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कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका: खाली पेट पिएं यह एक गिलास जूस….

सर्दियों में अदरक का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। खासकर अदरक का जूस शरीर में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अदरक में जिंजरोल, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने और इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं।
अदरक का जूस, खासकर सुबह खाली पेट पीने से कई लाभ होते हैं। यह न केवल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है, बल्कि वजन घटाने और दिल की सेहत को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा, अदरक में विटामिन बी6, विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो रक्तचाप और हृदय रोगों के जोखिम को कम करते हैं।
अदरक का जूस कैसे बनाएं:
- अदरक के 2-3 इंच टुकड़े को कद्दूकस या कुचलकर उसका जूस निकालें।
- जूस को मलमल के कपड़े में डालकर कसकर निचोड़ लें।
- स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें थोड़ा शहद और नींबू मिला सकते हैं।
- सुबह खाली पेट 1-2 चम्मच जूस से शुरुआत करें।
अदरक के फायदे:
- खराब कोलेस्ट्रॉल कम करना: अदरक का जूस कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और हृदय स्वास्थ्य को सुधारता है।
- वजन घटाना: अदरक का सेवन वजन घटाने में मदद करता है और शरीर के मेटाबोलिज्म को तेज करता है।
- इम्युनिटी को बढ़ाना: अदरक में पाए जाने वाले विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
- सर्दी-खांसी में राहत: अदरक की चाय सर्दी-खांसी से राहत देने के लिए भी प्रभावी है।
अदरक का जूस पीकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं और कई बीमारियों से बच सकते हैं।
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आपके बच्चे के फोन में भी है ये गेम तो हो जाएं सावधान !, एक टास्क ने ले ली तीन सगी बहनों की जान

Uttar Pradesh News : आपके बच्चे भी खेलते ऑनलाइन गेम्स तो जाएं सावधान, एक टास्क ने ले ली तीन सगी बहनों की जान
UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ऑनलाइन गेमिंग की लत में आकर तीन सगी बहनों ने खुदखुशी कर ली। इस मामले के सामने आने के बाद से हर कोई हैरान है और ये मामला कई सवाल भी उठा रहे हैं।
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गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने छत से कूदकर की खुदखुशी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग लड़कियों ने एक अपार्टमेंट की नौंवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। शुरूआत में लोगों को लग रहा था कि ये एक सामान्य आत्महत्या का मामला है। लेकिन प्रारंभिक जांच के बाद हुए खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों लड़कियों ने अवसाद या परेशानी के चलते आत्महत्या नहीं की थी। बल्कि ऑनलाइन गेमिंग की लत थी जिसे छोड़ने को कहने पर इसे छोड़ने के बजाय लड़कियों ने मौत को गले लगाना सही समझा। इस खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। लड़कियों ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है जिसमें उन्होंने माता-पिता से माफी मांगकर अपनी डायरी को पढ़ने को कहा है।

ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण तीनों ने ले ली अपनी जान
गाजियाबाद के डीसीपी निमिष पाटिल ने मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस को एक नोट मिला है जिसमें उन्होंने लिखा है कि वो कोरियन कल्चर से प्रभावित थी और इसी के चलते उन्होंने अपनी जान ली है।
कोरियाई टास्क आधारित गेम खेलती थी तीनों
एसीपी अतुल कुमार सिंह कुमार ने बताया कि तीनों लड़कियां क कोरियाई टास्क-आधारित इंटरएक्टिव- ‘लव गेम’ खेलती थीं और उन्हें इसकी लत लग गई थी। ज्यादातर समय वो Online games खेलती रहती थी इसीलिए माता-पिता ने उनकी इसे लेकर नाराजगी जताई। परिजनों ने तीनों बहनों के फोन इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी इसी के चलते उन्होंने ये कदम उठा लिया।

अगर आपके बच्चे भी खेलते हैं ऑनलाइन गेम तो दें ध्यान
