Uttarakhand
UTTARAKHAND: वनकर्मियों की हड़ताल और फायर सीजन-क्या होगा जंगलों की आग का समाधान ?

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के वन कर्मी 13 फरवरी से अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि उनकी पहली मांग उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 को पुनः लागू किया जाए, जबकि दूसरी मांग वर्दी नियमावली में संशोधन किया जाए।
वनकर्मियों ने यह भी कहा कि इस समय राज्य में फायर सीजन शुरू हो चुका है, और ऐसे समय में उनका हड़ताल पर जाना वन महकमे के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है। हड़ताल में बैठे वन कर्मियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे उग्र आंदोलन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। उत्तरकाशी वन विभाग परिसर कोट बंगला में चल रही इस हड़ताल से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर असर पड़ने की संभावना है, खासकर जब जंगलों में आग के मामले बढ़ रहे हैं।
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Pithoragarh के देवलथल में लगी भीषण आग, चार घर जलकर हुए खाक

Pithoragarh : सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में सोमवार रात देवलथल तहसील मुख्यालय में भीषण आग लग गई। आग लगने के कारण चार घर और उनमें रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया। घरों के खाक होने के कारण चारों परिवारों के पास अब कुछ भी नहीं बचा है और वो सड़क पर आ गए हैं।
Pithoragarh के देवलथल में चार घर जलकर हुए खाक
मिली जानकारी के मुताबिक पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर देवलथल तहसील के ग्राम पंचायत धुरौली में अचानक एक घर में आग लग गई। जिस से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि सबसे पहले ललित सिंह के घर पर आग लगी। आग इतनी भीषण थी कि उसने धीरे-धीरे गांव के ही गंभीर सिंह, चंदर सिंह और सुरेंद्र सिंह के मकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
घर जलने के कारण सड़क पर आए चार परिवार
आग में घर जलने के कारण चारों परिवारों के सामने सकंट आ गया है। चारों परिवार सड़क पर आ गए हैं। बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा नुकसान ललित सिंह को हुआ है। ललित सिंह के घर में रखा राशन, नकदी, सोने और चांदी के लाखों के गहने जलकर खाक हो गए हैं।
आग लगने के कारणों का नहीं चल सका पता
Pithoragarh के धुरौली गांव के निवासी ललित सिंह के परिवार के सदस्यों के पास अब बदन के कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं है। इस कड़कड़ाती ठंड में उनके पास सिर पर छत भी नहीं बची है। आग से चारों परिवारों को लाखों की क्षति होने का अनुमान है। हालांकि अब तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि आग लगी कैसे और कैसे इसने इतना विकराल रूप ले लिया।
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CDS Bipin Rawat की पुण्यतिथि आज, कौन थे बिपिन रावत और कैसे बने भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

भारत के सैन्य इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल पद से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व, साहस और दूरदृष्टि से अमर हो जाते हैं। जनरल बिपिन रावत उन्हीं में से एक थे। 8 दिसंबर 2021 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका असामयिक निधन पूरे देश के लिए एक गहरा आघात था। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा राष्ट्र एक ऐसे जांबाज़ सैनिक को नमन करता है, जिसने अपना पूरा जीवन देश की सुरक्षा, एकता और सैन्य सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया।
कौन थे CDS Bipin Rawat ?
जनरल बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। वे एक सैन्य परिवार से आते थे। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना में थे। ऐसे वातावरण में पले-बढ़े बिपिन रावत के भीतर देशभक्ति और अनुशासन बचपन से ही रचा-बसा था।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के प्रतिष्ठित कैंब्रियन हॉल स्कूल और सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और फिर इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), देहरादून से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
ऐसे शुरू हुआ था CDS Bipin Rawat का सैन्य सफर
जनरल बिपिन रावत का सैन्य करियर लगभग चार दशकों तक फैला रहा। उन्हें 1978 में 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला। अपने पूरे करियर में उन्होंने कश्मीर से लेकर उत्तर-पूर्व तक देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सेवा दी।

अपने सैन्य सफर में उन्होंने इंफैंट्री ब्रिगेड और डिविजन कमांड, काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स में सक्रिय भूमिका, कोरिया और कांगो में संयुक्त राष्ट्र मिशन, सेंट्रल आर्मी कमांड के प्रमुख, साल 2016 में भारतीय सेना के 27वें सेना प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। सेना प्रमुख के रूप में उन्होंने “सर्जिकल स्ट्राइक” जैसे निर्णायक सैन्य अभियानों के बाद भारतीय सेना के आत्मविश्वास और मनोबल को एक नई ऊंचाई दी।
बिपिन रावत बने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)
एक जनवरी 2020 को जनरल बिपिन रावत को भारत का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया गया। ये पद देश के सैन्य ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार था। सीडीएस के रूप में उनकी मुख्य भूमिका तीनों सेनाओं (थल, नौसेना, वायुसेना) के बीच समन्वय, संयुक्त सैन्य कमान की अवधारणा को मजबूत करना, सैन्य आधुनिकीकरण और संसाधनों का बेहतर उपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को अधिक प्रभावी बनाना था। उन्होंने रक्षा सुधारों को केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें लागू करने का साहसिक दृष्टिकोण अपनाया।

अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे जनरल रावत
CDS Bipin Rawat अपनी स्पष्ट और बेबाक बातों के लिए जाने जाते थे। वे राजनीति से परे रहकर सीधे और सटीक शब्दों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते थे। कश्मीर, चीन सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद जैसे संवेदनशील विषयों पर उन्होंने कई बार कठोर लेकिन व्यावहारिक दृष्टिकोण रखा। उनका मानना था कि “सुरक्षा में नरमी नहीं, बल्कि स्पष्टता होनी चाहिए।”
8 दिसंबर 2021को देश खोया अपना वीर सपूत
8 दिसंबर 2021 का दिन वो दिन था जब देश ने अपना वीर सपूत खो दिया। 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर के पास भारतीय वायुसेना का Mi-17V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत कुल 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस समाचार से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। संसद से लेकर गांवों तक, हर भारतीय ने इस अपूरणीय क्षति को महसूस किया।
मधुलिका रावत केवल CDS की जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्तित्व भी थीं। वे आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़ी रहीं और शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए लगातार कार्य करती रहीं। उनका निधन भी देश के लिए उतना ही दुखद था। दोनों का एक साथ जाना लोगों के दिलों में हमेशा के लिए एक टीस छोड़ गया।

चौथी पुण्यतिथि पर सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि
CDS Bipin Rawat की चौथी पुण्यतिथि पर आज सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सीएम धामी ने कहा कि अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण को स्मरण करते हुए उन्हें उत्तराखंड एवं देश का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि जनरल बिपिन रावत का जीवन देशभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणादायक मिसाल है।
लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है CDS Bipin Rawat
जनरल बिपिन रावत का जीवन आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका संदेश साफ था कि अनुशासन से बड़ा कोई हथियार नहीं, देश सेवा केवल वर्दी तक सीमित नहीं, निर्णय कठिन हों, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि हों। वे सैनिकों से हमेशा संवाद में रहते थे और जमीनी हालात को समझने पर जोर देते थे।
FAQs : CDS General Bipin Rawat
1. CDS Bipin Rawat कौन थे?
जनरल बिपिन रावत भारतीय सेना के 27वें सेना प्रमुख और देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) थे। वे अपने साहस, नेतृत्व और रणनीतिक सोच के लिए जाने जाते थे।
2. बिपिन रावत का जन्म कहां हुआ था?
उनका जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में एक सैन्य परिवार में हुआ था।
3. जनरल रावत की शिक्षा कहाँ हुई थी?
उन्होंने अपनी शिक्षा कैंब्रियन हॉल स्कूल (देहरादून), सेंट एडवर्ड स्कूल (शिमला), NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) और IMA (इंडियन मिलिट्री अकादमी) से प्राप्त की।
4. बिपिन रावत का सैन्य करियर कब शुरू हुआ?
उनका सैन्य करियर 1978 में शुरू हुआ, जब उन्हें 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला।
5. अपने करियर में उन्होंने कौन-कौन से महत्वपूर्ण पद संभाले?
उन्होंने ब्रिगेड कमांड, डिविजन कमांड, सेना उपप्रमुख, सेना प्रमुख और 2020 में पहले CDS सहित कई प्रमुख जिम्मेदारियां निभाईं।
6. भारत का पहला Chief of Defence Staff किसे बनाया गया था?
1 जनवरी 2020 को जनरल बिपिन रावत को भारत का पहला CDS नियुक्त किया गया था।
7. CDS का मुख्य काम क्या होता है?
CDS का काम तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त कमान प्रणाली को मजबूत करना, सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना होता है।
8. जनरल बिपिन रावत क्यों खास माने जाते हैं?
वे अपने बेबाक नेतृत्व, कड़े फैसलों, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सेना के आत्मविश्वास बढ़ाने और सैन्य सुधार लागू करने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किए जाते हैं।
9. बिपिन रावत और उनकी पत्नी का निधन कैसे हुआ?
8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना का Mi-17V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 13 लोगों की मौत हो गई।
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जनरल बिपिन रावत की पुण्यतिथि आज, सीएम धामी ने पुष्पचक्र अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून के कनक चौक स्थित पार्क में भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ स्व. जनरल बिपिन रावत की चतुर्थ पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
जनरल बिपिन रावत की पुण्यतिथि आज
मुख्यमंत्री ने जनरल बिपिन रावत के अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण को स्मरण करते हुए उन्हें उत्तराखंड एवं देश का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि जनरल बिपिन रावत का जीवन देशभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणादायक मिसाल है।

सीएम धामी ने पुष्पचक्र अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
सीएम धामी ने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सैनिकों एवं नागरिकों के साथ दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शहीदों के सम्मान में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
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