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क्या है G RAM G Bill ?, बिल पास होने से मनरेगा में होंगे कौन से बदलाव, जानें यहां

G RAM G Bill : आज यानी कि 18 दिसंबर को संसद के मॉनसून सत्र में लोकसभा में ग्रामीण रोजगार से जुड़ा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी कि VB-G RAM G Bill पास हो गया है। जिसके बाद इसे लेकर चर्चाएं हैं कि ये क्या है और इसके पास होने से मनरेगा में क्या बदलाव होंगे ? तो आईए जानते हैं।
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क्या है G RAM G Bill ?
G RAM G Bill जो कि आज देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे लेकर ना केवल विपक्ष देशभर में प्रदर्शन कर रहा है बल्कि आम जनता भी जानना चाहती है कि ये है क्या ?, तो आपको बता दें कि VB-G RAM G बिल का फुल फॉर्म विकासशील भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) है। ये बिल ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 के विज़न से जोड़ने की कोशिश करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास को तेज़, आधुनिक और टिकाऊ बनाना है।

VB G RAM G बिल का विपक्ष क्यों कर रहा विरोध ?
लोकसभा में VB G RAM G बिल पर करीब 14 घंटे तक चर्चा हुई। इसमें 98 सांसदों ने हिस्सा लिया लेकिन विपक्ष इसका लगातार विरोधस करता रहा। विपक्ष की मांग थी कि इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाए। लेकिन सरकार ने इस मांग को ना मानते हुए इस बिल को पारित कर दिया है।
विपक्ष का कहना है कि ये महात्मा गांधी का अपमान है। जबकि इस पर सदन में शिवराज सिंह चौहान ने जवाब देते हुए कहा कि मनरेगा का नाम शुरुआत में महात्मा गांधी के नाम पर नहीं रखा गया था। यह योजना पहले नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम) के नाम से जानी जाती थी। वर्ष 2009 के चुनावों से पहले इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया। जिसके बाद ये महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कहलाने लगी।

बिल पास होने के बाद मनरेगा में होंगे कौन से बदलाव
G RAM G Bill 2025 के पास होने के बाद लोगों के जहन में सवाल उठ रहे हैं कि अब मनरेगा में कौन से बदलाव होंगे। तो आपको बता दें कि इस बिल के पास होने के बाद दावा किया गया है कि ग्रामीण परिवारों को अब पहले से ज्यादा काम मिलेगा।

नए बिल के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान है। इसके साथ ही खर्च की जिम्मेदारी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां पहले मनरेगा में पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठाती थी। तो वहीं अब इसमें राज्यों का भी हिस्सा होगा। राज्यों को 10 से लेकर 40 प्रतिशत तक खर्च वहन करना पड़ेगा।
1. G RAM G Bill क्या है?
G RAM G Bill का पूरा नाम विकासशील भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM G Bill, 2025 है। यह बिल ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को नए ढांचे में ढालने की कोशिश करता है।
2. इस बिल को क्यों लाया गया है?
इसका मकसद ग्रामीण रोजगार को सिर्फ मजदूरी तक सीमित न रखकर उसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ना और गांवों का दीर्घकालीन विकास करना है।
3.क्या ये मनरेगा की जगह लेगा?
सरकार का कहना है कि यह मनरेगा से आगे बढ़कर एक आधुनिक और परिणाम आधारित मॉडल पेश करता है, जिसमें रोजगार के साथ विकास पर ज़ोर है।
4. रोजगार के दिनों में क्या बदलाव होगा?
नए बिल के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिन की जगह 125 दिन तक रोजगार देने का प्रावधान किया गया है।
5. विपक्ष इस बिल का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि यह बिल मनरेगा की मूल भावना को कमजोर करता है और महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना में बदलाव को अपमान के रूप में देखा जा रहा है।
Uttarakhand
पहाड़ों का मानसून मैदानों की ओर शिफ्ट? उत्तराखंड में बारिश का बदला पैटर्न, वैज्ञानिक भी हैरान

Uttarakhand Monsoon : उत्तराखंड में मानसून का पैटर्न बदल रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक उत्तराखंड में पहाड़ों से ज्यादा अब मैदानी इलाकों में भारी बारिश हो रही है। इस रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।
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उत्तराखंड में बदल रहा मानसून का पैटर्न
उत्तराखंड के मानसून को लेकर एक अध्ययन में मौसम के बदलते पैटर्न की तस्वीर सामने आई है। लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि मानसून के दौरान अब पहाड़ी इलाकों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या अधिक दर्ज हो रही है।
पहाड़ों का मानसून मैदानों की ओर हो रहा शिफ्ट?
बता दें कि ये अध्ययन मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह और मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल ने किया है, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 1983 से 2023 तक यानी 41 साल के मानसूनी बारिश के आंकड़ों का अध्ययन किया।
इसके लिए उत्तराखंड के चार मौसम केंद्रों को आधार बनाया गया। इनमें देहरादून और पंतनगर को मैदानी क्षेत्र, जबकि मुक्तेश्वर और टिहरी को पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधि माना गया।

