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Dollar vs Rupee 2026 : डॉलर के मुकाबले बेहाल हुआ रूपया , रिकॉर्ड निचले स्तर पर पंहुचा..

डॉलर बनाम रुपया (Dollar vs Rupee): 2026 में भारतीय मुद्रा का ऐतिहासिक संकट और भविष्य की संभावनाएं
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 एक ऐसी अग्निपरीक्षा बनकर उभरा है, जहां वित्तीय गलियारों से लेकर आम आदमी की रसोई तक सिर्फ एक ही चर्चा है—रुपये की ऐतिहासिक गिरावट। पिछले वर्ष, यानी 2025 में भारतीय रुपये ने लगभग 3.5% की कमजोरी देखी थी, जिसने इसे एशियाई मुद्राओं की सूची में सबसे निचले पायदानों पर लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन 2026 की शुरुआत ने उन तमाम आशंकाओं को हकीकत में बदल दिया, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 और 91 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
यह लेख इस मुद्रा संकट के पीछे छिपे अर्थशास्त्र, वैश्विक राजनीति के दांव-पेंच और आने वाले समय में आपकी जेब पर पड़ने वाले असर का एक विस्तृत विश्लेषण है।
1. Dollar vs Rupee : रुपये के गिरने का गणित , एक सरल विश्लेषण
मुद्रा का मूल्य किसी भी देश की आर्थिक सेहत का थर्मामीटर होता है। जब हम कहते हैं कि रुपया गिर रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि डॉलर की तुलना में रुपये की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हो गई है।
भारत एक आयात-प्रधान देश है। हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल से लेकर उन्नत तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स तक विदेशों से मंगवाते हैं। इन सबका भुगतान अंतरराष्ट्रीय मानक मुद्रा यानी अमेरिकी डॉलर में होता है। जब विनिमय दर (Exchange Rate) 80 से बढ़कर 91 हो जाती है, तो इसका अर्थ है कि उसी एक डॉलर के सामान के लिए अब हमें 11 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। यही अतिरिक्त बोझ देश में महंगाई के रूप में वापस लौटता है।

2. क्यों टूट रहा है रुपया? प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारण
रुपये की इस गिरावट को केवल घरेलू चश्मे से देखना गलत होगा। इसके पीछे वैश्विक महाशक्तियों की नीतियां और बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य जिम्मेदार हैं:
A. ‘ट्रंप इम्पैक्ट’ और नई व्यापार नीतियां:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से वैश्विक बाजारों में एक तरह की अनिश्चितता व्याप्त है। ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत सहित कई विकासशील देशों पर ऊंचे टैरिफ (Import Duty) लगाए गए हैं। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार कठिन हो गया है और विदेशी निवेशकों में घबराहट पैदा हुई है।
B. विदेशी निवेशकों की वापसी (Capital Outflow):
जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं या वहां की नीतियां घरेलू उद्योगों के पक्ष में होती हैं, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) की ओर ले जाते हैं। डॉलर की इस निकासी ने भारतीय बाजार में इसकी कमी पैदा कर दी है, जिससे रुपया कमजोर हुआ है।
C. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions):
यूक्रेन-रूस और मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी संघर्षों ने वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। अनिश्चितता के माहौल में डॉलर हमेशा एक ‘मजबूत ढाल’ की तरह व्यवहार करता है, जिससे उसकी मांग पूरी दुनिया में बढ़ जाती है।
3. ‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘ग्लोबल ब्राइट स्पॉट’ तक का सफर
आज से लगभग 15 साल पहले, भारत को दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं यानी ‘Fragile Five’ में गिना जाता था। तब भारत की जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों ही चिंताजनक स्थिति में थे।
आज 2026 में, भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। हमारे पास लगभग 900 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) है, जो मार्च 2014 के मुकाबले लगभग तीन गुना है। इसके बावजूद रुपये का गिरना यह दर्शाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं अब एक-दूसरे से इतनी जटिलता से जुड़ी हुई हैं कि घरेलू मजबूती भी बाहरी झटकों से पूरी तरह रक्षा नहीं कर सकती।