गाजियाबाद की इस घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। इसके साथ ही परिजनों के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा किया है। अगर आपके बच्चे भी गेम खेलते हैं तो आपको बच्चों पर ध्यान देने की खास जरूरत है। बच्चे किस तरीके का Online game खेल रहे हैं कितने समय तक खेल रहे हैं या फिर वो फोन पर क्या कर रहे हैं परिजनों को इस बात का खास ख्याल रखने की जरूरत है।
ये घटना ऐसे परिजनों की आंखें खोलने के लिए काफी है जो व्यस्त होने के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं देते या फिर बच्चों को टाइमपास करने के लिए फोन पकड़ा देते हैं। धीरे-धीरे बच्चों को इसकी आदत पड़ जाती है। कई बार जहां बच्चों को ऑनलाइन गेम्स की लत लग जाती है तो कई मामलों में बच्चों के गलत आदतें सीखने की बात भी सामने आई है। फोन के कारण छोटी उमर में ही बच्चे अश्लील कटेंट देख रहे हैं जो कि बिल्कुल गलत है।
Business
Gold Silver Price Today: सोने में फिर उछाल, चांदी भी तेज, जानिए आज का ताजा भाव…

Gold Silver Price Today 04-02-2026
जनवरी का महीना देश के सर्राफा बाजार के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। Gold Silver Price Today को लेकर निवेशकों और आम लोगों की नजरें लगातार बदलती कीमतों पर टिकी रहीं। कभी रिकॉर्ड तेजी तो कभी अचानक गिरावट ने बाजार की चाल को और भी दिलचस्प बना दिया। इसकी बड़ी वजहें रहीं वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चित माहौल और रुपये की कमजोरी। इन सब कारणों से सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में लोगों की पहली पसंद बनता दिखा।
जनवरी में क्यों उछले सोने-चांदी के दाम?
जनवरी की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सहज नहीं रहे। कई देशों के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले कई मुद्राओं की कमजोरी ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की ओर मोड़ा। ऐसे समय में सोना और चांदी हमेशा से भरोसेमंद माने जाते हैं। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही हफ्तों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के अंत तक सोने की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि, इसके बाद मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों में थोड़ी राहत आने से कीमतों में तेज गिरावट भी दर्ज की गई। यही वजह है कि Gold Silver Price Today निवेशकों के लिए सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार की दिशा समझने का अहम संकेत बन चुका है।
रिकॉर्ड हाई से तेज गिरावट तक का सफर
GoodReturns के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत 29 जनवरी को अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 17,885 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई थी। यह स्तर अपने आप में चौंकाने वाला था, क्योंकि कुछ ही समय पहले तक ऐसे आंकड़ों की कल्पना भी मुश्किल लगती थी।
लेकिन इसके बाद बाजार ने तेजी से करवट ली। महज छह दिनों के भीतर सोने की कीमत में करीब 2,492 रुपये प्रति ग्राम और 10 ग्राम पर लगभग 24,920 रुपये की गिरावट देखने को मिली। मंगलवार, 3 फरवरी को 24 कैरेट सोना 15,393 रुपये प्रति ग्राम पर आ गया, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 14,110 रुपये प्रति ग्राम दर्ज की गई।
यह गिरावट उन लोगों के लिए राहत लेकर आई, जो लंबे समय से सोने की खरीदारी का इंतजार कर रहे थे। वहीं, ऊंचे स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए यह दौर थोड़ा मुश्किल रहा।
आज का सोने का भाव: फिर लौटी तेजी
बुधवार को बाजार में एक बार फिर हल्की तेजी देखने को मिली। Gold Silver Price Today की बात करें तो 24 कैरेट सोने की कीमत आज 16,053 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल के मुकाबले 660 रुपये ज्यादा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी 605 रुपये की बढ़त के साथ 14,715 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया।
18 कैरेट सोने की कीमत में भी मजबूती दर्ज की गई है। आज इसका भाव 495 रुपये बढ़कर 12,040 रुपये प्रति ग्राम हो गया। यह साफ संकेत है कि गिरावट के बाद बाजार में दोबारा खरीदारी का रुझान लौट रहा है।
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें
भारत में सोने के दाम शहरों के हिसाब से थोड़े बहुत बदलते रहते हैं, लेकिन आज ज्यादातर बड़े शहरों में भाव लगभग एक जैसे रहे।
- दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, अयोध्या, गुड़गांव, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, लुधियाना, अमृतसर जैसे शहरों में