देहरादून में सबसे ज्यादा भारी बारिश वाले दिन
अध्ययन में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश वाले दिनों का औसत निकाला गया। इसके अनुसार मानसून के दौरान देहरादून में ऐसे दिनों की औसत संख्या 7.1 रही। पंतनगर में यह आंकड़ा 4.2 दिन दर्ज हुआ।
वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में मुक्तेश्वर में औसतन 2.3 दिन और टिहरी में केवल 1.7 दिन भारी या उससे अधिक बारिश वाले रहे। आंकड़ों की तुलना करने पर मैदानी इलाकों के दोनों केंद्र पहाड़ी क्षेत्रों के दोनों केंद्रों से आगे नजर आए। यानी पिछले चार दशकों के आंकड़ों के आधार पर अध्ययन ये संकेत देता है कि मानसून के दौरान भारी बारिश की घटनाएं मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ज्यादा हो रही हैं।
जुलाई-अगस्त में हो रही सबसे ज्यादा बारिश
अध्ययन में जुलाई और अगस्त को उत्तराखंड के मानसून के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण महीने बताया गया है। जुलाई में राज्य में औसतन 417.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज होती है, जबकि अगस्त में औसत बारिश करीब 385.7 मिलीमीटर रहती है।
इन दोनों महीनों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या भी अधिक रहती है। साथ ही, जून और सितंबर की तुलना में जुलाई और अगस्त में बारिश के पैटर्न में साल-दर-साल बदलाव अपेक्षाकृत कम देखा गया।

भारी बारिश का बड़ा हिस्सा मैदानी क्षेत्रों में
शोध में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश को एक साथ ‘चरम बारिश’ की श्रेणी में रखा गया। अध्ययन के मुताबिक मानसून के दौरान होने वाली कुल बारिश में इस तरह की चरम बारिश का हिस्सा देहरादून में औसतन 37 प्रतिशत है।
पंतनगर में यह हिस्सेदारी 33 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके मुकाबले मुक्तेश्वर में 24 प्रतिशत और टिहरी में 19 प्रतिशत बारिश चरम बारिश की श्रेणी में आती है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अध्ययन में शामिल चार मौसम केंद्रों में मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश का अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा भारी या उससे अधिक तीव्रता वाली बारिश के रूप में दर्ज हुआ है।
प्रदे बदलते मौसम पैटर्न पर बढ़ी चिंता
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बारिश के स्वरूप में बदलाव का असर सड़क, यातायात, नदियों और पहाड़ी ढलानों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर कम समय में होने वाली तेज बारिश अचानक जलभराव, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी परिस्थितियों का खतरा बढ़ा सकती है।
हालांकि, ये अध्ययन केवल चार मौसम केंद्रों के 41 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए पूरे उत्तराखंड में बारिश के बदलते स्वरूप को समझने के लिए अन्य क्षेत्रों और अधिक मौसम केंद्रों के आंकड़ों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण होगा।
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देहरादून के फाइव स्टार होटलों में छापा, किचन में मचा हड़कंप, जांच के लिए भेजे गए सैंपल

Dehradun News : खाद्य पदार्थों में मिलावट और गुणवत्ता के मानकों से किसी भी तरह का समझौता रोकने के लिए उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़े होटल प्रतिष्ठानों की जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने देहरादून-मसूरी रोड स्थित प्रमुख फाइव स्टार होटलों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया।
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देहरादून के फाइव स्टार होटलों में छापा
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान के दौरान टीमों ने बड़े होटलों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटल के किचन, स्टोर रूम और खाद्य सामग्री के रखरखाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा।
छापे से फाइव स्टार होटलों के किचन में मचा हड़कंप
जांच के दौरान खाद्य पदार्थों के भंडारण, कच्चे माल की गुणवत्ता, पैकेज्ड फूड की स्थिति, साफ-सफाई और खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के इंतजामों की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने होटल संचालकों और खाद्य कारोबारियों को निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता नियमों का पालन करने के निर्देश दिए।

दो होटलों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूने
निरीक्षण के दौरान विभाग की टीम ने दो अलग-अलग बड़े होटलों से खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए। एक होटल से मसाले का नमूना, जबकि दूसरे होटल से तैयार दाल का सैंपल जांच के लिए लिया गया है। दोनों नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एनालॉग पनीर पर भी विभाग की नजर
अभियान के दौरान विभाग ने विशेष रूप से एनालॉग पनीर और अन्य गैर-दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी जांच की। अधिकारियों ने खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता, लेबलिंग, स्रोत या निर्धारित मानकों में गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य होटल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने कारोबारियों से साफ-सफाई बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
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उत्तराखंड में भूकंप से डोली धरती, टिहरी और उत्तरकाशी में महसूस किए गए भूकंप के झटके

Earthquake in Uttarakhand : उत्तराखंड के उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल जिलों में सोमवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। उत्तरकाशी में भूकंप की तीव्रता 4.2 दर्ज की गई, जबकि टिहरी गढ़वाल में 2.0 तीव्रता का हल्का झटका आया। दोनों जिलों में भूकंप के कारण फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
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उत्तराखंड में भूकंप से डोली धरती
उत्तराखंड में रविवार रात और सोमवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। उत्तरकाशी जिले में भूकंप का असर यमुना घाटी और गंगा घाटी के कई इलाकों में महसूस किया गया। देर रात अचानक धरती हिलने से लोगों में दहशत फैल गई। कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक, उत्तरकाशी में भूकंप का झटका रात करीब 1:21 बजे महसूस किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इसकी तीव्रता 4.2 रही।
राजगढ़ी क्षेत्र के आसपास बताया जा रहा है केंद्र
भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी जिले में बताया गया है। इसकी गहराई जमीन के अंदर करीब 10 किलोमीटर दर्ज की गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बड़कोट तहसील मुख्यालय के पास राजगढ़ी क्षेत्र के आसपास बताया जा रहा है।

तेज झटके के बावजूद जिले में अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
टिहरी में 2.0 तीव्रता का भूकंप
उत्तरकाशी के अलावा टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्तिनगर और घनसाली क्षेत्र में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। यहां भूकंप की तीव्रता 2.0 दर्ज की गई।
यह भूकंप जमीन के करीब 5 किलोमीटर नीचे आया था। इसकी तीव्रता कम होने के कारण झटके हल्के रहे। टिहरी जिले में भी भूकंप से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।
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