4. रुपये की कमजोरी का चौतरफा असर
रुपये में गिरावट एक ‘दोधारी तलवार’ की तरह है। इसके कुछ नुकसान हैं तो कुछ अप्रत्यक्ष लाभ भी।
नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact):
- आयातित महंगाई (Imported Inflation): कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होती है और अंततः सब्जियों से लेकर अनाज तक सब कुछ महंगा हो जाता है।
- विदेशी शिक्षा और पर्यटन: जो छात्र अमेरिका या यूरोप में पढ़ाई कर रहे हैं, उनके माता-पिता के लिए फीस चुकाना अब पहले से 15% अधिक महंगा हो गया है। इसी तरह विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को अपना बजट बढ़ाना पड़ रहा है।
- कॉर्पोरेट कर्ज: जिन भारतीय कंपनियों ने विदेशों से डॉलर में कर्ज लिया है, उनके लिए ब्याज और मूलधन की वापसी अब एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गई है।
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact):
- निर्यातकों की चांदी: आईटी (IT), फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनियों को फायदा होता है क्योंकि उन्हें अपनी सेवाओं के बदले डॉलर मिलते हैं, जिन्हें भुनाने पर अब ज्यादा रुपये प्राप्त होते हैं।
- रेमिटेंस (Remittance): विदेशों में काम करने वाले भारतीय जब अपने घर पैसा भेजते हैं, तो उनकी कमाई की वैल्यू भारत में बढ़ जाती है। इससे देश के ग्रामीण इलाकों में उपभोग (Consumption) को बढ़ावा मिलता है।
5. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रणनीति
आरबीआई मूकदर्शक बनकर रुपये को गिरते हुए नहीं देख रहा है। केंद्रीय बैंक समय-समय पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बाजार में बेचता है ताकि रुपये की तरलता (Liquidity) बनी रहे और इसमें अचानक आने वाली गिरावट को नियंत्रित किया जा सके। आरबीआई का मुख्य उद्देश्य ‘रुपये के स्तर’ को बचाना नहीं, बल्कि इसमें होने वाली ‘अत्यधिक अस्थिरता’ (Volatility) को रोकना है।
6. भविष्य का अनुमान: 2026 का अंत कैसा होगा?
विशेषज्ञों के बीच रुपये के भविष्य को लेकर मिली-जुली राय है:
- नकारात्मक परिदृश्य: यदि वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ता है और अमेरिका अपनी टैरिफ नीतियों को और सख्त करता है, तो रुपया 92 से 93 के स्तर तक भी जा सकता है।
- सकारात्मक परिदृश्य: भारत और अमेरिका के बीच यदि कोई ‘ट्रेड डील’ सफल होती है, तो विदेशी निवेश वापस लौटेगा। ऐसी स्थिति में रुपया साल के अंत तक 87 से 88 के स्तर पर वापस आ सकता है।
निष्कर्ष
रुपये का 91 के पार जाना निश्चित रूप से एक चेतावनी संकेत है, लेकिन यह भारत की आर्थिक मंदी का प्रतीक नहीं है। यह वैश्विक शक्तियों के बीच चल रहे ‘मुद्रा युद्ध’ और बदलती व्यापार नीतियों का परिणाम है। एक जागरूक नागरिक के रूप में, हमें आने वाले समय में अपनी बचत और निवेश योजनाओं को मुद्रा के उतार-चढ़ाव के अनुरूप ढालना होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के पास इस झटके को सहने के लिए पर्याप्त भंडार और मजबूत बुनियाद है। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि भारत इस संकट को अवसर में बदलकर अपने निर्यात को कितना बढ़ावा दे पाता है।
महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
Q1. क्या रुपये के गिरने से शेयर बाजार भी गिरेगा?
आमतौर पर रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं, जिससे गिरावट आ सकती है। हालांकि, आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के शेयरों में तेजी देखी जा सकती है।
Q2. डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती के लिए सरकार क्या कर सकती है?
सरकार आयात पर निर्भरता कम करके (जैसे एथेनॉल ब्लेंडिंग या इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देना) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को सरल बनाकर रुपये को मजबूती दे सकती है।
Q3. क्या मुझे अभी डॉलर खरीदना चाहिए?