- 24 कैरेट सोना: 16,068 रुपये प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 14,730 रुपये प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: 12,055 रुपये प्रति ग्राम
- मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, मैसूर, अमरावती में
- 24 कैरेट सोना: 16,053 रुपये प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 14,715 रुपये प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: 12,040 रुपये प्रति ग्राम
- चेन्नई, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे दक्षिण भारतीय शहरों में
- 24 कैरेट सोना: 16,256 रुपये प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 14,900 रुपये प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: 12,750 रुपये प्रति ग्राम
इन आंकड़ों से साफ है कि दक्षिण भारत में सोने की कीमतें उत्तर और पश्चिमी हिस्सों की तुलना में थोड़ी ज्यादा बनी हुई हैं।
चांदी की कीमतों में भी बड़ा उतार-चढ़ाव
सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी जनवरी के दौरान जबरदस्त हलचल देखने को मिली। Gold Silver Price Today में चांदी का जिक्र करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि हाल के दिनों में इसकी चाल सोने से भी ज्यादा तेज रही है।
आज भारत में चांदी की कीमत 320 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल के मुकाबले 40 रुपये ज्यादा है। वहीं, एक किलो चांदी का भाव 3,20,000 रुपये पहुंच गया है, जिसमें एक ही दिन में करीब 40,000 रुपये का उछाल दर्ज किया गया।
जनवरी में चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया था। महीने के दौरान इसकी कीमतें 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार चली गई थीं। हालांकि, इसके बाद तेज गिरावट आई और सिर्फ एक हफ्ते के भीतर चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे आ गई। इस उतार-चढ़ाव ने साफ कर दिया कि चांदी में मुनाफे के साथ जोखिम भी बराबर बना हुआ है।
आगे क्या रह सकता है रुझान?
बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में Gold Silver Price Today पूरी तरह से वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहता है और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने-चांदी में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, अगर हालात सुधरते हैं और निवेशक जोखिम लेने को तैयार होते हैं, तो कीमतों में नरमी भी आ सकती है।
आम निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
जो लोग गहनों के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए मौजूदा गिरावट और हल्की तेजी के बीच का समय ठीक माना जा सकता है। वहीं, निवेश के नजरिये से देखें तो एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
कुल मिलाकर, जनवरी ने यह साफ कर दिया कि सोना और चांदी आज भी भरोसेमंद निवेश विकल्प हैं, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव अब पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गया है। ऐसे में Gold Silver Price Today पर नजर रखना और सोच-समझकर फैसला लेना ही सबसे बेहतर रणनीति है।
health and life style
भारत में Nipah Virus की वापसी –लक्षण और बचाव की पूरी जानकारी

कोलकाता मे Nipah Virus के नए मामलें
भारत एक बार फिर स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के केंद्र में है, जहां देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में Nipah Virus (NiV) के नए मामलों ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आए संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। हालांकि राहत की बात यह है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निरंतर सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको निपाह वायरस के वर्तमान प्रकोप, इसके इतिहास, इससे जुड़े खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
1. ताजा स्थिति: पश्चिम बंगाल में निपाह की दस्तक (2025-26)
हाल ही में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से निपाह वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह घटना तब प्रकाश में आई जब दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में दो स्वास्थ्य कर्मियों (नर्स) में संदिग्ध लक्षण देखे गए।
क्या है पूरा मामला?
