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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान अब पहाड़ पर भी सिखाएगा योग, मई माह से पाठ्यक्रम की होगा शुरू।

हरिद्वार – नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) पर्वतारोहण के साथ अब पहाड़ पर योग भी सिखाएगा। संस्थान आगामी मई माह से पहली बार योग में एक प्रारंभिक पाठ्यक्रम (इंट्रोडक्टरी कोर्स) शुरू करने जा रहा है। इस कोर्स में प्रशिक्षुओं को योग आसनों के साथ पहाड़ों पर भी योगाभ्यास कराया जाएगा।

देश के प्रतिष्ठित पर्वतारोहण संस्थानों में से एक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान पर्वतारोहण से लेकर साहसिक, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, स्कीइंग और माउंटेन टेरेन बाइकिंग कोर्स का प्रशिक्षण देता है। अब इन कोर्सों की फेहरिस्त में योग विषय भी जुड़ने जा रहा है। संस्थान आगामी मई माह से पहली बार योग पर प्रारंभिक पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है।
शिखर से मुद्रा तक: जहां पहाड़ ध्यानमग्नता से मिलते हैं” कि टैग लाइन से शुरू होने वाले इस कोर्स में न केवल संस्थान में प्रशिक्षुओं को योग आसन व योग की शैलियों बताई जाएंगी, बल्कि उन्हें पहाड़ाें पर भी योगाभ्यास का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्थान के रजिस्ट्रार प्रवीन कुमार ने कोर्स के विषय में जानकारी देते हुए पहली बार शुरू होने जा रहे इस कोर्स की अवधि दस दिनों की होगी। जिसमें प्रशिक्षुओं को संस्थान सहित संस्थान के प्रशिक्षण तेखला सहित अन्य जगह पर्वतों पर भी योग सिखाया जाएगा। मई में शुरू होने वाला कोर्स 7 मई से 16 मई तक चलेगा।
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हरिद्वार में विहिप मार्गदर्शक बैठक में संतों ने कहा, सीएम धामी सनातन के रक्षक…

Haridwar News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भूपतवाला, हरिद्वार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिन्दू परिषद पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय चेतना के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि परिषद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त माध्यम है।
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संत बोले – सीएम धामी सनातन के रक्षक…
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देश और विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में समाज को जागरूक, संगठित एवं अपनी सांस्कृतिक जड़ों एवं मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक एकता, समरसता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी वर्गों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक राजधानी कते रूप में स्थापित करने पर हो रहा काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसे कार्यों ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
केदारखण्ड एवं मानसखण्ड क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास एवं सौन्दर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार तथा हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर एवं गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

सरकार उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचानके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत एवं मूल स्वरूप के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार एवं समान कानून सुनिश्चित किए गए हैं। सख्त भू-कानून लागू कर प्रदेश की भूमि, संस्कृति एवं जनहितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है तथा कानून व्यवस्था एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है, जहां भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं सभ्यता से संबंधित विषयों पर अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है।
मुख्यमंत्री के संबोधन से पूर्व विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल से जुड़े संत-महात्माओं ने उन्हें धर्मरक्षक, सनातन सेवा के लिए समर्पित तथा देवभूमि के देवालयों का सेवक बताते हुए पूरे संत समाज की ओर से आशीर्वाद प्रदान किया।
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हरिद्वार जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, IAS अफसर को किया बर्खास्त, तत्कालीन DM पर हुआ ये एक्शन

Haridwar News : हरिद्वार जमीन घोटाले में उत्तराखंड सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की जांच और समीक्षा के बाद कई अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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हरिद्वार जमीन घोटाले में IAS अफसर को किया बर्खास्त
प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।
तत्कालीन DM पर भी हुआ एक्शन
उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था।

प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।
भ्रष्टाचार के मामलों में नहीं होगा समझौता – सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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हरिद्वार में सिडकुल में टैक्स चोरी का बड़ा मामला आया सामने, पकड़ी गई करोड़ों की चोरी

Haridwar News : उत्तराखंड के हरिद्वार में सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में टैक्स चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) ने एक खुफिया सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी और सर्कुलर ट्रेडिंग का भंडाफोड़ किया है।
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सिडकुल में टैक्स चोरी का बड़ा मामला आया सामने
राज्य कर उपायुक्त कार्तिकेय वर्मा के अनुसार, ये कंपनियां आपस में ही सर्कुलर ट्रेडिंग (Circular Trading) कर रही थीं। इसका मतलब है कि बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के, ये कंपनियां केवल कागजों पर एक-दूसरे को बिल जारी कर रही थीं।
कंपनियों ने अवैध रूप से उठाया ITC का लाभ
इस फर्जीवाड़े के जरिए कंपनियों ने अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाया और अपने टैक्स रिटर्न में कैश भुगतान को लगभग शून्य या बेहद कम कर दिया। जब अधिकारियों ने फैक्ट्री परिसरों में जाकर वास्तविक स्टॉक का मिलान किया, तो उनके ऑन-साइट स्टॉक और बही-खातों (ITC आंकड़ों) में भारी अंतर पाया गया।

जीएसटी चोरी और सर्कुलर ट्रेडिंग का भंडाफोड़
इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए 4 विशेष टीमें बनाई गई थीं, जिनमें सचल दल और ऑडिट इकाई के 12 अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल डेटा की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद कंपनियों पर अंतिम टैक्स लायबिलिटी और अतिरिक्त पेनल्टी तय की जाएगी। विभाग के अनुसार, सिडकुल की कई अन्य कंपनियां भी अभी रडार पर हैं।
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