यदि आपकी भविष्य की योजनाएं (जैसे शिक्षा या यात्रा) डॉलर से जुड़ी हैं, तो अस्थिरता को देखते हुए धीरे-धीरे डॉलर खरीदना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन सट्टेबाजी (Speculation) से बचना चाहिए।
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LPG गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, अब 10 या 20 दिन नहीं इतने दिन बाद मिलेगा सिलेंडर

LPG Booking New Rules : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के कारण देश में गैस संकट गहराता जा रहा है। लोगों को LPG सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसी बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार ने LPG गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
Table of Contents
LPG गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
सरकार ने देश में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियम बदल दिए हैं। मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के चलते और कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के मकसद से ये फैसला लिया गया है। बता दें कि रीफिल बुकिंग के लिए न्यूनतम इंतजार अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
मिडिल ईस्ट में युद्ध का एलपीजी की सप्लाई पर पड़ा असर
एनएनआई द्वारा सूत्रों के हवाले से दी गई खबर के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र और मिडिल ईस्ट में हो रहे युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। जिसका सीधा असर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की सप्लाई पर पड़ा है। इसी के चलते ये कदम उठाया गया है।

अब 10 या 20 दिन नहीं इतने दिन बाद मिलेगा सिलेंडर
आपको बता दें कि अब तक लोग 15 दिन के गैप में ही एलपीजी सिलेंडर बुक करते थे। जो कि 55 दिन तक का होता था। लेकिन अब कम से कम 25 दिनों को लोगों को इंतजार करना होगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक ‘ऐसे मामले सामने आए हैं कि जो लोग पहले 55 दिनों में एलपीजी सिलेंडर बुक करते थे, उन्होंने 15 दिनों में सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया है।
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UPSC 2026 में AIR-1 लाने वाले ‘अनुज अग्निहोत्री’ की कहानी जानकर चौंक जाएंगे

अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026: डॉक्टर से IAS बनने तक का प्रेरणादायक सफर
Anuj Agnihotri UPSC Topper: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। इस वर्ष परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल करने वाले उम्मीदवार अनुज अग्निहोत्री हैं। राजस्थान के जोधपुर जिले के छोटे से गांव राहता से आने वाले अनुज अग्निहोत्री की सफलता की कहानी आज पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। डॉक्टर से प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर यह साबित करता है कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
कौन हैं अनुज अग्निहोत्री (Who is Anuj Agnihotri)
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026 राजस्थान के जोधपुर जिले के राहता गांव के निवासी हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले अनुज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों से पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे अनुज ने आगे चलकर मेडिकल क्षेत्र को चुना और जोधपुर स्थित प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIMS) जोधपुर से वर्ष 2023 में मेडिकल की पढ़ाई पूरी की।
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मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद भी अनुज का लक्ष्य सिर्फ डॉक्टर बनकर रहना नहीं था। वे समाज और देश के लिए बड़े स्तर पर काम करना चाहते थे। यही सोच उन्हें सिविल सेवा की ओर ले गई और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की।
DANICS अधिकारी से IAS तक का सफर
UPSC परीक्षा देने से पहले अनुज अग्निहोत्री दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सिविल सेवा (DANICS) में कार्यरत थे। यह सेवा दिल्ली और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
DANICS में काम करते हुए अनुज को प्रशासनिक कार्यों का व्यावहारिक अनुभव मिला। इस अनुभव ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा के लिए और अधिक प्रेरित किया। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया। डॉक्टर से लेकर DANICS अधिकारी और अब IAS बनने तक का उनका सफर उनके दृढ़ संकल्प और मेहनत को दर्शाता है।
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UPSC परीक्षा के तीनों चरणों में शानदार प्रदर्शन
UPSC सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा में तीन चरण होते हैं:
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
- मुख्य परीक्षा (Mains)
- व्यक्तित्व परीक्षण / इंटरव्यू
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026 ने इन तीनों चरणों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सामान्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए परीक्षा के हर चरण में अपनी प्रतिभा साबित की।
UPSC CSE मुख्य परीक्षा 2025 अगस्त 2025 में आयोजित हुई थी। इसके बाद सफल उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू यानी व्यक्तित्व परीक्षण आयोजित किए गए, जो फरवरी 2026 में समाप्त हुए। अंतिम मेरिट सूची जारी होने पर अनुज अग्निहोत्री ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया।
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UPSC CSE 2025 result की प्रमुख बातें
UPSC द्वारा जारी अंतिम परिणाम के अनुसार कुल 958 उम्मीदवारों को विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अनुशंसित किया गया है। इनमें प्रमुख सेवाएं शामिल हैं:
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)
- भारतीय विदेश सेवा (IFS)
- भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
- विभिन्न केंद्रीय सेवाएं (Group A और Group B)
हालांकि अंतिम नियुक्ति भारत सरकार द्वारा घोषित रिक्तियों के आधार पर की जाएगी।
IAS में कुल रिक्तियां
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में कुल 180 रिक्तियां घोषित की गई हैं। इनका वर्गवार वितरण इस प्रकार है:
- सामान्य वर्ग – 74
- ओबीसी – 47
- अनुसूचित जाति – 28
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 18
- अनुसूचित जनजाति – 13
IFS में रिक्तियां
भारतीय विदेश सेवा (IFS) में कुल 55 पद घोषित किए गए हैं:
- सामान्य वर्ग – 22
- ओबीसी – 15
- अनुसूचित जाति – 8
- EWS – 6
- अनुसूचित जनजाति – 4
इन पदों पर नियुक्ति UPSC परीक्षा के नियमों और मेरिट के आधार पर की जाएगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने अनुज अग्निहोत्री
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2026 की सफलता यह साबित करती है कि किसी भी क्षेत्र की पृष्ठभूमि सिविल सेवा की तैयारी में बाधा नहीं बनती। मेडिकल क्षेत्र से आने के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में शानदार सफलता हासिल की। उनकी कहानी ये भी दिखाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में पहला स्थान हासिल करना उनके मजबूत इरादों का प्रमाण है।
