार्च 2026 को ही बड़े पर्दे पर आएगी। उन्होंने लिखा, “See you in cinemas on 19th March!” इस एक वाक्य ने उन सभी अफवाहों को शांत कर दिया है जो फिल्म के पोस्टपोन होने का दावा कर रही थीं।

बॉक्स ऑफिस पर ‘महा-संग्राम’: Dhurandhar 2 vs Toxic
19 मार्च 2026 की तारीख भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक बड़े टकराव की गवाह बनेगी। Dhurandhar 2 Release Date उसी दिन है जिस दिन कन्नड़ रॉकस्टार यश (Yash) की फिल्म ‘Toxic: A Fairytale For Grown-Ups’ रिलीज हो रही है।
‘Toxic’ का खौफ और चुनौती
- यश का कमबैक: KGF: Chapter 2 के बाद यह यश की पहली बड़ी फिल्म है।
- विशाल स्टारकास्ट: इस फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और अक्षय ओबेरॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
- डायरेक्शन: नेशनल अवॉर्ड विनर गीतू मोहनदास इस फिल्म को निर्देशित कर रही हैं, जिससे उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं।
धुरंधर: पहले भाग की ऐतिहासिक सफलता
‘धुरंधर 2’ को लेकर इतना शोर इसलिए है क्योंकि इसके पहले भाग ने बॉक्स ऑफिस के सभी समीकरण बदल दिए थे। 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई ‘धुरंधर’ ने भारत में 865 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर ‘पुष्पा 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है।
फिल्म की कहानी का आधार
यह फिल्म भारत के एक अंडरकवर एजेंट ‘हम्ज़ा अली मज़ारी’ (रणवीर सिंह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पाकिस्तान के कराची स्थित लयारी इलाके में घुसपैठ करता है। फिल्म की कहानी वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित है:
- IC-814 विमान अपहरण (1999)
- संसद पर हमला (2001)
- 26/11 मुंबई आतंकी हमला
- कराची का ऑपरेशन लयारी
Dhurandhar 2 की स्टार कास्ट (Ensemble Cast)
फिल्म की सफलता का एक बड़ा श्रेय इसकी दमदार कास्ट को जाता है। सीक्वल में भी वही जादू दोहराने के लिए मेकर्स ने बड़ी टीम तैयार की है:
| कलाकार | किरदार | भूमिका |
| रणवीर सिंह | हम्ज़ा अली मज़ारी / जसकीरत सिंह | अंडरकवर रॉ एजेंट |
| अक्षय खन्ना | रहमान डकैत | गैंगस्टर और मुख्य विलेन |
| संजय दत्त | एसपी चौधरी असलम | सख्त पुलिस अधिकारी |
| आर. माधवन | अजय सान्याल | आईबी डायरेक्टर (अजीत डोभाल से प्रेरित) |
| अर्जुन रामपाल | मेजर इकबाल | आईएसआई अधिकारी |
धुरंधर 2 में क्या होगा खास? (The Plot Twist)
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों की मानें तो Dhurandhar 2 पहले भाग से कहीं अधिक बड़े पैमाने पर बनाई जा रही है।
- हम्ज़ा की बैकस्टोरी: सीक्वल में दिखाया जाएगा कि कैसे एक साधारण लड़का ‘जसकीरत सिंह’ भारत का सबसे घातक एजेंट ‘हम्ज़ा’ बना।
- लयारी का अंत: फिल्म के दूसरे भाग में कराची के अंडरवर्ल्ड और आतंकी नेटवर्कों के पूरी तरह खात्मे की कहानी दिखाई जाएगी।
- 5 भाषाओं में रिलीज: पहले भाग की अपार सफलता को देखते हुए सीक्वल को हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज किया जाएगा।
निर्देशक आदित्य धर का ‘मास्टरस्ट्रोक’
आदित्य धर, जिन्होंने ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ से अपनी पहचान बनाई थी, अब ‘धुरंधर’ के साथ भारतीय जासूसी थ्रिलर (Spy Thrillers) को एक नई दिशा दे रहे हैं। फैंस उन्हें सोशल मीडिया पर ‘GOAT’ (Greatest of All Time) निर्देशक कहकर बुला रहे हैं। उन्होंने फिल्म में ‘रियलिज्म’ और ‘कमर्शियल एक्शन’ का जो संतुलन बनाया है, वही दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रहा है।
ट्रेड पंडितों की राय: बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन
ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि Dhurandhar 2 Release Date (19 मार्च) एक छुट्टी का हफ्ता हो सकता है, जिसका फायदा दोनों फिल्मों को मिलेगा।
- ओपनिंग प्रेडिक्शन: ‘धुरंधर 2’ पहले दिन हिंदी बेल्ट में 60-70 करोड़ की ओपनिंग ले सकती है।
- वर्ल्डवाइड कलेक्शन: फिल्म के 1500 करोड़ का आंकड़ा पार करने की संभावना जताई जा रही है।
फिल्म से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- ट्रेलर अपडेट: फिल्म का आधिकारिक ट्रेलर फरवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में रिलीज होने की उम्मीद है।
- संगीत: फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर (BGM) काफी चर्चा में है, जिसे फिल्म की जान माना जा रहा है।
- बजट: रिपोर्ट्स के अनुसार, सीक्वल का बजट 350 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Dhurandhar 2 Release Date का कन्फर्म होना उन करोड़ों फैंस के लिए बड़ी राहत है जो इस साल की सबसे बड़ी फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। रणवीर सिंह का ‘हम्ज़ा’ अवतार और अक्षय खन्ना का ‘रहमान डकैत’ वाला स्वैग एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लाने के लिए तैयार है। 19 मार्च 2026 को यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर भारत का ‘धुरंधर’ दक्षिण के ‘यश’ (Toxic) को कितनी कड़ी टक्कर देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Dhurandhar 2 Release Date क्या है?
उत्तर: धुरंधर 2 आधिकारिक तौर पर 19 मार्च 2026 को रिलीज होगी।
Q2. क्या धुरंधर 2 की रिलीज यश की Toxic के कारण टल गई है?
उत्तर: नहीं, निर्देशक आदित्य धर ने पुष्टि की है कि फिल्म 19 मार्च को ही रिलीज होगी और इसमें कोई देरी नहीं है।
Q3. धुरंधर 2 में रणवीर सिंह का क्या रोल है?
उत्तर: रणवीर सिंह इस फिल्म में एक अंडरकवर एजेंट की भूमिका निभा रहे हैं, जिसका नाम हम्ज़ा अली मज़ारी (असली नाम जसकीरत सिंह) है।
Q4. क्या अक्षय खन्ना सीक्वल का हिस्सा हैं?
उत्तर: हाँ, अक्षय खन्ना ‘रहमान डकैत’ के अपने लोकप्रिय किरदार में वापस लौटेंगे।
Q5. फिल्म धुरंधर किस पर आधारित है?
उत्तर: यह फिल्म वास्तविक जीवन के भारतीय जासूसों और आतंकवाद विरोधी मिशनों, जैसे ऑपरेशन लयारी और 26/11 के बाद की खुफिया कार्रवाई से प्रेरित है।
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