जनवरी 2026 की शुरुआत में, बारासात (कोलकाता के पास) के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले दो नर्सों (एक पुरुष और एक महिला) की तबीयत अचानक बिगड़ी। उनमें तेज बुखार और दिमागी सूजन (एन्सेफलाइटिस) के लक्षण पाए गए। 13 जनवरी 2026 को पुणे स्थित ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (NIV) ने इन नमूनों में निपाह वायरस की पुष्टि की।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मामला सामने आते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर स्थिति की समीक्षा की और एक ‘नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम’ को राज्य में भेजा।
- कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग: स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लगभग 200 लोगों (जिनमें परिवार वाले और अस्पताल के कर्मचारी शामिल थे) की पहचान की और उनकी जांच की। राहत की बात यह रही कि सभी संपर्कों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वायरस का सामुदायिक फैलाव (Community Transmission) नहीं हुआ है।
- वर्तमान स्थिति: 27 जनवरी 2026 को ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (NCDC) ने घोषणा की कि दिसंबर के बाद से कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
2. केरल में भी रहा वायरस का असर (2025)
पश्चिम बंगाल से पहले, वर्ष 2025 के मध्य में दक्षिण भारतीय राज्य केरल में भी निपाह वायरस ने अपना कहर बरपाया था। जुलाई 2025 के आसपास केरल के मलप्पुरम और कोझिकोड जिलों में संक्रमण के मामले देखे गए थे।
- केरल में 2025 के दौरान कुल 4 मामले सामने आए, जिनमें से दुर्भाग्यवश 2 लोगों की मृत्यु हो गई।
- केरल सरकार ने पिछले अनुभवों (2018, 2019, 2021, 2023) से सीखते हुए बहुत तेजी से कंटेनमेंट जोन बनाए और स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और WHO का बयान
भारत में आए इन इक्का-दुक्का मामलों ने पड़ोसी देशों को भी सतर्क कर दिया है।
- स्क्रीनिंग: थाईलैंड, सिंगापुर, नेपाल, म्यानमार और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत से आने वाले यात्रियों के लिए हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी है।
- WHO का आश्वासन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 जनवरी 2026 को जारी अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत से इस वायरस के वैश्विक स्तर पर फैलने का जोखिम “कम” (Low) है। WHO ने भारत पर किसी भी तरह के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता को खारिज कर दिया है, क्योंकि भारत के पास इस वायरस को ट्रैक करने और रोकने की मजबूत क्षमता मौजूद है।
4. आखिर क्या है Nipah Virus? (Understanding Nipah Virus)
निपाह वायरस (NiV) एक ज़ूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus) है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह पैरामिक्सोविरिडे (Paramyxoviridae) परिवार से ताल्लुक रखता है।
मुख्य वाहक (Natural Host)
इस वायरस का प्राकृतिक वाहक फ्रूट बैट्स (Fruit Bats) यानी फल खाने वाले चमगादड़ हैं, जिन्हें ‘फ्लाइंग फॉक्स’ भी कहा जाता है। ये चमगादड़ बिना बीमार हुए अपने शरीर में वायरस को ले जा सकते हैं और अपने मल, मूत्र या लार के जरिए इसे फैला सकते हैं।
इतिहास
- 1998 (मलेशिया): निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के ‘सुंगई निपाह’ गांव में हुई थी। वहां यह सूअरों के जरिए इंसानों में फैला था।
- भारत में इतिहास: भारत में इसका पहला प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में देखा गया था। इसके बाद 2007 में नादिया (पश्चिम बंगाल) और फिर 2018 से केरल में इसके मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

5. यह कैसे फैलता है? (Transmission)
निपाह वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से तीन तरीकों से होता है:
- जानवरों से इंसानों में: यदि कोई व्यक्ति संक्रमित चमगादड़ या सूअर के सीधे संपर्क में आता है, या उनके मल-मूत्र से दूषित चीजों को छूता है।
- दूषित भोजन: यह भारत और बांग्लादेश में संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है। चमगादड़ अक्सर खजूर के पेड़ों से रस पीते हैं या फलों को कुतरते हैं। यदि कोई इंसान कच्चा खजूर का रस (ताड़ी) पीता है या चमगादड़ द्वारा कुतरा हुआ फल खाता है, तो वह संक्रमित हो सकता है।