1. Who is Anuj Agnihotri UPSC Topper?
अनुज अग्निहोत्री UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के टॉपर हैं, जिन्होंने AIR-1 हासिल किया।
2. अनुज अग्निहोत्री कहाँ के रहने वाले हैं?
वे राजस्थान के जोधपुर जिले के राहता गांव के रहने वाले हैं।
4. UPSC से पहले अनुज अग्निहोत्री क्या करते थे?
UPSC से पहले वे DANICS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार सिविल सेवा) में कार्यरत थे।
5. UPSC CSE 2025 में कितने उम्मीदवार चयनित हुए?
UPSC CSE 2025 में कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ है।
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पश्चिम बंगाल में धामी ने भरी हुंकार, ममता सरकार पर साधा निशाना, कहा- बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति ने विकास रोका
हिंगलगंज से धामी ने भरी हुंकार, परिवर्तन यात्रा की शुरुआत, बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़
West Bengal: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने हिंगलगंज विधानसभा क्षेत्र से परिवर्तन यात्रा की शुरुआत की। परिवर्तन यात्रा के तहत आयोजित जनसभा और रोड शो में भी उन्होंने भाग लिया। बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए पहुंचे।
मुख्य बिंदु
सनातनी हिन्दू न मामता दीदी के अण्डों से डरता है न डंडों से: सीएम धामी
अपने संबोधन में धामी ने सनातन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि “सनातनी हिंदू कभी डरता नहीं, वो सत्य और राष्ट्र के लिए खड़ा रहता है”। उनके इस वक्तव्य पर जनसभा में जोरदार उत्साह देखने को मिला। सीएम धामी बोले सनातनी हिन्दू न ममता दीदी के अण्डों से डरता है और न उनके डंडों से.
धामी का हमला: बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति ने विकास रोका
धामी ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया गया है।उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को कर्मवीर बनाने के बजाय भत्तावीर बनाया जा रहा है। इससे युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हो रहा है।
अपने संबोधन में उठाया अवैध घुसपैठ का मुद्दा
धामी ने कहा कि आज पश्चिम बंगाल करोड़ों के कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और मातृशक्ति स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के कर्मचारियों को भी उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है। कार्मिकों को उनका डीए और महंगाई भत्ता तक समय पर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य कमजोर हो रहा है। धामी ने सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस गंभीर विषय पर राज्य सरकार की चुप्पी चिंताजनक है।
भाजपा सरकार आते ही ख़त्म होगी अराजक व्यवस्था
धामी ने कहा कि भाजपा का स्पष्ट संकल्प है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही अराजक व्यवस्था समाप्त की जाएगी और राज्य में सुशासन, सुरक्षा और विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा।उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ सर्वोच्च सिद्धांत है और इसी विचार के साथ पार्टी देश और समाज की सेवा कर रही है।
देशभर में ख्याति पा रहा धामी का सुशासन मॉडल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने धाकड़ और निर्णायक फैसलों के कारण देशभर में अलग पहचान बना चुके हैं। उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून, अवैध मदरसों पर कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने जैसे फैसले अन्य राज्यों के लिए भी नजीर बन रहे हैं। यही कारण है कि आज उत्तराखंड से बाहर भी लोग धामी को सुनना चाहते हैं और उनके नेतृत्व को मजबूत व निर्णायक शासन का प्रतीक मानते हैं।
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