Dehradun
सहकारी समितियों के चुनाव की तारीख टली, अब दिसंबर को होंगे चुनाव !

देहरादून – उत्तराखंड में केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव के मद्देनज़र प्रदेश की बहुउद्देशीय प्रारंभिक कृषि ऋण सहकारी समितियों के चुनाव की तारीखें बदल दी गई हैं। राज्य की 674 सहकारी समितियों के चुनाव 21 और 22 नवंबर को होने थे, लेकिन अब ये चुनाव 16 और 17 दिसंबर को होंगे। सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
चुनावों में देरी का कारण यह बताया गया है कि केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव और सहकारी समितियों के चुनाव की तिथियां एक ही समय पर होने से कर्मचारियों की कमी का सामना हो सकता था। सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष हंसा दत्त पांडे ने इस पर निर्णय लिया कि चुनाव अब 16 और 17 दिसंबर को आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा, एक अहम बदलाव यह है कि अब उन सदस्यों को भी मतदान का अधिकार मिलेगा, जिन्होंने पिछले एक साल में किसी भी सहकारी समिति से कोई लेन-देन नहीं किया है, लेकिन वे 45 दिन पहले सदस्य बने हैं। सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण ने इस मुद्दे को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा है ताकि इन सदस्यों को मतदान का अधिकार मिल सके।
प्रदेश की सहकारी समितियों में चुनाव के लिए पहले एक कार्यक्रम घोषित किया गया था। इसके तहत 6 नवंबर को अनंतिम मतदाता सूची जारी की गई थी, और 8 नवंबर तक उस पर आपत्तियां ली जानी थीं। इसके बाद, 11 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होनी थी। मतदाता सूची जारी होने के बाद, नामांकन पत्रों की बिक्री 12 नवंबर से शुरू होनी थी, और 13 नवंबर तक नामांकन पत्रों को जमा किया जाना था।
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि इस बार प्रदेश की सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। हालांकि, उत्तराखंड राज्य सहकारी समिति निर्वाचन नियमावली 2018 के अनुसार, जो सदस्य चुनाव से 45 दिन पहले सदस्य बने हैं और जिनका पिछले तीन सालों में किसी एक साल में किसी भी समिति से लेन-देन नहीं हुआ है, उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। यह नियम खासतौर पर महिलाओं को प्रभावित कर रहा था, क्योंकि कई महिलाएं इस नियम के कारण मतदान नहीं कर पा रही थीं, जिससे उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा था। इसे देखते हुए निर्वाचन प्राधिकरण ने शासन को इस नियम में छूट देने का प्रस्ताव भेजा है।
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Dehradun
पुलिस महानिदेशक की राज्यपाल से मुलाकात, शीतकालीन चारधाम यात्रा, कुम्भ मेला 2027 पर विशेष चर्चा

डीजीपी दीपम सेठ ने की राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट
देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से आज लोक भवन में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा तैयारियों पर विशेष फोकस
राज्यपाल ने पुलिस महानिदेशक से आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए, पुलिस व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक का उपयोग और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय
राज्यपाल ने शीतकालीन चारधाम यात्रा पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि कठिन मौसम और पहाड़ी रास्तों को देखते हुए तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
साइबर अपराधों पर रोक: वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करने पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिया कि साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर सुरक्षा नियमों से परिचित हो सकें।
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर चर्चा
भेंट के दौरान राज्यपाल ने नए लागू हुए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण के साथ-साथ आम नागरिकों को भी नए कानूनों की जानकारी देना आवश्यक है, ताकि कानून व्यवस्था और अधिक मजबूत बन सके।
Uttarakhand
सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर राज्यपाल का सैनिकों को नमन, कहा सैनिक देश की सबसे बड़ी सम्पति

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर राज्यपाल ने सैनिकों और उनके परिवारों को किया नमन
देहरादून: सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने देश के सभी सैनिकों, पूर्व सैनिकों, सैनिक परिवारों और प्रदेश और देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ये दिवस भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता, अनुशासन और राष्ट्र सेवा के अद्वितीय समर्पण का प्रतीक है।
सैनिकों की वीरता और समर्पण को याद करने का दिवस
राज्यपाल ने कहा कि “सशस्त्र सेना झण्डा दिवस हमें हमारे वीर जवानों की अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्र रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण का स्मरण कराता है।” उन्होंने ये भी उल्लेख किया कि हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने वाले जवानों के कारण ही देशवासी सुरक्षित तरीके से अपना जीवन जी पाते हैं।
सैनिक, देश की सबसे बड़ी संपत्ति
उन्होंने आगे कहा कि वीर सैनिक किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं।
उनके निरंतर प्रयास, तपस्या और बलिदान से ही देश सुरक्षित, अखंड और सशक्त बना रहता है।
इसी कारण, यह दिवस भारतीय सशस्त्र बलों के कल्याण के लिए आर्थिक सहयोग समर्पित करने का अवसर भी प्रदान करता है।
राज्यपाल ने किया योगदान का आह्वान
राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से अपील की कि सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर सभी नागरिक अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सशस्त्र सेना कल्याण कोष में योगदान दें। साथ ही, उन्होंने सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के सहयोग में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया।
Dehradun
पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा बयान, कांग्रेस की सरकार आने पर माल्टे का समर्थन मूल्य किया जाएगा 25 रुपए

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत यूं तो अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं, चर्चाओं में रहने के पीछे एक बड़ी वजह और भी है। हरीश रावत अक्सर उत्तराखंडी उत्पादों और व्यंजनों पर आधारित पार्टी को लेकर हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर देते हैं।
पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा बयान
पूर्व सीएम हरीश रावत ने आज माल्टा पार्टी देते हुए गैरसैण माल्टा प्रतियोगिता आयोजित की। जिसमें महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग प्रतियोगिता आयोजित की गई। आयोजित प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान पाने वालों के लिए इनाम भी रखा। इस दौरान उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए पुरस्कार दिए।
कांग्रेस की सरकार आने पर माल्टे का समर्थन मूल्य किया जाएगा 25 रुपए
हरीश रावत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अभी माल्टा केवल सात रुपए समर्थन मूल्य पर बिक रहा है। लेकिन कांग्रेस की सरकार आने के बाद इसका समर्थन मूल्य 25 रुपए किया जाएगा। इसे मध्य हिमालय क्षेत्र के किसानों की आर्थिक की में इजाफा होगा।
गणेश गोदियाल ने बीजेपी पर किया कटाक्ष
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बिना नाम लिए ही बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब लोग धर्म का उपयोग करके सफलता की सीढ़ी चढ़ सकते हैं। तब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कर्म को मिलाकर सफलता का मंत्र बताते हैं। जो हमारे नौनिहालों के लिए सफलता का प्रतीक बन सकता है।
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