- इंसान से इंसान में: यह आमतौर पर अस्पतालों में या परिवार के सदस्यों के बीच होता है जब वे किसी संक्रमित मरीज की देखभाल कर रहे होते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके शारीरिक तरल पदार्थों (Blood, Saliva) के संपर्क में आने से यह स्वस्थ व्यक्ति को बीमार कर सकता है।
6. लक्षण और पहचान (Symptoms)
संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 4 से 14 दिन (Incubation Period) लग सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में यह समय 45 दिनों तक भी हो सकता है।
शुरुआती लक्षण:
- तेज बुखार और बदन दर्द।
- सिरदर्द और भारीपन।
- खांसी और गले में खराश।
- सांस लेने में तकलीफ।
- उल्टी और पेट दर्द।
गंभीर लक्षण (खतरे की घंटी):
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, वायरस दिमाग पर हमला करता है, जिसे ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस’ (Acute Encephalitis) कहते हैं। इसके लक्षण हैं:
- चक्कर आना और भ्रम की स्थिति (Drowsiness/Confusion)।
- दौरे पड़ना (Seizures)।
- 24 से 48 घंटों के भीतर मरीज का कोमा में चले जाना।
मृत्यु दर: निपाह वायरस की मृत्यु दर (Case Fatality Rate) बहुत अधिक है, जो प्रकोप की गंभीरता के आधार पर 40% से 75% तक हो सकती है। यही कारण है कि इसे कोविड-19 से भी अधिक घातक माना जाता है, भले ही यह कोविड जितना संक्रामक नहीं है।
7. इलाज और वैक्सीन (Treatment & Vaccine)
यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशिष्ट दवा या वैक्सीन (टीका) उपलब्ध नहीं है।
- सपोर्टिव केयर: इलाज का मुख्य आधार ‘सपोर्टिव केयर’ है। यानी डॉक्टर मरीज के लक्षणों का इलाज करते हैं—बुखार कम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना, और सांस लेने में दिक्कत होने पर वेंटिलेटर का उपयोग करना।
- मोनोक्लोनल एंटीबॉडी: कुछ मामलों में (जैसे केरल में 2018 और 2024 में), प्रयोगात्मक तौर पर ‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी’ (m102.4) का उपयोग किया गया है, लेकिन यह अभी भी ट्रायल के चरण में है और हर जगह उपलब्ध नहीं है।
8. बचाव ही सुरक्षा है: क्या करें और क्या न करें
चूंकि इसका कोई पक्का इलाज नहीं है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपाय निम्नलिखित हैं:
खान-पान में सावधानी:
- फलों की जांच: जमीन पर गिरे हुए फल कभी न खाएं। बाजार से लाए गए फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं और छीलें।
- दांतों के निशान: अगर किसी फल पर पक्षी या जानवर के दांतों/नाखूनों के निशान दिखें, तो उसे तुरंत फेंक दें।
- खजूर का रस: खुले बर्तनों में इकट्ठा किया गया कच्चा खजूर का रस या ताड़ी पीने से पूरी तरह बचें। इसे उबालकर पीना सुरक्षित है।
व्यक्तिगत स्वच्छता:
- अपने हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं, खासकर भोजन करने से पहले और बाद में।
- अगर आप अस्पताल जा रहे हैं, तो N95 मास्क का प्रयोग करें।
बीमारों से दूरी:
- बुखार और खांसी से पीड़ित व्यक्तियों के बेहद करीब जाने से बचें।
- अगर किसी क्षेत्र में निपाह का प्रकोप है, तो वहां की यात्रा टालें।
- मृत जानवरों (विशेषकर चमगादड़ और सूअर) को न छुएं।
9. निष्कर्ष: डरें नहीं, जागरूक रहें
वर्तमान परिदृश्य में, पश्चिम बंगाल और केरल दोनों ही जगहों पर स्वास्थ्य तंत्र ने सराहनीय कार्य किया है। भारत सरकार की सर्विलांस प्रणाली (Surveillance System) मजबूत है और संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान की जा रही है।
आम जनता के लिए संदेश साफ है—घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। निपाह वायरस हवा में कोरोना की तरह आसानी से नहीं फैलता है। यह केवल बहुत नजदीकी संपर्क या दूषित भोजन से फैलता है। इसलिए, अपनी स्वच्छता का ध्यान रखें, फलों को धोकर खाएं और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें।
यदि आपको या आपके परिवार में किसी को तेज बुखार के साथ दिमागी उलझन या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
“सतर्कता ही सुरक्षा है, और जागरूकता ही बचाव।”
(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और स्वास्थ्य संगठनों (WHO/NCDC) की रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी चिकित्सीय सलाह के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श करें।)
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